स्वामित्व योजना में जिम्मेदारी थोपने से नाराज पटवारी, विक्रेता-निष्पादक की भूमिका से बाहर रखने की मांग

मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री में विक्रेता-निष्पादक बनाए जाने से नाराज पटवारी, संघ ने भूमिका से बाहर रखने की मांग रखी। जानिए पूरा मामला।

मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से शुरू होने वाली स्वामित्व योजना को लेकर पटवारियों की नाराजगी सामने आई है। पटवारी संघ ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में उन्हें “विक्रेता” और “निष्पादक” की भूमिका दिए जाने का विरोध करते हुए इस काम से पूरी तरह अलग रखने की मांग रखी है। मामला इतना गंभीर हो गया कि मंगलवार को हुई मंत्रालय की कैबिनेट बैठक में भी यह मुद्दा उठा, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों को पटवारियों को समझाने के निर्देश दिए।

योजना क्या है

केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को मध्य प्रदेश में “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026″ के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जा रखने वाले लोगों को उस जमीन की रजिस्ट्री दी जाएगी।

राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक इस योजना के तहत अब तक 68 लाख रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 50 लाख रिकॉर्ड की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जाएगी। स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क में ग्रामीणों को छूट दी गई है, और इस पर सरकार करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर इंदौर से इस योजना की शुरुआत होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इस मौके पर मौजूद रहेंगे।

पटवारियों की आपत्ति क्या है

इंदौर पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष मनोज परिहार के मुताबिक संघ ने कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

पहली आपत्ति यह है कि पटवारी को इस योजना में शासकीय जमीन का “विक्रेता” और “निष्पादक” बताया गया है, यानी दस्तावेज में यह दिखता है कि पटवारी ही ग्रामीण कब्जाधारक को जमीन बेच रहा है। संघ की मुख्य मांग यही है कि पटवारियों को इस निष्पादक की भूमिका से हटाया जाए। परिहार का कहना है कि भविष्य में कोई अदालती मामला बना तो इसी आधार पर पटवारियों को अदालत में पेश होना पड़ेगा।

दूसरी आपत्ति पंजीयन दस्तावेज की भाषा को लेकर है। दस्तावेज में लिखा जा रहा है कि “विक्रेता” यानी पटवारी द्वारा कब्जा सौंपा जा रहा है, जबकि हकीकत में कब्जाधारक वहां वर्षों से रह रहा है और उसी आधार पर उसे पहले ही अधिकार अभिलेख मिल चुका है।

तीसरी आपत्ति यह है कि जब कब्जाधारक ग्रामीण खुद खरीदार (क्रेता) है, तो पटवारी को विक्रेता कैसे बनाया जा सकता है।

चौथी आपत्ति ई-केवाईसी के दौरान पटवारी के निजी डेटा के साझा होने को लेकर है। संघ का कहना है कि इससे भविष्य में कानूनी विवाद की स्थिति बन सकती है।

एक और चिंता यह भी जताई गई है कि कुछ कब्जाधारक पहले ही अपनी जमीन बेच चुके हैं। ऐसे मामलों की पहले जांच नहीं हुई तो आगे नया विवाद खड़ा हो सकता है, क्योंकि जिस व्यक्ति ने जमीन खरीदी थी, वह भी दावा कर सकता है।

छतरपुर में मप्र पटवारी संघ संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हारून अहमद ने भी यही मांग दोहराई कि आबादी भूमि के पंजीयन, निष्पादन और ई-केवाईसी जैसे व्यक्तिगत दायित्व वाले कामों से पटवारी संवर्ग को पूरी तरह अलग रखा जाए। उनका कहना है कि सरकार के पास पहले से अलग पंजीयन विभाग मौजूद है, इसके बावजूद यह जिम्मेदारी राजस्व विभाग पर डाली जा रही है।

बैतूल में भी पटवारी संघ ने इसी तरह की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराया है।

ग्वालियर में क्या हुआ

ग्वालियर जिले में करीब 250 पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर की गैरमौजूदगी में यह ज्ञापन एडीएम को सौंपा गया।

मध्य प्रदेश पटवारी संघ के ग्वालियर जिला अध्यक्ष हर्ष श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि योजना की सबसे बड़ी खामी यह है कि पटवारी को विक्रेता बनाया गया है, जबकि जिस जमीन का वे मालिक ही नहीं हैं, उसे वे कैसे बेच सकते हैं।

रजिस्ट्री की जिम्मेदारी को लेकर सवाल

पटवारियों का यह भी कहना है कि यदि ड्रोन सर्वे में या आबादी रिकॉर्ड में कोई गलती होती है, तो रजिस्ट्री की जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर सरकार को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए। संघ ने डीड ऑफ कन्वेयंस (हस्तांतरण पत्र) में यह भूमिका दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है।

पटवारियों और रजिस्ट्री की पावर रखने वाले अफसरों को पहले एक दिन में 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे अब बढ़ाया जाना है।

