Phoolan Devi से लेकर Seema Parihar तक, जानें भारत की 10 सबसे खतरनाक और चर्चित महिला डाकुओं (Famous Female Dacoits of India) की असली कहानी, उनका खौफनाक क्राइम रिकॉर्ड और बीहड़ का इतिहास।
Famous Female Dacoits of India: जब भी ‘डाकू’ या ‘बागी’ शब्द हमारे सामने आता है, तो दिमाग में मूंछों वाले, कंधे पर बंदूक टांगे पुरुषों की छवि उभरती है। लेकिन भारत के अपराध इतिहास, खासकर चंबल के बीहड़ों में ऐसी कई महिला डाकू (Bandit Queens) भी हुईं, जिन्होंने पुरुषों के दबदबे वाले इस खूनी रास्ते पर अपनी हुकूमत चलाई।
इनमें से कई महिलाओं ने शौक से बंदूक नहीं उठाई थी, बल्कि सामाजिक प्रताड़ना, जातिवाद, अपहरण या बदले की आग ने उन्हें ‘बागी’ बना दिया। आइए जानते हैं भारत की 10 सबसे खूंखार और मशहूर महिला डाकुओं के बारे में, जिनके नाम से ही पुलिस प्रशासन के पसीने छूट जाते थे:
1. फूलन देवी (Phoolan Devi) – ‘द बैंडिट क्वीन’
भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे मशहूर महिला डाकू फूलन देवी थीं। उनके जीवन पर इंटरनेशनल फिल्में और किताबें भी लिखी जा चुकी हैं। नीची जाति में पैदा होने और समाज व ऊंची जाति के लोगों द्वारा भयानक प्रताड़ना झेलने के बाद उन्होंने बंदूक उठाई थी।
- आतंक का इलाका: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश (चंबल घाटी)।
- क्राइम रिकॉर्ड: फूलन देवी पर 22 लोगों की हत्या (1981 का बेहमई कांड) का मुख्य आरोप था, जहां उन्होंने अपने साथ हुए बलात्कार का बदला लेने के लिए एक ही लाइन में खड़े करके ठाकुरों को गोली मार दी थी। इसके अलावा उन पर 40 से अधिक डकैती और अपहरण के मामले दर्ज थे।
- अंतिम अंजाम: 1983 में आत्मसमर्पण किया। जेल से छूटने के बाद वे मिर्जापुर से दो बार लोकसभा सांसद बनीं। साल 2001 में दिल्ली में उनके घर के बाहर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
2. पुतली बाई (Putli Bai) – चंबल की पहली महिला डाकू
फूलन देवी से करीब तीन दशक पहले, 1950 के दशक में पुतली बाई का नाम चंबल में गूंजता था। इतिहासकार उन्हें चंबल के रिकॉर्ड में दर्ज पहली महिला डाकू मानते हैं। वह शुरुआत में एक मशहूर डांसर (नर्तकी) थीं।
- आतंक का इलाका: मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीहड़।
- क्राइम रिकॉर्ड: डाकू सुल्ताना ने उनका अपहरण किया था, लेकिन बाद में पुतली खुद बंदूक चलाना सीखकर गिरोह की लीडर बन गईं। उन पर 10 से अधिक हत्याएं और 20 से अधिक बड़ी डकैती के मामले दर्ज थे। वह पुलिस मुखबिरों की नाक और कान काटने के लिए कुख्यात थीं।
- अंतिम अंजाम: साल 1956 में पुलिस के साथ एक बेहद लंबे और ऐतिहासिक एनकाउंटर में पुतली बाई मारी गईं।
3. सीमा परिहार (Seema Parihar) – जिसने ‘बिग बॉस’ तक का सफर तय किया
सीमा परिहार की कहानी भी काफी सनसनीखेज है। जब वह महज 13 साल की थीं, तब डाकू लाला राम और निर्भय गुर्जर ने उनका अपहरण कर लिया था। बाद में वह खुद चंबल की एक खूंखार डाकू बन गईं।
- आतंक का इलाका: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिले।
