झारखंड सरकार ने JSSC-CGL व TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द कीं। CM हेमंत सोरेन के फैसले के बाद छात्र नेता डीएन महतो ने 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म की। जानें पूरा घटनाक्रम, मांगें और आगे की रणनीति।
झारखंड में महीनों से चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार ने JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय) परीक्षा और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी TDPL द्वारा 2014 से अब तक कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपनी 16 दिन पुरानी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? एक छात्र नेता का सफर
33 वर्षीय देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के रांची जिले के कपिडीह गांव के रहने वाले हैं। एक साधारण परिवार से आने वाले महतो के पिता एक सरकारी स्कूल शिक्षक थे, जिनकी शिक्षा और ईमानदारी की सीख ने उनके जीवन को दिशा दी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बुंडू से पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) का रुख किया, जहां से उन्होंने 2018-2020 के बीच स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
महतो सिर्फ एक आंदोलनकारी नहीं, बल्कि एक विद्वान भी हैं — उनके पास संस्कृत और कुड़माली (आदिवासी व क्षेत्रीय भाषा) में प्रथम श्रेणी की पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्रियां हैं, साथ ही उन्होंने हजारीबाग से बी.एड. (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की डिग्री भी हासिल की है।
छात्र सक्रियता की शुरुआत: महतो का छात्र आंदोलन से जुड़ाव 2015 में शुरू हुआ, जब उन्होंने झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियां, देरी और भ्रष्टाचार को करीब से देखा। तभी से उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीति जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई है।
राजनीति में भी सक्रिय: महतो सिर्फ छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहे — उन्होंने चुनावी राजनीति में भी हाथ आजमाया है। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव रांची सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा, और इसके बाद 2024 का झारखंड विधानसभा चुनाव सिल्ली सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के टिकट पर लड़ा। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपना पेशा “छात्र” और “सामाजिक कार्यकर्ता” बताया है।
“झारखंड के सोनम वांगचुक”: मौजूदा आंदोलन में महतो ने जब 2 अगस्त की रात रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो उन्हें मीडिया और छात्रों ने “झारखंड का सोनम वांगचुक” कहना शुरू कर दिया — यह तुलना NEET पेपर लीक को लेकर वांगचुक की भूख हड़ताल से प्रेरित थी। महतो ने खुद कहा था कि लंबे विरोध के बावजूद सरकार से ठोस जवाब न मिलने पर अनशन ही आखिरी विकल्प बचा था।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में महतो ने लिखा था: “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ और 25 जुलाई से दिन-रात चल रहे सत्याग्रह में बदल गया, अब एक कठिन मोड़ पर पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से चलाने की अपील भी की, यह कहते हुए कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा अभ्यर्थियों के भविष्य की है।
(संपादकीय नोट: चुनावी हलफनामों के सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार महतो के खिलाफ अतीत में कुछ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी भी उपलब्ध है। तथ्यात्मक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए इसे अलग से वेरिफाई कर उपयुक्त संदर्भ के साथ शामिल किया जा सकता है।)
क्या हुआ सोमवार की रात?
सोमवार देर शाम विशेष कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की कि राज्य सरकार JSSC-CGL परीक्षा और TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा संचालित सभी परीक्षाएं रद्द कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का भी ऐलान किया गया।
इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी की मौजूदगी में अपनी भूख हड़ताल तोड़ी। महतो का यह अनशन 16वें दिन में पहुंच चुका था, जबकि व्यापक आंदोलन 2 जुलाई से चल रहा था।
आंदोलन की जड़ें: कब और कैसे शुरू हुआ विवाद
JSSC-CGL परीक्षा पहले भी कई बार सवालों के घेरे में रह चुकी है। फरवरी 2024 में तय परीक्षा जनरल नॉलेज पेपर लीक के आरोपों के चलते स्थगित करनी पड़ी थी, और उससे पहले जनवरी 2024 की तीसरी शिफ्ट की परीक्षा भी लीक के कारण रद्द हुई थी।
अगस्त 2026 में मामला तब और गंभीर हो गया जब CID जांच में खुलासा हुआ कि 2024 की JSSC-CGL परीक्षा भी लीक हुई थी। जांच में आरोपी अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से पूछताछ में पता चला कि करीब 15 उम्मीदवारों से प्रति व्यक्ति 12 लाख रुपये लेकर पेपर सप्लाई किया गया, यानी कुल करीब 1.80 करोड़ रुपये की उगाही हुई थी।
इसी बीच जुलाई के अंत से हजारों परीक्षार्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार धरने पर बैठ गए। छात्रों की मुख्य मांगें थीं—14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करना, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच, तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता।
छात्रों को दिल्ली में हुए NEET (UG) 2026 पेपर लीक विरोध यानी Cockroach Janta Party (CJP) आंदोलन से भी प्रेरणा मिली, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खत्म हुआ था।
सरकार की क्रमिक रियायतें
आंदोलन जैसे-जैसे तेज हुआ, सरकार पर दबाव बढ़ता गया:
- 10 अगस्त: छात्रों ने विधानसभा तक मार्च निकाला।
- 16 अगस्त (रविवार): छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ छह घंटे लंबी मैराथन बैठक हुई, जिसमें सरकार तीन परीक्षाएं रद्द करने और 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में ED जांच पर सहमत हुई। हालांकि उस समय JSSC-CGL रद्द नहीं हुआ, क्योंकि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार के अनुसार अदालत इस मामले की निगरानी कर रही थी।
- 17 अगस्त (सोमवार): देर शाम कैबिनेट बैठक के बाद अंततः JSSC-CGL सहित TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा हुई।
डीएन महतो ने क्या कहा?
