यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर नवंबर में चुनाव होना है, बीजेपी-एनडीए को 7 और सपा को 2 सीटें मिलने की उम्मीद, बसपा के प्रतिनिधित्व पर संकट मंडरा रहा है.
उत्तर प्रदेश कोटे की राज्यसभा की 10 सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, और अगले दो महीनों में इन पर चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या-बल के हिसाब से बीजेपी आसानी से 8 सीटें जीत सकती है और समाजवादी पार्टी के खाते में 2 सीटें जा सकती हैं। लेकिन अगर बीजेपी 2020 की तरह एक सीट पर बसपा को बाहर से समर्थन देती है, तो बीजेपी-एनडीए का सीधा आंकड़ा 7 पर सिमट सकता है और बसपा अपनी आखिरी सांसदी बचा सकती है। यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है।
नंबर गेम: किसे कितनी सीटें मिलने की उम्मीद?
खाली हो रही 10 सीटों में से इस समय 8 पर बीजेपी, 1 पर समाजवादी पार्टी (रामगोपाल यादव) और 1 पर बहुजन समाज पार्टी (रामजी गौतम) का कब्जा है। 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के आधार पर बीजेपी ने पिछली बार 9 सीटें जीती थीं, लेकिन विधायकों के मौजूदा संख्या-बल के हिसाब से गणित बदल चुका है।
मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार बीजेपी इस बार 8 सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर सकती है, जबकि समाजवादी पार्टी को 2 सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है। बसपा के पास फिलहाल विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है, इसलिए उसे अपने दम पर एक भी सीट मिलने की संभावना नहीं है।
यहीं से 7 सीटों वाला समीकरण निकलता है। अगर बीजेपी अपनी संभावित 8 सीटों में से एक सीट छोड़कर बसपा उम्मीदवार का समर्थन करती है, तो बीजेपी-एनडीए के खाते में सीधे तौर पर 7 सीटें रह जाएंगी और दसवीं सीट बीजेपी के समर्थन से बसपा के पास जा सकती है। यह विकल्प अभी अटकलों के स्तर पर है और अंतिम फैसला चुनाव के समय की सियासी स्थिति, सहयोगी दलों के रुख और उम्मीदवारों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
बीजेपी के किन 8 मौजूदा सांसदों का कार्यकाल हो रहा खत्म?
नवंबर में जिन बीजेपी सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बी.एल. वर्मा, पूर्व डीजीपी बृजलाल, गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। इनके अलावा डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन उन्हें 5 सितंबर 2026 को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी इसी चुनाव में फैसला होगा।
हरदीप सिंह पुरी की दोबारा उम्मीदवारी का समीकरण केंद्र में उनकी भूमिका पर निर्भर कर सकता है, जबकि बाकी नामों को लेकर भी पार्टी में अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है। हालांकि अंतिम फैसला बीजेपी नेतृत्व ही करेगा और अभी चल रही चर्चाओं को आधिकारिक टिकट की घोषणा नहीं माना जा सकता।
सपा की पहली सीट रामगोपाल यादव के नाम, दूसरी पर सस्पेंस
समाजवादी पार्टी की तरफ से पहली सीट पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। रामगोपाल यादव का मौजूदा कार्यकाल भी 25 नवंबर को ही समाप्त हो रहा है।
असली चर्चा दूसरी सीट को लेकर है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट के जरिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकते हैं, इसलिए पार्टी कई समीकरणों पर मंथन कर रही है। इस दौड़ में सबसे आगे नाम राम आश्रय कुशवाहा का चल रहा है, जो विश्वकर्मा जयंती के मौके पर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं। राम आश्रय कुशवाहा 2013 से पहले सपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं, बाद में वे बीजेपी में चले गए थे और अब उनकी पार्टी में घर वापसी हुई है। बीजेपी छोड़ने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें वहां वह सम्मान नहीं मिला जो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व में मिलता था।
कानपुर और आसपास के इलाकों में कुशवाहा वोटबैंक पर राम आश्रय का अच्छा प्रभाव माना जाता है, और उनके आने से सपा को गैर-यादव ओबीसी वर्ग को साधने में मदद मिल सकती है।
बसपा पर मंडरा रहा ‘जीरो’ का संकट
मायावती की बहुजन समाज पार्टी के लिए यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा की एक सीट का मामला नहीं है। पार्टी के पास लोकसभा में पहले से ही कोई सांसद नहीं है, और अब विधानसभा में भी उसका प्रतिनिधित्व खत्म हो चुका है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह चुने गए थे, लेकिन उनके निधन के बाद पार्टी का सदन में कोई विधायक नहीं बचा।
बसपा के मौजूदा राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल भी 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। वे पार्टी के फिलहाल इकलौते सांसद हैं। राज्यसभा उम्मीदवार के नामांकन के लिए विधायकों का प्रस्तावक और अनुमोदक होना जरूरी होता है, और अपने दम पर यह पूरा करना बसपा के लिए बड़ी चुनौती है।
2020 में रामजी गौतम निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे थे, और उस समय बीजेपी विधायकों ने ही उनके नामांकन के लिए प्रस्तावक-अनुमोदक के तौर पर समर्थन दिया था। अब 2026 में भी परिस्थितियां कुछ वैसी ही बन गई हैं, जहां बीजेपी की भूमिका एक बार फिर निर्णायक हो सकती है। अगर बीजेपी समर्थन देती है तो मायावती की पार्टी राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बचा सकती है, लेकिन इसके लिए बीजेपी को अपनी संभावित सीटों की संख्या में बदलाव करना पड़ सकता है। वहीं अगर समर्थन नहीं मिला और बसपा अपना उम्मीदवार राज्यसभा नहीं भेज पाई, तो संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
सीट जीतने के लिए जरूरी वोटों का गणित
राज्यसभा चुनाव में यूपी के विधायक मतदान करते हैं। 10 सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी पहली वरीयता के वोटों का आंकड़ा विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या पर निर्भर करता है। मौजूदा गणित में यह आंकड़ा करीब 37 वोट प्रति सीट के आसपास बैठता है।
यही वजह है कि बीजेपी के पास अतिरिक्त संख्या-बल होने के बावजूद बसपा को समर्थन देने का फैसला सिर्फ राजनीतिक इच्छा का मामला नहीं होगा, बल्कि यह पूरी तरह सीटों के गणित से जुड़ा होगा।
चुनाव कब और कैसे होगा?
