नेपाल बाढ़ः नेपाल-चीन सीमा पर आई बाढ़ में मृतकों की संख्या 1287 पहुंची, करीब 5000 लोग अब भी लापता। जानें ताजा हालात, नुकसान और राहत कार्य की पूरी जानकारी।
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के 10 दिन बाद भी मलबे से जिंदा लोग निकलने का सिलसिला जारी है। नुवाकोट जिले में शुक्रवार को एक चार मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल में फंसी 60 वर्षीय महिला को सुरक्षित बचाया गया। नेपाली सशस्त्र पुलिस बल के मुताबिक, यह घटना बाढ़ आने के दस दिन बाद हुई।
इसी तरह अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग से एक चीनी नागरिक लू हाइताओ को भी जीवित निकाला गया। नेपाली सेना ने बताया कि यह बचाव अभियान नेपाली सेना और विदेशी बचावकर्मियों की संयुक्त टीम ने चलाया, और फिलहाल उसकी सेहत की जांच की जा रही है।
मृतकों की संख्या 1287 पार, आठ जिलों से मिले शव
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक, शुक्रवार तक नेपाल में मृतकों की संख्या 1,287 पहुंच चुकी है। यह प्राधिकरण नेपाल के गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है।
अब तक आठ प्रभावित जिलों से शव बरामद किए गए हैं। सबसे ज्यादा 359 शव चितवन से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व से 219, नवलपरासी पश्चिम से 212, नुवाकोट से 184, रसुवा से 140, गोरखा से 72, धादिंग से 63 और तनहुं से 38 शव बरामद हुए हैं।
प्राधिकरण के अनुसार, अब तक 96 शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंपा जा चुका है। साथ ही, 5,300 से ज्यादा लोगों का घायल होने के कारण इलाज हुआ है।
अब भी करीब 5 हजार लोग लापता
बाढ़ के बाद से लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। सीएनएन की 5 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, एनडीआरआरएमए ने बताया कि नेपाल में अब भी करीब 4,996 लोग लापता हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। एक दिन पहले, 4 सितंबर को यह आंकड़ा 5,083 था, जिसमें रसुवा से 2,130 और नुवाकोट से 2,340 लोग लापता बताए गए थे।
रसुवा और नुवाकोट इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले रहे हैं, जहां अब भी हजारों लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है।
तिब्बत में भी भारी नुकसान, आंकड़ों में अंतर
बाढ़ का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रहा। चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में हुए भूस्खलन में 31 लोगों की मौत हुई और 531 लोग लापता हैं। वहीं मलय मेल की रिपोर्ट में चीनी मीडिया के हवाले से 21 मौतें और 541 लापता होने का आंकड़ा दिया गया है। दोनों आंकड़ों में हल्का अंतर है, हालांकि दोनों ही सितंबर की शुरुआत के हैं।
नेपाल और तिब्बत को मिलाकर कुल आंकड़ा 1,308 मौतें और 5,624 लापता लोगों तक पहुंचता है। इसके अलावा 800 से ज्यादा विदेशी नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं, जिनमें हिमालय में ट्रैकिंग कर रहे पर्यटक और तिब्बत में कैलाश पर्वत की यात्रा पर गए श्रद्धालु शामिल हैं।
मलय मेल के मुताबिक, भारत की नदियों से भी कम से कम 17 शव मिले हैं, जिनके बारे में अधिकारियों का अनुमान है कि वे नेपाल से बहकर आए होंगे। हालांकि इन्हें नेपाल के आधिकारिक आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह
बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत संस्था केयर के मुताबिक, इस आपदा में 32 पुल और करीब 25 मील सड़क बह गई, जिसमें नुवाकोट के बेत्रावती से रसुवागढ़ी सीमा तक जाने वाली पूरी सड़क भी शामिल है। यह सड़क तिब्बत और नेपाल के बीच व्यापार का अहम रास्ता मानी जाती है।
टिमुरे और स्याफ्रुबेसी (स्याब्रु बेसी) जैसी सीमावर्ती बस्तियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जो नेपाल-चीन व्यापार और पर्यटन के लिहाज से अहम मानी जाती हैं। इसके अलावा कुल मिलाकर करीब 748 मेगावाट क्षमता की 14 जलविद्युत और सौर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
26 अगस्त को क्या हुआ था
विकिपीडिया पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की सुबह हिमनद (ग्लेशियर) खिसकने से आई मलबे और पानी की बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग चेकपॉइंट को तबाह कर दिया और त्रिशूली नदी के करीब 72 किलोमीटर लंबे हिस्से में बसी दर्जनों बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।
