MP Ethanol Scam 2026:मध्य प्रदेश में इथेनॉल-चावल घोटाले की पूरी कहानी — कैसे हुआ फर्जीवाड़ा, कब आया सामने, कहां-कहां फैला, सरकार ने क्या कार्रवाई की और दोषियों पर क्या कदम उठाए गए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश में जून 2026 में एक बड़ा घोटाला सामने आया, जिसमें इथेनॉल उत्पादन के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी पर दिए गए फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी का आरोप लगा। शुरुआत में यह मामला एक छोटी सी गड़बड़ी जैसा लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ इसका दायरा कई जिलों तक फैलता नजर आया। इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि यह घोटाला असल में क्या है, कैसे हुआ, कब उजागर हुआ, कहां-कहां फैला, इसमें कौन शामिल है, सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है और आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
घोटाला क्या है?
केंद्र सरकार की एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) नीति के तहत, FCI (भारतीय खाद्य निगम) का सरप्लस चावल ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के जरिए रजिस्टर्ड इथेनॉल डिस्टिलरीज को सस्ती दर पर दिया जाता है, ताकि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा किया जा सके। आरोप है कि छिंदवाड़ा के एक इथेनॉल प्लांट के अधिकृत प्रतिनिधि ने इस सब्सिडी वाले चावल को असल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने की बजाय स्थानीय चावल मिल में डायवर्ट करने और उसकी जगह बाजार से सस्ता चावल खरीदकर इस्तेमाल करने की योजना बनाई — जिससे सरकार को सीधा वित्तीय नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
घोटाला कैसे हुआ (तरीका)
- OMSS के तहत रजिस्टर्ड इथेनॉल डिस्टिलरीज को FCI चावल करीब ₹2,320 प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर मिलता है — जबकि सरकार की खरीद, मिलिंग, ढुलाई और भंडारण मिलाकर असल लागत करीब ₹4,100 प्रति क्विंटल आती है।
- जांच में पुलिस का कहना है कि सब्सिडी वाला चावल इथेनॉल में बदलने की बजाय ऊंचे दाम पर मिल मालिकों को बेचा गया, जबकि असल उत्पादन के लिए बाजार से सस्ता “टूटा हुआ चावल” (broken rice) खरीदा गया।
- चावल मिल में यह योजना थी कि इस चावल को नई बोरियों में पैककर 2025-26 के कस्टम मिलिंग प्रोग्राम (CMR) के तहत दोबारा सरकारी गोदाम में जमा कर दिया जाए — यानी चावल को सिस्टम में वापस “रीसाइकल” करना।
- जो चावल डायवर्ट होने का आरोप है, वह साधारण नहीं बल्कि फोर्टिफाइड चावल था, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में कुपोषण व एनीमिया रोकने के लिए बांटा जाना था।
कब उजागर हुआ घोटाला (टाइमलाइन)
- 2 जून 2026: बालाघाट के नवेगांव FCI गोदाम से छिंदवाड़ा के बोरगांव स्थित AVJ इथेनॉल प्लांट के लिए तीन ट्रक चावल रवाना हुए।
- 3 जून 2026 (लगभग): एक ट्रक अपने तय ठिकाने की बजाय बालाघाट की वारासिवनी स्थित एक निजी चावल मिल में मिला। बाकी दो ट्रक भी इथेनॉल प्लांट नहीं पहुंचे।
- 5 जून 2026: मध्य प्रदेश खाद्य विभाग ने इस मामले में औपचारिक FIR दर्ज की।
- 11 जून 2026: खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) और FCI के अधिकारियों की एक संयुक्त निरीक्षण टीम ने मौके पर जांच की और पाया कि बरामद चावल की बोरियों का संबंध EBP योजना के तहत जारी हुई खेप से है।
- इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे ₹1,200 करोड़ का घोटाला बताते हुए राजनीतिक हमला बोला, जबकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में शुरुआत में करीब ₹1,160 करोड़ (5 लाख मीट्रिक टन चावल) डायवर्जन का दावा किया गया।
- बाद में FCI ने स्पष्ट किया कि असल डायवर्जन सिर्फ 242.50 क्विंटल चावल तक सीमित है, न कि शुरुआती रिपोर्टों में बताए गए 5 लाख टन तक। यानी घोटाले का दायरा शुरुआती दावों से काफी छोटा निकला, हालांकि जांच अब भी जारी है।
कहां-कहां फैला है यह मामला
- बालाघाट — जहां डायवर्ट हुआ ट्रक और चावल पकड़ा गया, और जहां SIT का जांच केंद्र है
- छिंदवाड़ा — जहां वह इथेनॉल प्लांट (AVJ Agrico Pvt Ltd) स्थित है, जिसके लिए चावल भेजा गया था
- सिवनी — यह जिला भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में यह “हिमशैल का सिरा” भर लग रहा था, इसलिए संभावित बड़े नेटवर्क की आशंका से जांच का दायरा राज्य के अन्य हिस्सों तक भी बढ़ाया गया — हालांकि FCI के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हुआ है कि पुष्ट डायवर्जन अभी सीमित मात्रा तक ही है।
इसमें कौन शामिल है
- रहुल प्रताप — AVJ एग्रिको प्रा. लि. के अधिकृत प्रतिनिधि, जिन पर पुलिस ने चावल डायवर्ट करने और सस्ता चावल खरीदने की योजना बनाने का आरोप लगाया है
- चावल मिल मालिक (वारासिवनी स्थित मिल सहित)
- ट्रक ड्राइवर/ट्रांसपोर्टर
- संभावित रूप से कुछ सरकारी/विभागीय स्तर के लोग, जिनकी भूमिका की जांच जारी है
अब तक इस मामले में 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई है और 12 ट्रक जब्त किए गए हैं।
सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की?
