चंबल-कोतवाल जल परियोजना: ग्वालियर को मिलेगा रोज 150 MLD पानी, 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

चंबल कोतवाल जल परियोजना

चंबल-कोतवाल जल परियोजना क्या है, ग्वालियर को क्यों जरूरी है, अब तक क्या काम हुआ और 458 करोड़ की यह योजना कब तक पूरी होगी, जानिए एक नजर में।

ग्वालियर की पेयजल जरूरतों के लिए चंबल नदी और कोतवाल डैम से पानी लाने वाली चंबल-कोतवाल जल परियोजना पर काम जारी है। करीब 458 करोड़ रुपये की इस योजना का रविवार, 20 सितंबर को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। परियोजना से ग्वालियर की जलापूर्ति में रोज करीब 150 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी जोड़ने का लक्ष्य है, और इसे 31 मार्च 2027 तक पूरा करना है।

परियोजना में क्या बन रहा है

योजना के तहत चंबल नदी और मुरैना के कोतवाल डैम से पाइपलाइन के जरिए पानी ग्वालियर लाया जाएगा। ईटीवी भारत की सितंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 150 एमएलडी में से करीब 90 एमएलडी चंबल का और 60 एमएलडी कोतवाल डैम के बैक वॉटर का होगा। यह पानी ग्वालियर में मोतीझील स्थित जलशोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा।

मुरैना में चंबल नदी पर इंटेक वेल बन रहा है। उसी रिपोर्ट के अनुसार, वहां से 150 एमएलडी पानी देवरी तक लाया जाएगा। इसमें से 60 एमएलडी मुरैना की जलापूर्ति के लिए रखा गया है और बाकी 90 एमएलडी ग्वालियर की तरफ जाएगा।

ताजा रिपोर्टों में पाइपलाइन की लंबाई करीब 31 किलोमीटर बताई गई है। रास्ते में क्वारी, सांक और आसन नदियों को पार करने के लिए खास पाइपलाइन ब्रिज बन रहे हैं। हालांकि अप्रैल 2025 की एक रिपोर्ट में पूरी परियोजना की पाइपलाइन 43 किलोमीटर बताई गई थी, यानी आंकड़ों में अंतर है।

ग्वालियर को यह पानी क्यों चाहिए

शहरी इलाके में पीने के पानी का मुख्य स्रोत तिघरा डैम है। ईटीवी भारत की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे करीब 16 लाख की आबादी को सप्लाई होती है और रोज लगभग 13.43 एमसीएफटी पानी की जरूरत पड़ती है। उसी रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 4.43 एमसीएफटी पानी लीकेज और वाष्पीकरण में चला जाता है।

दिक्कत यह है कि तिघरा का भराव बारिश और ऊपरी बांधों पर टिका है। मुरैना के ककैटो और अपर ककैटो के साथ पेहसारी जलाशय का पानी तिघरा की ओर मोड़ा जाता है। बारिश कम हुई तो यह पूरी कड़ी कमजोर पड़ जाती है।

इस साल जून के अंत में मानसून में देरी के बीच तिघरा में सिर्फ 55 दिनों का पानी बचने की बात सामने आई थी। तब नगर निगम ने एक दिन छोड़कर सप्लाई का प्रस्ताव भी भेजा था। रिपोर्ट में हनुमान घाटी, घोसीपुरा, किला गेट और झांसी रोड समेत कई इलाकों में टैंकर से पानी देने का जिक्र था। सितंबर में बारिश के बाद तिघरा के गेट खोले जाने की खबरें भी आईं और रिपोर्टों में कहा गया कि फिलहाल संकट टल गया है।

मांग भी बढ़ी है। स्वदेश की 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमृत योजना के बाद शहर में रोज की सप्लाई 8-9 एमसीएफटी से बढ़कर करीब 12 एमसीएफटी हो गई थी।

अब तक क्या-क्या हुआ

  • अक्टूबर 2023: तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में परियोजना का शिलान्यास किया। उस समय लागत 376 करोड़ रुपये बताई गई थी। ईटीवी भारत के मुताबिक इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका।
  • अगस्त-सितंबर 2024: ईटीवी भारत के अनुसार, सिंधिया और मुख्यमंत्री मोहन यादव की बातचीत के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। जल संसाधन विभाग ने कोतवाल डैम से पानी लेने की मंजूरी दी। यह योजना अमृत 2.0 के तहत स्वीकृत बताई गई है।
  • नवंबर 2024: पत्रिका के अनुसार, एनएचएआई ने एनएच-44 पर देवरी से ग्वालियर बायपास (रायरू) तक 38 किलोमीटर हिस्से में हाईवे किनारे पाइपलाइन डालने की अनुमति दी। नगर निगम को 16.57 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क और 3.95 करोड़ रुपये बैंक गारंटी जमा करनी थी।
  • 16 दिसंबर 2024: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में भूमिपूजन किया।
  • 24 दिसंबर 2024: वर्क ऑर्डर जारी हुए। पत्रिका के अनुसार ठेका 458.68 करोड़ रुपये का है और कंपनी इनविराड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड है।
  • 6 फरवरी 2025: निर्माण कार्य शुरू हुआ। काम के लिए 24 महीने की अवधि तय बताई गई।
  • अप्रैल 2025: बानमोर के पास हाईवे किनारे 3.5 किलोमीटर खुदाई कर पाइपलाइन डालने का काम शुरू हो चुका था। मुरैना शहर के भीतर 7.5 किलोमीटर और नूराबाद में 2 किलोमीटर के हिस्से में डक्ट बनाकर पाइपलाइन डालने की योजना बताई गई।

