दिल्ली की अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बरी किया। विनेश फोगाट-बजरंग पूनिया अब हाईकोर्ट जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें।
बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में बरी, दिल्ली कोर्ट ने सुनाया फैसला
पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की एक अदालत ने महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया है। रूज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह खुद अदालत में मौजूद थे। मामले में सह-आरोपी और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी बरी कर दिया गया है। विस्तृत फैसले की प्रति अभी आना बाकी है।
क्या था पूरा मामला?
यह केस छह महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिन्होंने बृजभूषण शरण सिंह पर एक दशक से अधिक समय में कई मौकों पर अनुचित तरीके से छूने, पीछा करने और डराने-धमकाने के आरोप लगाए थे। शुरुआती FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 34 (सामूहिक इरादा) के तहत दर्ज की गई थी। मई 2024 में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धारा 354, 354A और आपराधिक धमकी (506) के तहत आरोप तय किए थे, जबकि सह-आरोपी विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी का आरोप तय हुआ था। इन धाराओं में अधिकतम पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।
गौरतलब है कि इसी मामले से जुड़ा एक और केस — एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत दर्ज — पहले ही बंद किया जा चुका था, जब जांच में पर्याप्त सबूत नहीं मिले और नाबालिग पहलवान ने अदालत में अपने बयान वापस ले लिए थे। मुख्य केस में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर पूरे मुकदमे के दौरान जमानत पर रहे।
2023 का ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन
यह मामला भारतीय खेल जगत के सबसे बड़े विवादों में से एक बन गया था। अप्रैल-मई 2023 में विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक जैसे शीर्ष पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया था, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी और WFI अध्यक्ष पद से हटाए जाने की मांग की गई थी। इस विरोध प्रदर्शन ने देशभर में बड़ी सुर्खियां बटोरी थीं और खेल मंत्रालय को हस्तक्षेप कर एक निगरानी समिति गठित करनी पड़ी थी।
दिल्ली पुलिस ने 15 जून को छह बार के सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बचाव पक्ष ने अंतिम बहस के दौरान तर्क दिया कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई विसंगतियां थीं — कुछ शिकायतकर्ताओं ने घटनाओं की तारीखें और स्थान बदले, और जिरह के दौरान बताई गई घटनाओं का क्रम पहले सरकार द्वारा नियुक्त समिति के सामने दिए गए हलफनामों से अलग था।
बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया
फैसला आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने खुशी जताते हुए कहा कि केस शुरू होने के पहले दिन ही उन्होंने कहा था कि अगर कोई भी आरोप साबित हुआ तो वे फांसी लगा लेंगे। उन्होंने कहा कि आज अदालत ने उन्हें सम्मान के साथ बरी किया है और यह उनके और उनके समर्थकों के लिए खुशी का दिन है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को उनके गढ़ कैसरगंज सीट से टिकट नहीं दिया था, बल्कि उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया था, जो चुनाव जीते थे।
विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया की प्रतिक्रिया — “लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई”
फैसले के कुछ ही घंटों बाद विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर संयुक्त बयान जारी करते हुए गहरी निराशा जताई। दोनों पहलवानों ने कहा कि वे इस फैसले से “बेहद दुखी” हैं, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है और महिला पहलवान इस लड़ाई को जारी रखेंगी। उन्होंने बताया कि उनके वकीलों को इस फैसले को ऊपरी अदालत में जल्द से जल्द चुनौती देने का निर्देश दे दिया गया है।
अपने बयान में दोनों पहलवानों ने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही “पूरा सिस्टम, सरकार और तंत्र” बृजभूषण शरण सिंह को बचाने में जुटा रहा। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के एक ताकतवर नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए सड़कों पर उतरना बड़ी हिम्मत का काम था, और यह भी आरोप लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कई महिलाओं को शिकायत वापस लेने के लिए डराया-धमकाया।
आगे क्या?
महिला पहलवानों की टीम अब इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। मामला एक बार फिर सुर्खियों में रहने की संभावना है, क्योंकि यह भारतीय खेल जगत और महिला सुरक्षा से जुड़े सबसे चर्चित कानूनी मामलों में से एक है। आने वाले दिनों में अदालत के विस्तृत फैसले की प्रति सामने आने के बाद इस केस से जुड़े और तथ्य स्पष्ट होने की उम्मीद है।
(संपादकीय नोट: यह एक संवेदनशील कानूनी मामला है। यह रिपोर्ट उपलब्ध कोर्ट कार्यवाही और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि मामले से जुड़े व्यक्तियों के प्रति निष्पक्ष दृष्टिकोण बनाए रखें, क्योंकि यह मामला अभी ऊपरी अदालत में जाने की प्रक्रिया में है।)
FAQ सेक्शन
Q1. बृजभूषण शरण सिंह को किस मामले में बरी किया गया है? दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में बरी किया है।
Q2. यह फैसला कब और किस अदालत ने सुनाया? यह फैसला 3 अगस्त 2026 को रूज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सुनाया।
Q3. मामले में सह-आरोपी कौन थे? WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर सह-आरोपी थे, जिन्हें भी अदालत ने बरी कर दिया है।
Q4. यह केस कब शुरू हुआ था? यह केस 2023 में महिला पहलवानों की शिकायत के बाद दर्ज हुआ था, और मई 2024 में अदालत ने आरोप तय किए थे।
Q5. विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी? दोनों पहलवानों ने कहा कि वे फैसले से निराश हैं लेकिन हार नहीं मानेंगे, और वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।
Q6. क्या बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई और मामला भी था? हां, एक नाबालिग पहलवान की POCSO एक्ट के तहत दर्ज शिकायत पहले ही बंद कर दी गई थी, जब जांच में सबूत नहीं मिले।
Q7. बृजभूषण शरण सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है? वे छह बार सांसद रह चुके भाजपा नेता हैं, हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट न देकर उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज सीट से उम्मीदवार बनाया था।
Q8. 2023 के धरने में कौन-कौन शामिल थे? विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक जैसे शीर्ष पहलवानों ने जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया था।
Q9. आरोपों में अधिकतम सजा का प्रावधान क्या था? जिन धाराओं के तहत आरोप तय हुए थे, उनमें अधिकतम पांच साल तक की सजा का प्रावधान था।
Q10. अब आगे इस केस में क्या होगा? महिला पहलवान इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं, जिससे यह मामला आगे भी अदालत में जारी रहेगा।
