तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी बगावत! दिल्ली में बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर शुभेंदु अधिकारी से मिले 14 लोकसभा सांसद। 20 सांसद बना सकते हैं अलग गुट। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
New Delhi / Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त का सबसे बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। कोलकाता से शुरू हुई तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी बगावत अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। दिल्ली में विपक्ष की ‘INDIA’ गठबंधन की बैठक के बीच, ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के 14 लोकसभा सांसदों ने दिल्ली में बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक बेहद गोपनीय बैठक की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसद पाला बदलकर अपना एक अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं।
💥 भूपेंद्र यादव के घर ‘महाबैठक’, शुभेंदु अधिकारी भी रहे मौजूद
दिल्ली के सियासी गलियारों से आ रही खबरें ममता बनर्जी की नींद उड़ाने वाली हैं। बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर हुई इस बैठक में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए।
- सांसदों की मौजूदगी: इस बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी जैसे बड़े चेहरों की मौजूदगी की खबरें हैं।
- बगावत की अगुवाई: माना जा रहा है कि लोकसभा में इस बागी गुट की कमान वरिष्ठ सांसद काकोली घोष संभाल सकती हैं।
एंटी-डिफेक्शन लॉ का पेंच: लोकसभा में टीएमसी के पास फिलहाल 28 सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने और अपनी सदस्यता सुरक्षित रखने के लिए बागी गुट को कम से कम 19 सांसदों (दो-तिहाई) के समर्थन की जरूरत होगी। सूत्रों का दावा है कि बागी खेमा 20 सांसदों का आंकड़ा पार करने का दावा कर रहा है।
🛑 दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा, ममता पर लगाए गंभीर आरोप
सांसदों की इस बगावत से ठीक पहले टीएमसी को एक और करारा झटका लगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता और 13 साल से राज्यसभा में टीएमसी के चीफ व्हिप रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सांसद पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर ने साफ कहा:
“पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी मनमाने ढंग से फैसले ले रहे हैं। बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद भी तानाशाही रवैया नहीं बदला, जिससे पार्टी के कई सांसद और नेता बेहद नाराज हैं।”
📊 विधायकों के बाद अब सांसदों की बारी: समझें पूरा समीकरण
TMC में यह टूट अचानक नहीं हुई है। इससे पहले बंगाल विधानसभा में भी टीएमसी के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं, जिन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना है। विधायकों के बाद अब सांसदों का यह विद्रोह ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को पूरी तरह कमजोर कर सकता है।
| सदन | कुल टीएमसी सदस्य | बागी सदस्यों की संख्या | वर्तमान स्थिति |
| विधानसभा (Bengal) | 80 विधायक | 58 विधायक | ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में अलग गुट |
| लोकसभा (Delhi) | 28 सांसद | 20 सांसद (दावा) | भूपेंद्र यादव और शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात |
📉 डैमेज कंट्रोल में जुटीं ममता, अभिषेक बनर्जी के कतरे पर
दिल्ली में मौजूद ममता बनर्जी इस वक्त भारी दबाव में हैं। अपनी ही पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए उन्होंने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। हालांकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने रहेंगे, लेकिन उनके एकाधिकार को कम करने के लिए राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह डैमेज कंट्रोल बहुत देर से उठाया गया कदम है, क्योंकि बागी सांसद अब ‘नो रिटर्न’ की स्थिति में पहुंच चुके हैं और दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अलग गुट की मान्यता के लिए पत्र सौंपने या सामूहिक इस्तीफे के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
