LNIPE ग्वालियर: जांच टीम बैरंग लौटी, नाराज छात्रों ने फिर बंद किया प्रशासनिक भवन

LNIPE ग्वालियर छात्र आंदोलन

ग्वालियर LNIPE में श्रुति उपाध्याय मौत मामले में छात्रों का 15वां दिन प्रदर्शन, जांच टीम से वार्ता बेनतीजा रहने पर प्रशासनिक भवन फिर बंद किया गया।

लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE), ग्वालियर में छात्रा श्रुति उपाध्याय की मौत को लेकर 15 दिन से धरने पर बैठे छात्रों ने बुधवार को एक बार फिर संस्थान का प्रशासनिक भवन बंद करा दिया। केंद्रीय खेल मंत्रालय से पहुंची जांच टीम के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद छात्र नारेबाजी करते हुए ऑडिटोरियम से बाहर निकले और भवन के चैनल गेट बंद कर दिए।

छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्रार को हटाने, 50 लाख रुपए मुआवजे और निष्पक्ष जांच जैसी उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों ने जांच टीम को सुनाई खरी-खरी बात

जांच टीम के सामने प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। छात्रों ने दो टूक कहा, “जब वीसी पर प्रेशर आया तो रातोंरात कमेटी बन गई और आप आ गए। हम 14 दिन से धरने पर बैठे थे, तब आप कहां थे।” छात्रों के इस सीधे सवाल पर टीम के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।

मंगलवार रात कुलगुरु और स्टाफ को बनाया गया था बंधक

इससे एक दिन पहले, मंगलवार रात छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया था। नाराज छात्रों ने कुलगुरु प्रोफेसर कल्पना शर्मा, रजिस्ट्रार और अन्य स्टाफ सदस्यों को प्रशासनिक भवन के भीतर करीब तीन घंटे तक बंधक बनाकर रखा।

रात करीब 9 बजे पुलिस बल मौके पर पहुंचा और सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ अन्य रिपोर्टों में यह अवधि करीब दो घंटे बताई गई है।

क्या है पूरा मामला?

LNIPE की गुवाहाटी शाखा (नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल सेंटर, सोनापुर, असम) में बीपीएड तृतीय वर्ष की छात्रा और टेनिस खिलाड़ी श्रुति उपाध्याय की सितंबर की शुरुआत में मौत हो गई थी। पश्चिम बंगाल की रहने वाली 22 वर्षीय श्रुति को पेट दर्द की शिकायत के बाद संस्थान के स्वास्थ्य केंद्र में इलाज दिया गया था। बाद में उन्हें सोनापुर जिला अस्पताल और फिर गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी मौत हो गई। कुछ रिपोर्टों में मौत की तारीख 8 सितंबर, जबकि अन्य में 9 सितंबर बताई गई है।

छात्रों का आरोप है कि इलाज में देरी हुई और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया गया। हालांकि, मौत के सटीक मेडिकल कारण की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और इलाज की प्रक्रिया में वास्तव में कोई चूक हुई या नहीं, यह भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हो पाया है। इसी घटना के बाद से LNIPE ग्वालियर परिसर के छात्र मुख्य गेट पर धरना दे रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें

छात्रों की प्रमुख मांगें

छात्र संगठन शुरू से चार मुख्य मांगों पर अड़ा है, और प्रशासन की ओर से इन पर ठोस कार्रवाई न होना ही ताजा टकराव की मुख्य वजह है:

  • रजिस्ट्रार को हटाया जाए: छात्रों की मांग है कि LNIPE ग्वालियर के रजिस्ट्रार यतेंद्र कुमार सिंह को तुरंत पद से हटाया जाए। छात्रों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय किए बिना जांच अधूरी रहेगी।
  • 50 लाख रुपए मुआवजा: छात्र मृतका श्रुति उपाध्याय के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग पर अड़े हैं। असम सरकार की ओर से मिले 9 लाख रुपए को छात्र नाकाफी बता रहे हैं।
  • निष्पक्ष जांच: गुवाहाटी परिसर की चिकित्सा सुविधाओं और इलाज में हुई कथित देरी की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
  • जिम्मेदारों पर कार्रवाई: छात्रों का कहना है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉक्टर, वार्डन और अन्य कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए, न कि सिर्फ तबादला या सस्पेंशन जैसी औपचारिकता।

इन्हीं मांगों को लेकर छात्र 15 दिन से डटे हैं, और दबाव बढ़ाने के लिए चार छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

प्रशासन की ओर से अब तक क्या कार्रवाई हुई

कुलगुरु प्रोफेसर कल्पना शर्मा के अनुसार, छात्रों की कुछ मांगें मान ली गई हैं। गुवाहाटी परिसर में इलाज से जुड़े एक शिक्षक को सस्पेंड किया गया है, जबकि वहां तैनात डॉक्टर और नर्स को हटा दिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक समिति भी बनाई गई है।

असम सरकार की ओर से मृतका के परिवार को कुल 9 लाख रुपए (4 लाख और 5 लाख रुपए की दो अलग-अलग राशियों में) मुआवजा दिया जा चुका है। बावजूद इसके, छात्र 50 लाख रुपए मुआवजे की अपनी मांग पर अड़े हैं।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का हस्तक्षेप

मामले ने सियासी तूल भी पकड़ लिया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया से बात कर छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इसमें 50 लाख रुपए मुआवजा, मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार वार्डन के खिलाफ कार्रवाई और रजिस्ट्रार यतेंद्र कुमार सिंह को हटाने या स्थानांतरित करने की मांग शामिल है।

फिलहाल LNIPE ग्वालियर परिसर में तनाव बना हुआ है। छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना और प्रदर्शन जारी रहेगा।

FAQ:

Q1. श्रुति उपाध्याय कौन थीं और उनकी मौत कैसे हुई?

Answer: श्रुति उपाध्याय LNIPE की गुवाहाटी शाखा में बीपीएड तृतीय वर्ष की छात्रा और टेनिस खिलाड़ी थीं। पेट दर्द की शिकायत के बाद इलाज के दौरान सितंबर की शुरुआत में उनकी मौत हो गई थी।

Q2. LNIPE ग्वालियर के छात्र किस बात का विरोध कर रहे हैं?

Answer: छात्र रजिस्ट्रार को हटाने, मृतका के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा देने, गुवाहाटी परिसर की चिकित्सा सुविधाओं की निष्पक्ष जांच और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर हैं।

Q3. मंगलवार रात LNIPE में क्या हुआ था?

Answer: छात्रों ने कुलगुरु प्रोफेसर कल्पना शर्मा, रजिस्ट्रार और अन्य स्टाफ सदस्यों को प्रशासनिक भवन में करीब तीन घंटे तक बंधक बनाकर रखा था। रात करीब 9 बजे पुलिस के पहुंचने पर सभी को बाहर निकाला गया।

Q4. अब तक प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई हुई है?

Answer: गुवाहाटी परिसर के एक शिक्षक को सस्पेंड किया गया है और डॉक्टर-नर्स को हटाया गया है। असम सरकार की ओर से परिवार को 9 लाख रुपए मुआवजा दिया जा चुका है, हालांकि छात्रों की मुख्य मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं।

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