अयोध्या में बड़ा एक्शन! राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की SIT जांच पूरी। आज सीएम योगी को सौंपी जाएगी सीक्रेट रिपोर्ट। चंपत राय और अनिल मिश्रा पर बड़ी कार्रवाई तय? पूरी खबर पढ़ें!
अयोध्या/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक और सियासी गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के आस्था के चढ़ावे पर लगी ‘सेंधमारी’ के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की मैराथन तफ्तीश पूरी हो चुकी है। तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय SIT टीम तड़के सुबह ही अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम की यह ‘सीक्रेट रिपोर्ट’ आज ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के टेबल पर सौंप दी जाएगी, जिसके बाद ट्रस्ट के बड़े चेहरों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।
करोड़ों रुपये के नकद और सोने के इस सनसनीखेज गबन मामले में अब तक कई करीबियों पर शिकंजा कसा जा चुका है। जांच की आंच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की दहलीज तक पहुंच चुकी है, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की सियासत में भूचाल ला दिया है।
अंदरखाने की खबर: SIT के चक्रव्यूह में फंसे बड़े पदाधिकारी
पिछले पांच दिनों से SIT ने राम मंदिर परिसर के वित्तीय और प्रशासनिक विंग को एक अभेद्य सुरक्षा घेरे में तब्दील कर रखा था। जांच टीम ने उस हर एक लूपहोल (खामी) को खंगाला है जिसके जरिए अंदरूनी स्टाफ ने भगवान के खजाने में सेंध लगाई।
1. अब तक कितने लोगों से पूछताछ हो चुकी है? (Total People Questioned)
SIT ने इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए एक बहुत लंबी लिस्ट तैयार की है।
- 200 लोगों की लिस्ट: जांच टीम ने पूछताछ के लिए लगभग 200 लोगों की एक विस्तृत सूची (List) तैयार की है।
- 125+ लोगों से पूछताछ पूरी: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 125 से अधिक लोगों से गहन पूछताछ की जा चुकी है। इनमें से कई लोगों को कड़ियों को जोड़ने के लिए दो से तीन बार भी तलब किया गया है।
- विभिन्न विभागों से पूछताछ: पूछताछ के दायरे में केवल ट्रस्ट के लोग ही नहीं हैं, बल्कि:
- 12 लोग सीधे ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ से जुड़े हैं।
- 6 कर्मचारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के हैं (जो नोटों की गिनती और बैंक डिपॉजिट संभालते थे)।
- 6 कर्मचारी टीसीएस (TCS) कंपनी के हैं, जो मंदिर के डिजिटल और तकनीकी सिस्टम को मैनेज करते हैं।
2. इस मामले में कितने लोग संदिग्ध (Under Scanner) हैं?
शुरुआती जांच और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने के बाद मुख्य रूप से 9 से 10 कर्मचारियों की भूमिका को बेहद संदेहास्पद माना गया है, जिनकी जीवनशैली और संपत्ति में अचानक बड़ा उछाल देखा गया था।
फिलहाल, 5 मुख्य नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं और सीधे तौर पर SIT के रडार (चक्रव्यूह) में हैं:
- लवकुश (Lavkush)
- अवनिष (Avnish)
- अनुकल्प (Anukalp)
- करुणेश / करुणे (Karune)
- रामशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू यादव’ (Tinnu Yadav): टिन्नू यादव को इस पूरे मामले का एक अहम सिंडिकेट लिंक माना जा रहा है क्योंकि वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी रहे हैं और कारसेवपुरम से लेकर मंदिर परिसर तक कई व्यवस्थाएं देखते थे। हालांकि, टिन्नू यादव ने मीडिया के सामने आकर खुद को निर्दोष बताया है।
3. जांच के दायरे में आने वाले अन्य प्रमुख विभाग और लोग:
- सीसीटीवी और सर्विलांस टीम (RMO): SIT को जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ (Tampering) और कुछ कैमरों को बंद किए जाने के पुख्ता सबूत मिले हैं। इसके बाद मंदिर के रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) और सर्विलांस रूम में तैनात सुरक्षाकर्मी भी सीधे संदिग्धों के दायरे में आ गए हैं।
- बैंक कर्मचारी: साल 2021 से लेकर अब तक के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद कुछ बैंक कर्मियों की संदिग्ध गतिविधियां भी सामने आई हैं, जिससे उनके भी इस खेल में शामिल होने की आशंका गहरा गई है।
- ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी: प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी में चूक (Procedural Lapses) के चलते ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा (जो दान प्रबंधन के सर्वेसर्वा हैं) और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी जांच के दायरे में रखते हुए घंटों ग्रिल किया गया है।
SIT की टीम इस समय पूरी चेन (Donation Flow)—यानी दानपेटी से पैसा निकलने से लेकर, उसके गिने जाने और बैंक में जमा होने तक—की एक-एक कड़ी की स्क्रूटनी कर रही है, और आज लखनऊ में सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में इन संदिग्धों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
1. सीएम के प्रोटोकॉल से चंपत राय आउट?
