स्वतंत्र भारद्वाज केस: जंतर-मंतर मारपीट कांड में अब हिंदू रक्षा दल का समर्थन, FIR को बताया गलत — जानिए पूरा घटनाक्रम

जंतर मंतर मारपीट मामला

जंतर-मंतर मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज पर POCSO और SC/ST एक्ट की धाराएं जुड़ीं। अब हिंदू रक्षा दल थाने पहुंचा और FIR को गलत बताया। पढ़ें पूरा मामला।

स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे हैं। संगठन ने दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR को गलत करार दिया है। यह घटनाक्रम जंतर-मंतर पर हुई मारपीट के उस मामले से जुड़ा है, जो बीते कुछ दिनों से राजधानी की सियासत में लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

यह विवाद अब सिर्फ एक मारपीट की घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कई राजनीतिक संगठन, सांसद और अलग-अलग सामाजिक समूह आमने-सामने आ चुके हैं। नीचे पूरे मामले की शुरुआत से लेकर अब तक की स्थिति को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।

मामला शुरू कहां से हुआ?

यह घटना 23 जून 2026 की है। उस दिन जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन चल रहा था। शिकायतकर्ता संजय कुमार अपनी नाबालिग बेटी के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे।

पुलिस के मुताबिक शाम करीब साढ़े पांच बजे संजय कुमार अपने फोन से प्रदर्शन का वीडियो बना रहे थे, तभी एक युवक के साथ उनकी बहस शुरू हो गई। आरोप है कि इसके बाद दो-तीन युवकों ने उन्हें घेर लिया और घूंसों के साथ-साथ हाथ में पहने लोहे के कड़े जैसी चीज से उनके सिर पर वार किया।

मारपीट के बाद संजय कुमार को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में उनके सिर पर दो कटे हुए घाव दर्ज किए गए।

पहली FIR और शुरुआती कार्रवाई

संजय कुमार की शिकायत पर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में FIR संख्या 62/2026 दर्ज हुई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया।

घटना के समय पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को आरोपी के तौर पर नामजद किया था। प्रदर्शन स्थल से दोनों को हिरासत में भी लिया गया, लेकिन पुलिस के अनुसार चोट को “साधारण प्रकृति” का बताते हुए बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

वायरल पॉडकास्ट से पकड़ा तूल

मामला उस वक्त फिर सुर्खियों में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस क्लिप में उन्हें कथित तौर पर यह दावा करते सुना गया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने ही संजय कुमार पर हमला किया था।

क्लिप में भारद्वाज ने यह भी कहा कि इस मामले में धारा 307 यानी हत्या के प्रयास का आरोप बनता है, पीड़ित को करीब 60 टांके लगे और उन्हें गंभीर हालत में एंबुलेंस से ले जाया गया। उन्होंने यह दावा भी किया कि इसके बावजूद वे जेल नहीं गए।

बाद में स्वतंत्र भारद्वाज ने अपना रुख बदल लिया। उन्होंने कहा कि यह हमला नहीं बल्कि आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी। उनके मुताबिक 10-15 लोगों ने उन्हें घेर लिया था और इसी दौरान संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए चोट को गंभीर न होने की बात दोहराई।

पत्रकार और फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर ने जंतर-मंतर प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें भी अपने एक्स हैंडल से साझा कीं, जिनमें भारद्वाज हाथ में डंडा लिए दिख रहे हैं।

गिरफ्तारी की मांग को लेकर थाने पर प्रदर्शन

वायरल क्लिप सामने आने के बाद CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास, नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और पप्पू यादव के साथ संगठन के सैकड़ों समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।

इसके अलावा दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लकड़ा, निशु आजाद और कांग्रेस की लीगल टीम भी थाने पहुंचकर तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते नजर आए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी निशु आजाद के समर्थन में बयान दिया।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ अलग से शिकायत दर्ज कराई और साफ किया कि उनका भारद्वाज से कोई निजी रिश्ता नहीं है।

CJP पक्ष की मांग रही है कि इस मामले में हत्या के प्रयास (धारा 307 या इसके समकक्ष प्रावधान) के साथ-साथ SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी जाएं, क्योंकि पीड़ित परिवार दलित समुदाय से है।

बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया भारद्वाज

72 घंटे के आश्वासन के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली पुलिस की टीम स्वतंत्र भारद्वाज को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर पहुंची। सूत्रों के मुताबिक भारद्वाज अपनी पहचान छुपाने के लिए हेलमेट पहनकर नैथला गांव से मोटरसाइकिल पर खुर्जा की ओर निकल गए थे।

