गोल्ड ETF ने एक साल में 35% से ज्यादा रिटर्न दिया। अगस्त में इसमें 2,596 करोड़ रुपये आए। निवेश का तरीका, टैक्स नियम और जोखिम की जानकारी।
गोल्ड ETF ने पिछले एक साल में निवेशकों को 35% से ज्यादा रिटर्न दिया है। सोने की कीमतों में तेजी के बीच अगस्त 2026 में इस श्रेणी में 2,596.70 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो जुलाई के 1,559 करोड़ रुपये से करीब 67% ज्यादा है। गोल्ड ETF में डीमैट खाते के जरिए शेयर की तरह सोने की कीमत पर निवेश किया जाता है, इसलिए गहने या सिक्के खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
अगस्त में करीब 67% बढ़ा निवेश
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के 10 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक गोल्ड ETF में लगातार तीसरे महीने शुद्ध निवेश आया। अगस्त में MCX पर घरेलू सोने की कीमतें 7.7% चढ़ी थीं। इसी महीने सिल्वर ETF में 1,270.63 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ।
एक रिपोर्ट में AMFI के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि अगस्त 2026 तक गोल्ड ETF के फोलियो की संख्या 1.25 करोड़ और कुल एसेट्स (AUM) करीब 1.91 लाख करोड़ रुपये रही।
गोल्ड ETF क्या है
गोल्ड ETF एक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है, जिसकी कीमत मुख्य रूप से सोने के बाजार भाव से जुड़ी रहती है। इसकी यूनिट NSE और BSE पर शेयरों की तरह खरीदी और बेची जा सकती हैं। यह एक पैसिव फंड है, यानी फंड मैनेजर अपनी पसंद से सोना नहीं चुनता, बल्कि सोने की कीमत को ट्रैक करता है।
यूनिट डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप में रहती है, इसलिए घर में सोना रखने या उसकी शुद्धता जांचने की चिंता नहीं रहती।
खर्च कितना आता है
गहनों में मेकिंग चार्ज लगता है, जबकि गोल्ड ETF में फंड का सालाना खर्च (एक्सपेंस रेश्यो) और ब्रोकरेज देना होता है। अगस्त की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ प्रमुख गोल्ड ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.37% से 0.42% के बीच है। फंड चुनते समय एक्सपेंस रेश्यो और खरीद-बिक्री की सुविधा (लिक्विडिटी) देखना जरूरी बताया जाता है।
रिटर्न: आंकड़ों में फर्क, छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव
एक साल में 35% से ज्यादा रिटर्न का आंकड़ा रिपोर्ट्स में सामने आया है। हालांकि तारीख और फंड के हिसाब से आंकड़े बदलते हैं। 19 अगस्त की कुछ रिपोर्ट्स में कई गोल्ड ETF का एक साल का रिटर्न 50% से ऊपर बताया गया था।
उसी समय की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछले तीन महीनों में ज्यादातर गोल्ड ETF का रिटर्न नेगेटिव रहा था। यानी लंबी अवधि का शानदार रिटर्न छोटी अवधि में भी वैसा रहे, यह जरूरी नहीं। सोने की कीमतें बाजार की स्थिति के हिसाब से ऊपर-नीचे होती हैं और भविष्य का रिटर्न तय नहीं होता।
निवेश कैसे करें
गोल्ड ETF खरीदने के लिए डीमैट और ट्रेडिंग खाता चाहिए। खाते के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर किसी गोल्ड ETF की यूनिट उसी तरह खरीदी जाती है, जैसे शेयर खरीदे जाते हैं। बेचने के लिए भी यही खाता इस्तेमाल होता है।
टैक्स के नियम
गोल्ड ETF में 12 महीने या उससे कम रखने पर हुआ मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है और निवेशक के आय कर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। 12 महीने से ज्यादा रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स लगता है, साथ में 4% उपकर (सेस) अलग से जुड़ता है।
इक्विटी की तरह 1.25 लाख रुपये की सालाना छूट गोल्ड ETF के मुनाफे पर लागू नहीं होती।