- क्राइम रिकॉर्ड: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सीमा परिहार पर 70 से अधिक हत्याएं, 200 से अधिक अपहरण और 30 से ज्यादा डकैती के मामले दर्ज थे। चंबल में करीब 18 साल बिताने के बाद उन्होंने साल 2000 में आत्मसमर्पण किया।
- अंतिम अंजाम: आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने खुद के जीवन पर आधारित फिल्म ‘वूंइडेड’ (Wounded) में काम किया और वे टीवी रियलिटी शो ‘बिग बॉस सीजन 4’ में भी नजर आईं।
4. कुसमा नैन (Kusma Nain) – फूलन देवी की जानी दुश्मन
कुसमा नैन को चंबल की सबसे क्रूर महिला डाकुओं में गिना जाता है। वह फूलन देवी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी (Rival) थीं। जब फूलन देवी ने बेहमई में ठाकुरों को मारा, तो कुसमा नैन ने लाला राम गिरोह के साथ मिलकर फूलन के वफादारों को चुन-चुन कर निशाना बनाया था।
- आतंक का इलाका: जालौन, हमीरपुर और इटावा के बीहड़।
- क्राइम रिकॉर्ड: कुसमा नैन पर 30 से अधिक हत्याओं और 50 से ज्यादा डकैती व अपहरण के मुकदमे दर्ज थे। अस्ता गांव में हुए नरसंहार में भी उनका नाम आया था, जिसे बेहमई कांड का बदला माना जाता था।
- अंतिम अंजाम: काफी सालों तक आतंक मचाने के बाद उन्होंने पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण सरेंडर कर दिया था।
5. सरला दीक्षित (Sarla Dixit) – चंबल की ‘ब्यूटी क्वीन’
सरला दीक्षित को चंबल के इतिहास में सबसे खूबसूरत लेकिन बेहद शातिर दिमाग महिला डाकू माना जाता है। वह कुख्यात डाकू निर्भय सिंह गुर्जर की प्रेमिका और गिरोह की मुख्य सदस्य थी।
- आतंक का इलाका: इटावा और औरैया के आसपास के जंगल।
- क्राइम रिकॉर्ड: सरला पर हत्या, फिरौती के लिए अपहरण और डकैती के 20 से अधिक गंभीर मामले दर्ज थे। वह गिरोह के पैसों का हिसाब-किताब रखने और हथियारों की सप्लाई चेन संभालने का काम करती थी।
- अंतिम अंजाम: निर्भय गुर्जर से विवाद होने के बाद वह गिरोह से अलग हो गई और बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
6. नीलम गुप्ता (Neelam Gupta) – निर्भय गुर्जर की दूसरी कमान
सरला दीक्षित के जाने के बाद निर्भय सिंह गुर्जर के गिरोह में नीलम गुप्ता की एंट्री हुई। नीलम पहले से शादीशुदा थी लेकिन चंबल के इस सबसे हाइटेक डाकू के प्यार में पड़कर वह बीहड़ों में कूद गई।
- आतंक का इलाका: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बॉर्डर वाले इलाके।
- क्राइम रिकॉर्ड: नीलम पर 15 से अधिक डकैती, जबरन वसूली और हत्या के प्रयास के मामले दर्ज थे। वह गिरोह में पुरुषों की तरह कपड़े पहनती और एके-47 लेकर चलती थी।
- अंतिम अंजाम: 2005 में जब पुलिस ने निर्भय गुर्जर का एनकाउंटर किया, तो उसके कुछ समय बाद नीलम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
7. रेणु यादव (Renu Yadav) – कॉलेज स्टूडेंट से डाकू बनने की कहानी
रेणु यादव की कहानी आधुनिक दौर (2000 के दशक) की है। वह एक कॉलेज की छात्रा थी, जिसका अपहरण डाकू चंदन यादव ने कर लिया था। बीहड़ के माहौल ने उसे जल्द ही एक लेडी शार्पशूटर बना दिया।