25 नवंबर को राज्यसभा की कुल 11 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें 10 सीटें उत्तर प्रदेश की और 1 सीट उत्तराखंड की है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी किया जा सकता है।
अधिसूचना जारी होने से लेकर मतदान और मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर करीब 20 दिन लगते हैं। अधिसूचना के बाद 7 से 8 दिनों तक नामांकन दाखिल किए जाते हैं, नामांकन खत्म होने के अगले दिन पत्रों की जांच होती है और उसके दो दिन बाद तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के करीब 7 दिन बाद मतदान होता है, और उसी दिन शाम को वोटों की गिनती कर नतीजे घोषित कर दिए जाते हैं। कोशिश यही रहेगी कि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने से पहले सभी सीटों पर नए सदस्यों का चुनाव पूरा कर लिया जाए।
साथ में विधान परिषद की 11 सीटों पर भी नजर
राज्यसभा चुनाव के अलावा यूपी में विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों पर भी चुनाव होना है, जिन पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को खत्म हो रहा है। इनमें स्नातक खंड की 5 सीटें- वाराणसी, प्रयागराज-झांसी, लखनऊ, आगरा और मेरठ- तथा शिक्षक खंड की 6 सीटें- गोरखपुर-फैजाबाद, आगरा, बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, मेरठ और वाराणसी शामिल हैं। यानी आने वाले हफ्तों में यूपी की सियासत में राज्यसभा और एमएलसी की कुल 21 सीटों को लेकर जोड़-तोड़ और गुणा-गणित तेज रहने वाला है।
2027 से पहले क्यों अहम है यह चुनाव?
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले नवंबर में होने वाला यह राज्यसभा चुनाव सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके नतीजे न सिर्फ संसद में दलों की ताकत तय करेंगे, बल्कि 2027 के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देंगे। बीजेपी जहां ब्राह्मण, पिछड़े और जाट-गुर्जर समीकरणों के सहारे पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी की नजर दलित वोट बैंक पर भी है। इस बीच बसपा के सामने संसद में अपना प्रतिनिधित्व बचाए रखने की चुनौती इस पूरे चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू बनी हुई है।
FAQ
Q1. यूपी में राज्यसभा की कितनी सीटों पर चुनाव होने जा रहा है?
Answer: उत्तर प्रदेश कोटे की राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है, जिनका कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है।
Q2. बीजेपी और सपा को कितनी-कितनी सीटें मिलने की संभावना है?
Answer: मौजूदा विधानसभा संख्या-बल के आधार पर बीजेपी को 8 सीटें और सपा को 2 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर बीजेपी एक सीट पर बसपा को समर्थन देती है, तो बीजेपी-एनडीए का सीधा आंकड़ा 7 रह सकता है।
Q3. बसपा के सामने राज्यसभा चुनाव में क्या संकट है?
Answer: बसपा के पास विधानसभा में फिलहाल एक भी विधायक नहीं है, इसलिए वह अपने दम पर उम्मीदवार नहीं उतार सकती। अगर बीजेपी समर्थन नहीं देती, तो संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो सकता है।
Q4. सपा की तरफ से राज्यसभा किसे भेजा जा सकता है?
Answer: पहली सीट पर रामगोपाल यादव की वापसी लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए हाल ही में पार्टी में शामिल हुए राम आश्रय कुशवाहा का नाम चर्चा में है।
Q5. यूपी राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कब हो सकता है?
Answer: चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में चुनाव कार्यक्रम जारी हो सकता है। पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर करीब 20 दिन लगते हैं।
SOURCE/FACT-CHECK NOTE
यह लेख निम्नलिखित हिंदी समाचार स्रोतों की रिपोर्टिंग पर आधारित है (सभी सितंबर 2026 में प्रकाशित):
- Newstrack.com (16 सितंबर 2026, लेखक: अलखा सिंह)
- InKhabar.com (19 सितंबर 2026, लेखक: सोहेल रहमान)
- IndiaNews.in (22 सितंबर 2026, लेखक: प्रीति राजपूत)
- Prabhatkhabar.com (सितंबर 2026)
