Super El Nino Effect on India Monsoon 2026 Alert: मॉनसून में तरसेगा भारत! प्रशांत महासागर में शुरू हुआ ‘सुपर अल नीनो’, इन 197 जिलों में सूखे की बड़ी चेतावनी

Super El Nino effect 2026

Super El Nino Effect on India Monsoon 2026: प्रशांत महासागर में खतरनाक ‘सुपर अल नीनो’ का असर शुरू हो चुका है। आईएमडी (IMD) ने मॉनसून को डाउनग्रेड कर 90% कर दिया है। सरकार ने देश के 197 जिलों को संवेदनशील घोषित कर ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली: भारत में इस साल भीषण गर्मी और हीटवेव झेल रहे लोगों के लिए मॉनसून को लेकर एक बेहद डराने वाली खबर आ रही है। अमरीकी मौसम एजेंसी (NOAA) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर में ‘सुपर अल नीनो’ (Super El Niño) का असर तेजी से सक्रिय हो रहा है।

इस वैश्विक मौसमी बदलाव के कारण इस साल भारत में मॉनसून की बारिश ‘गायब’ होने या बेहद कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई है। सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश के 197 जिलों को ‘हाई-रिस्क’ (बेहद संवेदनशील) ज़ोन में डाल दिया है और आपातकालीन स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

IMD ने मॉनसून अनुमान घटाकर किया 90%, सूखे की आहट!

मौसम विभाग (IMD) ने अपने शुरुआती मॉनसून अनुमान को और डाउनग्रेड कर दिया है। अब यह साफ हो गया है कि इस साल देश में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की सिर्फ 90% बारिश होगी, जो ‘बिलो नॉर्मल’ (सामान्य से कम) की श्रेणी में आता है। पिछले 26 वर्षों में यह अब तक का सबसे कमजोर शुरुआती मॉनसून पूर्वानुमान है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2.0°C से भी ज्यादा बढ़ चुका है, जो सीधे तौर पर एक ‘सुपर अल नीनो’ की दस्तक है। इतिहास गवाह है कि जब-जब अल नीनो इतना मजबूत हुआ है, भारत को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ा है।

कृषि मंत्रालय अलर्ट: 197 जिलों के लिए बना ‘कंटिंगेंसी प्लान’

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपातकालीन बैठक के बाद मीडिया को बताया कि सरकार इस खतरे को लेकर 24 घंटे सतर्क है। उन्होंने कहा:

“अल नीनो की चिंता मेरे दिमाग में चौबीसों घंटे है। देश के 197 जिलों को इसके प्रभाव के प्रति सबसे संवेदनशील पाया गया है। हमने हर राज्य के लिए एक विशेष ‘कंटिंगेंसी प्लान’ (आपातकालीन योजना) तैयार कर ली है।”

इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने देश भर में “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया है। इसके तहत जिला स्तर पर कम पानी में उगने वाले बीजों का बफर स्टॉक तैयार किया जा रहा है ताकि अगर बारिश कम हो, तो किसानों को वैकल्पिक फसलों की तरफ शिफ्ट किया जा सके।

इन राज्यों के 197 जिलों पर सबसे बड़ा खतरा

मौसम के इस बदले मिजाज का सबसे घातक असर भारत के उन हिस्सों पर पड़ने जा रहा है, जहां खेती पूरी तरह से बारिश (Rain-fed agriculture) पर निर्भर है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले संभावित इलाके हैं:

  • मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र का मारठवाड़ा क्षेत्र।
  • पश्चिमी भारत: राजस्थान और गुजरात के ग्रामीण इलाके।
  • उत्तर और दक्षिण भारत: पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से और उत्तरी कर्नाटक का बेल्ट।

मिशनों पर संकट: यह अल नीनो ऐसे समय में आया है जब भारत दलहन (Pulses) और तिलहन (Oilseeds) के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय मिशन चला रहा है। इन दोनों फसलों का लगभग 90% हिस्सा वर्षा आधारित क्षेत्रों में उगाया जाता है, जिससे देश में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ने का डर सताने लगा है।

क्या होता है अल नीनो (El Niño) और यह बारिश को कैसे रोकता है?

आसान शब्दों में समझें तो सामान्य दिनों में प्रशांत महासागर में चलने वाली व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) गर्म पानी को एशिया की तरफ धकेलती हैं, जिससे हमारे यहां कम दबाव का क्षेत्र बनता है और अच्छी बारिश होती है।

लेकिन अल नीनो के दौरान यह हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। नतीजतन, महासागर का गर्म पानी वापस अमरीका के तटों की तरफ मुड़ जाता है। हवाओं का यह चक्र टूटने से भारत और दक्षिण एशिया के ऊपर मॉनसून को खींचने वाला सिस्टम कमजोर हो जाता है, और बादल भारत पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

जलाशयों में पानी की कमी ने बढ़ाई टेंशन

सिर्फ खेती ही नहीं, देश में पीने के पानी और बिजली संकट का खतरा भी मंडरा रहा है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों (Reservoirs) में पानी का स्तर घटकर उनकी कुल क्षमता का महज 34% से 38% के बीच रह गया है। अगर मॉनसून में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में जल संकट बेहद गहरा हो सकता है।

(यह एक लगातार बदलने वाली मौसमी परिस्थिति है। अल नीनो और मॉनसून की प्रगति से जुड़े हर छोटे-बड़े लाइव अपडेट्स के लिए हमारे पेज को बुकमार्क करें और जुड़े रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *