ISRO से 100-120 वैज्ञानिकों का इस्तीफा, गगनयान-चंद्रयान मिशन प्रभावित। जानें कौन से विभाग, कितने प्रोजेक्ट और DoS का बड़ा फैसला — पूरी रिपोर्ट।
मामला क्या है?
पिछले कुछ महीनों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इस्तीफा दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement) के लिए आवेदन किया है। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे बाद में डेक्कन हेराल्ड, आउटलुक बिजनेस और अन्य प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी कवर किया।
इसके जवाब में अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) ने 14 जुलाई 2026 को एक आंतरिक मेमो जारी किया, जिसमें कहा गया कि गगनयान जैसे “राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स” पर काम कर रहे ग्रुप-A वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS अब सीधे केंद्र निदेशकों के स्तर पर मंज़ूर नहीं होंगे — हर आवेदन अब अंतिम फैसले के लिए सीधे अंतरिक्ष विभाग को भेजा जाएगा।
महत्वपूर्ण नोट: ISRO या DoS ने अभी तक इस्तीफों की आधिकारिक संख्या या कारण सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किए हैं। नीचे दिए गए आंकड़े और कारण मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों पर आधारित हैं।
किन-किन विभागों/केंद्रों से इस्तीफे आए?
| ISRO केंद्र | स्थान | अनुमानित इस्तीफे | मुख्य काम |
|---|---|---|---|
| यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) | बेंगलुरु | करीब 60-80 | सैटेलाइट डिज़ाइन और निर्माण |
| विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) | तिरुवनंतपुरम | करीब 20-40 | लॉन्च व्हीकल और रॉकेट डेवलपमेंट |
तुलना के लिए, 2012 से 2024 के बीच यानी 12 साल में ISRO से कुल मिलाकर करीब 700 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया था। ऐसे में पिछले एक साल में ही 100-120 वैज्ञानिकों का इस्तीफा एक असामान्य रूप से तेज़ रफ्तार मानी जा रही है।
कितने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्तीफा देने वालों में उन वैज्ञानिकों के नाम भी शामिल हैं जो इन प्रमुख मिशनों से जुड़े रहे हैं:
- गगनयान (Gaganyaan) — भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, जो सबसे ज़्यादा प्रभावित बताया जा रहा है
- चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) — जिसने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की थी, उससे जुड़े वैज्ञानिक
- स्पैडेक्स (SpaDeX) — भारत का डॉकिंग तकनीक प्रदर्शन मिशन
- LVM-3 लॉन्च व्हीकल — भारत के सबसे भारी रॉकेट प्रोग्राम से जुड़ी टीम
चूंकि गगनयान जैसा ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन बेहद उच्च सुरक्षा मानकों की मांग करता है — जहां हर सिस्टम, हर कंपोनेंट और हर इमरजेंसी प्रोसीजर बिना किसी गलती के काम करना चाहिए — अनुभवी वैज्ञानिकों की कमी को इस मिशन के लिए विशेष रूप से जोखिम भरा माना जा रहा है।
बड़ा फैसला (पॉलिसी बदलाव)
- 14 जुलाई 2026 को जारी मेमो में केंद्र निदेशकों (Centre Directors) से इस्तीफा और VRS मंज़ूर करने का अधिकार वापस ले लिया गया
- अब हर आवेदन, निदेशक की सिफारिश के साथ, सीधे अंतरिक्ष विभाग (DoS) को भेजा जाएगा
- जब तक किसी वैज्ञानिक का मौजूदा असाइनमेंट पूरा नहीं हो जाता, तब तक उसे रिलीव न करने का निर्देश दिया गया है
- यह नियम खासतौर पर गगनयान और अन्य “राष्ट्रीय महत्व” के मिशनों पर लागू होगा
इस्तीफों के 10 संभावित कारण (रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार)
(ध्यान दें: ISRO ने अभी तक कोई भी कारण आधिकारिक रूप से नहीं बताया है। यह सूची मीडिया विश्लेषण, उद्योग के रुझानों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित संभावित कारण हैं, न कि पुष्टि किए गए तथ्य।)
- निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का तेज़ी से उभरना — स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस जैसी कंपनियों के बढ़ने से अनुभवी वैज्ञानिकों के लिए नए मौके खुले हैं
- ज़्यादा सैलरी और बेहतर पैकेज — निजी कंपनियां अक्सर सरकारी वेतनमान से कहीं ज़्यादा वेतन ऑफर करती हैं
- तेज़ करियर ग्रोथ — निजी क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिकाएं और प्रमोशन सरकारी प्रक्रिया से तेज़ मिल सकते हैं
- कमर्शियल स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका — कुछ वैज्ञानिक नई तकनीकों और स्टार्टअप माहौल में काम करना चाहते हैं
- वैश्विक एयरोस्पेस इंजीनियरों की मांग — दुनियाभर में स्पेस और एयरोस्पेस इंजीनियरों की मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय अवसर भी बढ़े हैं
- लचीला कार्य वातावरण (Flexible Work Culture) — निजी कंपनियों में सरकारी नौकरी की तुलना में ज़्यादा लचीलापन हो सकता है
- उच्च शिक्षा और शोध के अवसर — कुछ वैज्ञानिक आगे की पढ़ाई या रिसर्च के लिए इस्तीफा दे सकते हैं
- पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण — किसी भी बड़े संस्थान की तरह व्यक्तिगत परिस्थितियां भी एक वजह हो सकती हैं
- लंबे समय से एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने की थकान — गगनयान जैसे बरसों चलने वाले मिशन पर लगातार काम करने से बर्नआउट की संभावना
- सरकारी प्रक्रिया और नौकरशाही की धीमी रफ्तार — निर्णय लेने की धीमी प्रक्रिया कुछ वैज्ञानिकों के लिए निराशाजनक हो सकती है
इसका भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर क्या असर पड़ सकता है?
- विशेषज्ञता की कमी: ISRO के वैज्ञानिकों के पास वर्षों के अनुभव से हासिल की गई विशेषज्ञता होती है, जो किताबों से नहीं बल्कि सीधे काम करने से आती है — इसकी भरपाई नई भर्ती से तुरंत संभव नहीं
- मिशन में देरी का जोखिम: खासकर गगनयान जैसे जटिल और सुरक्षा-केंद्रित मिशन में अनुभवी टीम का न होना समयसीमा को प्रभावित कर सकता है
- नीतिगत जवाब: सरकार ने संकेत दिया है कि वह “टैलेंट रिटेंशन” यानी काबिल वैज्ञानिकों को रोके रखने के लिए और कदम उठा सकती है
FAQ
1. कितने वैज्ञानिकों ने ISRO छोड़ा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ महीनों में करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इस्तीफा या VRS के लिए आवेदन किया है।
2. किन प्रोजेक्ट्स पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा है?
गगनयान (मानव अंतरिक्ष मिशन) के साथ-साथ चंद्रयान-3, स्पैडेक्स और LVM-3 लॉन्च व्हीकल से जुड़ी टीमों पर असर की खबर है।
3. किन केंद्रों से सबसे ज़्यादा इस्तीफे आए?
यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (बेंगलुरु) और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (तिरुवनंतपुरम) से सबसे ज़्यादा इस्तीफे रिपोर्ट किए गए हैं।
4. सरकार ने क्या कदम उठाया है?
14 जुलाई 2026 के मेमो के तहत अब गगनयान जैसे प्राथमिकता वाले मिशनों पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के इस्तीफे केंद्र निदेशक नहीं, बल्कि सीधे अंतरिक्ष विभाग (DoS) मंज़ूर करेगा।
5. क्या ISRO ने इस्तीफों का आधिकारिक कारण बताया है?
नहीं। ISRO या DoS ने अभी तक कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया में जो कारण बताए जा रहे हैं वे विश्लेषण और अनुमान पर आधारित हैं।
यह रिपोर्ट 18 जुलाई 2026 तक उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स (टाइम्स ऑफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड, द साउथ फर्स्ट, आउटलुक बिजनेस) पर आधारित है। चूंकि ISRO/DoS की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं है, इसलिए आंकड़े अनुमानित माने जाने चाहिए।
