मध्य प्रदेश कैबिनेट ने UCC बिल को मंजूरी दी। शादीशुदा लोगों के लिव-इन में रहने पर 5 साल जेल का प्रावधान। जानें रजिस्ट्रेशन नियम, जुर्माना और पूरी जानकारी
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा फैसला हो चुका है। 19 जुलाई 2026 को राज्य कैबिनेट ने UCC बिल को मंजूरी दे दी, जिसे अब मानसून सत्र (20-25 जुलाई 2026) में विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।
इस बिल की सबसे ज्यादा चर्चा में रही बात है — शादीशुदा व्यक्ति के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर 5 साल तक की जेल का प्रावधान। आइए पूरे कानून को विस्तार से समझते हैं।
मध्य प्रदेश UCC बिल क्या है?
यह प्रस्तावित कानून राज्य के सभी नागरिकों के लिए — चाहे वे किसी भी धर्म के हों — शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, गोद लेना और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में एक समान नियम लागू करने की कोशिश करता है। हालांकि, अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
इस ड्राफ्ट को तैयार करने वाली कमेटी की अध्यक्षता रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की, जो उत्तराखंड के UCC ड्राफ्ट की भी अगुवाई कर चुकी हैं।
‘राम या रहीम’ वाला विवादित बयान
बिल को कैबिनेट में मंजूरी मिलने से कुछ दिन पहले, 17 जुलाई को कटनी में एक स्कूल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा:
“अगर राम की एक शादी हो सकती है, तो रहीम की दो, तीन या चार क्यों होनी चाहिए? हमारी मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित UCC के तहत सिर्फ एक शादी वाले व्यक्ति को ही मध्य प्रदेश में रहने का कानूनी अधिकार होगा। इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सीएम पर धार्मिक नामों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। वहीं BJP सरकार इसे “एक देश, एक कानून” के सिद्धांत के तहत पेश कर रही है।
बिल के मुख्य प्रावधान
- सभी के लिए एक पत्नी/पति का नियम: बहुविवाह और निकाह हलाला पर पूरी तरह रोक, अब किसी भी धर्म का व्यक्ति एक समय में सिर्फ एक ही जीवनसाथी रख सकेगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: साथ रहना शुरू करने के एक महीने के भीतर जोड़ों को रजिस्ट्रार के पास “स्टेटमेंट ऑफ लिव-इन रिलेशनशिप” जमा करना होगा। दोनों पार्टनर की उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए, वे पहले से शादीशुदा न हों, और रिश्ता आपसी सहमति से हो।
- 21 साल से कम उम्र वालों के लिए पैरेंट्स को सूचना: अगर कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो रजिस्ट्रार को उसके माता-पिता/अभिभावक को सूचित करना होगा। रजिस्टर्ड लिव-इन जोड़ों का रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजा जाएगा।
सजा और जुर्माने का प्रावधान
| उल्लंघन | सजा |
|---|---|
| एक महीने से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन साथ रहना | 3 महीने जेल या ₹10,000 जुर्माना |
| गलत जानकारी देना | 3 महीने जेल और ₹25,000 जुर्माना |
| नोटिस के बावजूद स्टेटमेंट न देना | 6 महीने जेल और ₹25,000 जुर्माना |
| शादीशुदा व्यक्ति का लिव-इन में रहना | 5 साल तक की जेल |
- बच्चों को कानूनी मान्यता: शादी, गोद लेने, सरोगेसी, या लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को समान कानूनी अधिकार मिलेंगे।
- महिलाओं के लिए गुजारा भत्ता: अगर कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है, तो महिला कोर्ट से गुजारा भत्ता मांग सकती है।
- रजिस्ट्रेशन कहां होगा: शहरी क्षेत्रों में MP e-नगरपालिका पोर्टल के जरिए, और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगर निकाय या ग्राम पंचायत के जरिए रजिस्ट्रेशन होगा।
अब आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी का मतलब यह नहीं कि यह कानून बन गया है। बिल को अभी विधानसभा में पेश किया जाएगा, वहां चर्चा और वोटिंग के बाद ही यह पास होगा। पास होने के बाद ही लागू करने के नियम बनाए जाएंगे।
उत्तराखंड से क्या सीख मिलती है?
उत्तराखंड ने जनवरी 2025 में अपना UCC लागू किया था। लेकिन लागू होने के शुरुआती 10 दिनों में सिर्फ एक ही लिव-इन कपल ने रजिस्ट्रेशन कराया — जबकि कानून में सख्त सजा के प्रावधान थे। आलोचकों का कहना है कि यह दिखाता है कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन वाला मॉडल व्यावहारिक तौर पर कारगर नहीं है, और यह निजता के अधिकार का उल्लंघन भी है।
निष्कर्ष
समर्थकों का मानना है कि यह बिल कानूनी समानता और महिलाओं के अधिकारों (जैसे विधवा-विधुर को समान संपत्ति अधिकार) को मजबूत करेगा। वहीं आलोचक इसे निजी जीवन में सरकारी दखल और ‘राम-रहीम’ जैसे बयानों को राजनीतिक रंग देने वाला बताते हैं। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र में इस बिल पर बहस तय मानी जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. मध्य प्रदेश UCC बिल क्या है?
मध्य प्रदेश यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल एक प्रस्तावित कानून है, जो सभी धर्मों के नागरिकों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान नियम बनाता है। इसे 19 जुलाई 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
Q2. शादीशुदा व्यक्ति के लिव-इन में रहने पर क्या सजा है?
प्रस्तावित बिल के मुताबिक, अगर कोई पहले से शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 5 साल तक की जेल हो सकती है।
Q3. लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्टर कराना क्यों जरूरी है?
बिल के तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को रिश्ता शुरू होने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “स्टेटमेंट ऑफ लिव-इन रिलेशनशिप” जमा कराना अनिवार्य है।
Q4. रजिस्ट्रेशन न कराने पर क्या जुर्माना है?
बिना रजिस्ट्रेशन के एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने की जेल या ₹10,000 जुर्माना, गलत जानकारी देने पर 3 महीने जेल और ₹25,000 जुर्माना, और नोटिस के बावजूद स्टेटमेंट न देने पर 6 महीने तक की जेल हो सकती है।
Q5. MP UCC बिल कब लागू होगा?
अभी यह सिर्फ कैबिनेट से मंजूर हुआ है। इसे मानसून सत्र (20-25 जुलाई 2026) में विधानसभा में पेश किया जाएगा। पास होने के बाद ही यह कानून बनेगा।
Q6. मोहन यादव के ‘राम या रहीम’ बयान का मतलब क्या है?
CM मोहन यादव ने कहा था कि “अगर राम की एक शादी हो सकती है, तो रहीम की दो, तीन या चार क्यों?” — यह बयान बिल के बहुविवाह-विरोधी प्रावधान के समर्थन में दिया गया था, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
Q7. क्या यह कानून सभी पर लागू होगा?
अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, बाकी सभी धर्मों के नागरिकों पर यह लागू होगा।
