सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन में हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा- आंदोलन शांतिपूर्ण था, पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और संविधान के दायरे में था, इसलिए हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए।
पूरा मामला क्या है?
यह विवाद 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में हुए संसद मार्च से जुड़ा है। NEET-यूजी 2026 पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। इस दौरान दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) पर छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोप लगे। इसके बाद पीड़ित छात्रों और उनके परिजनों की ओर से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े आदेश और टिप्पणियां
1. नाबालिगों की तुरंत रिहाई अदालत ने साफ निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम उम्र के उन सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
2. आंदोलन शांतिपूर्ण था CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह के आंदोलन होते ही रहेंगे। यह छात्रों का पूरी तरह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था, जिसमें कुछ जायज मांगें रखी गई थीं और यह पूरी तरह संवैधानिक दायरे में था।
3. सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर लाठीचार्ज नहीं कोर्ट ने कहा कि केवल विरोध-प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस बल प्रयोग या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता। संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है और कानून-व्यवस्था के नाम पर इस अधिकार का मनमाना हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
4. अत्यधिक बल प्रयोग करने वालों पर होगी कार्रवाई अदालत ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी भी पक्ष ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया या प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
5. स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के संकेत पीठ ने संकेत दिए कि छात्रों, महिलाओं, वकीलों और पत्रकारों के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता के सभी आरोपों की गहन और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
आपराधिक रिकॉर्ड वालों को राहत नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत केवल निर्दोष छात्रों के लिए है। जिन आरोपियों का पहले से आपराधिक बैकग्राउंड है, उनके खिलाफ दर्ज केस वापस नहीं लिए जाएंगे। फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर या देश के किसी भी राज्य में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कोई नई कार्रवाई नहीं करेगी।
पुलिस पक्ष ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस घटना में करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें कई को टांके लगे। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए, क्योंकि ऐसा नहीं लगता कि छात्र इतनी हिंसा कर सकते हैं। उनके मुताबिक प्रदर्शन के दौरान भीड़ में कुछ असामाजिक तत्व और “बिन बुलाए मेहमान” भी शामिल हो गए थे, जिन्होंने माहौल बिगाड़ा।
याचिकाकर्ताओं के गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि कई नाबालिग बच्चों को 48 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा गया और करीब 40 घंटे बाद ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया — जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हिरासत में लिए गए बच्चों में से एक की उम्र महज 13 वर्ष थी।
याचिकाकर्ताओं की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि:
- दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए
- भविष्य में इस तरह के छात्र प्रदर्शनों के लिए पूरे देश में एक समान गाइडलाइंस बनाई जाएं
- हिरासत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित हो
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख भविष्य में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव वाले सभी मामलों के लिए एक अहम नजीर बन सकता है। कोर्ट का जोर साफ तौर पर निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने पर है। मामले की अगली सुनवाई में राज्यों को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसके बाद स्वतंत्र जांच पर आगे का रास्ता तय होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन मामले में क्या आदेश दिया?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने 18 वर्ष से कम उम्र के उन सभी छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
प्रश्न 2: यह पूरा मामला किस घटना से जुड़ा है?
उत्तर: यह मामला 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में हुए संसद मार्च से जुड़ा है, जब NEET पेपर लीक के विरोध में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के आरोप लगे थे।
प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कौन कर रहा है?
उत्तर: मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
प्रश्न 4: क्या आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों को भी राहत मिलेगी?
उत्तर: नहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल निर्दोष छात्रों के लिए है। जिनका पहले से आपराधिक बैकग्राउंड है, उनके खिलाफ केस वापस नहीं होंगे।
प्रश्न 5: पुलिस की तरफ से इस मामले में क्या दलील दी गई?
उत्तर: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि झड़प में करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे।
प्रश्न 6: याचिकाकर्ताओं ने हिरासत को लेकर क्या आरोप लगाए?
उत्तर: याचिकाकर्ताओं के अनुसार कई नाबालिगों को 48 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखा गया और करीब 40 घंटे बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिनमें एक बच्चे की उम्र सिर्फ 13 वर्ष थी।
प्रश्न 7: क्या पुलिस के खिलाफ भी कार्रवाई होगी?
उत्तर: कोर्ट ने कहा है कि यदि जांच में अत्यधिक बल प्रयोग या प्रोटोकॉल उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
