सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा: 6 दर्जन से ज्यादा छात्र फंसे, अब तक 6 की मौत, जानें पूरी टाइमलाइन और कारण

सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा

दिल्ली के सत्या निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने से 6 की मौत। जानें हादसे की पूरी टाइमलाइन, संभावित कारण, प्रशासन की कार्रवाई और इलाके में पहले हुई घटना की जानकारी।

दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक बहुमंजिला इमारत गिरने से अब तक 6 लोगों की मौत हो गई है। यह बिल्डिंग दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास मोती बागड़ में शिव मंदिर के नज़दीक स्थित थी और इसमें लड़कों की पेइंग गेस्ट (पीजी) सुविधा चलती थी। हादसे के वक्त इमारत में कई छात्र मौजूद थे, जिससे यह घटना और गंभीर हो गई।

हादसे के वक्त क्या हुआ

दिल्ली फायर सर्विस को दोपहर करीब 1:30 से 1:33 बजे के बीच इमारत गिरने की सूचना मिली। मौके पर आठ दमकल गाड़ियां, सीएटीएस एम्बुलेंस और अन्य आपात सेवाएं भेजी गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अचानक तेज आवाज के साथ धमाका हुआ और चारों तरफ धूल-धुआं फैल गया।

आसपास रहने वाले लोगों ने पुलिस के पहुंचने से पहले ही मलबा हटाना शुरू कर दिया था। एक स्थानीय निवासी यश चौधरी के मुताबिक, मौके पर शुरुआत में पुलिसकर्मी बहुत कम थे, इसलिए स्थानीय लोगों ने खुद मलबे में फंसे छात्रों को निकालने में मदद की।

रविवार होने के कारण कई छात्र अपने कमरों में मौजूद थे, जो आमतौर पर हफ्ते के बाकी दिनों में कॉलेज गए हुए होते। इस वजह से भी फंसे हुए लोगों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है।

बचाव अभियान और मौत का आंकड़ा

दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए), एमसीडी और सिविल डिफेंस की टीमें मिलकर बचाव अभियान चला रही हैं। शुरुआती घंटों में दो से आठ लोगों को मलबे से निकाला गया, जिनमें से कुछ की एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाते वक्त और बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।

सोमवार सुबह तक की जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या 6 हो गई है, जबकि मलबे से कुल 11 लोगों को बचाया जा चुका है। करीब 20 छात्रों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। यह आंकड़ा बचाव अभियान के साथ आगे बदल सकता है।

हादसे का कारण क्या बताया जा रहा है

अधिकारियों के मुताबिक, यह इमारत लगभग 30 साल पुरानी थी और महज 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। हादसे के वक्त इमारत की ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था।

एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस इमारत का कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान मौजूद नहीं था, और बेसमेंट में किया गया निर्माण अनधिकृत था। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से यह भी सामने आया कि एमसीडी के पास इस इमारत को सील करने या उसके खिलाफ किसी शिकायत का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई दिनों से हुई बारिश का पानी बेसमेंट में जमा होता रहा, जिससे इमारत की नींव कमजोर हो गई और आखिरकार वह ढह गई। कुछ चश्मदीदों ने यह भी बताया कि हादसे के वक्त बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। हालांकि, जांच अभी जारी है और सटीक कारण की पुष्टि अधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

एफआईआर और मालिक पर आरोप

पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपों में गैर-इरादतन हत्या (कल्पेबल होमिसाइड), ढांचे की देखरेख में लापरवाही और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालना शामिल है। यह ध्यान रहे कि यह अभी पुलिस की तरफ से लगाया गया आरोप है, दोष अदालत में साबित होना बाकी है।

एमसीडी की सख्ती, दिल्ली सीएम की प्रतिक्रिया

हादसे के बाद एमसीडी ने शहर भर में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का एलान किया है। नागरिक निकाय के मुताबिक चार मंजिल से ज्यादा ऊंचाई की सभी अवैध इमारतों को तुरंत सील किया जाएगा, और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाएगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट में हादसे पर चिंता जताई और बताया कि एहतियात के तौर पर बगल की इमारत को भी खाली करा लिया गया है। उन्होंने कहा कि डीडीएमए, एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, एमसीडी, सीएटीएस और सिविल डिफेंस की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं।

क्या सत्या निकेतन में पहले भी ऐसा हादसा हुआ है

सत्या निकेतन इलाके में इससे पहले भी एक इमारत गिरने की घटना दर्ज है। उस मामले में बिल्डिंग नंबर 173 में एक तीन मंजिला मकान, जिसे पीजी में तब्दील करने के लिए बनाया जा रहा था, ढह गया था। इस हादसे में दो मजदूरों, बिलाल और नसीम, की मौत हुई थी, जबकि मोहम्मद फिरदौस, असलम, सरफराज और मुसाहिद नाम के चार मजदूर घायल हुए थे। दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) ने उस घटना की भी जांच के आदेश दिए थे और एफआईआर दर्ज हुई थी।

