राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर 14 अलग-अलग आरोप लगाए हैं। हर आरोप को अलग करके, उसके पीछे के तथ्य और चुनाव आयोग-बीजेपी के जवाब के साथ यहां पढ़ें पूरा फैक्ट चेक।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, बीजेपी और मतदाता सूची को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई अलग-अलग आरोप लगाए हैं। 24 सितंबर 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनमें से कई आरोप एक साथ दोहराए गए।
यहां हम इन आरोपों को 14 अलग-अलग हिस्सों में बांटकर हर एक की अलग से पड़ताल कर रहे हैं। ध्यान रहे, ये सभी राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोप हैं। कुछ का आधार मीडिया रिपोर्ट्स में मिलता है, जबकि कई दावे अभी सिर्फ राजनीतिक स्तर पर हैं, अदालत या स्वतंत्र जांच से साबित नहीं हुए हैं।
आरोप 1: सभी हाल के चुनावों में गड़बड़ी को लेकर “100% यकीन”
राहुल गांधी का दावा है कि उन्हें अब पूरा यकीन है कि 2024 लोकसभा चुनाव और उसके बाद के विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
फैक्ट चेक: यह एक व्यक्तिगत राजनीतिक दावा है, कोई आंकड़ा या रिपोर्ट नहीं जिसे स्वतंत्र रूप से परखा जा सके। “100% यकीन” जैसा दावा अपने आप में सत्यापन योग्य तथ्य नहीं है, बल्कि आगे बताए गए बाकी आरोपों (जैसे महादेवपुरा, महाराष्ट्र) के आधार पर बनाई गई राय है।
आरोप 2: चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट पर नियंत्रण खो दिया
गांधी का कहना है कि चुनाव आयोग अब मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित नहीं कर पा रहा और आयोग के भीतर भी इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फैक्ट चेक: चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि उसने नियंत्रण खोया है। इसके उलट आयोग का रुख है कि सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। यह दावा आरोप 3 (नीचे) से जुड़ा है, जिसका अपना तथ्यात्मक आधार अलग से जांचा जा सकता है।
आरोप 3: दो चुनाव आयुक्तों ने SIR फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई
गांधी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई, जो आंतरिक मतभेद दिखाता है।
फैक्ट चेक: यह आंकड़ा राहुल गांधी का अपना नहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट से आया है। रिपोर्ट में फॉर्म 6 में बदलाव और अपील अधिकृति जैसे ठोस उदाहरण भी दिए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे “मतभेद” कहने से इनकार किया है और कहा है कि ड्राफ्ट स्तर पर सवाल उठाना सामान्य प्रक्रिया है। खुद संधू और जोशी ने अब तक इस पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
आरोप 4: CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा और “सरकारी गवाह” बनने की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की और कहा कि उन्हें कथित गड़बड़ी की जानकारी जांच एजेंसियों के सामने रखते हुए “सरकारी गवाह” बनना चाहिए।
फैक्ट चेक: यह सीधे तौर पर एक राजनीतिक मांग है, किसी कानूनी प्रक्रिया या शिकायत पर आधारित नहीं। चुनाव आयोग या सरकार की ओर से इस मांग को स्वीकार करने का कोई संकेत नहीं मिला है।
आरोप 5: PM मोदी और अमित शाह पर वोट चोरी की साजिश में शामिल होने का आरोप
गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी कथित चुनावी गड़बड़ी से जोड़ा।
फैक्ट चेक: यह भी एक राजनीतिक आरोप है, किसी दस्तावेज़ी सबूत या जांच रिपोर्ट के हवाले से नहीं। मोदी या शाह की ओर से इस आरोप पर सीधा जवाब सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है; जवाब मुख्यतः चुनाव आयोग और बीजेपी प्रवक्ताओं की ओर से आया है।