गिज़मोडो की रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि यह हिमालयी ग्लेशियर हादसे से कई हफ्ते पहले से तेजी से खिसकना शुरू हो गया था। सीएनएन से बात करते हुए आईसीआईएमओडी की क्रायोस्फीयर विश्लेषक प्रशांत बराल ने कहा कि हादसे की जगह के आसपास अब भी अस्थिरता की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि बचा हुआ बर्फ, टूटी चट्टानें और हाल में हिली ढलानें अभी भी असुरक्षित हो सकती हैं।
हालांकि कुछ राहत की खबर भी है। अमेरिका के कोलोराडो यूनिवर्सिटी बोल्डर के पर्वत भूगोलवेत्ता ऑल्टन बायर्स के मुताबिक, ग्लेशियर खिसकने से बने गड्ढे में जमा पानी अब काफी हद तक निकल चुका है, जिससे दोबारा बड़े पैमाने पर पानी छूटने की आशंका पहले जितनी नहीं रही।
चेतावनी तंत्र फेल, स्थानीय स्तर पर लोगों ने बचाई जान
मोंगाबे की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के सरकारी एसएमएस चेतावनी सिस्टम ने इस आपदा में सही तरीके से काम नहीं किया। यह अलर्ट देरी से आया, सिर्फ नेपाली भाषा में था और इसमें किसी खास इलाके के लिए ठोस सलाह भी नहीं थी। ऐसे में स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच फैली अनौपचारिक चेतावनियों ने कई जानें बचाईं।
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल का जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग पूर्वानुमान और चेतावनी तो जारी कर सकता है, लेकिन उसके पास लोगों को हटाने (evacuation) का आदेश देने का कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसा कोई नियम भी नहीं है जो पूर्वानुमान आने पर अपने आप निकासी अभियान शुरू कर दे, जिस वजह से यह फैसला स्थानीय अधिकारियों पर निर्भर रहता है।
बचाव अभियान जारी, अब तक हजारों लोग बचाए गए
विकिपीडिया पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक नेपाल में 11,814 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 324 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। शुरुआती दिनों में अस्पताल और शवगृह भर जाने के बाद घायलों और शवों को भैरहवा, भरतपुर, बुटवल, गोरखा, काठमांडू, नवलपरासी, पाल्पा और पोखरा जैसे शहरों में भेजा गया था।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भी बताया था कि पहले लापता बताए गए पांच ऑस्ट्रेलियाई नागरिक सुरक्षित पाए गए हैं। नेपाल सरकार ने बचाव अभियान में मदद के लिए भारत और चीन, दोनों से सहयोग मांगा है, और नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल व नेपाल पुलिस लगातार तलाशी अभियान में जुटे हैं।
10 दिन बाद भी मलबे से जिंदा लोगों का मिलना बताता है कि प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान अब भी पूरी गंभीरता से चल रहा है, भले ही ज्यादातर उम्मीदें अब कमजोर पड़ चुकी हों।
FAQ:
Q1. नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
Answer: एनडीआरआरएमए के मुताबिक 4 सितंबर तक नेपाल में मृतकों की संख्या 1,287 पहुंच चुकी है, जिनमें सबसे ज्यादा 359 शव चितवन जिले से मिले हैं।
Q2. नेपाल में अभी कितने लोग लापता हैं?
Answer: सीएनएन की 5 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में करीब 4,996 लोग लापता हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
Q3. यह बाढ़ किस वजह से आई थी?
Answer: 26 अगस्त 2026 को हिमालयी ग्लेशियर खिसकने से आई मलबे और पानी की बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा पर ग्यिरोंग चेकपॉइंट और त्रिशूली नदी किनारे बसी बस्तियों को तबाह कर दिया।
Q4. क्या तिब्बत में भी नुकसान हुआ है?
Answer: हां, चीनी मीडिया के मुताबिक तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में 21 से 31 के बीच मौतें और 531 से 541 के बीच लोग लापता बताए गए हैं। अलग-अलग स्रोतों में यह आंकड़ा थोड़ा अलग है।
Q5. बाढ़ से बुनियादी ढांचे को कितना नुकसान हुआ है?
Answer: राहत संस्था केयर के मुताबिक 32 पुल, करीब 25 मील सड़क और करीब 748 मेगावाट क्षमता की 14 जलविद्युत व सौर परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।
SOURCE/FACT CHECK NOTE:
यह लेख निम्नलिखित स्रोतों की जानकारी पर आधारित है: The Kathmandu Post (4 सितंबर 2026), CNN (1-5 सितंबर 2026 की लाइव अपडेट रिपोर्ट्स), Al Jazeera (1 सितंबर 2026), Malay Mail (4 सितंबर 2026), The Tribune/ANI (4 सितंबर 2026), Mongabay (सितंबर 2026), CARE.org की आपातकालीन प्रतिक्रिया रिपोर्ट, Gizmodo, और अंग्रेज़ी विकिपीडिया के “2026 Nepal floods” पेज पर संकलित आधिकारिक व समाचार स्रोत। जहां स्रोतों में आंकड़ों में अंतर पाया गया (जैसे तिब्बत में मृतकों की संख्या), वहां दोनों आंकड़े स्पष्ट रूप से बताए गए हैं। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए प्रकाशन से पहले नवीनतम आंकड़ों की पुष्टि करने की सलाह दी जाती ह
