NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने जी ग्रुप संस्थापक सुभाष चंद्र की 6.25 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना पर रोक लगाई और संपत्ति बेचने से भी रोका। जानें पूरा मामला।
जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया (पर्सनल इनसॉल्वेंसी) से जुड़े मामले में मंगलवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की नई गठित पांच सदस्यीय बेंच ने 25 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनकी 6.25 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना को मंजूरी दी गई थी। यह योजना 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत लेनदार दावों के मुकाबले थी। बेंच ने सुभाष चंद्र को गारंटर के तौर पर अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने, ट्रांसफर करने, गिरवी रखने या किसी अन्य तरीके से डील करने से भी रोक दिया है।
NCLT अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की अगुवाई वाली इस पांच सदस्यीय बेंच ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बेंच ने स्पष्ट किया कि 25 अगस्त का आदेश फिलहाल लागू नहीं किया जा सकता और मामले को आगे बढ़ाने से पहले सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा।
पूरा मामला शुरू कैसे हुआ
यह पूरा विवाद 2024 में शुरू हुआ था। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने अप्रैल 2024 में सुभाष चंद्र को NCLT ले जाया था। मामला विवेक इंफ्राकॉन नाम की कंपनी को दिए गए करीब 170 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ा था, जिसकी गारंटी सुभाष चंद्र ने व्यक्तिगत तौर पर दी थी। यह लोन डिफॉल्ट हो गया, जिसके बाद इंडियाबुल्स ने गारंटर के खिलाफ ट्रिब्यूनल का रुख किया।
इसके बाद जिन-जिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास सुभाष चंद्र की पर्सनल गारंटी थी, उन सभी ने अपने-अपने दावे दाखिल करने शुरू कर दिए। इस तरह कुल दावों का आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते 22,006.57 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। गौरतलब है कि यह रकम सुभाष चंद्र के अपने नाम पर लिया गया कर्ज नहीं है, बल्कि एसेल ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों द्वारा लिए गए लोन की गारंटी के दावे हैं, जो एक-दूसरे पर ओवरलैप भी करते हैं।
लेनदारों ने नवंबर 2024 में रीपेमेंट योजना पर वोटिंग की थी, जिसमें 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर रखने वाले लेनदारों ने योजना के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि LIC हाउसिंग फाइनेंस और HDFC बैंक जैसे कुछ बड़े लेनदारों ने इस पर आपत्ति जताई और योजना की वैधता पर सवाल उठाए।
लेनदारों ने यह भी आरोप लगाया कि वीना इन्वेस्टमेंट्स, वर्ल्ड क्रेस्ट और डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रिब्यूशन जैसी कुछ संस्थाएं, जिन्होंने योजना के पक्ष में वोट किया, वे सुभाष चंद्र से जुड़ी “एसोसिएट” कंपनियां हैं और इनका वोट नहीं गिना जाना चाहिए था। तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा ने अपनी 144 पन्नों की राय में इंसॉल्वेंसी कानून की धारा 79(2)(जी) के आधार पर यह तय किया कि इन संस्थाओं को “एसोसिएट” नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर उन्होंने योजना को मंजूरी दी थी।
सुभाष चंद्र ने खुद 30 अगस्त को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर पूरे 22,006 करोड़ रुपये की गारंटी नहीं दी थी, बल्कि उनके अनुसार वास्तविक गारंटी वाली रकम करीब 3,900 करोड़ रुपये है। उन्होंने यह भी बताया कि 2016 में संसद में घोषित उनकी संपत्ति 39.08 करोड़ रुपये थी, जो अब घटकर करीब 31.79 करोड़ रुपये रह गई है, जिसमें एक गिरवी रखा हुआ मकान भी शामिल है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार लेनदारों ने पुराने नेट-वर्थ सर्टिफिकेट का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि पहले सुभाष चंद्र की संपत्ति 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई थी, इसलिए इतनी बड़ी गिरावट पर जांच होनी चाहिए। हालांकि ट्रिब्यूनल ने कहा कि इंसॉल्वेंसी कानून के तहत योजना मंजूर करने से पहले फोरेंसिक ऑडिट अनिवार्य नहीं है।
क्या था 25 अगस्त का विवादित आदेश
सुभाष चंद्र की रीपेमेंट योजना के तहत उन्होंने लेनदारों को 6.25 करोड़ रुपये और इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस के खर्च के लिए अतिरिक्त 25 लाख रुपये चुकाने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव 22,006.57 करोड़ रुपये के कुल स्वीकृत दावों के सामने था।
