दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को ₹9 करोड़ के चेक बाउंस केस में 3 महीने की सजा सुनाई। जानिए पूरा मामला — कैसे शुरू हुआ, तिहाड़ जेल तक कैसे पहुंचा, और आगे क्या होगा।
कॉमेडियन-एक्टर राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन महीने की सजा सुनाई है, जिसके बाद उनकी पुरानी सजा बरकरार रह गई। यहां पढ़िए पूरी कहानी — शुरुआत से लेकर आज के फैसले तक।
बॉलीवुड के सबसे चहेते कॉमेडियन एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन किसी फिल्म की वजह से नहीं। 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उस कानूनी लड़ाई पर अंतिम फैसला सुनाया, जो राजपाल यादव का पीछा 15 साल से भी ज्यादा समय से कर रही थी — और इस बार खबर उनके पक्ष में नहीं है।
अगर आप सोच रहे हैं कि लाखों लोगों को हंसाने वाला एक चहेता एक्टर आखिर तिहाड़ जेल तक कैसे पहुंच गया, तो यहां है पूरी कहानी, आसान भाषा में।
राजपाल यादव के चेक बाउंस केस की शुरुआत कैसे हुई
पूरा मामला 2010 से जुड़ा है। राजपाल यादव अपनी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म अता पता लापता बनाने जा रहे थे और इसे पूरा करने के लिए उन्हें तुरंत पैसों की जरूरत थी। उन्होंने दिल्ली की एक फाइनेंशियल कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का लोन लिया, जिसके मालिक बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल हैं।
दुर्भाग्य से, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई। इसके बाद शुरू हुआ एक दशक लंबा वित्तीय विवाद, जो आगे चलकर एक क्रिमिनल केस में बदल गया।
वो चेक जिन्होंने पूरा मामला शुरू किया
2013 में, यादव ने कथित तौर पर बकाया राशि को ₹10.40 करोड़ में सेटल करने का प्रस्ताव दिया और इसके तहत दिल्ली हाईकोर्ट में सात चेक जमा किए। ये चेक मुरली प्रोजेक्ट्स को सौंप दिए गए — लेकिन सातों चेक बाउंस हो गए।
यही वो घटना थी जिसने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस का कानून) के तहत क्रिमिनल कंप्लेंट को जन्म दिया।
अदालतों में लंबा सफर
- 2018: एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी करार दिया, और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई।
- 2019: अपील में यह सजा बरकरार रही।
- 2024: बकाया राशि बढ़कर करीब ₹9 करोड़ हो जाने के बाद, एक सेशन कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा।
- 2024–2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने बार-बार सजा को सस्पेंड किया, ताकि सेटलमेंट का मौका दिया जा सके — जिसमें ₹2.5 करोड़ की किस्तों वाली एक डील भी शामिल थी, जो आखिरकार टूट गई।
इस पूरे दौरान, यादव ने कई बार सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाया कि मामला सुलझ जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सरेंडर, तिहाड़ जेल, और अंतरिम जमानत
फरवरी 2026 तक, कोर्ट का धैर्य जवाब दे गया। बार-बार की गई अवहेलना का हवाला देते हुए, कोर्ट ने यादव को सरेंडर करने का आदेश दिया — और इस बार, आगे और समय देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने 5 फरवरी 2026 को सरेंडर किया और उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। ₹1.5 करोड़ जमा करने के बाद, उन्हें अंतरिम जमानत मिली और वे 17 फरवरी 2026 को रिहा हुए। उनकी रिहाई के बाद इंडस्ट्री से जबरदस्त समर्थन सामने आया — सलमान खान, अजय देवगन और सोनू सूद जैसे नाम कथित तौर पर उनकी मदद के लिए आगे आए।
लेकिन अंतरिम जमानत कभी भी समाधान नहीं थी — बल्कि सिर्फ अंतिम फैसले से पहले का एक पड़ाव थी।
आज का फैसला: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा
10 जुलाई 2026 को, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने राजपाल यादव की उन याचिकाओं पर फैसला सुनाया जिनमें उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी थी। नतीजा यह रहा:
- सभी सात चेक बाउंस मामलों में सजा बरकरार
- हर मामले में तीन महीने की साधारण कैद — लेकिन सभी सजाएं एक साथ (concurrently) चलेंगी, यानी कुल मिलाकर उन्हें सिर्फ तीन महीने ही जेल में बिताने होंगे, 21 महीने नहीं
- मुआवजा तय: हर मामले में शिकायतकर्ता को ₹1.05 करोड़, साथ ही कुछ अतिरिक्त राशि, और उनकी पत्नी राधा यादव को हर मामले में ₹5.51 करोड़ देने का आदेश
- प्रोबेशन नहीं मिला: कोर्ट ने उनके आचरण और बार-बार तोड़े गए वादों का हवाला देते हुए राहत देने से इनकार किया
- चेतावनी: अगर ट्रायल कोर्ट का जुर्माना नहीं भरा गया, तो छह महीने की अतिरिक्त सजा होगी
जज ने साफ शब्दों में कहा कि यादव के अपने बयान बार-बार बदलते रहे — और इतने मौके मिलने के बावजूद, उन्होंने अपने वादों को पूरा नहीं किया।
राजपाल यादव ने सेटलमेंट क्यों नहीं किया?