एक फायर अधिकारी ने उस वक्त बताया था कि इमारत पुरानी और जीर्ण-शीर्ण हालत में थी, फिर भी उसे पीजी में बदलने के लिए तोड़फोड़ की जा रही थी, जिससे वह गिर गई।

स्पष्ट कर दें कि उपलब्ध रिपोर्टों से यह पुष्टि नहीं हो पाती कि बिल्डिंग नंबर 173 और 6 सितंबर 2026 को गिरी इमारत एक ही ढांचा है या इलाके की दो अलग-अलग इमारतें। दोनों घटनाओं में समानता सिर्फ इतनी है कि दोनों सत्या निकेतन इलाके में हुई, दोनों में पीजी के लिए बदलाव/मरम्मत का काम चल रहा था, और दोनों बार दिल्ली फायर सर्विस को दोपहर के करीब डेढ़ बजे कॉल मिली थी। सटीक तारीख (वर्ष) की भी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं मिलती।

दिल्ली में पीजी और हॉस्टल इमारतों में हादसों का सिलसिला

रिपोर्टों के मुताबिक, सत्या निकेतन हादसा बीते पांच महीनों के भीतर दिल्ली में तीसरी बड़ी बिल्डिंग गिरने की घटना है। इससे कुछ महीने पहले दक्षिण दिल्ली के मेहरौली इलाके में एक पीजी के तौर पर चल रही इमारत गिरने से कम से कम 6 लोगों की मौत हुई थी और 8 अन्य घायल हुए थे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास सैकड़ों पीजी और हॉस्टल जैसी इमारतों में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। इन घटनाओं ने पुरानी और बिना स्वीकृत नक्शे वाली इमारतों में चल रहे अनधिकृत निर्माण और बेसमेंट खोदने जैसे कामों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सत्या निकेतन में बचाव अभियान जारी है और मृतकों व घायलों की संख्या में बदलाव की आशंका है। आगे की जानकारी आधिकारिक पुष्टि के आधार पर अपडेट की जाएगी।

FAQ:

Q1. सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसे में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?

Answer: सोमवार सुबह तक मिली जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या 6 है, जबकि 11 लोगों को मलबे से सुरक्षित बचाया गया है। यह आंकड़ा बचाव अभियान जारी रहने के साथ बदल सकता है।

Q2. हादसे की वजह क्या बताई जा रही है?

Answer: अधिकारियों के मुताबिक इमारत की ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था। बेसमेंट में निर्माण अनधिकृत था और स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के पानी के जमा होने से नींव कमजोर हुई, जिससे इमारत ढह गई। पूरी जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है।

Q3. क्या इमारत का निर्माण अवैध था?

Answer: एमसीडी के एक अधिकारी के अनुसार इमारत का कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान मौजूद नहीं था और बेसमेंट का निर्माण अनधिकृत तरीके से किया गया था।

Q4. क्या इससे पहले भी सत्या निकेतन में ऐसा हादसा हुआ है?

Answer: सत्या निकेतन इलाके में इससे पहले भी बिल्डिंग नंबर 173 में एक इमारत गिरने की घटना दर्ज है, जिसमें दो मजदूरों की मौत हुई थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि यह वही इमारत है जो 6 सितंबर 2026 को गिरी।

Q5. हादसे के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?

Answer: पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत कई आरोपों में मामला दर्ज किया है। एमसीडी ने शहर भर में चार मंजिल से ऊंची सभी अवैध इमारतों को सील करने और लापरवाह अधिकारियों को बर्खास्त करने की घोषणा की है।

SOURCE/FACT CHECK NOTE: यह रिपोर्ट निम्नलिखित स्रोतों की जानकारी पर आधारित है: The Print (collapsed building housed 75-bed PG report), WION News, The Federal, Xinhua, The Week (MCD crackdown और मृतकों की संख्या 6 से जुड़ी रिपोर्ट), और Deccan Herald व The Tribune (सत्या निकेतन बिल्डिंग नंबर 173 की पुरानी घटना)। मृतकों/घायलों की संख्या बचाव अभियान जारी रहने के कारण बदल सकती है। बिल्डिंग नंबर 173 वाली पुरानी घटना और 6 सितंबर 2026 की घटना के एक ही ढांचे से जुड़े होने की पुष्टि नहीं हो पाई है — इसे स्पष्ट रूप से अनिश्चित माना गया है। पुरानी घटना की सही तारीख (वर्ष) भी स्रोत सामग्री में स्पष्ट नहीं थी।

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