मध्य प्रदेश STF ने डबरा से शुरू हुए फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 70 पासपोर्ट जांच में लिए, 4 गिरफ्तार। जानें एक ही पते और गवाह का पैटर्न और ताजा अपडेट।
मध्य प्रदेश एसटीएफ ने ग्वालियर के डबरा से शुरू हुए एक फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा किया है। अब तक 70 पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं। एसटीएफ के मुताबिक इनमें से कई आवेदनों में एक ही पता और एक ही गवाह इस्तेमाल हुआ। चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और आठ अन्य की तलाश जारी है।
एक ही पते से 17 से 20 पासपोर्ट, हर आवेदन में एक ही गवाह
एसटीएफ के डीआईजी राहुल कुमार लोढ़ा के मुताबिक जांच की शुरुआत एक शिकायत से हुई। डबरा के सेमरिया ताल इलाके के एक ही पते से करीब 21-22 पासपोर्ट आवेदन आए थे। इनमें से लगभग 17-18 मंजूर हो गए, जबकि कुछ खारिज हुए। पासपोर्ट धारकों के नाम और सरनेम इलाके के स्थानीय लोगों से मेल नहीं खा रहे थे, जिससे शक गहराया।
जांच में सामने आया कि इन आवेदनों में लोगों को डबरा के बौद्ध विहार क्षेत्र में रहने वाला बौद्ध धर्म का अनुयायी दिखाया गया था। एसटीएफ के मुताबिक सभी आवेदनों में गवाह के तौर पर रियाल चौधरी के हस्ताक्षर थे। इस पते से बने पासपोर्ट की संख्या कुछ रिपोर्ट्स में 17 और कुछ में 20 बताई गई है।
70 पासपोर्ट कहां-कहां: शहरवार ब्योरा
एसटीएफ के हवाले से आई रिपोर्ट्स के अनुसार 70 पासपोर्ट इस तरह बंटे हैं:
- भोपाल: करीब 40 (अन्ना नगर, गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में एक मठ के पते पर)
- डबरा (ग्वालियर): 17
- बैतूल: 11
- छिंदवाड़ा और पांढुर्णा: एक-एक
एसटीएफ का कहना है कि ये वे पासपोर्ट हैं जिन्हें अब तक ट्रेस किया जा सका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ और पासपोर्ट ऐसे भी हो सकते हैं जिनकी पहचान अभी नहीं हुई है। जांच के अनुसार गड़बड़ी की यह कड़ी 2021 में डबरा से शुरू हुई थी।
कैसे बने दस्तावेज और पासपोर्ट
एसटीएफ की शुरुआती जांच के मुताबिक आरोपियों ने असम या देश के किसी और हिस्से को अपना जन्म या निवास स्थान बताकर वेरिफिकेशन पार किया। इसके लिए पहले असम में पहचान के दस्तावेज बनवाए गए। फिर बैतूल या दूसरी जगह जाकर नई पहचान और स्थानीय दस्तावेज तैयार किए गए। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार डबरा में फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की फर्जी मार्कशीट तैयार कराई गई थी।
एसटीएफ के हवाले से यह भी बताया गया है कि रियाल चौधरी ने पूछताछ में हर पासपोर्ट के बदले 20 से 25 हजार रुपये लेने की बात कही। इस पैसे में और कौन-कौन हिस्सेदार था, इसकी जांच चल रही है। ये सभी बातें फिलहाल पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।
अब तक चार गिरफ्तार, आठ की तलाश
एसटीएफ ने 7 सितंबर को इस रैकेट का खुलासा किया था। पहले दो आरोपी, रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी, पकड़े गए। बाद की रिपोर्ट्स में अब तक चार गिरफ्तारियां बताई गई हैं। एसटीएफ ने रियाल चौधरी को मामले का मास्टरमाइंड बताया है। उसके नाम से अलग-अलग शहरों से चार पासपोर्ट बनने की भी बात कही गई है।
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के बांग्लादेश से जुड़े होने की शुरुआती जानकारी मिली है, लेकिन उनकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन अभी जारी है। कुछ रिपोर्ट्स में आठ और लोगों की तलाश की बात कही गई है। एसटीएफ की टीमें असम, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों में जांच कर रही हैं, जबकि पांच टीमें मध्य प्रदेश के बाहर छापेमारी में लगी बताई गई हैं। एसटीएफ किसी अंतरराष्ट्रीय गिरोह की संभावना भी टटोल रही है।
