डोडा/किश्तवाड़, 6 जुलाई 2026: सोमवार की वो रात जम्मू-कश्मीर के चिनाब वैली के लोग शायद जल्दी नहीं भूल पाएंगे। घड़ी की सुइयां रात के करीब 4 बजे को छू रही थीं, ज़्यादातर लोग गहरी नींद में थे, और तभी प्रेम नगर के ऊपर आसमान फट पड़ा। कुछ ही मिनटों में पहाड़ी से मिट्टी, बड़े-बड़े पत्थर और मलबे का सैलाब नीचे की तरफ दौड़ पड़ा — और सीधे बाटोटे-डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे (NH-244) पर आ गिरा।
जब तक लोगों को कुछ समझ आता, हाईवे पर खड़ी दर्जनों गाड़ियां — ट्रक, बसें, मिनी-बसें, ऑटो रिक्शा — मलबे में दब चुकी थीं। तीन ट्रक, दो बसें, तीन मिनी-बसें और आधा दर्जन से ज़्यादा छोटे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। कुल मिलाकर एक दर्जन से ज़्यादा गाड़ियां और सड़क किनारे की कुछ दुकानें-इमारतें इस आपदा की भेंट चढ़ गईं। हाईवे पूरी तरह बंद हो गया और आठ घंटे से ज़्यादा समय तक कोई भी गाड़ी उस रास्ते से नहीं गुज़र सकी।
क्वार पावर प्रोजेक्ट में मंज़र और भी डरावना था
लेकिन असली तबाही का मंज़र दिखा किश्तवाड़ जिले के दुल इलाके में, जहां 540 मेगावाट के क्वार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण चल रहा है। यहां पानी इतनी तेज़ी और ताकत से आया कि टेल रेस टनल एरिया में मिट्टी-पत्थर लेकर सीधे परिसर के भीतर घुस गया। परिसर में खड़ी कई गाड़ियां पलक झपकते ही मलबे के नीचे दफन हो गईं।
हालात संभालने के लिए भारी अर्थ-मूविंग मशीनें तुरंत मौके पर बुलानी पड़ीं। पूरे दिन मलबा हटाने और फंसी गाड़ियों को बाहर निकालने का काम चलता रहा।
“किसी की जान नहीं गई” — इतनी बड़ी आपदा में यही सबसे बड़ी राहत रही
जैसे ही खबर दिल्ली पहुंची, PMO में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बिना देर किए जम्मू के डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार को फोन लगाया। बातचीत के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बात साफ कही — इस पूरी घटना में किसी की जान नहीं गई। इतनी बड़ी तबाही के बीच यही सबसे बड़ी सांस लेने वाली खबर रही, और अब तक किसी भी रिपोर्ट में किसी के हताहत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सिर्फ प्रेम नगर नहीं, पूरा जम्मू संभाग भीगा
रात की यह बारिश सिर्फ डोडा और किश्तवाड़ तक सीमित नहीं रही। उधमपुर, रियासी, सांबा, कठुआ और जम्मू शहर में भी बादल जमकर बरसे। उज्ज, बसंतर और तवी नदी समेत इलाके के कई छोटे-बड़े नाले उफान पर आ गए। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों में सांबा में सबसे ज़्यादा 90mm बारिश हुई, उसके बाद कठुआ में 66.2mm, कटरा में 44.4mm, डोडा में 42mm, जम्मू में 41.8mm, उधमपुर में 40.6mm, भद्रवाह में 33.6mm और किश्तवाड़ में 24mm बारिश दर्ज हुई।
दिलचस्प बात यह रही कि इतनी भारी बारिश के बावजूद कटरा में माता वैष्णो देवी की यात्रा नहीं रुकी। हां, सुबह के वक्त हेलिकॉप्टर सेवा में थोड़ी देर के लिए दिक्कत आई, लेकिन कुछ घंटों में सब सामान्य हो गया। दूसरी तरफ किस्मत इतनी मेहरबान नहीं रही माछैल यात्रा के श्रद्धालुओं पर — हाईवे बंद होने से उनकी यात्रा अटक गई, और प्रशासन ने साफ कह दिया कि जब तक रास्ता सुरक्षित घोषित नहीं होता, तब तक आगे न बढ़ें।
अभी खतरा टला नहीं है
मौसम विभाग की चेतावनी थोड़ी चिंता बढ़ाने वाली है। 6 से 8 जुलाई के बीच चिनाब वैली और पीर पंजाल इलाके में फिर से भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। और यह सिलसिला यहीं नहीं थमेगा — 9 से 12 जुलाई तक भी मौसम कुछ इसी तरह उतार-चढ़ाव भरा रहने का अनुमान है। एक कमज़ोर पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून हवाओं के आपस में टकराने से अमरनाथ यात्रा के पहलगाम और सोनमर्ग रूट पर भी बारिश का खतरा बढ़ गया है।
यह पहली बार नहीं है
अगर आपको लगता है कि यह कोई इकलौती घटना है, तो चिनाब वैली का इतिहास कुछ और ही कहानी बताता है। ठीक पिछले साल, अगस्त 2025 में, किश्तवाड़ के चिश्तोती गांव में बादल फटने से माछैल माता यात्रा के दौरान इतना बड़ा हादसा हुआ था कि 62 लोगों की जान चली गई और 41 लोग हमेशा के लिए लापता रह गए। इससे भी पहले, जुलाई 2021 में किश्तवाड़ के दचन इलाके के होंज़र में बादल फटने से सड़कें, पुल और घर तक बह गए थे। और रामबन जिला तो जैसे हर साल जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर भूस्खलन और बाढ़ की चपेट में आता ही रहता है।
तो क्या ये सिर्फ प्रकृति का कहर है, या इंसानों का भी हाथ है?
इस घटना ने एक पुराना लेकिन अहम सवाल फिर से हवा दे दी है — क्या क्वार जैसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और बिना सोचे-समझे हो रहा निर्माण, इस पहले से ही नाज़ुक हिमालयी इलाके में आपदाओं का असर और बढ़ा रहा है? स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता कहते हैं कि बादल फटना और तेज़ बारिश तो प्रकृति का ही खेल है, लेकिन जिस तरह से इसके नतीजे लगातार भयावह होते जा रहे हैं, उसके पीछे इंसानी दखल की भी बड़ी भूमिका है।
एक तकनीकी बात अभी भी साफ नहीं हुई है — मौसम विभाग ने अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है कि यह वाकई “क्लाउडबर्स्ट” ही था या फिर सिर्फ बहुत ज़्यादा तेज़ बारिश। इसका डेटा आना अभी बाकी है।
फिलहाल प्रशासन की तरफ से एक ही सलाह है — जब तक हाईवे पूरी तरह सुरक्षित घोषित न हो जाए, यात्रा से बचें, और नदी-नालों या भूस्खलन-संभावित इलाकों के आसपास बिल्कुल न जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल: डोडा-किश्तवाड़ हाईवे पर बादल कब फटा? जवाब: 6 जुलाई 2026 को सुबह करीब 4 बजे प्रेम नगर इलाके में बादल फटा, जिससे NH-244 हाईवे क्षतिग्रस्त हो गया।
सवाल: क्या इस घटना में किसी की जान गई? जवाब: नहीं, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई घायल हुआ।
सवाल: क्वार हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को कितना नुकसान हुआ? जवाब: 540 मेगावाट के क्वार प्रोजेक्ट के टेल रेस टनल एरिया में पानी घुस गया, जिससे परिसर में खड़ी कई गाड़ियां मलबे में दफन हो गईं। भारी मशीनरी से मलबा हटाने का काम जारी है।
सवाल: हाईवे कब तक बंद रहा? जवाब: हाईवे लगभग 8 घंटे तक पूरी तरह बंद रहा, जिसके बाद बहाली का काम शुरू किया गया।
सवाल: क्या आगे भी बारिश का खतरा है? जवाब: हां, मौसम विभाग ने 6 से 12 जुलाई के बीच चिनाब वैली और पीर पंजाल क्षेत्र में और भी भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की चेतावनी दी है।
