E20 पेट्रोल से माइलेज 2-6% कम, पर इंजन सुरक्षित: गडकरी का बड़ा बयान

E20 पेट्रोल माइलेज

E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज 2 से 6% तक घट सकता है, लेकिन इंजन फेल होने का कोई सबूत नहीं — जानिए नितिन गडकरी ने संसद में क्या-क्या कहा, पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

देशभर में पेट्रोल पंपों पर अब लगभग हर जगह मिल रहे E20 पेट्रोल को लेकर लोगों के मन में जो सवाल और शिकायतें उठ रही थीं, उन पर केंद्र सरकार ने संसद में विस्तार से जवाब दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में गिरावट आ सकती है, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि इससे इंजन खराब होने का कोई पुख्ता सबूत सरकार के पास नहीं है।

माइलेज में कितनी गिरावट?

गडकरी के मुताबिक, गाड़ी की श्रेणी और उसकी उम्र (vintage) के आधार पर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। मंत्री ने यह भी कहा कि माइलेज पर असर ड्राइविंग की स्थिति, ड्राइविंग की आदतों और गाड़ी की तकनीकी बनावट जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है, इसलिए हर वाहन पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।

बेंगलुरु में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले सोशल मीडिया पर उठे सवालों के जवाब में बताया था कि जो गाड़ियां E10 के लिए बनी थीं पर अब E20 के हिसाब से ट्यून की गई हैं, उनमें 1-2% तक गिरावट आती है, जबकि पुरानी गाड़ियों में यह गिरावट 3-6% तक हो सकती है। साथ ही यह भी बताया गया कि 20 हजार किलोमीटर से ज्यादा चली गाड़ियों में रबर गास्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जो एक सस्ता समाधान है।

इंजन फेल होने के दावों को सरकार ने किया खारिज

सोशल मीडिया पर लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंच रहा है और बार-बार सर्विसिंग की जरूरत पड़ रही है। इस पर गडकरी ने संसद में साफ कहा कि डायनामोमीटर टेस्ट और सड़क पर हुए वाहन परीक्षणों में E20 की वजह से कोई इंजन फेलियर सामने नहीं आया है।

मंत्री ने बताया कि यह अध्ययन इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने मिलकर BS-III, BS-IV और BS-VI श्रेणी के दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर किया, जिसमें मानक प्रमाणन परीक्षणों के अलावा वाहन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर बनाए गए विशेष टेस्ट प्रोटोकॉल भी शामिल थे।

गडकरी ने यह भी दावा किया कि पिछले साढ़े तीन साल से E15+ पेट्रोल और ढाई साल से E19-E20 पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन ब्लेंड पर चल चुकी हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण की वजह से किसी बड़े पैमाने पर इंजन फेलियर या गाड़ी खराब होने का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि वाहन निर्माता कंपनियां E20 पर चलने वाली गाड़ियों की वारंटी का पालन जारी रखे हुए हैं, जो इसकी सुरक्षा पर भरोसे को और मजबूत करता है।

बेहतर परफॉर्मेंस के दावे भी

गडकरी ने E20 पेट्रोल के फायदे भी गिनाए। उनके मुताबिक, इस ईंधन से गाड़ियों की एक्सीलरेशन बेहतर होती है, राइड क्वालिटी में सुधार आता है, और E10 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में करीब 30 प्रतिशत की कमी आती है।

राज्यसभा में भी सरकार का यही रुख

इससे एक दिन पहले, बुधवार को राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में भी सरकार ने यही कहा था कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने या माइलेज घटने की शिकायतें किसी वैज्ञानिक अध्ययन से साबित नहीं हुई हैं। गडकरी ने बताया कि E20 पेट्रोल को देशभर में लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, फील्ड ट्रायल और विशेषज्ञ संस्थाओं से सलाह-मशविरा किया गया था। यह अध्ययन IOCL, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) देहरादून, SIAM और ARAI ने मिलकर किया।

E20 पेट्रोल की शुरुआत को लेकर विपक्षी दलों और उपभोक्ता संगठनों की ओर से लगातार आलोचना होती रही है, खासकर उन पुरानी गाड़ियों को लेकर जो शुरू में ज्यादा एथेनॉल मिश्रण के हिसाब से नहीं बनाई गई थीं।

पेट्रोल की कीमत पर भी बड़ा दावा

सरकार ने संसद में यह भी दावा किया कि हाल ही में पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग के जरिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम न की गई होती, तो पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। सरकार का कहना है कि देशभर में 23 करोड़ से ज्यादा वाहन ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर चल रहे हैं, फिर भी बड़े पैमाने पर इंजन फेलियर का कोई सत्यापित सबूत नहीं मिला है।

