राम मंदिर चंदा चोरी कांड: SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, चंपत राय का इस्तीफा — जानें पूरी सच्चाई

राम मंदिर दान चोरी,

राम मंदिर चंदा चोरी कांड: SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, चंपत राय का इस्तीफा — जानें पूरी सच्चाईचोरी मामले में SIT की प्रिलिमिनरी रिपोर्ट में बड़े खुलासे। चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, कृष्ण मोहन नए महासचिव नियुक्त। पूरी टाइमलाइन और डिटेल्स पढ़ें।

अयोध्या, जुलाई 2026 — श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान-पात्रों की गिनती के दौरान हुई कथित चोरी का मामला बीते एक महीने से देश की सबसे बड़ी सुर्खियों में बना हुआ है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव हो चुके हैं, दो शीर्ष पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है, और मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है।


1. मामला कब और कैसे सामने आया

7 जून 2026 से श्री रामजन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्रों की गिनती के दौरान हुई चोरी को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं। SIT ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की CCTV फुटेज खंगाली, जिसमें करीब 70 संदिग्ध घटनाएं सामने आईं। फुटेज में आरोपी कर्मचारी नोटों की गड्डियों को जेबों, कपड़ों और यहां तक कि जूतों-मोजों में छिपाकर बाहर ले जाते हुए दिखे।

बरामदगी के प्रमुख आंकड़े

  • जांच के दौरान अब तक कर्मचारियों से ₹78 लाख बरामद किए जा चुके हैं।
  • 4 जून को गिनती वाले कमरे के बाथरूम के फ्लश टैंक में छिपाए गए ₹2.25 लाख बरामद हुए।

सुरक्षा में चूक

  • पहले लागू सख्त तलाशी व्यवस्था और विशेष ड्रेस कोड को समय के साथ ढीला कर दिया गया था।
  • गिनती कक्ष और तिजोरियों (हुंडियों) की चाबियां बिना किसी लिखित आदेश के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव के पास रहती थीं — जांच में यह सबसे बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

2. किन पर कार्रवाई हुई

आरोपी कर्मचारी

₹15,000 प्रति माह वेतन पाने वाले 6 कर्मचारियों को सीधे तौर पर चोरी में शामिल पाया गया और उन्हें आरोपी बनाया गया:

  1. अविनाश शुक्ला
  2. अनुकल्प मिश्र
  3. लवकुश मिश्रा
  4. मनीष कुमार यादव (टिन्नू यादव के भतीजे)
  5. करुणेश पांडे
  6. रमाशंकर मिश्रा

इनके और इनके रिश्तेदारों के बैंक खातों व FD में भारी नकदी मिलने की पुष्टि हुई है। SIT फिलहाल आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है।

शीर्ष पदाधिकारियों पर असर

  • SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सीधे आपराधिक मामले में क्लीन चिट दी, लेकिन निगरानी में लापरवाही (Supervisory Negligence) के आधार पर उनकी भूमिका पर सवाल उठे।
  • ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर भी निगरानी संबंधी गंभीर आरोप लगे।

3. इस्तीफों की झड़ी और ट्रस्ट में फेरबदल

प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद, 6 जुलाई 2026 को ट्रस्ट परिसर में हुई बैठक में यह फैसले लिए गए:

  • चंपत राय ने महासचिव पद से नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया।
  • डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर किया गया।
  • विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव नागरकट्टे को भी हटा दिया गया।
  • रिटायर्ड IFS अधिकारी और RSS से जुड़े कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का कार्यवाहक (अंतरिम) महासचिव नियुक्त किया गया, जिन्होंने अगले ही दिन कार्यभार संभाल लिया<cite index=”24-2″>।</cite>

कृष्ण मोहन कौन हैं?

  • मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले (चंद्रपुर गांव, शाहाबाद विधानसभा) के निवासी, करीब 74 वर्ष के <cite index=”26-2″>कृष्ण मोहन 1978 बैच के महाराष्ट्र कैडर के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी रह चुके हैं और 2012 में सेवानिवृत्त हुए</cite>।
  • सेवानिवृत्ति के बाद वे RSS से जुड़े और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे।
  • <cite index=”27-2″>वे अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय से आते हैं और उन्हें दिवंगत ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल — जो बिहार के दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते थे — के निधन के बाद सितंबर 2025 में ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।</cite>
  • <cite index=”30-4″>यह भी सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती में गड़बड़ी सबसे पहले पकड़ने और उसकी लिखित शिकायत/तहरीर देने वाले ट्रस्टी भी कृष्ण मोहन ही थे, जिनकी शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी।</cite>
  • कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता प्रशासनिक खामियों को दूर करना, पारदर्शिता बढ़ाना और श्रद्धालुओं का भरोसा फिर से कायम करना होगा।

चूंकि कृष्ण मोहन दलित समाज से आते हैं, राजनीतिक विश्लेषक इस नियुक्ति को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए दलित वोटों को साधने की एक बड़ी रणनीतिक चाल के तौर पर भी देख रहे हैं।

चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया

इस्तीफे के एक दिन बाद, 7 जुलाई को <cite index=”21-3″>चंपत राय ने रामभक्तों के नाम एक भावुक हस्तलिखित पत्र जारी कर कहा कि उन्होंने फिलहाल मौन धारण कर लिया है और SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सभी आरोपों का क्रमानुसार जवाब देंगे, जिसके बाद पूरा सच सामने आ जाएगा।</cite> <cite index=”21-4″>उन्होंने इस पर भी हैरानी जताई कि ट्रस्ट की बैठक में पेश की गई SIT की शुरुआती रिपोर्ट, जो ‘परम गोपनीय’ थी, अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुकी है।</cite>


