Ram Mandir Scam SIT Report: योगी को सौंपी जाएगी अंतिम रिपोर्ट, 40% कमीशन और दान चोरी में ये बड़े नाम शामिल

Ram Mandir Scam SIT Report

Ram Mandir Scam SIT Report: राम मंदिर जमीन खरीद और दान चोरी घोटाले की SIT रिपोर्ट तैयार। अनिल मिश्रा, चंपत राय समेत रडार पर आए बड़े नामों और मुख्य आरोपियों की पूरी लिस्ट देखें।

अयोध्या | 22 जून 2026: श्री राम जन्मभूमि से जुड़े कथित घोटालों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ताजा अपडेट के मुताबिक, SIT ने अपनी 140 पन्नों की विस्तृत और गहन जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार कर ली है। रविवार (20 जून) को SIT ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी। हालांकि, रविवार शाम जब SIT के आला अधिकारी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे, तो सीएम की पहले से तय व्यस्तताओं के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। सूत्रों के मुताबिक, आज सोमवार (22 जून) को SIT अपनी अंतिम प्रारंभिक रिपोर्ट सीएम योगी को सौंप सकती है, जिसके बाद अयोध्या में एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी एक्शन की उम्मीद है।

🔍 60+ घंटे की जांच और 150+ संदिग्धों से पूछताछ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद गठित की गई SIT ने पिछले 6 दिनों (15 से 21 जून) तक अयोध्या में डेरा डाला हुआ था। इस दौरान टीम ने 60 घंटे से भी अधिक समय तक सघन जांच की।

जांच का दायरा केवल बयानों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें मंदिर के आधिकारिक अभिलेखों (Records), दानपात्रों की मशीनों और वित्तीय गतिविधियों की तकनीकी रूप से गहन जांच की गई। इस पूरे मामले में अब तक 150 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोगों से पहले भी विवरण लिया गया था।

सीएम योगी का बड़ा बयान (19 जून):

“अयोध्या को बदनाम करने और श्री राम जन्मभूमि के बारे में सवाल उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं… SIT का गठन किया गया है और यह दूध का दूध एवं पानी का पानी अलग कर देगी।”

🚨 राम मंदिर विवाद: जानें किन-किन लोगों ने क्या-क्या घोटाला किया?

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं — पहला साल 2021 का जमीन खरीद घोटाला और दूसरा हालिया 2026 का दान चोरी + 40% कमीशन घोटाला। यहाँ दोनों मामलों के आरोपियों और उनके कारनामों का पूरा विवरण दिया गया है:

📌 1. जमीन खरीद घोटाला (2021)

इस मामले में आरोप है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने कुल 71 एकड़ जमीन खरीदी, जिसके लिए बाजार भाव से 500% से 800% (5 से 8 गुना) तक ज्यादा कीमत चुकाई गई। इस घोटाले का कुल धन करीब 16.5 करोड़ रुपये (2 करोड़ से 18 करोड़ रुपये के बीच) आंका गया है।

  • दीप नारायण उपाध्याय (तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे): इन्होंने साल 2021 में महज 20 लाख रुपये की जमीन खरीदी और उसके ठीक 10 मिनट बाद उसे राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 2.50 करोड़ रुपये में बेच दिया।
  • ऋषिकेश उपाध्याय (तत्कालीन मेयर): इन पर अपने भतीजे के साथ मिलकर नजूल (सरकारी) जमीन को अवैध रूप से बेचने का आरोप है।
  • चंपत राय (ट्रस्ट महासचिव): आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि चंपत राय की मिलीभगत से 3 करोड़ रुपये की नजूल भूमि को 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
  • डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्टी): 2 करोड़ की जमीन खरीद और फिर उसे 18 करोड़ में बेचने के एग्रीमेंट, दोनों में ये मुख्य गवाह थे।
  • सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी: सुल्तान अंसारी ने 2010-11 में जिस जमीन को बेचने का 10 साल का समझौता किया था, उसे बाद में रवि मोहन तिवारी के साथ मिलकर सीधे 18 करोड़ रुपये में बेच दिया।
  • कुसुम पाठक व बाबा हरिदास: कुसुम पाठक के पास जमीन का मालिकाना हक था, जिन्होंने 2010-11 में समझौता किया था, जबकि बाबा हरिदास इस 208 हेक्टेयर जमीन के बैनामे और एग्रीमेंट में शामिल रहे।