प्रक्रिया कैसे काम करेगी

एमपी ई-सेवा पोर्टल पर कब्जाधारी ग्रामीण को खुद अपना पंजीयन कराना है और दस्तावेज अपलोड करना है। इसके बाद पटवारी इसकी जांच करता है और इस डीड का निष्पादन करता है कि जमीन बेची जा रही है। इसके बाद नायब तहसीलदार और तहसीलदार ई-संपदा सर्वर पर रजिस्ट्री करते हैं। पटवारी की भूमिका पर विवाद इसी पहले चरण को लेकर है।

पटवारियों का यह भी कहना है कि जिन कब्जाधारकों को पहले ही अधिकार अभिलेख मिल चुके हैं और राजस्व रिकॉर्ड में जिनका नाम पहले से दर्ज है, उन्हें अलग से रजिस्ट्री की जरूरत क्यों है। सामान्य राजस्व नियम के मुताबिक पहले रजिस्ट्री होती है, फिर राजस्व रिकॉर्ड में नाम आता है, जबकि इस योजना में यह क्रम पहले से उलटा हो चुका है।

कैबिनेट में क्या हुआ

मंगलवार को मंत्रालय में हुई मोहन यादव कैबिनेट की बैठक में स्वामित्व योजना के हितग्राहियों की मुफ्त रजिस्ट्री को लेकर पटवारियों के विरोध का मुद्दा उठा। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि रजिस्ट्री की समय-सीमा चार-पांच महीने के बजाय एक महीने में पूरी कराई जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सुझाव पर सहमति जताई। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि कलेक्टर पटवारियों को समझाएं कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह काम शासन स्तर से कराया जा रहा है और पटवारी इसमें नहीं उलझेंगे। मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्री का काम प्राथमिकता से पूरा कराने के निर्देश भी दिए।

अब आगे क्या

17 सितंबर से योजना के तहत रजिस्ट्री शुरू होनी है, जिसका पहला चरण पटवारी की भूमिका पर टिका है। पटवारी संघ की मुख्य मांगों पर अभी कोई औपचारिक सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर स्तर पर पटवारियों को समझाने की कोशिश शुरू हो गई है। यह देखना बाकी है कि विक्रेता-निष्पादक की भूमिका को लेकर सरकार दस्तावेज की भाषा में कोई बदलाव करती है या नहीं।

FAQ

Q1. मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना कब शुरू हो रही है?

Answer: यह योजना 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर इंदौर से शुरू होगी। इसका पूरा नाम “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026” है।

Q2. पटवारी इस योजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?

Answer: पटवारी संघ की मुख्य आपत्ति यह है कि उन्हें रजिस्ट्री दस्तावेज में शासकीय जमीन का “विक्रेता” और “निष्पादक” बताया गया है, जबकि वे उस जमीन के मालिक नहीं हैं। संघ चाहता है कि उन्हें इस भूमिका से हटाया जाए।

Q3. योजना के तहत कितने लोगों को फायदा मिलेगा?

Answer: सरकार के मुताबिक अब तक 68 लाख रिकॉर्ड तैयार हो चुके हैं, जिनमें से करीब 50 लाख रिकॉर्ड की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जाएगी। इस पर सरकार करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

Q4. सरकार ने पटवारियों की नाराजगी पर क्या कदम उठाया?

Answer: मंगलवार की कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे पटवारियों को समझाएं कि यह काम शासन स्तर से कराया जा रहा है और उन्हें इसमें उलझने की जरूरत नहीं है। साथ ही रजिस्ट्री की समय-सीमा पांच महीने से घटाकर एक महीना करने पर सहमति बनी।

Q5. ग्वालियर में पटवारियों ने क्या किया?

Answer: ग्वालियर में करीब 250 पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर की गैरमौजूदगी में यह ज्ञापन एडीएम को दिया गया।

SOURCE / FACT-CHECK NOTE

इस्तेमाल किए गए स्रोत:

  • The Sootr (16 सितंबर 2026, संजय गुप्ता) — इंदौर पटवारी संघ की आपत्तियां, मनोज परिहार का बयान, प्रक्रिया का ब्योरा, 50 लाख पंजीयन लक्ष्य
  • Mediasaheb (15 सितंबर 2026) — मोहन यादव कैबिनेट बैठक का ब्योरा, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल का बयान, मुख्यमंत्री के निर्देश, 68 लाख रिकॉर्ड और 4,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा, रजिस्ट्री की जिम्मेदारी संबंधी सवाल, 40 रजिस्ट्री प्रतिदिन का टारगेट
  • MP Breaking News (ग्वालियर, 15 सितंबर 2026) — ग्वालियर में 250 पटवारियों का प्रदर्शन, हर्ष श्रीवास्तव का बयान, एडीएम को ज्ञापन
  • UNIVarta (बैतूल, 15 सितंबर 2026) — पटवारी संघ की मांग कि उन्हें व्यक्तिगत दायित्व वाले कार्यों से अलग रखा जाए
  • MediaWala (छतरपुर) — हारून अहमद का बयान, अलग पंजीयन विभाग होने का तर्क

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