Monsoon Crisis 2026:126 साल में दूसरा सबसे सूखा जून! जानें क्यों भारत में 42% कम बारिश हुई, अल-नीनो का क्या असर है और UP-MP में हीटवेव व राजस्थान में ओले गिरने की पूरी रिपोर्ट।
22 जून 2026, नई दिल्ली:
भारत में इस साल जून का महीना मौसम के लिहाज से बेहद अजीब और डरावना साबित हो रहा है। एक तरफ जहां आसमान से आग बरस रही है, वहीं दूसरी तरफ मॉनसून के गायब होने से देश इतिहास के दूसरे सबसे बड़े सूखे जून का सामना कर रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जून महीने में सामान्य से 42% कम बारिश दर्ज की गई है। भारत के 126 साल के मौसम इतिहास में यह दूसरा मौका है जब जून का महीना इतना सूखा बीता है। आइए जानते हैं कि इस मॉनसून संकट की वजह क्या है और देश के अलग-अलग राज्यों में इस वक्त क्या हालात हैं।
📊 आंकड़े गवाह हैं: मॉनसून संकट की गंभीर स्थिति
मॉनसून की शुरुआत हुए बमुश्किल 2 हफ्ते हुए हैं, लेकिन आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। नीचे दी गई तालिका से समझिए कि इस बार बादलों ने हमें कितना तरसाया है:
| पैमाना | आंकड़ा |
| सामान्य बारिश (4-18 जून) | 72.2 mm |
| इस साल हुई बारिश | 42.1 mm |
| बारिश की कुल कमी | 42% |
| ऐतिहासिक रिकॉर्ड (Historical Rank) | 126 सालों में दूसरा सबसे सूखा जून |
⛈️ राजस्थान में कुदरत का कहर: भीषण गर्मी के बीच गिरे बेर जैसे ओले
राजस्थान का मौसम इस वक्त सबसे हैरान करने वाला बना हुआ है। जहां एक तरफ लोग गर्मी से बेहाल थे, वहीं राज्य के कई जिलों में अचानक आंधी-तूफान के साथ भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) हो गई।
- प्रभावित जिले: जयपुर, अजमेर, डीडवाना-कुचामन, नागौर, जालौर, दौसा, बीकानेर, चूरू, सीकर और ब्यावर।
- फसलों को भारी नुकसान: चित्तौड़गढ़ और कोटा सहित कई इलाकों में गेहूं, सरसों और अफीम की खड़ी फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं।
- ओलों का आकार: कई गांवों में बेर के आकार के ओले गिरे, जिससे खेतों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। हालांकि, इस ओलावृष्टि और तेज हवाओं से तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर आई है, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
🔥 उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश: 47°C तापमान और भीषण हीटवेव का अलर्ट
एक तरफ राजस्थान में ओले गिर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार भीषण लू (Heatwave) की चपेट में हैं। IMD ने अगले 4-5 दिनों तक इन राज्यों में ‘रेड अलर्ट’ जैसी स्थिति घोषित की है।
हीटवेव का टाइमटेबल और प्रभावित क्षेत्र:
- उत्तर प्रदेश (East & West UP): 18 से 24 जून तक लखनऊ और कानपुर समेत कई शहरों में दिनभर गर्म हवाएं (लू) चलेंगी। पारा 47°C तक पहुंचने का अनुमान है।
- मध्य प्रदेश व विदर्भ: 18 से 20 जून के बीच मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में खतरनाक हीटवेव दर्ज की गई।
- बिहार: पूर्वी बिहार में 18 से 24 जून तक लू का सितम जारी रहेगा।
⚠️ जरूरी सावधानी: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी न होने पर घर से बाहर निकलने से बचें। लगातार पानी पीते रहें।
🌍 आखिर क्यों रूठ गए बादल? क्या है ‘अल-नीनो’ का चक्कर?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मॉनसून की इतनी कमजोर और निराशाजनक शुरुआत के पीछे कुछ बड़े वैश्विक (Global) कारण जिम्मेदार हैं:
- अल-नीनो (El Nino): प्रशांत महासागर में सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो गया है। जब भी ऐसा होता है, भारत में मॉनसून कमजोर हो जाता है।
- इंडियन ओशन डाईपोल (IOD): यह फिलहाल ‘न्यूट्रल’ स्थिति में है, यानी यह भारतीय मॉनसून को कोई अतिरिक्त सपोर्ट नहीं दे पा रहा है।
- मेडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO): बादलों और बारिश के चक्र को प्रभावित करने वाला यह सिस्टम भी भारत के पक्ष में नहीं है।
- क्रॉस-इक्वेटोरियल हवाएं: मध्य भारत में ये हवाएं इतनी कमजोर हैं कि नमी आगे बढ़ ही नहीं पा रही है।
क्षेत्र-वार बारिश की कमी (IMD के आंकड़े):
- मध्य भारत: 67% की भारी कमी
- पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत: 42% कमी
- दक्षिणी प्रायद्वीप: 22% कमी
- उत्तर-पश्चिम भारत: 6% कमी
🌾 खेती और पानी का संकट: हमारी थाली पर क्या असर होगा?