- आतंक का इलाका: औरैया और इटावा के बीहड़।
- क्राइम रिकॉर्ड: रेणु यादव पर 10 से अधिक अपहरण और डकैती के मामले दर्ज थे। वह राइफल चलाने में इतनी माहिर हो गई थी कि पुलिस एनकाउंटर के दौरान गैंग को कवर फायर वही देती थी।
- अंतिम अंजाम: साल 2005 में पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के बाद रेणु यादव को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की थी।
8. मुन्नी बाई (Munni Bai) – राजस्थान-एमपी बॉर्डर का खौफ
मुन्नी बाई चंबल घाटी के उस हिस्से में सक्रिय थी जो राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से जुड़ता है। वह डाकू बाबू गुर्जर की सहयोगी थी।
- आतंक का इलाका: राजस्थान और मध्य प्रदेश का बॉर्डर।
- क्राइम रिकॉर्ड: मुन्नी बाई पर 12 से अधिक हत्या और हत्या के प्रयास और 20 से अधिक लूट व डकैती के मामले दर्ज थे। वह गांव वालों को धमकाने और पुलिस की जासूसी करने वालों को भयानक सजा देने के लिए जानी जाती थी।
- अंतिम अंजाम: पुलिस मुठभेड़ के बढ़ते दबाव के बाद मुन्नी बाई को गिरफ्तार कर लिया गया था।
9. कलावती (Kalawati) – बुंदेलखंड की लेडी डॉन
कलावती का खौफ चंबल से सटे बुंदेलखंड के बीहड़ों में था। उन्होंने पारिवारिक दुश्मनी और पुलिसिया प्रताड़ना के तंग आकर हथियार उठाए थे।
- आतंक का इलाका: बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के जंगल।
- क्राइम रिकॉर्ड: कलावती के नाम पर 8 हत्याएं और 15 से अधिक डकैती व रंगदारी के मामले दर्ज थे। वह अक्सर अमीर जमींदारों को निशाना बनाती थी।
- अंतिम अंजाम: एक लंबे कॉम्बिंग ऑपरेशन के बाद पुलिस ने उसे भारी हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था।
10. रेशमा (Reshma) – फिरौती किंग गिरोह की सदस्य
रेशमा 1990 के दशक के उत्तरार्ध में सक्रिय रही एक ऐसी महिला डाकू थी जिसने गैंग के भीतर अपना एक अलग गुट बना लिया था। वह अपहरण के बाद फिरौती वसूलने की कला में बेहद माहिर थी।
- आतंक का इलाका: शिवपुरी और श्योपुर के घने जंगल।
- क्राइम रिकॉर्ड: रेशमा पर 5 हत्याएं और 18 से अधिक अपहरण के मामले दर्ज थे। वह व्यापारियों के बच्चों का अपहरण करने के बाद खुद फोन पर फिरौती की रकम तय करती थी।
- अंतिम अंजाम: मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था।
निष्कर्ष: कैसे खत्म हुआ महिला डाकुओं का दौर?
भारत में महिला डाकुओं का उदय सामाजिक असमानता, महिलाओं के खिलाफ अपराध और न्याय न मिलने की वजह से ज्यादा हुआ। चंबल और बुंदेलखंड के जंगलों में जब तक पुरुषों के गिरोह सक्रिय रहे, तब तक इन महिलाओं का सिक्का भी चलता रहा। लेकिन 2000 के दशक के बाद जब एसटीएफ (STF) ने आधुनिक तकनीकों, ड्रोन और सटीक मुखबिरी के जरिए बड़े-बड़े डकैतों का सफाया (Encounter) कर दिया, तो इन महिला डाकुओं के गिरोह भी पूरी तरह बिखर गए। आज इनमें से कई महिलाएं अपनी सजा पूरी कर समाज की मुख्य धारा में सामान्य जीवन जी रही हैं।
