दिशा सालियान मौत मामले में CBI ने 13 सितंबर 2026 को FIR दर्ज की। पढ़िए जून 2020 से अब तक की पूरी टाइमलाइन, हाईकोर्ट का आदेश और मामले से जुड़े नाम।
सीबीआई ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर रहीं दिशा सालियान की मौत के मामले में 13 सितंबर 2026 को FIR दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद हुई, जिसमें अदालत ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी थी। जून 2020 में हुई इस मौत को मुंबई पुलिस छह साल तक आत्महत्या मानती रही, लेकिन अब यह मामला पहली बार हत्या और साजिश की धाराओं में आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है।
FIR में क्या दर्ज है
सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच-II, नई दिल्ली ने यह FIR संख्या RC0502026S0006 के तहत दर्ज की है। आधार बना दिशा के पिता सतीश ईश्वर सालियान का 11 सितंबर 2026 को दर्ज कराया गया विस्तृत बयान।
FIR में भारतीय दंड संहिता की ये धाराएं लगाई गई हैं:
- धारा 120-B — आपराधिक साजिश
- धारा 376-D — सामूहिक दुष्कर्म
- धारा 302 — हत्या
- धारा 201 — सबूत नष्ट करना या गलत जानकारी देना
- धारा 217 और 218 — लोक सेवकों द्वारा कानून की अवहेलना और गलत रिकॉर्ड तैयार करना
जांच का जिम्मा सीबीआई के डीएसपी पूरन कुमार को सौंपा गया है। एजेंसी यह पड़ताल करेगी कि इस मौत में हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, साजिश या सबूतों से छेड़छाड़ जैसा कोई अपराध हुआ था या नहीं।
नामों को लेकर रिपोर्टों में अंतर
यहां एक अहम बिंदु स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में इस पर फर्क है।
न्यूज24 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 पेज की यह FIR अज्ञात व्यक्तियों और संदिग्धों के खिलाफ दर्ज की गई है और इसमें किसी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।
वहीं सियासत और ऑर्गनाइज़र जैसी कुछ अन्य वेबसाइटों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि FIR में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, विधायक आदित्य ठाकरे, उनके अंगरक्षक, अभिनेता दिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रोहन रॉय, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वझे, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और डीसीपी विशाल ठाकुर समेत कई नामों का उल्लेख है। इन रिपोर्टों में भी कहा गया है कि ये नाम मुख्य रूप से सतीश सालियान की शिकायत के हिस्से के रूप में दर्ज हैं, न कि औपचारिक आरोपी के तौर पर।
तेज़ ख़बर इन नामों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि जब तक जांच अधिकारी को पर्याप्त सामग्री न मिले, किसी को आरोपी नहीं माना जाएगा। किसी का नाम जांच के दायरे में आना और उस पर आरोप तय होना, दोनों अलग बातें हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया
2 सितंबर 2026 को जस्टिस सारंग वी. कोतवाल और जस्टिस रणजीतसिंह राजा भोसले की खंडपीठ ने सतीश सालियान बनाम महाराष्ट्र राज्य (क्रिमिनल रिट पिटीशन नंबर 1612/2025) में यह आदेश सुनाया।
अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह एक वरिष्ठ अधिकारी को जांच सौंपे। साथ ही कहा कि यदि संज्ञेय अपराध बनता है तो जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाए, और यदि अपराध नहीं बनता तो सक्षम अदालत में क्लोजर की कार्यवाही की जाए। सतीश सालियान को विरोध याचिका दाखिल करने की छूट भी दी गई।
सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार की ओर से चीफ पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शिशिर हिरे ने दलील दी कि किसी पर मुकदमा चलाने लायक सबूत मौजूद नहीं हैं और उपलब्ध सामग्री यही दर्शाती है कि दिशा ने या तो आत्महत्या की या वह दुर्घटनावश गिरीं। उन्होंने यह भी पूछा कि पुलिस के सामने कई बार बयान दर्ज होने के वक्त सतीश सालियान ने ये शंकाएं क्यों नहीं जताईं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नीलेश ओझा ने कहा कि शुरुआत में पुलिस ने दिशा के पिता को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं दी और अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद ही रिपोर्ट मिली।
आदेश के बाद मीडिया से बात करते हुए सतीश सालियान ने कहा कि उन्हें न्याय मिला है।
15 सितंबर को ताजा स्थिति
रिपोर्टों के मुताबिक सीबीआई ने मंगलवार को FIR की प्रति सीलबंद लिफाफे में बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने पेश की। एजेंसी ने मालवणी पुलिस स्टेशन और मुंबई पुलिस से मूल रिकॉर्ड तलब किए हैं, जिनमें ADR नंबर 85/2020, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, केस डायरी और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। SIT से भी केस डायरी का ब्योरा मांगा गया है। अब जांच अदालत की निगरानी में आगे बढ़ेगी।
पूरी टाइमलाइन: जून 2020 से सितंबर 2026 तक
2020 — घटना और शुरुआती जांच
8-9 जून 2020 की रात — मुंबई के मालाड इलाके में जनकल्याण नगर स्थित गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग से गिरने के बाद 28 वर्षीय दिशा सालियान की मौत। मालवणी पुलिस ने CrPC की धारा 174 के तहत आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की और शुरुआती तौर पर किसी आपराधिक कोण से इनकार किया। ज्यादातर रिपोर्टों में 14वीं मंजिल का जिक्र है, जबकि ट्रिब्यून इंडिया की एक रिपोर्ट में 12वीं मंजिल लिखा गया है।
14 जून 2020 — बांद्रा स्थित किराये के फ्लैट में 34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मृत मिले। दोनों मौतों के बीच सिर्फ छह दिन के अंतर ने देशभर में अटकलों और थ्योरी की बाढ़ ला दी।
अगस्त 2020 — तत्कालीन भाजपा नेता नारायण राणे ने आरोप लगाया कि दिशा की मौत इमारत से कूदकर आत्महत्या नहीं, बल्कि दुष्कर्म और हत्या का मामला है। इसी दौरान सतीश सालियान ने अफवाहें फैलाने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मालवणी थाने में लिखित शिकायत दी। मुंबई पुलिस ने शव की स्थिति को लेकर चल रही कुछ रिपोर्टों का खंडन किया।
अक्टूबर 2020 — सुशांत के मित्र सुनील शुक्ला ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दिशा की मौत की सीबीआई जांच मांगी।
26 अक्टूबर 2020 — सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। तत्कालीन सीजेआई एस.ए. बोबडे की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट पहले से ऐसे कई मामलों को देख रहा है।
2021-2022 — क्लोजर रिपोर्ट और परिवार का रुख
4 फरवरी 2021 — मालवणी पुलिस ने ADR मामलों के नियम के मुताबिक क्लोजर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी। इसमें मौत को आत्महत्या बताया गया और कहा गया कि दिशा कई कारणों से अवसाद में थीं।
मार्च 2022 — दिशा के माता-पिता सतीश और वसंती सालियान ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और तत्कालीन मुख्यमंत्री समेत कई लोगों को पत्र लिखकर कहा कि वे मुंबई पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं और उनकी बेटी का नाम राजनीति के लिए बदनाम किया जा रहा है।
मार्च 2022 — दादर स्थित आवास पर मीडिया से बात करते हुए दिशा के माता-पिता ने भावुक अपील की कि उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। इसी दौरान महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने मुंबई पुलिस को नोटिस भेजकर दो दिन में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर की प्रति और अन्य दस्तावेज मांगे।
22 दिसंबर 2022 — विधानसभा के शीतकालीन सत्र में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी को निशाना नहीं बनाया जाएगा।
2023-2024 — SIT और नई शिकायत
दिसंबर 2023 — राज्य सरकार ने मुंबई पुलिस को SIT गठित करने के लिए पत्र लिखा।
12 दिसंबर 2023 — मुंबई पुलिस ने SIT बनाई। मालवणी थाने के वरिष्ठ निरीक्षक चिमाजी आढाव को जांच सौंपी गई और डीसीपी अजय बंसल को पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई।
12 जनवरी 2024 — परिवार के वकील नीलेश ओझा के मुताबिक इसी तारीख को आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली और अन्य के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दी गई थी, जिस पर एक साल से अधिक समय तक FIR दर्ज नहीं हुई।
2025 — हाईकोर्ट में याचिका और सियासी टकराव
मार्च 2025 — सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या हुई और फिर राजनीतिक संरक्षण में लीपापोती की गई। उन्होंने सीबीआई जांच और आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR की मांग की।
मार्च 2025 — कुछ दिन बाद सतीश सालियान और उनके वकील ने क्रॉफर्ड मार्केट स्थित मुंबई पुलिस मुख्यालय में भी शिकायत दी। ओझा के मुताबिक शिकायत में आदित्य ठाकरे, दिनो मोरिया, सूरज पंचोली और उनके अंगरक्षक, परमबीर सिंह, सचिन वझे और रिया चक्रवर्ती के नाम शामिल थे।
मार्च 2025 — यह मुद्दा महाराष्ट्र विधानमंडल में गूंजा। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी की और सदन को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और उनका कहना रहा है कि इस मामले में उनका कोई संबंध नहीं है।
जून 2025 — मौत के पांच साल पूरे होने पर जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस आर.आर. भोसले की पीठ ने पुलिस से पूछा कि जांच आखिर कब तक चलेगी। अदालत ने टिप्पणी की कि तय सिर्फ यह करना है कि मौत आत्महत्या थी या गैर-इरादतन हत्या। सरकारी वकील ने कहा कि हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और यह भी कि दिशा के माता-पिता ने पहले कई बार बयान में किसी पर शक जाहिर नहीं किया था।
2026 — SIT रिपोर्ट से CBI जांच तक
2026 की शुरुआत — रिपोर्टों के मुताबिक SIT ने धारा 174 के तहत रिपोर्ट सौंपते हुए आत्महत्या के निष्कर्ष को दोहराया। याचिकाकर्ता ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
2 सितंबर 2026 — बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई को FIR दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया।
11 सितंबर 2026 — सतीश सालियान ने सीबीआई के सामने विस्तृत बयान दर्ज कराया।
13 सितंबर 2026 — सीबीआई ने FIR संख्या RC0502026S0006 दर्ज की।
15 सितंबर 2026 — FIR की प्रति सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश। सीबीआई ने मूल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य तलब किए।
परिवार के आरोप क्या हैं
सतीश सालियान का कहना है कि 8-9 जून 2020 की रात उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि वह एक साजिश का शिकार हुईं। उनका दावा है कि दिशा के पास कुछ संवेदनशील जानकारी थी, जिसे वह और सुशांत सिंह राजपूत सार्वजनिक करने वाले थे।
उन्होंने मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच पर कई सवाल उठाए हैं:
- लंबे समय तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई
- पूरी जानकारी दिए बिना दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए
- मेडिकल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक सैंपल से छेड़छाड़ का आरोप
- सीसीटीवी फुटेज और लोकेशन डेटा का गायब होना
परिवार के वकील नीलेश ओझा ने मीडिया के सामने और भी सीधे आरोप लगाए हैं। ये सभी आरोप याचिकाकर्ता पक्ष के दावे हैं और अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
एक बात जो इस मामले को जटिल बनाती है, वह यह है कि 2022 में यही परिवार सार्वजनिक रूप से कह चुका था कि उसे पुलिस जांच पर कोई संदेह नहीं है। सरकारी वकील ने हाईकोर्ट में इसी बिंदु को उठाया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा है कि मुंबई पुलिस पहले ही आदित्य ठाकरे को इस मामले से अलग बता चुकी है, और FIR की चुनिंदा जानकारी मीडिया में लीक करके बिना सबूत के छवि खराब की जा रही है। इससे पहले 2023 में भी उन्होंने कहा था कि जांच जिस एजेंसी से करानी हो, करा ली जाए।
दूसरी ओर भाजपा और शिवसेना के कई नेता वर्षों से इस मामले में केंद्रीय जांच की मांग करते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे लगातार यह दावा करते रहे हैं कि दोनों मौतें आपस में जुड़ी हैं। यह उनका दावा है, जिसकी किसी जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने सीबीआई जांच का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि सच सामने आएगा।
सुशांत सिंह राजपूत केस से क्या रिश्ता है
दिशा सालियान कुछ समय तक सुशांत सिंह राजपूत की टैलेंट मैनेजर रह चुकी थीं। उन्होंने भारती सिंह और वरुण शर्मा जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया था।
दोनों मौतों में सिर्फ छह दिन का अंतर था, जिसके कारण इन्हें जोड़कर देखा जाता रहा। हालांकि दोनों मामलों की जांच अलग-अलग हुई है। सुशांत मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2020 के आदेश पर सीबीआई ने की और बाद में एजेंसी ने आत्महत्या के निष्कर्ष के साथ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिस पर सक्षम अदालत में सुनवाई अभी बाकी है। सीबीआई यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि दिशा सालियान मामले की जांच उसने पहले नहीं की थी, इसलिए किसी को क्लीन चिट देने का दावा गलत है।
आगे क्या
सीबीआई को अब यह तय करना है कि हाईकोर्ट द्वारा चिह्नित संदिग्ध परिस्थितियों के पीछे कोई अपराध है, या वे केवल जांच की खामियां हैं। एजेंसी मूल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक सामग्री, तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयानों की दोबारा पड़ताल करेगी। अदालत के आदेश के मुताबिक अपराध साबित होने की स्थिति में चार्जशीट दाखिल होगी, वरना क्लोजर रिपोर्ट, जिसके खिलाफ परिवार विरोध याचिका दे सकता है।
Q1. दिशा सालियान की मौत कब और कहां हुई थी?
Answer: 8-9 जून 2020 की रात मुंबई के मालाड इलाके में गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग से गिरने के बाद 28 वर्षीय दिशा सालियान की मौत हुई थी। ज्यादातर रिपोर्टों में 14वीं मंजिल का जिक्र है, जबकि एक रिपोर्ट में 12वीं मंजिल बताया गया है।
Q2. सीबीआई ने FIR कब दर्ज की और उसमें कौन सी धाराएं हैं?
Answer: सीबीआई ने 13 सितंबर 2026 को FIR संख्या RC0502026S0006 दर्ज की। इसमें IPC की धारा 120-B, 376-D, 302, 201 तथा 217 और 218 लगाई गई हैं।
Q3. क्या FIR में किसी को आरोपी बनाया गया है?
Answer: न्यूज24 की रिपोर्ट के मुताबिक FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ है और किसी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है। कुछ अन्य वेबसाइटों ने शिकायत में शामिल नामों का उल्लेख किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी को आरोपी नहीं माना जाएगा।
Q4. मुंबई पुलिस और SIT की जांच में क्या निकला था?
Answer: मालवणी पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज कर 4 फरवरी 2021 को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें मौत को आत्महत्या बताया गया। दिसंबर 2023 में गठित SIT ने भी रिपोर्टों के मुताबिक 2026 की शुरुआत में यही निष्कर्ष दोहराया।
Q5. इस मामले का सुशांत सिंह राजपूत केस से क्या संबंध है?
Answer: दिशा सालियान सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं और उनकी मौत के छह दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत मृत मिले थे। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग हुई है। सुशांत मामले में सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है, जिस पर सुनवाई बाकी है।
Q6. बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को क्या निर्देश दिए हैं?
Answer: अदालत ने सीबीआई को एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त कर जांच करने, संज्ञेय अपराध बनने पर जल्द चार्जशीट दाखिल करने और अपराध न बनने पर क्लोजर की कार्यवाही करने को कहा है। याचिकाकर्ता को विरोध याचिका दाखिल करने की छूट भी दी गई है।
SOURCE / FACT-CHECK NOTE
इस्तेमाल किए गए स्रोत:
- News24 (15 सितंबर 2026) — CBI FIR, FIR नंबर, धाराएं, डीएसपी पूरन कुमार, सीलबंद लिफाफा, मांगे गए रिकॉर्ड
- The Federal और The Week (2 सितंबर 2026) — बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश, खंडपीठ, सरकारी वकील की दलील, सतीश सालियान की प्रतिक्रिया
- Legal Service India — याचिका संख्या (क्रिमिनल रिट पिटीशन 1612/2025) और फैसले का विश्लेषण
- Deccan Herald — SIT गठन, विधानमंडल में हंगामा, मार्च 2025 की शिकायत, जून 2025 की हाईकोर्ट टिप्पणी, माता-पिता की 2022 की अपील, CBI का स्पष्टीकरण
- Tribune India — मालवणी पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट (4 फरवरी 2021), SIT की घोषणा, सुप्रीम कोर्ट का अक्टूबर 2020 का आदेश
- Siasat और Organiser (13-14 सितंबर 2026) — FIR में उल्लिखित नामों संबंधी रिपोर्ट
- Gulf News — 2020 की शुरुआती शिकायतें, परिवार का पुराना रुख, दिशा के पेशेवर काम का ब्योरा
फैक्ट-चेक नोट:
- मंजिल को लेकर अंतर — ज्यादातर रिपोर्टों में 14वीं मंजिल, ट्रिब्यून इंडिया में 12वीं मंजिल। लेख में दोनों का उल्लेख किया गया है।
- FIR में नामजद आरोपी — News24 के अनुसार कोई नामजद आरोपी नहीं; Siasat/Organiser के अनुसार कई नामों का उल्लेख। दोनों स्थितियां स्रोत सहित दर्ज की गई हैं। तेज़ ख़बर ने स्वतंत्र रूप से FIR की प्रति नहीं देखी है।
- सभी आरोप अप्रमाणित — सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और लीपापोती के आरोप याचिकाकर्ता पक्ष और उनके वकील के दावे हैं। अदालत में कुछ भी साबित नहीं हुआ है और हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी को आरोपी न माना जाए।
- राजनीतिक दावे — दोनों मौतों के आपस में जुड़े होने संबंधी दावे राजनीतिक नेताओं के बयान हैं, किसी जांच एजेंसी का निष्कर्ष नहीं।
- 2021 की क्लोजर रिपोर्ट के अवसाद संबंधी विवरण — यह पुलिस रिपोर्ट का हिस्सा है। संवेदनशीलता को देखते हुए इसका पारिवारिक विवरण लेख में शामिल नहीं किया गया है।