इस योजना का कई लेनदारों ने कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि रिकवरी की राशि बेहद कम है। इसके अलावा लेनदारों ने वोटिंग प्रक्रिया और कथित तौर पर सुभाष चंद्र से जुड़ी कुछ संस्थाओं की भागीदारी पर भी सवाल उठाए थे।
तीन सदस्यों की तीन अलग-अलग राय, इसलिए बनी बड़ी बेंच
यह मामला बड़ी बेंच तक इसलिए पहुंचा क्योंकि मूल दो सदस्यीय NCLT बेंच में शामिल जुडिशियल मेंबर अशोक कुमार भारद्वाज और टेक्निकल मेंबर रीना सिन्हा पुरी ने पाया कि रीपेमेंट योजना पर कोई बहुमत की राय नहीं बन पाई थी। तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा ने 25 अगस्त को योजना को मंजूरी देने के पक्ष में राय दी थी, लेकिन बाद में यह सामने आया कि तीनों सदस्यों की राय आपस में काफी अलग-अलग थी। इसी वजह से पांच सदस्यीय बेंच का गठन किया गया।
NCLAT में भी पहुंचा मामला
यह विवाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) तक भी पहुंचा है, जहां असहमति जताने वाले लेनदारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। तुषार मेहता ने अपीलेट ट्रिब्यूनल को NCLT में हुए ताजा घटनाक्रम से अवगत कराया, जिसमें पांच सदस्यीय बेंच का गठन और 25 अगस्त के आदेश पर अंतरिम रोक शामिल है। उन्होंने यह तय करने के लिए बुधवार तक का समय मांगा है कि लेनदार NCLAT में अपील आगे बढ़ाएंगे या नहीं।
शेयर बाजार पर असर
इस घटनाक्रम के बीच BSE डेटा के अनुसार जी एंटरटेनमेंट का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 9,018 करोड़ रुपये रहा। शेयर में हल्की बढ़त बता रही है कि दोपहर तक इस खबर का शेयर पर कोई तीखा नकारात्मक असर नहीं दिखा, हालांकि इंट्रा-डे हाई से पीछे हटने से यह भी साफ है कि बढ़त कुछ कम हुई।
अब आगे क्या होगा
फिलहाल 25 अगस्त की मंजूरी पर रोक बरकरार है और सुभाष चंद्र सीधे या परोक्ष रूप से अपनी किसी संपत्ति का निपटान नहीं कर सकते। अगला कदम अब बड़ी बेंच द्वारा रीपेमेंट योजना और लेनदारों की आपत्तियों पर विस्तृत सुनवाई होगा।
नोट: कुछ रिपोर्ट्स में सुभाष चंद्र को “जी ग्रुप” तो कुछ में “एसेल ग्रुप” का संस्थापक बताया गया है, चूंकि जी एंटरटेनमेंट एसेल ग्रुप का हिस्सा है, दोनों संदर्भ सही माने जा सकते हैं।
FAQ
Q1. NCLT ने सुभाष चंद्र के मामले में क्या फैसला दिया है?
Answer: NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने 25 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सुभाष चंद्र की 6.25 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना को मंजूरी दी गई थी।
Q2. सुभाष चंद्र पर लेनदारों का कुल कितना दावा है?
Answer: लेनदारों के स्वीकृत दावे 22,006.57 करोड़ रुपये के हैं, जबकि सुभाष चंद्र ने बदले में सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव रखा था।
Q3. सुभाष चंद्र की संपत्ति को लेकर बेंच ने क्या आदेश दिया?
Answer: बेंच ने सुभाष चंद्र को गारंटर के तौर पर मामले की सुनवाई पूरी होने तक अपनी किसी भी संपत्ति को सीधे या परोक्ष रूप से बेचने, ट्रांसफर करने, गिरवी रखने या किसी अन्य तरीके से डील करने से रोक दिया है।
Q4. पांच सदस्यीय बेंच का गठन क्यों करना पड़ा?
Answer: मूल दो सदस्यीय बेंच और तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा की राय में एकरूपता नहीं थी, तीनों सदस्यों की राय अलग-अलग होने के कारण कोई स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया, इसलिए पांच सदस्यीय बेंच बनाई गई।
Q5. क्या इस खबर का असर जी एंटरटेनमेंट के शेयर पर पड़ा?
Answer: BSE डेटा के अनुसार जी एंटरटेनमेंट का मार्केट कैप करीब 9,018 करोड़ रुपये रहा और शेयर में उस समय तक तीखी गिरावट नहीं दिखी, हालांकि इंट्रा-डे हाई से यह कुछ नीचे आया।
SOURCE/FACT CHECK NOTE: यह लेख निम्न स्रोतों की रिपोर्ट्स पर आधारित है:
- ताजा घटनाक्रम (NCLT की रोक): Business Standard, ANI, Deccan Chronicle, Free Press Journal, Newsdrum और TheNewsMill की 1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट्स।
- पृष्ठभूमि (केस की शुरुआत, वोटिंग, सुभाष चंद्र का बयान): BusinessToday (29 व 30 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स), Exchange4media, BW Businessworld और ValueResearch Online की रिपोर्ट्स।
“पहली बार पांच सदस्यीय बेंच बनने” का दावा केवल एक स्रोत (Free Press Journal) में “reportedly” के तौर पर मिला है, इसलिए इसे मुख्य लेख में शामिल नहीं किया गया है। सुभाष चंद्र की असली गारंटी राशि (3,900 करोड़ रुपये) और उनकी मौजूदा संपत्ति के आंकड़े उनके अपने 30 अगस्त के बयान पर आधारित हैं, जबकि नेट-वर्थ में गिरावट पर लेनदारों की आपत्ति अलग से स्पष्ट रूप से attribute की गई है।
