NEET Paper Leak Case कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। दिल्ली की रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की मुख्य आरोपी और बॉटनी (Botany) एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे को सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है।
जांच एजेंसी का दावा है कि मनीषा की कस्टडी से इस पूरे घोटाले के पीछे सक्रिय ‘विशाल सिंडिकेट’ और एनटीए (NTA) के अधिकारियों की संलिप्तता का पर्दाफाश हो सकता है।
कौन हैं मनीषा मंधारे और क्या हैं आरोप?
मनीषा गुरुनाथ मंधारे पेशे से एक लेक्चरर (Lecturer) और बॉटनी एक्सपर्ट हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल का हिस्सा थीं, जिसे प्रश्नपत्र तैयार करने या समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
सीबीआई द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप:
- प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच: एनटीए के पैनल में शामिल होने के कारण मनीषा के पास नीट परीक्षा के फाइनल प्रश्नपत्रों (बॉटनी और जूलॉजी सेक्शन) का एक्सेस था।
- सीक्रेट कोचिंग और लीक: आरोप है कि परीक्षा से ठीक पहले मनीषा ने पुणे में अपने घर पर ‘विशेष कोचिंग सत्र’ चलाए, जहां छात्रों को असली प्रश्नपत्र के सवाल नोट करवाए गए।
- मोटा वित्तीय लाभ: सीबीआई के मुताबिक, मनीषा ने सह-आरोपियों (पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे) के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के वित्तीय लाभ के बदले छात्रों को प्रश्नपत्र लीक किया।
जांच में खुलासा: परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र और मनीषा द्वारा छात्रों को नोटबुक में लिखवाए गए सवालों में हूबहू समानता पाई गई है।
रॉउज एवेन्यू कोर्ट में क्या हुआ? (Court Proceedings)
सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष अभियोजक (Public Prosecutor) ने कोर्ट को बताया कि यह केवल एक शहर का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार देश के कई राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश) से जुड़े हुए हैं।
- सीबीआई की दलील: “आरोपी को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी होगी। साथ ही उनके डिजिटल डिवाइस (लैपटॉप, मोबाइल) और बैंक स्टेटमेंट्स को खंगालकर पैसों के लेन-देन (Money Trail) का पता लगाना जरूरी है।”
- बचाव पक्ष का तर्क: मनीषा के वकीलों ने कस्टडी का विरोध करते हुए कहा कि उनकी उम्र 57 वर्ष है और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है, इसलिए उन्हें हिरासत में देने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, मामले की गंभीरता और 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को देखते हुए, स्पेशल जज ने सीबीआई की अर्जी को स्वीकार कर लिया और आरोपी को कस्टडी में भेजने का आदेश जारी किया।
देशव्यापी जांच और ‘नांदेड़’ कनेक्शन
सीबीआई की टीमें इस वक्त महाराष्ट्र के पुणे और नांदेड़ जैसे इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। जांच में सामने आया है कि नांदेड़ के एक परिवार को भारी रकम के बदले ‘गेस पेपर्स’ के नाम पर असली प्रश्नपत्र बेचे गए थे। इस मामले में अब तक कई मास्टरमाइंड और दलालों की गिरफ्तारी हो चुकी है, और मनीषा की कस्टडी के बाद एनटीए के कुछ बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की उम्मीद है।
निष्कर्ष (Conclusion)
NEET-UG परीक्षा में हुई इस धांधली ने देशभर के लाखों ईमानदार छात्रों और अभिभावकों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि सीबीआई कस्टडी के दौरान मनीषा मंधारे से पूछताछ में इस शिक्षा माफिया नेटवर्क के कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं।
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