सिंधिया ने क्या देखा

रविवार को सिंधिया ने कोतवाल डैम पर बन रहे इंटेक वेल, सांक नदी पर बन रहे पाइपलाइन ब्रिज और बानमोर के पास पाइपलाइन बिछाने के काम का जायजा लिया। पत्रिका के मुताबिक, वे पाइपलाइन की चौड़ाई और गुणवत्ता देखने के लिए बड़े पाइप के अंदर भी गए। उन्होंने अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली और काम तय समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।

सिंधिया ने कहा कि यह योजना ग्वालियर और मुरैना की आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा से जुड़ी है। मौके पर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना भी मौजूद रहे।

कब तक पूरी होगी परियोजना

ताजा रिपोर्टों में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य 31 मार्च 2027 बताया गया है। पत्रिका की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी को काम 24 महीने में पूरा करना था और काम फरवरी 2025 में शुरू हुआ था। समयसीमा के बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बदलाव का कारण नहीं बताया गया है।

अगस्त 2026 में ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने चंबल प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए थे कि काम समय पर पूरा हो और तय अवधि के बाद ठेकेदार को समय न बढ़ाकर दिया जाए। पानी की सप्लाई कब से शुरू होगी, इसकी अलग तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।

परियोजना से क्या फायदा होगा

सबसे सीधा असर ग्वालियर की जलापूर्ति पर पड़ेगा। योजना पूरी होने पर शहर को रोज करीब 150 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलना है। इसका मतलब यह भी है कि तिघरा के अलावा शहर के पास पानी का एक और स्रोत होगा, जो सीधे बारिश और ऊपरी बांधों की कड़ी पर निर्भर नहीं है।

मुरैना को भी इसी व्यवस्था से 60 एमएलडी पानी मिलने की बात ईटीवी भारत और पत्रिका की रिपोर्टों में कही गई है। सिंधिया के मुताबिक परियोजना 2055 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। पत्रिका की 2025 की रिपोर्ट में शहर को 30 साल तक भरपूर पानी मिलने की बात कही गई थी।

सिंधिया ने सिंचाई का भी जिक्र किया और चंबल-पार्वती-सिंध जैसी परियोजनाओं का नाम लिया। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में चंबल-कोतवाल पाइपलाइन को सीधे सिंचाई से नहीं जोड़ा गया है। यह मुख्य रूप से घरेलू पेयजल की योजना है।

FAQ:

Q1. चंबल-कोतवाल जल परियोजना क्या है?

Answer: यह ग्वालियर के लिए पेयजल परियोजना है, जिसमें चंबल नदी और मुरैना के कोतवाल डैम से पाइपलाइन के जरिए पानी ग्वालियर लाया जाएगा। पानी मोतीझील स्थित जलशोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा।

Q2. ग्वालियर को इस परियोजना से कितना पानी मिलेगा?

Answer: लक्ष्य रोज करीब 150 एमएलडी पानी का है। ईटीवी भारत की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार इसमें करीब 90 एमएलडी चंबल का और 60 एमएलडी कोतवाल डैम का पानी होगा।

Q3. परियोजना की लागत कितनी है?

Answer: ताजा रिपोर्टों में लागत करीब 458 करोड़ रुपये बताई गई है। पत्रिका के अनुसार ठेका 458.68 करोड़ रुपये का है। 2023 के शिलान्यास के समय लागत 376 करोड़ रुपये बताई गई थी।

Q4. परियोजना कब तक पूरी होगी?

Answer: लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का है। पानी की सप्लाई शुरू होने की अलग तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।

Q5. मुरैना को क्या मिलेगा?

Answer: ईटीवी भारत और पत्रिका की रिपोर्टों के अनुसार चंबल से लिए जाने वाले 150 एमएलडी में से 60 एमएलडी पानी मुरैना की जलापूर्ति के लिए रखा गया है।

SOURCE/FACT CHECK NOTE:

स्रोत (सभी सार्वजनिक रिपोर्टें, कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं देखा गया):

  • नवभारत लाइव, 21 सितंबर 2026 (सिंधिया निरीक्षण, 458 करोड़, 31 किमी, 31 मार्च 2027, मोतीझील)
  • लल्लूराम, 20 सितंबर 2026 (उपरोक्त आंकड़ों की पुष्टि)
  • पत्रिका, मुरैना, 20 सितंबर 2026 (निरीक्षण का ब्योरा, पाइप के अंदर जाना)
  • पत्रिका, ग्वालियर, 15 अप्रैल 2025 (ठेका, समयरेखा, 24 महीने, 43 किमी)
  • पत्रिका, 28 नवंबर 2024 (एनएचएआई अनुमति, शुल्क; सिर्फ सर्च स्निपेट देखा गया)
  • ईटीवी भारत, 9 सितंबर 2024 (376 करोड़, 90+60 एमएलडी का बंटवारा, कोतवाल डैम की मंजूरी, अमृत 2.0)
  • ईटीवी भारत, 30 जून 2026 (तिघरा की स्थिति, 16 लाख आबादी, 55 दिन का पानी)
  • स्वदेश न्यूज, 15 जुलाई 2023 (सप्लाई 8-9 से 12 एमसीएफटी; सिर्फ सर्च स्निपेट)
  • नव भारत, अगस्त 2026 (सांसद कुशवाह की समीक्षा बैठक; सिर्फ सर्च स्निपेट)
  • एमएसएन/एमपी ब्रेकिंग न्यूज (सितंबर में तिघरा के गेट खुलने की खबर; सिर्फ सर्च स्निपेट, सटीक तारीख साफ नहीं)

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