FCRA बिल पर क्यों भड़का अमेरिका? 5 बड़ी वजहें जो मचा रहीं हलचल

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FCRA Amendment Bill 2026 का अमेरिकी सांसद राइली मूर, चर्च संगठन और एमनेस्टी इंटरनेशनल क्यों विरोध कर रहे हैं? जानें प्रोसिलिटाइजेशन बैन, संपत्ति जब्ती और NGO नियमों की पूरी सच्चाई।

1. “प्रोसिलिटाइजेशन” पर बैन

जून 2026 में नोटिफाई हुए नए FCRA नियमों के तहत, जो संगठन “प्रोसिलिटाइजेशन” (धर्म प्रचार) गतिविधियों में शामिल हैं, उन्हें FCRA रजिस्ट्रेशन के लिए अयोग्य माना जाएगा। यह शब्द स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है, जिससे ईसाई मिशनरी संगठनों और चर्च से जुड़े NGOs को डर है कि उनकी विदेशी फंडिंग रुक सकती है।

2. संपत्ति जब्त करने वाली अथॉरिटी

अगर किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द, सरेंडर या एक्सपायर हो जाता है, तो सरकार द्वारा बनाई गई एक “डेजिग्नेटेड अथॉरिटी” उसकी संपत्ति — जैसे चर्च, स्कूल या अस्पताल — को अपने कब्जे में लेकर मैनेज या बेच सकती है, वो भी बिना पहले किसी अदालती निगरानी के। आलोचकों को डर है कि इससे धार्मिक और चैरिटी संस्थानों की संपत्ति बिना कोर्ट गए जब्त हो सकती है।

3. राज्यों पर केंद्र की मंजूरी की शर्त

अब राज्य सरकार की एजेंसियों को FCRA से जुड़ी जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी। इसे कई राज्यों में संघीय ढांचे में दखल के तौर पर देखा जा रहा है।

किन-किन ने जताया विरोध?

  • अमेरिकी कांग्रेसमैन राइली मूर ने बिल को “ईसाइयों पर सीधा हमला” बताते हुए भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर की चेतावनी दी।
  • एमनेस्टी इंटरनेशनल ने लोकसभा से बिल खारिज करने की अपील की है।
  • संयुक्त राष्ट्र के स्पेशल रैपोर्टियर पहले (2016 में) भी FCRA को एसोसिएशन की आज़ादी के खिलाफ बता चुके हैं।
  • FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने 2024 की रिपोर्ट में भारत को नॉन-प्रॉफिट सेफगार्ड्स पर सिर्फ आंशिक रूप से अनुपालक पाया था।
  • मिज़ोरम में काउंसिल ऑफ चर्चेज़ ने 11 अगस्त 2026 को आइज़ोल में विरोध मार्च का ऐलान किया है, वहीं केरल और मेघालय में भी विरोध तेज है।

क्या NGO बिना FCRA के विदेशी चंदा ले सकता है?

नहीं, कोई भी गैर सरकारी संगठन FCRA के बिना विदेशी धन कानूनी रूप से नहीं ले सकता। इसके सिर्फ दो वैध रास्ते हैं:

  • FCRA रजिस्ट्रेशन (स्थायी): सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट या कंपनीज़ एक्ट के तहत रजिस्टर्ड और कम से कम 3 साल से सक्रिय संगठन ही आवेदन कर सकते हैं। यह रजिस्ट्रेशन 5 साल के लिए वैध होता है और फिर रिन्यू कराना पड़ता है।
  • प्रायर परमिशन (एकबारगी अनुमति): जो संगठन फुल रजिस्ट्रेशन के लायक नहीं हैं, वे किसी खास दानदाता से, किसी खास प्रोजेक्ट के लिए, तय राशि की अनुमति ले सकते हैं।

सारा विदेशी चंदा पहले दिल्ली स्थित SBI की तय शाखा के “FCRA अकाउंट” में ही आना अनिवार्य है। 2020 के संशोधन के बाद से बिना रजिस्ट्रेशन/परमिशन के कोई छूट सीमा नहीं बची — यानी एक रुपये का भी विदेशी चंदा बिना अनुमति के लेना गैरकानूनी है। 2026 के नए नियमों में यह भी जोड़ा गया है कि जिन संगठनों में विदेशी नागरिक (भारतीय मूल के लोगों को छोड़कर) प्रमुख पदों पर हैं, उन्हें आमतौर पर रजिस्ट्रेशन/परमिशन नहीं मिलेगी। नियम तोड़ने पर अभी अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान है, जिसे नए बिल में घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव है।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि ये बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और विदेशी फंड के दुरुपयोग रोकने के लिए हैं, और किसी एक धर्म या समुदाय को टारगेट नहीं किया जा रहा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

FCRA Amendment Bill 2026 का सबसे विवादित प्रावधान कौन-सा है? सबसे ज्यादा विवाद “प्रोसिलिटाइजेशन” पर बैन और सरकार को दी गई संपत्ति जब्ती की शक्ति को लेकर है, क्योंकि इनकी परिभाषा साफ नहीं है और इनमें अदालती निगरानी की व्यवस्था नहीं है।

अमेरिका इस बिल का विरोध क्यों कर रहा है? अमेरिकी कांग्रेसमैन राइली मूर का दावा है कि यह बिल ईसाई चर्च और चैरिटी संस्थानों को निशाना बनाता है, जिससे भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव आ सकता है।

क्या FCRA बिल किसी एक धर्म को टारगेट करता है? सरकार का कहना है कि यह बिल राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए है और किसी एक धर्म या समुदाय को टारगेट नहीं करता, हालांकि आलोचक इससे असहमत हैं।

क्या कोई NGO बिना FCRA के विदेशी चंदा ले सकता है? नहीं, FCRA रजिस्ट्रेशन या प्रायर परमिशन के बिना विदेशी धन लेना कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और UN ने क्या कहा है? एमनेस्टी इंटरनेशनल ने लोकसभा से बिल खारिज करने की मांग की है, जबकि UN स्पेशल रैपोर्टियर पहले भी FCRA को एसोसिएशन की आज़ादी के खिलाफ बता चुके हैं।

भारत में विरोध सबसे ज्यादा कहां हो रहा है? मिज़ोरम, केरल और मेघालय में विरोध सबसे तेज है, जहां चर्च संगठनों ने विरोध मार्च का ऐलान किया है।

निष्कर्ष

FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर विदेशी विरोध मुख्य रूप से प्रोसिलिटाइजेशन बैन और संपत्ति जब्ती के प्रावधानों को लेकर है, जबकि सरकार इसे नियामकीय सुधार बता रही है। मानसून सत्र की डेडलाइन नजदीक होने से यह विवाद और तेज होने की संभावना है।

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