ग्वालियर से 70 किमी दूर होटल में चल रहा फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को लोन के नाम पर ठगते थे आरोपी, 4 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार।
प्रकाशन तिथि: 26 जुलाई 2026 | स्थान: ग्वालियर, मध्य प्रदेश
ग्वालियर पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह कॉल सेंटर ग्वालियर से करीब 70 किलोमीटर दूर मोहना थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर स्थित जैनपथ होटल के कमरों से पिछले पांच महीनों से संचालित किया जा रहा था।
होटल के कमरा नंबर-6 में दबिश, 4 गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार जैनपथ होटल के कमरा नंबर-6 में दबिश देने पर चार युवक लैपटॉप पर ऑनलाइन कॉलिंग और डेटा प्रोसेसिंग करते हुए पकड़े गए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अभिषेक राजपूत, शिवेंद्र नरेंद्र सिंह परिहार, आर्यन राजपूत उर्फ लाला (झांसी निवासी) और शुभोम घोष उर्फ शुभम (दीमापुर, नागालैंड निवासी) के रूप में हुई है। गिरोह का मास्टरमाइंड प्रबल प्रताप सिंह परिहार पिछले करीब पांच महीने से फरार है, जिसके निर्देश पर यह पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था।
लोन दिलाने का झांसा देकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी
जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को अमेरिका की “लेंडिंग क्लब” कंपनी का एजेंट बताकर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे। उन्हें कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद पीड़ितों से सोशल सिक्योरिटी नंबर और बैंकिंग जानकारी हासिल कर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर एप्पल गिफ्ट कार्ड, नाइकी गिफ्ट कार्ड और अन्य गिफ्ट वाउचर के जरिए ठगी की जाती थी।
विदेशी ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी अपनी असली पहचान छिपाकर FRANK, LUIS HAMILTON और BRUCE जैसे फर्जी अंग्रेजी नामों का इस्तेमाल करते थे। अमेरिकी नागरिकों का निजी डेटा उन्हें वॉट्सएप और ई-मेल के जरिए मुहैया कराया जाता था।
पुलिस को मिले अहम सबूत
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल फोन, 4 हेडफोन, अंग्रेजी में तैयार की गई ठगी की स्क्रिप्ट, ग्राहकों का डेटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
हर महीने सैलरी के साथ कमीशन भी मिलता था
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों को हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की सैलरी दी जाती थी, जबकि ठगी की रकम पर उन्हें 5 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन भी मिलता था। यानी जितनी बड़ी ठगी, उतना बड़ा मुनाफा — इस लालच में युवा इस अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा बनते चले गए।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी, बड़े खुलासे की उम्मीद
पुलिस फिलहाल फरार मास्टरमाइंड प्रबल प्रताप सिंह परिहार की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के तार देश और विदेश में किन-किन लोगों से जुड़े हैं। पुलिस का मानना है कि आगे की जांच में इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
क्यों अहम है यह खुलासा
यह मामला दिखाता है कि साइबर ठगी के गिरोह अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेशनल हाईवे किनारे बने छोटे होटलों को भी ठिकाना बना रहे हैं। ग्वालियर पुलिस की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के खिलाफ मध्य प्रदेश में हो रही सख्त कार्रवाइयों की एक और मिसाल है।
FAQ Section
Q1. ग्वालियर का फर्जी कॉल सेंटर कहां चल रहा था?
यह फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर ग्वालियर से करीब 70 किलोमीटर दूर मोहना थाना क्षेत्र में एनएच-46 स्थित जैनपथ होटल के कमरा नंबर-6 से संचालित किया जा रहा था।
Q2. इस मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने अभिषेक राजपूत, शिवेंद्र नरेंद्र सिंह परिहार, आर्यन राजपूत उर्फ लाला और शुभोम घोष उर्फ शुभम — इन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
Q3. आरोपी किस तरह ठगी करते थे?
आरोपी खुद को अमेरिका की “लेंडिंग क्लब” कंपनी का एजेंट बताकर अमेरिकी नागरिकों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देते थे, फिर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर गिफ्ट कार्ड के जरिए पैसे ठगते थे।
Q4. गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है और क्या वह पकड़ा गया?
गिरोह का मास्टरमाइंड प्रबल प्रताप सिंह परिहार है, जो पिछले पांच महीने से फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
Q5. पुलिस ने मौके से क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल फोन, 4 हेडफोन, अंग्रेजी में तैयार ठगी की स्क्रिप्ट और ग्राहकों का डेटा बरामद किया है।
Q6. आरोपियों को कितनी सैलरी और कमीशन मिलता था?
आरोपियों को हर महीने 15 से 20 हजार रुपये सैलरी दी जाती थी, साथ ही ठगी की रकम पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन भी मिलता था।
