बंगाल की राजनीति में भूचाल! कोलकाता एयरपोर्ट पर भारी बवाल के बाद TMC के 3 बैंक खाते फ्रीज, ₹440 करोड़ रुपये ब्लॉक। चंपत राय और ममता सरकार के संकट की पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े दोहरे संकट से जूझ रही है। एक तरफ जहां सड़क से लेकर एयरपोर्ट तक राजनीतिक हिंसा का खूनी दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अंदरूनी विद्रोह ने तृणमूल को कंगाली की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। कोलकाता एयरपोर्ट पर हुए हिंसक बवाल के ठीक बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए TMC के तीन मुख्य बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें ₹440 करोड़ की भारी-भरकम राशि जमा है।
एयरपोर्ट बना अखाड़ा: अभिषेक बनर्जी के सामने ही भिड़े TMC-BJP कार्यकर्ता
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात करीब 9:45 बजे उस समय अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब अराइवल गेट के ठीक बाहर बीजेपी और टीएमसी के सैकड़ों कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। यह हिंसक झड़प टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दिल्ली से कोलकाता आगमन के ठीक पहले हुई।
- हमले की साजिश का आरोप: टीएमसी नेतृत्व का दावा है कि भाजपा समर्थकों ने अभिषेक बनर्जी पर अंडे और पत्थर फेंकने की सुनियोजित साजिश रची थी। इसकी भनक लगते ही टीएमसी कार्यकर्ता भी वहां डट गए।
- लात-घूंसे और हेलमेट चले: देखते ही देखते दोनों पक्षों में हिंसक मारपीट शुरू हो गई। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाए और सुरक्षा हेलमेट से लेकर जो हाथ में आया, उससे हमला किया।
- पैनिक और रेस्क्यू: एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील वीआईपी इलाके में अचानक हुई इस हिंसा से यात्रियों में भगदड़ मच गई। मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने तुरंत मोर्चा संभाला और अभिषेक बनर्जी को घेरा बनाकर सुरक्षित बाहर निकाला। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भी अभिषेक बनर्जी पर हुए एक हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं।
दिल्ली दौरे की इनसाइड स्टोरी: क्यों गए थे अभिषेक?
सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी का यह दिल्ली दौरा राजनीतिक रूप से बेहद आक्रामक था। वे चुनाव में हार के बाद बागी हुए टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों की सदस्यता रद्द कराने की कानूनी लड़ाई लड़ने दिल्ली पहुंचे थे।
| कानूनी पहलू | विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट |
| मुलाकात | लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आधिकारिक भेंट। |
| मुख्य मांग | टीएमसी से बगावत करने वाले 20 सांसदों को तुरंत अयोग्य घोषित किया जाए। |
| रणनीति | दलबदल विरोधी कानून के तहत 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी गईं। |
| टीएमसी का रुख | पार्टी छोड़ चुके या बागी रुख अपनाने वाले नेताओं को अब टीएमसी का हिस्सा नहीं माना जाएगा। |
अभिषेक बनर्जी ने साफ किया कि पार्टी के 4-5 शीर्ष बागी सांसद एक नई क्षेत्रीय पार्टी बनाने की फिराक में हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक: अपनों की ही चिट्ठी पर फ्रीज हुए ₹440 करोड़!
अभी एयरपोर्ट की हिंसा शांत भी नहीं हुई थी कि ममता बनर्जी को दूसरा और सबसे तगड़ा झटका वित्तीय मोर्चे पर लगा। पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर सेल ने एचडीएफसी (HDFC) बैंक को नोटिस भेजकर टीएमसी के तीन खातों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
अरूप बिस्वास का बगावती पत्र: जिसने हिला दी पार्टी की नींव
इस कार्रवाई के पीछे कोई बाहरी एजेंसी नहीं, बल्कि टीएमसी के पूर्व कोषाध्यक्ष और राज्य के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास की एक सीक्रेट चिट्ठी है। बिस्वास ने बैंक को लिखे पत्र में साफ शब्दों में दावा किया है:
“तृणमूल कांग्रेस के भीतर इस समय लीडरशिप की आंतरिक जंग चरम पर है। पार्टी का वास्तविक और वैध नेतृत्व अभी तक तय नहीं हो पाया है, इसलिए इन खातों से किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन पर तुरंत रोक लगाई जाए।”
पार्टी पर क्या होगा असर?
- संगठनिक गतिविधियां ठप: ₹440 करोड़ की राशि लॉक होने से पार्टी के दैनिक खर्चे, विज्ञापन और संगठनात्मक कार्यक्रम पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
- बागी विधायकों का दबाव: यह पूरी कानूनी कार्रवाई बागी विधायकों और सांसदों की लिखित शिकायत के बाद ही की गई है, जो यह साबित करता है कि बगावत की जड़ें बहुत गहरी हैं।
बंगाल में थम नहीं रहा राजनीतिक हिंसा का दौर
एक खोजी पत्रकार के रूप में यदि हम अतीत के पन्नों को पलटें, तो साफ होता है कि यह हिंसा कोई नई घटना नहीं है। बंगाल की धरती राजनीतिक प्रतिशोध से लगातार लाल हो रही है:
- 28 फरवरी 2021 (उत्तर 24 परगना): भाजपा कार्यकर्ताओं ने टीएमसी के कैडर्स पर घर में घुसकर जानलेवा हमले का आरोप लगाया था।
- 27 अप्रैल 2026 (समुद्रगढ़, पूर्वी बर्धमान): भाजपा की एक राजनीतिक रैली जब तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय के सामने से गुजरी, तो दोनों गुटों में खूनी संघर्ष हो गया। पथराव और नारेबाजी के बीच चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें टीएमसी के अमल हलदार, सानशा अली शेख और बीजेपी के कमल दास व सौविक पान शामिल थे।
रिपोर्टर का विश्लेषण: क्या बिखर रही है टीएमसी?
चुनावी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर उपजा असंतोष अब पूरी तरह सतह पर आ चुका है। 20 लोकसभा सांसदों का एक साथ बागी हो जाना और नई पार्टी बनाने का दावा करना यह साफ करता है कि ममता बनर्जी के किले में बड़ी सेंध लग चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, भाजपा लगातार हमलावर है और उसका आरोप है कि टीएमसी के गुंडे हताशा में उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।
कुल मिलाकर, ₹440 करोड़ की वित्तीय नाकेबंदी और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का यह टकराव पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बेहद खतरनाक और अनिश्चित मोड़ पर ले आया है। आने वाले दिन ममता बनर्जी की साख और टीएमसी के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाले हैं।