पुलिस ने सादे कपड़ों में कई टीमें तैनात कीं और उनकी तलाश के दौरान स्थानीय पत्रकारों से भी पूछताछ की। काफी मशक्कत के बाद 4 सितंबर को पुलिस स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लेने में कामयाब रही।

FIR में जुड़ीं नई धाराएं

हिरासत में लिए जाने के बाद मामले में एक और मोड़ आया। एक नाबालिग की शिकायत पर, जिसमें उसने ऑनलाइन धमकियां मिलने की बात कही थी और जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज का भी नाम है, पुलिस ने क्रिमिनल इंटीमिडेशन (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो एक्ट के तहत एक अलग FIR दर्ज की।

इसके साथ ही पुरानी FIR (संख्या 62/2026) में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस के मुताबिक अब यह भी जांचा जाएगा कि नाबालिग को सोशल मीडिया पर धमकी किन-किन लोगों ने दी थी।

अब हिंदू रक्षा दल थाने पहुंचा, FIR को बताया गलत

इस पूरे घटनाक्रम में अब हिंदू रक्षा दल की एंट्री हुई है। संगठन के लोग स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे। उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR को गलत बताया है।

हिंदू रक्षा दल की ओर से थाने पर दिए गए बयान या मांगों को लेकर अभी सिर्फ प्रारंभिक जानकारी ही सामने आई है। संगठन के प्रतिनिधिमंडल, उनकी संख्या और विस्तृत मांगों को लेकर आधिकारिक और विस्तृत रिपोर्ट फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस हिस्से की पुष्टि होने पर अपडेट किया जाएगा।

अभी मामला किस स्थिति में है

फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एक साथ कई मामले चल रहे हैं — मारपीट को लेकर मूल FIR, उसमें जुड़ी SC/ST एक्ट की धाराएं, और नाबालिग की शिकायत पर दर्ज पॉक्सो एक्ट की अलग FIR। दूसरी ओर, अब हिंदू रक्षा दल जैसे संगठन उनके समर्थन में सामने आ गए हैं और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी तक अदालत में इनमें से किसी भी आरोप पर फैसला नहीं आया है। दोनों पक्षों के दावे जांच का विषय हैं और स्वतंत्र भारद्वाज पर लगे आरोप कानूनी तौर पर अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।

SOURCE/FACT CHECK NOTE: यह लेख AajTak (aajtak.in) की रिपोर्ट्स, The Wire Hindi, The Federal (desh.thefederal.com), India TV Hindi, Times Now Navbharat और theprint.in हिंदी की रिपोर्ट्स पर आधारित है। हिंदू रक्षा दल के पार्लियामेंट थाने पहुंचने और FIR को गलत बताने की जानकारी सीमित है — केवल एक हेडलाइन और एक-पंक्ति के विवरण के तौर पर उपलब्ध है, विस्तृत बयान या मांगपत्र सार्वजनिक रूप से नहीं मिला। इस हिस्से को लेख में सावधानी से, बिना अतिरिक्त विवरण जोड़े प्रस्तुत किया गया है। नाबालिग शिकायतकर्ता की पहचान जानबूझकर उजागर नहीं की गई है। सभी आरोप अदालत में अप्रमाणित हैं।

FAQ:

Q1. स्वतंत्र भारद्वाज पर मारपीट का आरोप कब लगा था?

Answer: यह घटना 23 जून 2026 की है, जब जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर कथित तौर पर हमला हुआ था।

Q2. मामले में अब तक कितनी FIR दर्ज हो चुकी हैं?

Answer: मूल मारपीट मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में FIR संख्या 62/2026 दर्ज है, जिसमें बाद में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। इसके अलावा एक नाबालिग की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट और आपराधिक धमकी की धाराओं में अलग FIR दर्ज हुई है।

Q3. स्वतंत्र भारद्वाज को कब और कहां से हिरासत में लिया गया?

Answer: उन्हें 4 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया।

Q4. हिंदू रक्षा दल ने थाने पहुंचकर क्या कहा है?

Answer: हिंदू रक्षा दल के लोग स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे और उन्होंने दिल्ली पुलिस की दर्ज FIR को गलत बताया है। इससे अधिक विस्तृत बयान अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

Q5. CJP और अन्य संगठनों की क्या मांग रही है?

Answer: CJP और कांग्रेस की लीगल टीम स्वतंत्र भारद्वाज की तुरंत गिरफ्तारी और मामले में हत्या के प्रयास व SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ने की मांग करती रही हैं।

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