अनशन तोड़ने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए महतो ने कहा:
“हम सभी छात्रों, अभिभावकों, मीडिया, पुलिस प्रशासन और विशेष रूप से झारखंड सरकार व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस आंदोलन में समर्थन और सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद करते हैं। जांच बहुत बारीकी से की जा रही है और हर भ्रष्ट व्यक्ति को पकड़ा जा रहा है।”
उन्होंने इसे “झारखंड के लिए बड़ी जीत” बताया, लेकिन साफ किया कि यह संघर्ष का अंत नहीं है: “मैं फिलहाल अपना विरोध स्थगित कर रहा हूं, लेकिन सुधार के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा।” महतो ने कड़े कानून और परीक्षा प्रणाली में निगरानी-ऑडिट की मांग भी दोहराई।
गौरतलब है कि महतो ने JSSC-CGL रद्द करने के फैसले को मुश्किल बताया, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया ज्वाइनिंग चरण तक पहुंच चुकी थी और कई उम्मीदवार पद पा भी चुके थे। फिर भी उन्होंने इसे छात्रों के हित में सरकार का साहसिक कदम करार दिया।
आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि महतो का अनशन खत्म हो गया है, आंदोलन पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। JPSC-JSSC सुधार मंच के नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि विरोध जारी रहेगा, क्योंकि छात्रों की एक अहम मांग—CBI जांच—अभी पूरी नहीं हुई है। छात्रों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रणाली में स्थायी और पारदर्शी सुधार नहीं होते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
आगे क्या होगा?
- गठित समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देगी।
- छात्र संगठन CBI जांच की मांग पर अड़े हैं।
- 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी छात्रों की मांगें अभी लंबित हैं।
- JSSC-CGL की नई परीक्षा तिथि और प्रक्रिया पर सरकार जल्द निर्णय ले सकती है।
FAQ SECTION
Q1. JSSC-CGL परीक्षा क्यों रद्द की गई?
पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद, लंबे छात्र आंदोलन के दबाव में झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
Q2. डीएन महतो कौन हैं?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता हैं, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिन तक भूख हड़ताल की।
Q3. TDPL क्या है और इसकी परीक्षाएं क्यों रद्द हुईं?
TDPL (TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) एक ब्लैकलिस्टेड एजेंसी है जिसने 2014 से झारखंड में कई भर्ती परीक्षाएं कराईं। अनियमितताओं के आरोपों के बाद इसकी सभी परीक्षाएं रद्द की गई हैं।
Q4. क्या छात्र आंदोलन पूरी तरह खत्म हो गया है?
नहीं। महतो की भूख हड़ताल खत्म हुई है, लेकिन CBI जांच की मांग पूरी न होने के कारण JPSC-JSSC सुधार मंच जैसे संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
Q5. सरकार ने सुधार के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है, जो परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देगी।
Q6. डीएन महतो को “झारखंड का सोनम वांगचुक” क्यों कहा जाता है?
अगस्त 2026 में जब महतो ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो उनकी तुलना NEET पेपर लीक को लेकर भूख हड़ताल करने वाले जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से की जाने लगी।
Q7. महतो 2015 से कैसे छात्र नेता बने?
महतो 2015 से छात्र आंदोलन से जुड़े हैं, जब उन्होंने झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं देखीं। तभी से वे छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीति जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2024 में रांची लोकसभा सीट से निर्दलीय और सिल्ली विधानसभा सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के टिकट पर चुनाव भी लड़ा।