आरोप 6: चुनाव आयोग और बीजेपी की “मिलीभगत” का आरोप
अगस्त 2025 की अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गांधी ने कहा था कि चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर वोटर लिस्ट में हेरफेर कर रहे हैं।
फैक्ट चेक: चुनाव आयोग ने इस आरोप को तत्काल “मिसलीडिंग” (भ्रामक) करार दिया था और अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक “फैक्ट चेक” जारी करते हुए गांधी से नियम 20(3)(बी) के तहत हलफनामा देकर शिकायत दर्ज कराने को कहा था। गांधी ने यह मांग खारिज करते हुए कहा कि वे संविधान की शपथ पहले ही ले चुके हैं। यानी यह आरोप अब भी दोनों पक्षों के बीच खुला विवाद है, अदालत से तय नहीं हुआ।
आरोप 7: महाराष्ट्र में मतदाताओं की असामान्य वृद्धि
गांधी का दावा है कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच के कुछ महीनों में जितने नए वोटर जुड़े, वह पिछले कई सालों में जुड़े वोटरों से भी ज्यादा थे, और यह संख्या राज्य की आबादी वृद्धि से भी असामान्य रूप से ज्यादा थी।
फैक्ट चेक: यह आंकड़ा कांग्रेस की अपनी गणना पर आधारित है, जिसे गांधी ने सार्वजनिक तौर पर पहले भी उठाया था। चुनाव आयोग ने इसका बिंदुवार खंडन जारी नहीं किया है और यह विषय अब भी विवाद में है। बीजेपी और चुनाव आयोग की ओर से इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं माना गया है।
आरोप 8: कर्नाटक के महादेवपुरा में 1,00,250 वोटों की चोरी
अगस्त 2025 में गांधी ने कर्नाटक की महादेवपुरा सीट पर कांग्रेस की अपनी जांच के आधार पर 1,00,250 संदिग्ध वोटों का दावा किया था, जिसमें डुप्लिकेट वोटर, फर्जी पते और बिना फोटो वाले वोटर जैसी श्रेणियां शामिल थीं।
फैक्ट चेक: यह गांधी के सबसे विस्तृत आंकड़ों वाले आरोपों में एक है। बंगलूरू सेंट्रल लोकसभा सीट पर कांग्रेस-बीजेपी की हार-जीत का अंतर करीब 32,707 वोट का था, जबकि इसके भीतर आने वाली महादेवपुरा विधानसभा सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के वोटों में करीब 1,14,046 वोट का बड़ा अंतर था। इसी अंतर को आधार बनाकर कांग्रेस ने अपना विश्लेषण पेश किया।
चुनाव आयोग ने इस दावे को “भ्रामक” बताते हुए गांधी से हलफनामे पर शिकायत देने को कहा, जिसे गांधी ने ठुकरा दिया। एक साल बाद, 2026 में कर्नाटक SEC ने कांग्रेस की इस शिकायत को चुनाव आयोग के पास भेजा है, ताकि इसे राज्य में चल रहे SIR के दौरान परखा जा सके। यानी यह मामला अब भी प्रशासनिक जांच के दायरे में है, इसका कोई अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।
आरोप 9: Form 6 के दुरुपयोग से फर्जी मतदाता जोड़ने का आरोप
गांधी और कांग्रेस का कहना है कि नए मतदाता जोड़ने वाले फॉर्म 6 का दुरुपयोग करके बड़ी संख्या में फर्जी नाम मतदाता सूची में जोड़े गए, खासकर महादेवपुरा में।
फैक्ट चेक: बीजेपी ने इस आरोप को सीधे खारिज किया है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि फॉर्म में माता-पिता का नाम जोड़ने से जुड़ा कोई नया या मनमाना प्रावधान नहीं किया गया। हालांकि द इंडियन एक्सप्रेस की अलग रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जुलाई में फॉर्म 6 में एक नया अनिवार्य सवाल जरूर जोड़ा गया था, जिसे लेकर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने ही प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। यानी फॉर्म 6 में बदलाव होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है, लेकिन उसे “फर्जी मतदाता जोड़ने” की मंशा से जोड़ना अब भी एक विवादित व्याख्या है।
आरोप 10: SIR से असली मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने का आरोप
