बालाघाट में बच्चों की मौत के विरोध में गुरुवार को बंद, बाजार-बसें ठप। आदिवासी संगठनों ने मुआवजा और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।
बालाघाट जिले में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के विरोध में गुरुवार को शहर बंद रहा। सुबह से ही बसें थम गईं, बाजार और सब्जी मंडी बंद रहे, और सड़कों पर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उतर आए। आदिवासी समाज का कहना है कि सरकार ने मृत बच्चों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन असली जिम्मेदारी अब तक तय नहीं हुई है।
बंद का आह्वान जिले के विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों ने किया था। इसका असर शहर में साफ देखने को मिला। व्यापारिक प्रतिष्ठान, बाजार और सब्जी मंडी सहित कई संस्थान बंद रहे। अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकान और अन्य आपातकालीन सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी।
धरना, आमसभा और कलेक्ट्रेट तक रैली
बंद के दौरान दोपहर में धरना और आमसभा हुई, जिसमें विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और पीड़ित परिवारों को मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठाए। इसके बाद एक संयुक्त रैली निकाली गई, जो कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर संपन्न हुई। यहां प्रशासन को मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा गया। संगठनों ने लोगों से बंद को शांतिपूर्ण तरीके से समर्थन देने की अपील की थी, और प्रशासन ने भी सुरक्षा को लेकर पहले से इंतजाम किए थे।
मौत के आंकड़ों पर मतभेद: संगठन बोले 29, प्रशासन ने मानीं 9
मामला बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक से जुड़ा है, जहां बीते कुछ महीनों में मलेरिया, मिजल्स, कुपोषण और त्वचा संबंधी बीमारियों से बच्चों की मौत की खबरें सामने आती रही हैं। सामाजिक संगठनों का दावा है कि इस दौरान कम से कम 29 बच्चों की जान गई, जबकि प्रशासन फिलहाल सिर्फ नौ मौतों की पुष्टि कर रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में यह आंकड़ा 24 से 30 के बीच बताया गया है, लेकिन मौतों का सटीक और आधिकारिक आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
बीमारी फैलने के पीछे के कारणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नक्सल प्रभावित रहे इन दूरस्थ इलाकों में समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाएं न पहुंच पाना एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके अलावा दूषित पानी, कुपोषण और संक्रामक बीमारियों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। परिजनों ने जिला अस्पताल में समय पर इलाज और सुविधाएं न मिलने के आरोप भी लगाए हैं।
सरकार ने बालाघाट CMHO को हटाया
बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलव को पद से हटा दिया है। उनकी जगह डिंडौरी के CMHO डॉ. मनोज पांडेय को बालाघाट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव को बच्चों की मौत के मामले में प्रशासनिक स्तर पर उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बैगा परिवारों से की थी मुलाकात, 2-2 लाख की मदद घोषित
बीते सप्ताह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद प्रभावित बैगा परिवारों से मिलने बालाघाट पहुंचे थे। उन्होंने कोरका और बोंडारी गांव का दौरा कर पीड़ित परिवारों से बातचीत की और मृत बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि पूर्व नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट के करीब 100 गांवों के विकास पर 225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
हालांकि आदिवासी संगठनों का कहना है कि सिर्फ मुआवजे की घोषणा से मामला खत्म नहीं होता। संगठनों की मुख्य मांग यह है कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से जवाबदेही तय हो, और आगे ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत की जाएं।
आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने की तैयारी
आदिवासी युवा 21 अगस्त से ही जयस्तंभ चौक के पास धरने पर बैठे हुए हैं। मामले को लेकर दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की एक बैठक भी हो चुकी है, जिसमें बैहर क्षेत्र में हुई बैगा बच्चों की मौतों पर चर्चा की गई। समिति का कहना है कि संरक्षित जनजाति के इतने बच्चों की मौत सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है। संगठनों के मुताबिक, 5 सितंबर को शहर के आंबेडकर चौक पर एक राष्ट्रीय महाधरना प्रदर्शन भी प्रस्तावित है, जिसमें देशभर के आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
फिलहाल बालाघाट जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच मौतों के आंकड़े, जिम्मेदारी और मुआवजे को लेकर मतभेद बना हुआ है, और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है।
FAQ:
Q1. बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला कहां से जुड़ा है?
Answer: यह मामला बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक के बैगा आदिवासी बहुल गांवों से जुड़ा है, जहां मलेरिया, मिजल्स, कुपोषण और त्वचा संबंधी बीमारियों से बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
Q2. बच्चों की मौत के आंकड़े को लेकर विवाद क्यों है?
Answer: सामाजिक संगठनों का दावा है कि करीब 29 बच्चों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन फिलहाल सिर्फ नौ मौतों की पुष्टि कर रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में यह आंकड़ा 24 से 30 के बीच बताया गया है।
Q3. सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए क्या घोषणा की है?
Answer: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित गांवों का दौरा कर मृत बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
Q4. बालाघाट CMHO को क्यों हटाया गया?
Answer: बढ़ते विरोध और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बालाघाट के CMHO डॉ. परेश उपलव को हटाकर डिंडौरी के CMHO डॉ. मनोज पांडेय को जिम्मेदारी सौंपी है।
Q5. बंद के दौरान किन सेवाओं को छूट दी गई थी?
Answer: बंद के दौरान अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकान और अन्य आवश्यक व आपातकालीन सेवाओं को छूट दी गई थी।
SOURCE/FACT CHECK NOTE: यह रिपोर्ट Navbharat Live (3 सितंबर 2026 की बंद रिपोर्ट, बंद का विवरण, आंकड़े व CMHO बदलाव), Amar Ujala और The Sootr (मुख्यमंत्री के बालाघाट दौरे व 2 लाख मुआवजे की घोषणा), Webdunia (मुआवजा व 225 करोड़ के विकास बजट की घोषणा) और Mooknayak व Balaghat Express (बंद के आह्वान, धरना और 5 सितंबर के प्रस्तावित राष्ट्रीय महाधरना) की रिपोर्टों पर आधारित है। मौतों की कुल संख्या को लेकर सामाजिक संगठनों और प्रशासन के दावों में अंतर है, जिसे लेख में स्पष्ट किया गया है। आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए मौत के सटीक कारणों पर अंतिम निष्कर्ष देने से बचा गया है।