वेरिफिकेशन पर सवाल: अफसरों की भूमिका जांच के घेरे में
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन और दूसरी जांच से कैसे निकल गए। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक जांचकर्ता देख रहे हैं कि कई संदिग्ध आवेदनों में एक जैसे पते, गवाह और संपर्क नंबर कैसे पास हुए।
एसटीएफ ने भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल के पुलिस अधिकारियों व दूसरे विभागों के कर्मचारियों की भूमिका को संदिग्ध मानकर अपनी निगरानी में रखा है। इनकी संख्या कुछ रिपोर्ट्स में करीब 12 और कुछ में 25 बताई गई है। डीआईजी लोढ़ा ने कहा है कि आपराधिक साजिश मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी और लापरवाही पाए जाने पर केस दर्ज किए जाएंगे। अभी किसी अधिकारी पर आरोप तय नहीं हुआ है।
एसटीएफ यह भी जांच रही है कि इन पासपोर्ट से किसी ने विदेश यात्रा की या नहीं। साथ ही डबरा और भोपाल के विहार-मठों के पतों के इस्तेमाल की भी पड़ताल हो रही है। इसका मतलब यह नहीं कि वहां के लोग दोषी हैं। जांच यह देखने की है कि इन पतों का इस्तेमाल आवेदनों में कैसे हुआ।
किन बातों पर अभी स्पष्टता नहीं
सभी 70 पासपोर्ट धारकों की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि एसटीएफ ने अभी नहीं की है। जांच में सिर्फ यह कहा गया है कि 70 पासपोर्ट संदिग्ध हैं और उनकी पड़ताल चल रही है। रिपोर्ट्स में गिरफ्तार आरोपियों के नामों की वर्तनी और गिरफ्तारी की जगहों को लेकर भी फर्क है। पुलिस की अगली आधिकारिक जानकारी के बाद तस्वीर साफ होगी।
FAQ:
Q1. फर्जी पासपोर्ट का यह मामला क्या है?
Answer: मध्य प्रदेश एसटीएफ ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्ट के रैकेट का खुलासा किया है। जांच डबरा (ग्वालियर) के एक ही पते से कई आवेदनों से शुरू हुई। अब कुल 70 पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं।
Q2. 70 पासपोर्ट किन शहरों से जुड़े हैं?
Answer: एसटीएफ के हवाले से आई रिपोर्ट्स के अनुसार भोपाल से करीब 40, डबरा से 17, बैतूल से 11 और छिंदवाड़ा व पांढुर्णा से एक-एक पासपोर्ट जुड़े हैं।
Q3. अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
Answer: रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। रियाल चौधरी को मास्टरमाइंड बताया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में आठ और लोगों की तलाश की बात कही गई है।
Q4. क्या सभी 70 पासपोर्ट धारक बांग्लादेशी हैं?
Answer: यह अभी पुष्ट नहीं है। एसटीएफ ने शुरुआती जांच में गिरफ्तार आरोपियों के बांग्लादेश से जुड़े होने की बात कही है, लेकिन पासपोर्ट धारकों की पहचान और राष्ट्रीयता की पड़ताल जारी है।
Q5. क्या अफसरों की भी जांच हो रही है?
SOURCE/FACT CHECK NOTE:
उपयोग किए गए स्रोत (सभी 7 से 16 सितंबर 2026 के बीच के):
Free Press Journal (भोपाल): चार गिरफ्तारियां, आठ की तलाश, 25 अधिकारी संदिग्ध, जन्मस्थान असम बताने की “लेयर्ड रणनीति”, संभावित अंतरराष्ट्रीय गिरोह। Answer: हां। एसटीएफ ने कई जिलों के पुलिस अधिकारियों और दूसरे विभागों के कर्मचारियों की भूमिका को संदिग्ध मानकर निगरानी में रखा है। अभी किसी पर आरोप तय नहीं हुआ है और जांच जारी है।
ETV Bharat हिंदी और अंग्रेजी (डबरा से 20 पासपोर्ट, 70 पासपोर्ट, लोढ़ा के बयान, 20-25 हजार रुपये प्रति पासपोर्ट)।
ANI (10 सितंबर): 60-70 पासपोर्ट, भोपाल के अन्ना नगर से 40, डबरा से 17, रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी।
IANS (14 सितंबर, Punjab Kesari अंग्रेजी): 70 से ज्यादा पासपोर्ट, चार गिरफ्तार, सेमरिया ताल के पते से 17 पासपोर्ट, भोपाल में 40, नागपुर में पकड़े गए आरोपी का पासपोर्ट गुजरात से जारी।