4. ट्रस्ट की सफाई: सोने की रामायण सार्वजनिक

विपक्ष (खासकर अखिलेश यादव) द्वारा सोने की रामायण चोरी होने के आरोपों के जवाब में ट्रस्ट ने मीडिया और जनता के सामने ये चीजें प्रदर्शित कीं:

  • 147 किलोग्राम वजन की सोने की रामायण
  • आभूषणों को पिघलाकर बनाई गई चांदी की छड़ें
  • काकभुशुंडि की चांदी की मूर्ति

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी आकर अपने दान की एंट्री जांच सकता है।

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने सफाई दी कि वे हमेशा अयोध्या में मौजूद नहीं रहते थे, इसलिए जिम्मेदारियां डेलिगेट की हुई थीं। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि वे इस घटना से आहत हैं और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।


5. अयोध्या की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर

आर्थिक झटका

  • विवाद के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट देखी जा रही है (हालांकि जून-जुलाई में मानसून व स्कूल खुलने के चलते हर साल स्वाभाविक डिप आता है)।
  • अयोध्या के 17,000 से अधिक ई-रिक्शा चालकों, होटलों, रेस्टोरेंटों और स्थानीय दुकानदारों की ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की सालाना अर्थव्यवस्था सीधे श्रद्धालुओं की संख्या पर निर्भर है, जो इस मंदी से प्रभावित हो रही है।

2027 का राजनीतिक दंगल

विपक्ष — सपा, आप, कांग्रेस — इस मुद्दे पर सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमलावर है, यह सवाल उठाते हुए कि उनका “बुलडोजर एक्शन” इस मामले में शांत क्यों है। विपक्ष इसे 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की साख को नुकसान पहुंचाने के लिए भुनाने की कोशिश कर रहा है।


6. आगे क्या होगा

<cite index=”24-1″>ट्रस्ट ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के लिए एक समिति बनाई है, जिसकी सिफारिशों पर चर्चा के लिए 22 जुलाई 2026 को अगली बैठक बुलाई गई है, जिसमें SIT की विस्तृत/अंतिम रिपोर्ट भी सौंपे जाने की उम्मीद जताई गई है।</cite> इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी होंगी क्योंकि:

  • SIT की अंतिम रिपोर्ट में और नाम या खुलासे सामने आ सकते हैं।
  • चंपत राय अपनी बात रखने का वादा कर चुके हैं।
  • ट्रस्ट को स्थायी महासचिव की नियुक्ति करनी होगी।
  • सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में स्थायी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

संक्षेप में (Timeline)

तारीखघटनाक्रम
27 अप्रैल – 5 जून 2026चोरी की ~70 संदिग्ध घटनाएं (CCTV में दर्ज)
7 जून 2026दान-पात्र गिनती के दौरान चोरी सामने आना, चर्चाएं शुरू
6 आरोपी कर्मचारी चिह्नित, ₹78 लाख + ₹2.25 लाख बरामद
6 जुलाई 2026ट्रस्ट बैठक: चंपत राय व अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव नियुक्त
7 जुलाई 2026चंपत राय का रामभक्तों के नाम पत्र — मौन का ऐलान, अंतिम रिपोर्ट के बाद जवाब का वादा
22 जुलाई 2026 (प्रस्तावित)अगली ट्रस्ट बैठक, संभावित SIT अंतिम रिपोर्ट

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. राम मंदिर दान-पात्र चोरी मामला क्या है? 7 जून 2026 से श्री रामजन्मभूमि मंदिर परिसर के दान-पात्रों की गिनती के दौरान नकदी चोरी होने का मामला सामने आया। SIT जांच में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की CCTV फुटेज में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं पाई गईं।

Q2. चोरी में कितने पैसे बरामद हुए हैं? अब तक आरोपी कर्मचारियों से ₹78 लाख नकद बरामद किए जा चुके हैं, साथ ही गिनती कक्ष के बाथरूम के फ्लश टैंक से ₹2.25 लाख अलग से बरामद हुए।

Q3. चोरी के मामले में कौन-कौन आरोपी हैं? 6 कर्मचारी आरोपी बनाए गए हैं: अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा। इनके व इनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में भी भारी नकदी मिली है।

Q4. क्या चंपत राय पर भी आपराधिक आरोप हैं? नहीं। SIT ने चंपत राय को सीधे आपराधिक मामले में क्लीन चिट दी है, लेकिन निगरानी में लापरवाही (सुपरवाइज़री नेग्लिजेंस) के आधार पर सवाल उठने के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए महासचिव पद से इस्तीफा दिया।

Q5. चंपत राय के बाद ट्रस्ट का नया महासचिव कौन बना है? रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का कार्यवाहक (अंतरिम) महासचिव नियुक्त किया गया है। वे दलित समुदाय से आते हैं और चोरी की शिकायत सबसे पहले दर्ज कराने वाले ट्रस्टी भी वही थे।

Q6. क्या सोने की रामायण भी चोरी हुई थी? नहीं। इन आरोपों के जवाब में ट्रस्ट ने 147 किलोग्राम की सोने की रामायण, चांदी की छड़ें और काकभुशुंडि की चांदी की मूर्ति सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कीं और कहा कि कोई भी अपने दान की एंट्री जाकर जांच सकता है।

Q7. SIT की अंतिम रिपोर्ट कब आएगी? ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें SIT की विस्तृत/अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

Q8. इस विवाद का अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है? विवाद के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट देखी जा रही है, जिससे 17,000 से अधिक ई-रिक्शा चालकों, होटलों और स्थानीय दुकानदारों की ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की सालाना अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।


नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जांच विवरण और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। मामला अभी जांचाधीन है और SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है। किसी भी व्यक्ति पर लगे आरोप अंतिम रूप से न्यायिक प्रक्रिया द्वारा ही सिद्ध या खारिज होंगे।

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