MP चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे पार्टी का ‘संकल्प पत्र’ (घोषणा पत्र) और ‘मोदी की गारंटी’ की बहुत बड़ी भूमिका थी। लोक-लुभावन वादों और विकास के दावों के दम पर सरकार तो बन गई, लेकिन आज भी जमीन पर एक बड़ा सवाल तैर रहा है—क्या चुनाव के समय जनता से किए गए वादे पूरी तरह वफा हो पाए?
विपक्ष (कांग्रेस) और मध्य प्रदेश के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार बनने के बाद कई अहम वादों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों और जमीनी हकीकतों के आधार पर, आइए नजर डालते हैं उन 10 प्रमुख चुनावी वादों पर, जो आज भी अधूरे हैं या जिन पर पूरी तरह अमल होना बाकी है:
1. किसानों से फसल खरीद का वादा (MSP और बोनस)
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने किसानों को आकर्षित करने के लिए गेहूं को ₹2,700 प्रति क्विंटल और धान को ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का बड़ा वादा किया था। इसे ‘मोदी की गारंटी’ के तौर पर पेश किया गया था। लेकिन सरकार बनने के बाद किसानों को तुरंत यह तय दाम और बोनस नहीं मिल पाया। मंडियों में अपनी उपज कम दाम पर बेचने को मजबूर किसानों ने इसे लेकर प्रदेशभर में काफी विरोध प्रदर्शन भी किया।
2. लाड़ली बहनों को पक्के मकान (मुख्यमंत्री जन आवास योजना)
‘लाड़ली बहना योजना’ ने एमपी चुनाव में गेमचेंजर की भूमिका निभाई थी। संकल्प पत्र में वादा किया गया था कि इस योजना की सभी पात्र हितग्राही महिलाओं को मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत पक्के मकान दिए जाएंगे। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। लाखों पंजीकृत महिलाएं आज भी कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अपने पक्के मकान के सपने के सच होने का इंतजार कर रही हैं।
3. हर परिवार में एक रोजगार का अवसर
बेरोजगारी मध्य प्रदेश का एक बड़ा मुद्दा रहा है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि प्रदेश के प्रत्येक परिवार में कम से कम एक सदस्य को रोजगार या स्वरोजगार (Self-employment) का अवसर दिया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी नौकरियों की धीमी रफ्तार और भर्ती परीक्षाओं में देरी के कारण युवा आज भी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
4. ₹450 में गैस सिलेंडर का पूर्ण विस्तार
चुनाव से ठीक पहले और संकल्प पत्र में लाड़ली बहना और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹450 में एलपीजी (LPG) सिलेंडर देने का ढिंढोरा पीटा गया था। सरकार गठन के बाद यह लाभ कुछ विशेष महीनों या चुनिंदा लाभार्थियों तक ही सीमित होकर रह गया। तकनीकी अड़चनों, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के नियमों और बजटीय सीमाओं के कारण आज भी सभी पात्र महिलाओं को नियमित रूप से इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
5. संभाग स्तर पर IIT और AIIMS जैसे उच्च संस्थान
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के लिए भाजपा ने वादा किया था कि राज्य के प्रत्येक संभाग (Division) मुख्यालय में IIT की तर्ज पर मध्य प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MPIT) और AIIMS की तर्ज पर मध्य प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ Medical Sciences (MPIMS) खोले जाएंगे। बड़े स्तर पर होने वाली इस घोषणा का काम आज भी प्रारंभिक प्रशासनिक मंजूरियों और जमीनी स्तर पर अटका हुआ है।
6. लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को ₹2 लाख की कुल सहायता
बेटियों के सुनहरे भविष्य के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत उनके जीवन चक्र में (जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु तक) कुल ₹2 लाख की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई थी। इस कागजी घोषणा के बाद भी कई पात्र बालिकाओं और उनके परिवारों को किस्तों के समय पर भुगतान न होने और बजट आवंटन की कमी के चलते दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
7. अतिथि शिक्षकों और संविदा कर्मियों का नियमितीकरण
मध्य प्रदेश में 70 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षक (Guest Teachers) और संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। चुनाव के समय इनसे वादा किया गया था कि इन्हें नियमित किया जाएगा या विभागीय परीक्षाओं में विशेष छूट दी जाएगी। संविदा कर्मियों के लिए नौकरियों में 50% आरक्षण की बात तो कही गई, लेकिन जॉब सिक्योरिटी (Job Security) और स्थायी नीति के अभाव में इनका विरोध आज भी जारी है।
8. ग्वालियर और जबलपुर में मेट्रो ट्रेन का विस्तार
भोपाल और इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के साथ ही भाजपा ने संकल्प पत्र में ग्वालियर और जबलपुर में भी मेट्रो ट्रेन नेटवर्क शुरू करने का वादा प्रमुखता से शामिल किया था। लेकिन इन दोनों ऐतिहासिक शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट आज भी केवल कागजी योजनाओं, शुरुआती फिजिबिलिटी रिपोर्ट और प्रारंभिक सर्वेक्षण के स्तर से आगे नहीं बढ़ पाया है।
9. सरकारी स्कूलों में ‘पौष्टिक नाश्ता’ (Breakfast Scheme)
बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (Mid-day Meal) से पहले सुबह विशेष पौष्टिक नाश्ता देने का वादा किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर उचित योजना न होने और शिक्षा विभाग के पास बजट की कमी के कारण यह योजना प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों में आज तक शुरू ही नहीं हो सकी।
10. ₹20,000 करोड़ का हाईटेक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर
मध्य प्रदेश के बदहाल स्वास्थ्य ढांचे को दुरुस्त करने के लिए अस्पतालों और ICU बेड्स की संख्या दोगुनी करने तथा ₹20,000 करोड़ के निवेश का वादा किया गया था। लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और जिला स्तर के अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञ स्टाफ और जीवन रक्षक दवाओं व उपकरणों की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।
निष्कर्ष: लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी घोषणा पत्र जनता के साथ एक पवित्र अनुबंध होता है। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार को बने समय बीत चुका है, लेकिन इन 10 प्रमुख वादों पर धीमी प्रगति यह बताती है कि चुनावी घोषणाओं और उनके जमीनी क्रियान्वयन (Implementation) के बीच एक बड़ा फासला है। आने वाले समय में देखना होगा कि सरकार इन ‘अधूरे वादों’ को कब तक ‘मोदी की गारंटी’ की तरह पूरा कर पाती है।
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