गांधी का तर्क है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं का मतदान अधिकार प्रभावित हो सकता है।
फैक्ट चेक: यह आंशिक रूप से एक सत्यापित तथ्य पर आधारित तर्क है, क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार SIR के तहत देशभर में अब तक करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, यह संख्या खुद आधिकारिक आंकड़ों से जुड़ी है। लेकिन इन हटाए गए नामों में से कितने वास्तव में अपात्र या डुप्लिकेट थे और कितने असली मतदाताओं के, इसका कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
आरोप 11: “वोट से संविधान तक पूरी चेन टूट गई”
गांधी का सैद्धांतिक तर्क है कि अगर वोट प्रभावित होता है, तो उससे बनने वाली सरकार, कानून और संस्थाएं भी अपनी वैधता खो देती हैं।
फैक्ट चेक: यह एक राजनीतिक-सैद्धांतिक तर्क है, न कि कोई सत्यापन योग्य तथ्य। इसकी सच्चाई पूरी तरह इस पर निर्भर करती है कि ऊपर बताए गए वोटर लिस्ट संबंधी आरोप (7, 8, 9) कितने साबित होते हैं, जो अभी विवादित हैं।
आरोप 12: 2024 लोकसभा चुनाव समेत कई चुनावों को “rigged” बताना
गांधी ने कहा कि उनके पास यह मानने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कथित तौर पर गड़बड़ी वाले थे।
फैक्ट चेक: चुनाव आयोग या किसी अदालत ने अब तक 2024 लोकसभा चुनाव या इनमें से किसी विधानसभा चुनाव को अमान्य या गड़बड़ी वाला घोषित नहीं किया है। कांग्रेस ने भी अब तक किसी चुनाव को औपचारिक रूप से हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिए चुनौती नहीं दी है, जो कानूनी तौर पर ऐसे आरोपों को परखने का तरीका है।
आरोप 13: बीजेपी को कभी एंटी-इनकंबेंसी न झेलने पर सवाल
गांधी ने कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद बीजेपी को एंटी-इनकंबेंसी का सामना नहीं करना पड़ता, जो शक पैदा करता है।
फैक्ट चेक: यह एक राजनीतिक विश्लेषण है, प्रत्यक्ष सबूत नहीं। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर किसी पार्टी को लगातार एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ा है, तो वह खुद कांग्रेस है। एंटी-इनकंबेंसी का न दिखना कई राजनीतिक कारणों (संगठन, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे) से भी हो सकता है, यह अपने आप में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है।
आरोप 14: लोकसभा और विधानसभा नतीजों में भारी अंतर का आरोप
गांधी ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ महीने पहले लोकसभा चुनाव में जो गठबंधन मजबूत दिखा, वह विधानसभा चुनाव में लगभग साफ हो गया, जो असामान्य है।
फैक्ट चेक: लोकसभा और विधानसभा नतीजों में अंतर आना भारतीय राजनीति में नई बात नहीं है, यह स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधन समीकरणों से भी हो सकता है। हालांकि गांधी का यह विशेष आरोप है कि महाराष्ट्र में यह अंतर वोटर लिस्ट में हुई असामान्य बढ़ोतरी (आरोप 7) से जुड़ा है, जो अभी एक विवादित और असत्यापित कड़ी है।
इस पूरे विवाद से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य
मौजूदा SIR देश में 2002-2005 के बाद पहला ऐसा अखिल भारतीय गहन पुनरीक्षण है, यानी करीब दो दशक बाद इतने बड़े पैमाने पर पूरी मतदाता सूची की दोबारा जांच हो रही है।
मौजूदा दौर का पहला SIR राहुल गांधी की किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले, 24 जून 2025 को बिहार में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था, विधानसभा चुनाव से पहले। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कई सुनवाइयां हो चुकी हैं।
