भारत में पहली बार डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा को मंजूरी मिली। जानें किसे लगवानी चाहिए, कितनी डोज़ लगेगी, क्या हैं फायदे और साइड इफेक्ट्स।
देश में हर साल मानसून के दौरान डेंगू के हजारों मामले सामने आते हैं और कई लोगों की जान भी चली जाती है। इस बीमारी से निपटने की दिशा में अब भारत ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (Qdenga) को मंजूरी दे दी है। जापानी दवा कंपनी टकेडा की यह वैक्सीन अब तक दुनिया के 42 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल हो रही है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मान्यता भी मिल चुकी है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह वैक्सीन कैसे काम करती है, इसे कौन लगवा सकता है, कितनी डोज़ लगेगी और इसके क्या फायदे और साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
क्या है क्यूडेंगा वैक्सीन?
क्यूडेंगा एक लाइव एटेन्युएटेड यानी कमजोर किए गए जीवित वायरस से बनी वैक्सीन है, जिसे रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक से तैयार किया गया है। यह डेंगू वायरस के टाइप-2 ढांचे पर आधारित है, जिसमें बाकी तीन डेंगू सीरोटाइप के प्रोटीन जीन भी जोड़े गए हैं। इसका मतलब है कि यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रमुख स्ट्रेन — DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4 — से सुरक्षा देने के लिए डिज़ाइन की गई है।
इसे जर्मनी की कंपनी टकेडा जीएमबीएच बनाती है और भारत में इसे टकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया आयात करेगी। आगे चलकर देश में ही वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए टकेडा ने भारतीय कंपनी बायोलॉजिकल ई के साथ करार भी किया है।
किसे लगवानी चाहिए यह वैक्सीन?
CDSCO ने इस वैक्सीन को 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले किसी खून की जांच की जरूरत नहीं है, यानी यह पता लगाने की जरूरत नहीं कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं। जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और जिन्हें कभी नहीं हुआ, दोनों तरह के लोग यह वैक्सीन लगवा सकते हैं। इससे उन इलाकों में इसे लगाना आसान हो जाएगा जहां डेंगू के मामले ज्यादा आते हैं, क्योंकि पहले जांच की झंझट खत्म हो जाती है।
कितनी डोज़ और कैसे लगेगी?
यह वैक्सीन दो डोज़ में लगाई जाती है। पहली डोज़ के तीन महीने बाद दूसरी डोज़ दी जाती है। इसे 0.5ml की मात्रा में त्वचा के नीचे (सब्क्यूटेनियस) इंजेक्शन के जरिए लगाया जाता है। यह इंजेक्शन डॉक्टर या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में ही लगवाना चाहिए।
वैक्सीन के फायदे
- यह भारत में मंजूर होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है, जो चारों डेंगू सीरोटाइप से सुरक्षा देने का दावा करती है
- वैक्सीन लगवाने से पहले खून की जांच की जरूरत नहीं, जिससे प्रक्रिया आसान हो जाती है
- दुनिया के 42 से ज्यादा देशों में पहले से इस्तेमाल हो रही है और WHO की मान्यता प्राप्त है
- भारत में हुए फेज-3 ट्रायल में अलग-अलग आबादी पर इसकी सुरक्षा और असर परखा जा चुका है
- गंभीर डेंगू और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत को कम करने में मदद कर सकती है
साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?
किसी भी वैक्सीन की तरह क्यूडेंगा के भी कुछ साइड इफेक्ट्स सामने आए हैं, हालांकि ये आमतौर पर हल्के और अस्थायी होते हैं।
सबसे आम साइड इफेक्ट्स (लगभग हर 5 में से 1 व्यक्ति में हो सकते हैं):
- इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द और लालिमा
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- थकान और कमजोरी महसूस होना
इसके अलावा करीब 10 में से 1 व्यक्ति को हल्का बुखार भी आ सकता है। राहत की बात यह है कि ये लक्षण आमतौर पर हल्के से मध्यम स्तर के होते हैं और कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। साथ ही, दूसरी डोज़ के बाद इनका असर पहली डोज़ की तुलना में कम देखा गया है।
कुछ अन्य संभावित साइड इफेक्ट्स: गले में हल्का इंफेक्शन, भूख कम लगना, चिड़चिड़ापन, नींद ज्यादा आना, जी मिचलाना, उल्टी, चक्कर आना, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, और खांसी।
गंभीर लेकिन दुर्लभ मामले: बहुत कम मामलों में गंभीर एलर्जिक (एनाफिलैक्टिक) रिएक्शन की आशंका रहती है। अगर वैक्सीन लगवाने के बाद सांस लेने में दिक्कत, जीभ या होंठ नीले पड़ना, शरीर पर रैशेज़, चेहरे या गले में सूजन, ब्लड प्रेशर गिरने से चक्कर या बेहोशी, या दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ होना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
किन्हें यह वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए?
- जिन्हें क्यूडेंगा की पहली डोज़ से एलर्जिक रिएक्शन हुआ हो
- जिनका इम्यून सिस्टम किसी बीमारी, दवा या एचआईवी इंफेक्शन के कारण कमजोर हो
- गर्भवती महिलाएं
- स्तनपान कराने वाली महिलाएं
कीमत और उपलब्धता
भारत में इस वैक्सीन की आधिकारिक कीमत अभी घोषित नहीं की गई है। वैक्सीन के रोलआउट के साथ इसकी उपलब्धता और कीमत को लेकर स्पष्ट जानकारी आने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन का नाम क्या है?
भारत में मंजूर हुई पहली डेंगू वैक्सीन का नाम क्यूडेंगा (Qdenga) है, जिसे जापानी कंपनी टकेडा ने बनाया है।
2. क्यूडेंगा वैक्सीन किस उम्र के लोग लगवा सकते हैं?
यह वैक्सीन 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूर की गई है।
3. क्या वैक्सीन लगवाने से पहले डेंगू टेस्ट कराना जरूरी है?
नहीं, क्यूडेंगा लगवाने से पहले यह जांचने की जरूरत नहीं कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ था या नहीं। इसे दोनों तरह के लोग लगवा सकते हैं।
4. क्यूडेंगा वैक्सीन की कितनी डोज़ लगती है? इसकी दो डोज़ लगती हैं, पहली डोज़ के तीन महीने बाद दूसरी डोज़ दी जाती है।
5. क्या गर्भवती महिलाएं यह वैक्सीन लगवा सकती हैं?
नहीं, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को यह वैक्सीन नहीं दी जानी चाहिए।
6. क्या क्यूडेंगा के गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं?
ज्यादातर साइड इफेक्ट्स हल्के होते हैं जैसे इंजेक्शन की जगह पर दर्द, सिरदर्द या हल्का बुखार, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। बहुत दुर्लभ मामलों में गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
7. भारत में यह वैक्सीन कहां उपलब्ध होगी और इसकी कीमत क्या होगी?
फिलहाल कीमत और उपलब्धता को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। रोलआउट के साथ यह जानकारी सामने आएगी।