यहां एक ऐसा मोड़ आया जिसने कई लोगों को चौंका दिया: सुनवाई के आखिरी दौर में, राजपाल यादव ने कोर्ट के जरिए पेश किए गए ₹6 करोड़ के फुल-एंड-फाइनल सेटलमेंट को ठुकरा दिया — जबकि वे सालों में पहले ही करीब ₹4.25 करोड़ चुका चुके थे। उनके वकील ने इसकी वजह गंभीर वित्तीय संकट और निजी संपत्तियों की मजबूरन बिक्री बताई।
आगे क्या होगा?
कोर्ट ने राजपाल यादव को इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए दो महीने का समय दिया है। तब तक, यह सजा और मुआवजे का आदेश जस का तस लागू रहेगा।
फिलहाल स्थिति इस प्रकार है:
| विवरण | स्थिति |
|---|---|
| सजा | बरकरार |
| कैद | 3 महीने (सभी 7 मामलों में एक साथ) |
| बकाया मुआवजा | ₹1.05 करोड़/मामला + अतिरिक्त (राजपाल); ₹5.51 करोड़/मामला (राधा यादव) |
| प्रोबेशन | खारिज |
| अपील की समयसीमा | 2 महीने |
बड़ी तस्वीर: एक सबक भरी कहानी
सुर्खियों से परे, यह मामला इस बात की एक कड़ी याद दिलाता है कि भारतीय अदालतें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस मामलों को कितनी गंभीरता से लेती हैं। 2010 में शुरू हुआ एक साधारण बिजनेस लोन, 16 साल बाद, बॉलीवुड के सबसे जाने-पहचाने चेहरों में से एक को असली जेल तक ले गया — यह साबित करते हुए कि शोहरत वित्तीय और कानूनी जवाबदेही से बचने का कोई शॉर्टकट नहीं देती।
यह एक विकसित हो रहा कानूनी मामला है। जैसे-जैसे राजपाल यादव के अगले कानूनी कदम स्पष्ट होंगे, हम इस लेख को अपडेट करते रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
राजपाल यादव को जेल क्यों भेजा गया?
₹5 करोड़ के लोन को चुकाने के लिए उन्होंने जो सात चेक जारी किए थे, वे अपर्याप्त बैलेंस के कारण बाउंस हो गए, जिसके चलते नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया।
राजपाल यादव पर कितना बकाया है?
2024 तक विवादित राशि बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ हो चुकी थी। जुलाई 2026 के फैसले में उन्हें सात मामलों में हर मामले में ₹1.05 करोड़ से ज्यादा, साथ ही अतिरिक्त मुआवजा चुकाने का आदेश दिया गया।
क्या राजपाल यादव अभी जेल में हैं?
10 जुलाई 2026 के फैसले के अनुसार, उनकी सजा और तीन महीने की कैद बरकरार रखी गई है, हालांकि उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए दो महीने का समय दिया गया है।
यह लोन आखिर किस लिए लिया गया था?
यादव ने 2010 में यह पैसा अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म अता पता लापता को फाइनेंस करने के लिए लिया था।
क्या उन्हें पहले भी जेल हुई थी?
हां, फरवरी 2026 में उन्हें सरेंडर करना पड़ा था और वे कुछ दिन तिहाड़ जेल में रहे, जिसके बाद ₹1.5 करोड़ जमा करने पर उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी।
क्या उनकी पत्नी राधा यादव को भी सजा हुई?
हां, राधा यादव को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया था और कोर्ट ने उन्हें हर मामले में ₹5.51 करोड़ का मुआवजा चुकाने का आदेश दिया है।