💰 2. दान चोरी और 40% कमीशन घोटाला (2026)

यह हालिया मामला मंदिर में आने वाले चढ़ावे की चोरी और निर्माण सामग्री की सप्लाई में भारी कमीशनखोरी से जुड़ा है। इस मामले में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद हो चुकी है, जिसमें लाखों की नकदी सीधे लवकुश और अनुकल्प मिश्रा से जब्त की गई है।

  • डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्ट सदस्य): पूर्व इंजीनियर दीनानथ वर्मा ने आरोप लगाया कि डॉ. अनिल मिश्रा ने निर्माण सामग्री (Construction Material) की सप्लाई में 40% कमीशन लिया। जब इंजीनियर ने इसकी शिकायत की, तो उन्हें पद से हटा दिया गया। (दीनानथ वर्मा इस आरोप को साबित करने के लिए SIT के सामने नार्को टेस्ट देने को भी तैयार हैं)।
  • लवकुश मिश्रा (दानपात्र गिनने वाला कर्मचारी): महज 18-20 हजार रुपये प्रति माह की सैलरी पाने वाले इस कर्मचारी ने अचानक 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीद ली, जिसके बाद इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
  • चंदन, सोमेश और मनीष: दानपात्रों के चढ़ावे की गिनती करने वाले ये कर्मचारी भी इस चोरी में सीधे तौर पर शामिल पाए गए हैं। इनमें सोमेश, ट्रस्ट सदस्य गोपाल राव का भतीजा है।
  • रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू (ट्रस्टी का पूर्व ड्राइवर): इसके पास चढ़ावे के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी थी। बहुत ही कम समय में टिन्नू ने करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति खड़ी कर ली।
  • गोपाल राव (ट्रस्ट सदस्य): वर्तमान में दान चोरी के मामले को लेकर SIT के मुख्य रडार पर हैं।
  • फूलकांत मिश्रा (आभूषण रखरखाव जिम्मेदार): राम मंदिर के आभूषणों और कीमती सामानों की देखभाल का जिम्मा संभाल रहे फूलकांत मिश्रा की संपत्ति में भी अप्रत्याशित उछाल आया है; उनके पास 4 गाड़ियां और एक आलीशान बंगला पाया गया है।
  • महिपाल सिंह (पूर्व लेखाकार): इन्होंने सबसे पहले चढ़ावे के पैसे में हो रही इस भारी अनियमितता की जांच की मांग उठाई थी।

🏛️ SIT के रडार पर मुख्य नाम

क्रमनामपद/भूमिका
1चंपत रायट्रस्ट महासचिव
2डॉ. अनिल मिश्राट्रस्ट सदस्य
3गोपाल रावट्रस्ट सदस्य
4रामशंकर यादव (टिन्नू)ट्रस्टी का पूर्व ड्राइवर
5लवकुश मिश्रादानपात्र गिनने वाला कर्मचारी

⚡ बड़ी कार्रवाई के संकेत: अयोध्या छोड़ने पर रोक!

SIT ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मुख्य संदिग्धों को अयोध्या न छोड़ने का सख्त निर्देश दिया है। चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के शहर से बाहर जाने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मंदिर प्रबंधन में लगे कई सेवादारों की सेवा तत्काल समाप्त की जा सकती है। सूत्रों की मानें तो कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ट्रस्ट के बड़े और रसूखदार चेहरों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। 22 जून (सोमवार) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अंतिम रिपोर्ट पेश होते ही इस पूरे मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *