डकैत जगन गुर्जर कौन था? जानिए चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की पूरी कहानी — बचपन, परिवार, वसुंधरा राजे को धमकी, सचिन पायलट के सामने सरेंडर, और अजमेर जेल में हुई उसकी हत्या तक।
चंबल के बीहड़ों की बात हो और जगन गुर्जर का नाम न आए, ऐसा मुमकिन नहीं। तीन दशक तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस को छकाने वाला यह डकैत आखिर में एक ऐसी जगह मारा गया जहां उसे सबसे सुरक्षित होना चाहिए था — जेल के अंदर। 29 जून 2026 को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में उसी के एक साथी कैदी ने उसकी हत्या कर दी। चलिए, शुरू से जानते हैं कि आखिर यह कहानी कैसे शुरू हुई थी और कहां जाकर खत्म हुई।
शुरुआत बड़ी मामूली थी
यकीन करना मुश्किल है, लेकिन जिस आदमी के नाम से कभी पूरे इलाके में सन्नाटा पसर जाता था, उसका बचपन बेहद साधारण था। धौलपुर जिले के डांग इलाके के भगवतीपुरा गांव में पैदा हुआ जगन एक ऐसे घर से था जहां पिता शिवचरण मंदिर में पूजा-पाठ करते थे और घर दूध-पशुपालन के सहारे चलता था। खुद जगन भी बचपन में दूध बेचने में हाथ बंटाता था। यानी अपराध की दुनिया से इसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था।
धौलपुर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गा सिंह ने भी हाल ही में यही कहा — जगन कोई पैदाइशी अपराधी नहीं था। हालात और गलत संगत ने उसे धीरे-धीरे उस रास्ते पर धकेला।
कैसे शुरू हुआ डकैत जगन गुर्जर बनने का सफर?
इसका जवाब उतना सीधा नहीं है जितना लगता है। मीडिया में इसे लेकर कई कहानियां चलती रहीं। किसी ने कहा कि मंदिर में प्रसाद बांटने पर मंदिर कमेटी से झगड़ा हुआ, जगन ने हाथ उठा दिया, फिर पुलिस के डर से भाग खड़ा हुआ। किसी ने कहा कि चोरी के एक मामूली मामले में जेल जाना ही उसकी बर्बादी की जड़ बना।
लेकिन जो कहानी सबसे ज़्यादा सुनने को मिलती है, वो 1994 की है — जगन के जीजा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बदला लेने की आग में उसने अपने चार भाइयों को साथ लिया और एक गैंग खड़ी कर ली। यहीं से असली कहानी शुरू होती है।
शुरुआत में वह मोहन गुर्जर नाम के एक बड़े डकैत के गिरोह में शामिल हुआ। लेकिन ज़्यादा दिन गुजरे नहीं कि उसने अपने ही उस्ताद मोहन गुर्जर को ठिकाने लगा दिया और खुद गैंग का मालिक बन बैठा। यही वो पल था जब जगन गुर्जर का नाम चंबल के सबसे डरावने नामों की लिस्ट में आ गया।
पूरा परिवार ही अपराध में उतर गया था
अजीब बात यह है कि यह सिर्फ जगन की कहानी नहीं थी — पूरा परिवार इसी रास्ते पर चल पड़ा था। भाई लाल सिंह गुर्जर 10 साल की सज़ा काट रहा है और भरतपुर की सेंट्रल जेल में बंद है। एक और भाई पान सिंह गुर्जर को उम्रकैद हुई, फिलहाल वह धौलपुर की ओपन जेल में पैरोल पर है। तीसरा भाई पप्पू गुर्जर तो जगन के साथ ही अजमेर की उसी हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था।
निजी ज़िंदगी की बात करें तो जगन ने तीन शादियां कीं, जिनमें से एक पत्नी उसके साथ अपराध की दुनिया में भी बराबर की साझेदार रही। इसके अलावा एक नाम और सामने आता रहा — कोमेश। कहा जाता है कि अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए वह भी बीहड़ों में उतरी थी और आगे चलकर जगन के गैंग से जुड़ गई। 2008 में मध्य प्रदेश में एक पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से वह घायल हुई थी, और उस वक्त वह गर्भवती भी थी।
जब उसने वसुंधरा राजे के महल को उड़ाने की धमकी दी
अगर जगन गुर्जर की दबंगई की एक कहानी सबसे ज़्यादा याद रखी जाती है, तो वो 2008 की है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान भरतपुर के पीलूपुरा में हथियार लहराते हुए उसने खुलेआम तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल को बम से उड़ा देने की धमकी दे डाली। इस एक धमकी ने पूरे राज्य को हिला दिया, और सरकार ने उस पर 11 लाख रुपये का इनाम रख दिया।
पुलिस का शिकंजा जब बहुत कसा, तो 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में जगन ने अपने 25 साथियों के साथ हथियार डाल दिए। यह सरेंडर उस दौर की सबसे बड़ी खबर बनी।
लेकिन जगन का किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ। जेल से छूटते ही वह फिर उसी दुनिया में लौट आया। 2018 में तत्कालीन IG मालिनी अग्रवाल के सामने एक और सरेंडर हुआ। 2019 में एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई — धौलपुर के सायपुर गांव में मुखबिर न मिलने पर उसने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया। और 2022 में बाड़ी के विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को फोन पर जान से मारने की धमकी दी, जिसका ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