घोटाला सामने आते ही केंद्र और राज्य, दोनों स्तर पर तेजी से कार्रवाई शुरू हुई:
- FIR दर्ज: मध्य प्रदेश खाद्य विभाग ने 5 जून 2026 को औपचारिक FIR दर्ज कराई।
- संयुक्त निरीक्षण टीम: DFPD और FCI अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने 11 जून 2026 को मौके पर जाकर जांच की और सबूतों की पुष्टि की।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट रोका गया: जांच पूरी होने तक FCI ने संबंधित इथेनॉल डिस्टिलरी की सिक्योरिटी डिपॉजिट रोक दी है और उसे आगे चावल की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है।
- ब्याज सब्सिडी रोकी गई: DFPD ने NABARD को निर्देश दिया कि संबंधित फर्म को दी जाने वाली ब्याज छूट (interest subvention) फिलहाल रोक दी जाए।
- SIT का गठन: मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) बनाया है, जिसका नेतृत्व बालाघाट रेंज के IG ललित सक्यवार कर रहे हैं।
- जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग: मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन ने संबंधित चावल मिल पर ₹44.12 लाख का जुर्माना लगाया है और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
- चावल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा: FCI और राज्य सरकार अब इथेनॉल प्लांट्स को चावल आपूर्ति की निगरानी प्रक्रिया को और सख्त करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की डायवर्जन को रोका जा सके।
आगे की कार्रवाई के तौर पर SIT की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने, संबंधित डिस्टिलरी का लाइसेंस/अनुबंध रद्द होने और वसूली की कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इस बारे में अभी कोई अंतिम आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
निष्कर्ष
MP इथेनॉल-चावल घोटाला शुरू में एक विशाल राष्ट्रीय स्तर के घोटाले जैसा पेश किया गया, लेकिन आधिकारिक जांच और FCI के स्पष्टीकरण के बाद सामने आया कि पुष्ट डायवर्जन अभी अपेक्षाकृत सीमित मात्रा (242.50 क्विंटल) तक ही है। फिर भी, यह मामला फोर्टिफाइड चावल जैसी संवेदनशील सरकारी योजना में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, और आने वाले समय में SIT की रिपोर्ट से इसकी असली गहराई और स्पष्ट होगी।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. MP इथेनॉल घोटाला क्या है?
यह मध्य प्रदेश में सामने आया एक मामला है, जिसमें इथेनॉल उत्पादन के लिए सब्सिडी पर मिले फोर्टिफाइड चावल को इथेनॉल बनाने की बजाय बेचने और उसकी जगह सस्ता चावल इस्तेमाल करने का आरोप है।
Q2. यह घोटाला कब सामने आया?
मामला 2 जून 2026 को शुरू हुआ जब बालाघाट से छिंदवाड़ा भेजा गया चावल अपने तय ठिकाने नहीं पहुंचा, और 5 जून 2026 को औपचारिक FIR दर्ज हुई।
Q3. यह घोटाला कहां-कहां फैला है?
यह मामला मुख्य रूप से बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों से जुड़ा है।
Q4. घोटाले की कुल रकम कितनी है?
शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में ₹1,160-1,200 करोड़ तक के दावे किए गए थे, लेकिन FCI ने स्पष्ट किया है कि पुष्ट डायवर्जन सिर्फ 242.50 क्विंटल चावल तक सीमित है।
Q5. अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, और 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।
Q6. सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
FIR दर्ज करने, संयुक्त निरीक्षण टीम भेजने, संबंधित डिस्टिलरी की सिक्योरिटी डिपॉजिट व चावल आपूर्ति रोकने, ब्याज सब्सिडी रोकने, SIT बनाने और चावल मिल पर ₹44.12 लाख का जुर्माना लगाकर उसे ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई हो चुकी है।
Q7. दोषियों पर आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
SIT की जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल होने, लाइसेंस/अनुबंध रद्द होने और वसूली की कार्रवाई होने की संभावना है, लेकिन अभी अंतिम फैसला आना बाकी है।
Q8. इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
बालाघाट पुलिस द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT), जिसका नेतृत्व IG ललित सक्यवार कर रहे हैं।