बारिश की इस 42% कमी का सीधा असर देश की कृषि और जल स्रोतों पर पड़ने लगा है:
- बुआई प्रभावित: धान, मक्का और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुआई का समय निकला जा रहा है, जिससे उत्पादन घटने का डर है।
- जलाशयों का गिरता स्तर: देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है। इससे सिंचाई के साथ-साथ पीने के पानी की किल्लत शुरू हो सकती है।
- शहरी संकट: मुंबई जैसे महानगरों में अभी से जल संकट (Water Crisis) की आहट सुनाई देने लगी है।
📜 इतिहास गवाह है: भारत के सबसे बड़े सूखे वर्ष
भारतीय मॉनसून का इतिहास हमेशा से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अगर पिछले रिकॉर्ड्स को देखें, तो जून की स्थिति वाकई डराने वाली है:
| वर्ष | बारिश की कमी | विशेषता |
| 1884 | 25%+ | इतिहास का सबसे सूखा जून |
| 1972 | 23.9% (कुल कमी) | देश का सबसे भयानक सूखा वर्ष |
| 2009 | 22% (कुल कमी) | भयंकर सूखा, फसलें बर्बाद |
| 2026 | 42% (केवल जून) | 126 साल में दूसरा सबसे सूखा जून |
नोट: 1871 से 2015 के बीच भारत ने 26 बार सूखे के वर्ष देखे हैं।
🌦️ राहत की खबर: क्या जून के आखिरी हफ्ते में सुधरेगी स्थिति?
इतनी चुनौतियों के बाद भी उम्मीद की एक किरण बाकी है। IMD का अनुमान है कि जून के आखिरी सप्ताह में मॉनसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा:
- सोमाली जेट होगा मजबूत: अरब सागर से नमी लाने वाली ‘सोमाली जेट’ हवाएं मजबूत हो रही हैं।
- इन राज्यों में होगी बारिश: महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में जल्द ही भारी बारिश देखने को मिल सकती है। छत्तीसगढ़ में मंगलवार तक मॉनसून दस्तक दे सकता है।
- पूर्वोत्तर में अलर्ट: उत्तर-पूर्वी राज्यों में बहुत भारी बारिश का अनुमान है, जिससे वहां बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।
भविष्यवाणी: हालांकि, IMD ने चेतावनी दी है कि साल 2026 में कुल मॉनसून सामान्य से कम (90% LPA) रहने की 60% संभावना है। यह लगातार तीसरा साल है जब जून में मॉनसून ने इतना लंबा ब्रेक लिया है।
💡 सरकार और किसानों के लिए जरूरी सलाह
इस संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सही प्रबंधन की जरूरत है:
सरकार को क्या करना चाहिए?
- जल संरक्षण और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को युद्ध स्तर पर बढ़ावा दें।
- किसानों को कम पानी में उगने वाले (सूखा प्रतिरोधी) बीज उपलब्ध कराएं।
- संकटग्रस्त इलाकों में सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम करें।
किसानों के लिए सलाह:
- मौसम के पूर्वानुमान (Weather Forecast) को देखकर ही फसलों की बुआई का फैसला लें।
- अचानक होने वाली ओलावृष्टि से फसलों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं।
🎯 निष्कर्ष
साल 2026 के मॉनसून की शुरुआत ने देश को चिंता में डाल दिया है। अल-नीनो के असर से चुनौती बड़ी है, लेकिन मौसम विभाग की मानें तो जून का आखिरी हफ्ता राहत ला सकता है। इतिहास गवाह है कि भारतीय मॉनसून देर से ही सही, पर खुद को संभाल लेता है। बशर्ते, हम पानी की हर बूंद को सहेजने और मौसम के इस बदलाव (Climate Change) से लड़ने के लिए तैयार रहें।
आपको क्या लगता है, क्या आने वाले दिनों में आपके इलाके में बारिश होगी? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस जरूरी जानकारी को अपने किसान भाइयों के साथ शेयर करें!