गोल्ड ETF से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य
भारत का पहला गोल्ड ETF, गोल्ड बीईएस, बेंचमार्क एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने 19 मार्च 2007 को NSE पर लिस्ट किया था। तब इसकी ट्रेडिंग यूनिट एक ग्राम तय की गई थी और यह करीब 950 रुपये पर लिस्ट हुआ। उस समय AMFI के चेयरमैन ने कहा था कि इससे आम लोग छोटी मात्रा में सोने में बचत कर सकेंगे।
वित्त वर्ष 2022-23 में गोल्ड ETF में निवेश साल-दर-साल 74% गिरकर 653 करोड़ रुपये रह गया था। AMFI के आंकड़ों पर आधारित एक विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें करीब 68,868 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसमें अकेले जनवरी 2026 का 24,040 करोड़ रुपये शामिल है।
उसी विश्लेषण के मुताबिक अप्रैल 2019 में गोल्ड ETF के फोलियो 3.20 लाख और AUM 4,594 करोड़ रुपये था। यानी सात साल में फोलियो करीब 39 गुना और AUM करीब 42 गुना हो गया। विश्लेषण में यह भी साफ किया गया है कि AUM की बढ़त सिर्फ नए निवेश से नहीं, सोने की कीमत बढ़ने से भी हुई है।
ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड के कुल AUM में गोल्ड ETF की हिस्सेदारी मार्च 2025 में करीब 0.90% थी, जो अगस्त 2026 में करीब 2.20% हो गई।
अगस्त 2026 में गोल्ड ETF का AUM सिल्वर ETF से करीब 2.24 गुना था। गोल्ड ETF में शुद्ध निवेश (2,596.70 करोड़ रुपये) सिल्वर ETF (1,270.63 करोड़ रुपये) के दोगुने से ज्यादा रहा। हालांकि 19 अगस्त की एक रिपोर्ट में कुछ सिल्वर ETF का एक साल का रिटर्न करीब 100% बताया गया, जो गोल्ड ETF से काफी ज्यादा है।
निवेश से पहले ध्यान रखें
यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं। निवेश से पहले अपने लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और फंड की जानकारी देखें या प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से राय लें।
SOURCE / FACT CHECK NOTE
उपयोग की गई सामग्री: आपकी दी हुई हेडलाइन और ये रिपोर्ट्स: IANS/AMFI अगस्त 2026 आंकड़ों की खबर (10 सितंबर), तमस संकेत की गोल्ड ETF निवेश रिपोर्ट, पत्रिका और अपस्टॉक्स की 19 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स, IndMoney का AMFI-आधारित विश्लेषण, आदित्य बिड़ला कैपिटल/IIFL/DSP/बिजनेस स्टैंडर्ड के टैक्स स्पष्टीकरण। कोई कोट या अपनी तरफ से आंकड़ा नहीं जोड़ा गया।
स्रोतों में अंतर (प्रकाशन से पहले जांचें):
- एक साल का रिटर्न: आपकी हेडलाइन और तमस संकेत में “35% से ज्यादा” है, जबकि 19 अगस्त की पत्रिका/अपस्टॉक्स रिपोर्ट्स में कई फंड का एक साल का रिटर्न 51-54% बताया गया है। “35% से ज्यादा” दोनों स्थितियों में सही बैठता है, इसलिए हेडलाइन में यही रखा है। सटीक आंकड़ा किसी एक फंड की ताजा NAV/रिटर्न से मिलाकर देना बेहतर होगा।
- जुलाई का निवेश: IANS में 1,559 करोड़, तमस संकेत में 1,558 करोड़। लेख में IANS/AMFI वाला 1,559 लिया है।
- तीन महीने का नेगेटिव रिटर्न: यह 19 अगस्त की रिपोर्ट पर आधारित है। अगस्त में सोना 7.7% चढ़ा, इसलिए ताजा तीन महीने का आंकड़ा अलग हो सकता है। लेख में इसे उसी तारीख के हवाले से लिखा है।
- फोलियो (1.25 करोड़) और AUM (1.91 लाख करोड़): सिर्फ एक द्वितीयक स्रोत (IndMoney, AMFI रिपोर्ट के हवाले से) से मिले हैं। AMFI की मासिक रिपोर्ट से मिलान कर लें।
- एक्सपेंस रेश्यो (0.37%-0.42%): अपस्टॉक्स की 19 अगस्त की रिपोर्ट से। फंड के हिसाब से बदल सकता है।
- टैक्स: कई स्रोत एक जैसे हैं (12 महीने का होल्डिंग पीरियड, 12.5% LTCG बिना इंडेक्सेशन, STCG स्लैब दर पर, 1.25 लाख की छूट लागू नहीं, 4% सेस)। फिर भी प्रकाशन से पहले आय कर विभाग की ताजा जानकारी से मिला लें।