आखिरी बार 7 फरवरी 2022 को करौली पुलिस के सामने सरेंडर करने के बाद उसे अजमेर जेल भेजा गया। कुल मिलाकर तीनों राज्यों में उस पर हत्या, डकैती, लूट, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के तहत 100 से भी ज्यादा — कहीं-कहीं तो 123 तक — मामले दर्ज थे।
कैसे खत्म हुआ डकैत जगन गुर्जर का जीवन सफर
मार्च 2026 में करीब चार महीने जमानत पर रहने के बाद जगन को आर्म्स एक्ट के एक नए मामले में गिरफ्तार कर राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल भेज दिया गया था।
29 जून, सोमवार को दोपहर करीब 3 बजे जब बैरक नंबर 2 खोली गई, तो जगन गुर्जर वहां मृत मिला। जांच में पता चला कि उसी बैरक में पिछले तीन महीने से बंद उसके साथी कैदी विष्णु जाट (उर्फ बौना) ने गमछे से उसका गला घोंट दिया था। विष्णु खुद भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड में आरोपी था।
क्या हुआ था उस सुबह? कहा जा रहा है कि नाश्ते के दौरान दोनों के बीच कहासुनी हुई। पूछताछ में विष्णु ने बताया कि जगन उसे छोटी-छोटी बातों पर ताने मारता था और लगातार मानसिक रूप से परेशान करता था। एक दूसरी रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विवाद की जड़ विष्णु की बहन को लेकर की गई कोई आपत्तिजनक बात थी। पुलिस ने साफ किया है कि यह कोई गैंगवार नहीं, बल्कि जेल के भीतर का निजी झगड़ा था। खबर मिलते ही SP हर्षवर्धन अग्रवाला समेत पुलिस और FSL की टीम मौके पर पहुंच गई, और 3 जुलाई को विष्णु जाट को प्रोडक्शन वारंट के ज़रिए विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।
परिवार बोला — यह हत्या है, जांच होनी चाहिए
खबर फैलते ही परिवार अजमेर पहुंच गया और JLN हॉस्पिटल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गया। बेटे आसाराम ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम ज्ञापन भेजा — आरोप लगाया कि जेल प्रशासन की मिलीभगत से यह हुआ, और मांग की कि CBI जांच हो, CCTV फुटेज खंगाली जाए, परिवार को सुरक्षा दी जाए। परिवार का सवाल सीधा है — अगर दोनों बंदियों के बीच विवाद की जानकारी पहले से थी, तो उन्हें अलग-अलग बैरक में क्यों नहीं रखा गया?
आखिर में
एक धार्मिक परिवार के दूध बेचने वाले लड़के से चंबल के सबसे डरावने नाम तक, और फिर जेल की चारदीवारी के भीतर एक छोटे से झगड़े में मौत — जगन गुर्जर की कहानी राजस्थान के दस्यु इतिहास के एक पूरे युग के खत्म होने जैसी लगती है। लेकिन उसकी यह मौत जितने सवाल खत्म करती है, उससे कहीं ज़्यादा नए सवाल खड़े कर गई है — जेल की सुरक्षा पर, प्रशासन की जवाबदेही पर। इनके जवाब शायद जांच पूरी होने पर ही मिलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. जगन गुर्जर कौन था?
जगन गुर्जर राजस्थान के धौलपुर जिले का एक कुख्यात डकैत था, जो 1994 से चंबल के बीहड़ों में सक्रिय रहा और जिस पर राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में 100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे।
2. जगन गुर्जर डकैत कैसे बना?
1994 में उसके जीजा की हत्या के बाद बदला लेने के लिए उसने अपने चार भाइयों के साथ मिलकर गैंग बनाई और डकैती की दुनिया में उतर गया। शुरुआत में वह मोहन गुर्जर के गैंग का हिस्सा था, बाद में उसी की हत्या कर खुद गैंग का सरगना बन गया।
3. जगन गुर्जर की मौत कैसे हुई?
29 जून 2026 को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में उसके साथी बंदी विष्णु जाट (उर्फ बौना) ने गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
4. जगन गुर्जर की हत्या किसने की?
आरोपी का नाम विष्णु जाट (उर्फ बौना) है, जो पहले से भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड में आरोपी था और जगन के साथ ही बैरक में बंद था।
5. जगन गुर्जर ने वसुंधरा राजे को क्या धमकी दी थी?
2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल को बम से उड़ाने की धमकी दी थी, जिसके बाद उस पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ था।
6. जगन गुर्जर ने सरेंडर कब-कब किया?
उसने कम से कम चार बार सरेंडर किया — 2009 (सचिन पायलट की मौजूदगी में), 2018 (IG मालिनी अग्रवाल के सामने), 2019 और आखिरी बार 7 फरवरी 2022 को करौली पुलिस के सामने।
7. जगन गुर्जर के परिवार में कौन-कौन है?
उसके तीन भाई — लाल सिंह, पान सिंह और पप्पू गुर्जर — सभी पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। बेटे आसाराम ने उसकी मौत के बाद CBI जांच की मांग की है।
8. क्या जगन गुर्जर की हत्या की जांच हो रही है?
हां, राजस्थान पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी विष्णु जाट को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं परिवार ने निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग की है।
(यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित है। मामला अभी पुलिस जांच के अधीन है, इसलिए आगे नए तथ्य सामने आ सकते हैं।)
