Nirjala Ekadashi Vrat Parana Time 2026: निर्जला एकादशी का महाव्रत जितना कठिन है, इसका पारण (व्रत खोलना) उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि एकादशी व्रत का पारण सही समय पर और सही विधि से न किया जाए, तो 24 घंटे की कठिन तपस्या और व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।
यदि आपने भी 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा है, तो 26 जून (शुक्रवार) को व्रत खोलने से पहले पारण का शुभ मुहूर्त, सही विधि और जरूरी नियम जरूर जान लें।
निर्जला एकादशी 2026 पारण का शुभ मुहूर्त (Parana Shubh Muhurat)
शास्त्रों के नियम के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में और ‘हरि वासर’ (द्वादशी तिथि का शुरुआती एक-चौथाई हिस्सा) समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।
- व्रत पारण की तारीख: 26 जून 2026, शुक्रवार
- पारण का शुभ समय: सुबह 05:25 AM से 08:13 AM तक
- कुल अवधि: 2 घंटे 48 मिनट
सावधान: सुबह 08:13 बजे के बाद द्वादशी तिथि के रहते-रहते ही पारण कर लेना सबसे उत्तम है। हरी वासर या राहुकाल के समय व्रत भूलकर भी न खोलें।
निर्जला एकादशी व्रत खोलने की सही विधि (Step-by-Step Vrat Parana Vidhi)
1.ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और ध्यान:सुबह 04:30 से 05:15 AM.
शुक्रवार सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं।
2.मंत्र जाप और क्षमा याचना:सुबह 05:15 से 05:30 AM.
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। व्रत में अनजाने में हुई किसी भी भूल या गलती के लिए भगवान विष्णु से हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।
3.ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान:सुबह 05:30 से 06:00 AM.
व्रत खोलने से पहले सीधे हाथ में जल लेकर दान का संकल्प करें। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र, पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (कलश), मौसमी फल (जैसे आम या खरबूजा) और दक्षिणा का दान निकाल कर अलग रख दें।
4.तुलसी पत्र और चरणामृत से पारण:सुबह 06:00 AM के बाद (शुभ मुहूर्त में).
भगवान विष्णु को अर्पित किए गए चरणामृत (पंचामृत) और तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) को मुंह में डालकर सबसे पहले अपना व्रत खोलें। इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs – Frequently Asked Questions)
यहाँ निर्जला एकादशी व्रत और पारण से जुड़े कुछ मुख्य सवाल और उनके धार्मिक जवाब दिए गए हैं, जो अक्सर भक्तों के मन में होते हैं:
Q1. निर्जला एकादशी का व्रत किस चीज से खोलना चाहिए?
उत्तर: निर्जला एकादशी का व्रत सबसे पहले तुलसी के पत्ते और गंगाजल या चरणामृत से खोलना सबसे शुभ माना जाता है। चूंकि यह पूरे 24 घंटे का निर्जला (बिना पानी का) व्रत होता है, इसलिए व्रत खोलते ही तुरंत भारी भोजन करने की बजाय थोड़ा पानी या नींबू पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट करें, फिर सात्विक भोजन लें।
Q2. क्या एकादशी के पारण के भोजन में लहसुन-प्याज खा सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी को बनने वाला पारण का भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। इसमें लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का प्रयोग वर्जित है। पारण के भोजन में सादा चावल, दाल और हरी सब्जियां (जैसे कद्दू या लौकी) बनाई जाती हैं।
Q3. एकादशी व्रत के पारण में चावल खाना क्यों जरूरी माना जाता है?
उत्तर: जहां एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना है, वहीं द्वादशी (पारण के दिन) चावल खाना बेहद शुभ और अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी को चावल खाने से व्रत पूरा माना जाता है और मानसिक शांति मिलती है।
Q4. यदि पारण का शुभ मुहूर्त छूट जाए तो क्या करें?
उत्तर: यदि किसी कारणवश आप शुभ मुहूर्त (सुबह 08:13 AM) तक पारण नहीं कर पाए, तो दोपहर के समय (मध्याह्न काल) को छोड़कर किसी भी शुभ चौघड़िया में भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत खोल लें। हालांकि, जानबूझकर मुहूर्त छोड़ना व्रत के पुण्य को कम करता है।
Q5. क्या व्रत खोलने के तुरंत बाद पानी पी सकते हैं?
उत्तर: हाँ, क्योंकि यह निर्जला व्रत है, इसलिए पारण के समय सबसे पहले जल और तुलसी पत्र ही ग्रहण किया जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि बहुत ज्यादा ठंडा या बर्फीला पानी एक बार में न पिएं, इससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। हल्का सामान्य पानी या शिकंजी से शुरुआत करें।
निष्कर्ष
निर्जला एकादशी का व्रत सीधे मोक्ष के द्वार खोलता है। 26 जून को सुबह 05:25 AM से 08:13 AM के बीच ऊपर बताई गई विधि से अपना व्रत खोलें, दान-पुण्य करें और भगवान हरी की कृपा प्राप्त करें।
क्या आपने इस साल निर्जला एकादशी का व्रत रखा है? कमेंट बॉक्स में ‘जय श्री हरि’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ लिखकर अपनी हाजिरी जरूर लगाएं!