महादेवपुरा, जिसे लेकर गांधी ने सबसे बड़ा आरोप लगाया, इससे पहले भी सुर्खियों में रह चुकी है। 2022 में यहां “चिलुमे ट्रस्ट” नाम के एक एनजीओ पर, जिसे शहर प्रशासन ने वोटर जागरूकता के लिए अधिकृत किया था, मतदाताओं का निजी डेटा गैरकानूनी तरीके से जुटाने का आरोप लगा था। एक सरकारी जांच में यह माना भी गया कि डेटा “अवैध रूप से” जुटाया गया था, हालांकि हेरफेर का कोई सबूत नहीं मिला।
द हिंदू की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, महादेवपुरा में एक दौर में करीब 66% वोटर आवेदन खारिज हो रहे थे। इसके बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को फॉर्मों की दोबारा जांच के आदेश देने पड़े थे, और मामला कर्नाटक हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था।
चुनाव आयोग एक तीन-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत बनी है। मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त पद पर बराबर दर्जे के माने जाते हैं।
मौजूदा तीनों आयुक्तों की नियुक्ति 2023 में बने नए कानून, मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, के तहत हुई है। संधू ने अपनी आपत्तियों में खुद इसी 2023 के कानून का हवाला दिया था।
FAQ:
Q1. राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए हैं?
Answer: उन्होंने मुख्य रूप से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, चुनाव आयुक्तों के बीच आंतरिक मतभेद, महादेवपुरा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में असामान्य बदलाव, और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जैसे आरोप लगाए हैं।
Q2. क्या इन आरोपों में से कोई अदालत या स्वतंत्र जांच से साबित हुआ है?
Answer: नहीं, फिलहाल इनमें से कोई भी आरोप अदालत या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से साबित नहीं हुआ है। ज्यादातर मामले अभी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक शिकायत के स्तर पर हैं।
Q3. महादेवपुरा वोट चोरी के दावे पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
Answer: चुनाव आयोग ने इसे भ्रामक बताया और राहुल गांधी से नियम 20(3)(बी) के तहत हलफनामे पर शिकायत देने को कहा था, जिसे गांधी ने ठुकरा दिया। 2026 में यह शिकायत कर्नाटक SEC के जरिए फिर से चुनाव आयोग तक पहुंची है।
Q4. दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट किसने प्रकाशित की?
Answer: यह रिपोर्ट द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित की थी, राहुल गांधी की अपनी खोज नहीं है। चुनाव आयोग ने इसे “मतभेद” कहने से इनकार किया है।
SOURCE/FACT-CHECK NOTE:
यह लेख आपके दिए गए मूल दस्तावेज़ के साथ-साथ Amar Ujala, Business Today, IANS, Hindustan Times (Magzter), The Wire, The News Minute, Newslaundry, Punjab Kesari, Scroll.in, The Federal, DNA India, LatestLY और SIR की पृष्ठभूमि के लिए Vajiram & Ravi की रिपोर्ट पर आधारित है, जो अगस्त 2025 और सितंबर 2026 की समयावधि को कवर करती हैं।
ध्यान देने योग्य बिंदु:
- सभी 14 बिंदु राहुल गांधी/कांग्रेस के आरोप हैं। जहां भी कोई ठोस आंकड़ा या मीडिया रिपोर्ट का हवाला मिला, उसे “फैक्ट चेक” में अलग से बताया गया है। जहां कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं मिला, वहां साफ लिखा गया है कि यह अभी सिर्फ राजनीतिक दावा है।
- चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों के पक्ष को जहां भी उपलब्ध था, शामिल किया गया है, ताकि लेख एकतरफा न लगे।
- यह एक जारी राजनीतिक विवाद है, इसलिए स्थिति आगे बदल भी सकती है। पब्लिश करने से पहले नवीनतम अपडेट जरूर जांच लें।