गडकरी बोले— यह “प्रायोजित अभियान” है

E20 को लेकर उठे विवाद पर गडकरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए SIAM के 65वें वार्षिक सम्मेलन में कहा कि उनके खिलाफ चलाया जा रहा अभियान प्रायोजित (sponsored) है और इसका मकसद उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में दायर एक याचिका को खारिज कर चुका है और इसके पीछे कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

जमीनी स्तर पर लोगों का अनुभव अलग

हालांकि सरकार के दावों के उलट, आम उपभोक्ताओं और ऑटो इंजीनियरों के अनुभव कुछ अलग कहानी बयां करते हैं। पीटीआई से बातचीत में कुछ ऑटोमोटिव इंजीनियरों ने बताया कि जो पुरानी गाड़ियां E20 के हिसाब से नहीं बनाई गई थीं, उनमें लंबे समय में गास्केट और फ्यूल रबर होज घिसने की समस्या आ सकती है। उनके अनुसार एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से कम होने के कारण माइलेज में 2-5% तक गिरावट आना स्वाभाविक है।

एक सर्वे में सामने आया कि हर चार में से एक वाहन चालक ने अपनी गाड़ी के माइलेज में 20% से ज्यादा की गिरावट महसूस की, जबकि केवल 13% लोगों ने कहा कि उनकी गाड़ी की क्षमता में कोई बदलाव नहीं आया। इसके अलावा एक उपभोक्ता अदालत ने हाल ही में एक वाहन निर्माता कंपनी को आदेश दिया कि वह ग्राहक को रिफंड दे या गाड़ी बदले, क्योंकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से कथित तौर पर इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचा था।

वहीं SIAM के कार्यकारी निदेशक पी.के. बनर्जी ने कहा कि पुरानी गाड़ियों में E20 से माइलेज जरूर घटता है, लेकिन यह सुरक्षा के लिहाज से कोई खतरा नहीं है। उनके मुताबिक अब तक किसी भी वाहन में ब्रेकडाउन या इंजन फेलियर का सत्यापित मामला सामने नहीं आया, और अगर कोई समस्या आती भी है तो वारंटी और इंश्योरेंस क्लेम पूरी तरह से निपटाए जाएंगे।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में मामूली गिरावट (2-6%) आम बात है, लेकिन इंजन को स्थायी नुकसान या फेलियर जैसी बड़ी समस्या का कोई प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं की शिकायतें और स्वतंत्र सर्वे कुछ अलग तस्वीर पेश करते हैं। ऐसे में यह मुद्दा फिलहाल सरकार के दावों और जमीनी अनुभवों के बीच बहस का विषय बना हुआ है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. E20 पेट्रोल क्या है?

E20 पेट्रोल एक ऐसा ईंधन मिश्रण है जिसमें 80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल मिलाया जाता है। इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के मकसद से बढ़ावा दिया जा रहा है।

2. E20 पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कितना कम होता है?

सरकार के मुताबिक, वाहन की श्रेणी और उम्र के आधार पर माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह गिरावट 1-2% से लेकर 6% तक बताई गई है।

3. क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो सकता है?

सरकार का कहना है कि अब तक हुए परीक्षणों और लाखों वाहनों के इस्तेमाल में इंजन फेलियर का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। हालांकि कुछ उपभोक्ताओं और एक उपभोक्ता अदालत के मामले में इंजन डैमेज की शिकायतें भी दर्ज हुई हैं।

4. क्या पुरानी गाड़ियों के लिए E20 पेट्रोल इस्तेमाल करना सुरक्षित है?

सरकार और SIAM के अनुसार पुरानी गाड़ियों में भी E20 इस्तेमाल करना सुरक्षित है, हालांकि माइलेज में हल्की गिरावट और लंबे समय में रबर गास्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

5. E20 पेट्रोल के क्या फायदे हैं?

गडकरी के अनुसार E20 पेट्रोल से गाड़ी की एक्सीलरेशन बेहतर होती है, राइड क्वालिटी में सुधार आता है और E10 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30% की कमी आती है।

6. क्या E20 पेट्रोल से वाहन की वारंटी प्रभावित होती है?

नहीं, सरकार के मुताबिक वाहन निर्माता कंपनियां E20 पेट्रोल पर चलने वाली गाड़ियों की वारंटी का पूरी तरह पालन कर रही हैं।

7. E20 पेट्रोल पर विवाद क्यों हो रहा है?

सोशल मीडिया पर कई उपभोक्ताओं ने माइलेज घटने और गाड़ी में झटके महसूस होने की शिकायत की है, जिसके चलते विपक्षी दलों और उपभोक्ता संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं गडकरी ने इसे “प्रायोजित अभियान” करार दिया है।

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