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया अयोध्या दौरे के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अगवानी और आधिकारिक बैठकों से दूर रहने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत उनसे अपनी जगह एक प्रतिनिधि (प्रॉक्सी) नामित करने को कहा गया, ताकि सक्रिय जांच के बीच कोई असहज स्थिति पैदा न हो। यह इस बात का साफ संकेत है कि शासन स्तर पर इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
2. डॉ. अनिल मिश्रा से 4 घंटे की मैराथन पूछताछ
मेडिकल ग्राउंड पर चेन्नई गए ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के अयोध्या लौटते ही SIT ने बिना वक्त गंवाए उन्हें तलब कर लिया। बंद कमरे में करीब 4 घंटे तक चली इस मैराथन पूछताछ में जांच टीम ने सवालों की बौछार कर दी। सूत्रों के मुताबिक, जांच दल का मुख्य फोकस इन बिंदुओं पर था:
- चढ़ावे की गिनती के दौरान तय सुरक्षा मानकों और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की निगरानी में लापरवाही क्यों बरती गई?
- मुख्य संदिग्धों (अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा आदि) की नोटों की गिनती करने वाले कोर-स्टाफ में नियुक्ति किसकी सिफारिश पर की गई थी?
इसके साथ ही, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की कड़ियों को जोड़ने के लिए घंटों तक ग्रिल किया गया।
3. करीबियों से बरामदगी और पूर्व ड्राइवर की भूमिका
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच की आंच चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू यादव’ तक पहुंच गई। संदिग्ध भूमिका के चलते टिन्नू से भी लंबी पूछताछ की गई है। सूत्रों का दावा है कि संदिग्धों के ठिकानों से मोटी नकद राशि और कुछ अहम दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिसने इस पूरे रैकेट की पोल खोल कर रख दी है।
सियासी गलियारों में भूचाल: आमने-सामने आए दिग्गज नेता
राम मंदिर के चढ़ावे में हुए इस कथित भ्रष्टाचार ने एक बड़े राजनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है। पक्ष और विपक्ष के नेता एक-दूसरे पर जमकर शब्दबाण चला रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (भाजपा)
“इस पवित्र धाम की शुचिता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए SIT का गठन किया है और दूध का दूध, पानी का पानी होकर रहेगा। लेकिन विपक्ष का दोहरा चरित्र भी जनता देख रही है—जिन्होंने कभी मासूम कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, वे आज रामभक्तों की गरिमा पर हमें उपदेश दे रहे हैं। मैं सभी भक्तों से अपील करता हूं कि वे धैर्य रखें, जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी)
“अयोध्या इन महापापियों के लिए ‘कुरुक्षेत्र’ साबित होगी। जिस प्रदेश में युवाओं के भविष्य के लिए रोजगार और उच्च शिक्षण संस्थान (IITs) बनाने चाहिए थे, वहां सरकार अपने ही बनाए सिस्टम में भ्रष्टाचार की जांच के लिए SIT बैठा रही है। आज हमारे पूज्य संतों, पुजारियों और सेवादारों को अधिकारियों के सामने बयान देने पड़ रहे हैं। लेकिन इस संस्थागत विफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर मंदिर के सेवादारों और कर्मचारियों को सम्मानजनक और लाखों का वेतन दिया जाता, तो शायद किसी का मन इस तरह के पाप की तरफ नहीं भटकता।”
संजय सिंह (आम आदमी पार्टी – राज्यसभा सांसद)
संजय सिंह ने सीधे चंपत राय को घेरते हुए जमीन खरीद से जुड़े नए दस्तावेज सोशल मीडिया पर साझा किए। उन्होंने आरोप लगाया:
- “प्रभु श्रीराम के मंदिर में एक और महालूट चल रही है। जिस जमीन की वास्तविक कीमत करीब 9 करोड़ रुपये थी, उसे चंपत राय गैंग ने आलोक बंसल से 55.47 करोड़ रुपये में खरीदा। प्रभु के चंदे की इस तरह खुलेआम चोरी करने वालों की अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? यह आस्था के साथ बहुत बड़ा धोखा है।”
अजय राय (यूपी कांग्रेस अध्यक्ष)
“अयोध्या में जो कुछ भी हो रहा है, वह देश की जनता की आस्था के साथ एक सुनियोजित और संगठित लूट है, जिसे सत्ता के करीबी लोग अंजाम दे रहे हैं। यह एसआईटी जांच महज एक दिखावा है क्योंकि इसके तार सीधे बड़े चेहरों से जुड़े हैं। कांग्रेस मांग करती है कि इस पूरे मामले की समयबद्ध न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए।”
नृपेंद्र मिश्रा (राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष)
इस पूरे विवाद के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने माना कि चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं और तय गाइडलाइंस का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा था। उन्होंने मांग उठाई कि इस तरह की वित्तीय गड़बड़ियों को पूरी तरह रोकने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर राम मंदिर में भी एक अनुभवी और वरिष्ठ IAS रैंक के CEO की नियुक्ति की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा? लखनऊ में बड़े फैसले की तैयारी!
आज जैसे ही SIT की यह सीक्रेट रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मेज पर पहुंचेगी, लखनऊ के पांच कालिदास मार्ग (CM आवास) से बड़े फैसलों का ऐलान हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, शासन स्तर पर राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल की स्क्रिप्ट तैयार हो चुकी है। यदि रिपोर्ट में लापरवाही या मिलीभगत के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो आने वाले 24 से 48 घंटों में कुछ बेहद हाई-प्रोफाइल लोगों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
