RBI लाएगा प्लास्टिक के ₹10-₹20 नोट! जानें क्या पुराने नोट होंगे बेकार या चलते रहेंगे?

RBI पॉलिमर नोट ₹10 ₹20

RBI को मिली ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोट टेस्टिंग की मंजूरी। जानें कितने नोट छपेंगे, क्या हैं फायदे और आपके मौजूदा पुराने नोटों का क्या होगा।

भारत में करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव आने वाला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों के फील्ड ट्रायल के लिए सरकार की मंजूरी मिल गई है। यह पहली बार है जब भारत में इतने बड़े पैमाने पर प्लास्टिक करेंसी का परीक्षण होने जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है — क्या आपके पास मौजूद पुराने कागज़ी नोट अमान्य हो जाएंगे? आइए पूरी जानकारी विस्तार से समझते हैं।

क्या है पूरा मामला

वित्त मंत्रालय ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को संसद में बताया कि सरकार ने RBI के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसके तहत ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर बैंक नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि RBI के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर यह प्रस्ताव RBI एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत सरकार को भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है।

ट्रायल के तहत RBI ₹10 और ₹20 के एक-एक अरब (100-100 करोड़) नोट जारी करेगा — यानी कुल मिलाकर करीब 2 अरब पॉलिमर नोट सर्कुलेशन में लाए जाएंगे। ट्रायल सफल रहने पर ही इन नोटों को नियमित रूप से जारी करने पर फैसला लिया जाएगा।

क्या पुराने नोट अमान्य हो जाएंगे

यह सबसे ज़रूरी सवाल है और इसका जवाब साफ है — नहीं। सरकार और RBI दोनों ने स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोट मौजूदा कागज़ी नोटों की जगह नहीं लेंगे, बल्कि उनके साथ-साथ चलन में रहेंगे। फिलहाल पेपर करेंसी को पूरी तरह खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यानी आपके पास मौजूद ₹10 और ₹20 के पुराने पेपर नोट पूरी तरह वैध बने रहेंगे और उन्हें लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।

पॉलिमर नोट क्यों लाए जा रहे हैं

RBI का मानना है कि छोटे मूल्यवर्ग के नोट सबसे ज्यादा हाथों-हाथ चलते हैं, जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं और बार-बार छापने व नष्ट करने की जरूरत पड़ती है। पॉलिमर नोट इस समस्या का समाधान हो सकते हैं क्योंकि:

  • ये नमी, धूल, मिट्टी और मुड़ने के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं
  • कागज़ी नोटों के मुकाबले इनकी उम्र काफी लंबी होती है
  • बार-बार छपाई और नष्ट करने की लागत में कमी आती है, जिससे लंबे समय में खर्च घटता है
  • नकली नोटों पर लगाम — पॉलिमर सब्सट्रेट पर ट्रांसपेरेंट विंडो, विशेष सिक्योरिटी थ्रेड, मेटैलिक डिनॉमिनेशन नंबर और कलर-चेंजिंग पैटर्न जैसे एडवांस सुरक्षा फीचर लगाना आसान होता है, जिनकी नकल करना मुश्किल है

गौरतलब है कि दुनिया के 60 से ज्यादा देश — जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, न्यूजीलैंड और रोमानिया शामिल हैं — पहले से ही पॉलिमर करेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ट्रायल में क्या-क्या परखा जाएगा

फील्ड ट्रायल के दौरान भारत की अलग-अलग जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों में इन पैरामीटर्स की जांच होगी:

  • टिकाऊपन — गर्मी, नमी, धूल और बारिश में नोट कैसा प्रदर्शन करता है
  • घिसाव-प्रतिरोध — बार-बार हाथों में आने पर मुड़ने और फटने की क्षमता
  • हैंडलिंग — आम लोगों के लिए नोट का इस्तेमाल कितना आसान है
  • जनता की स्वीकार्यता — लोग प्लास्टिक करेंसी को कितना अपनाते हैं

तैयारी पहले से शुरू

सरकार की औपचारिक मंजूरी से पहले ही RBI की प्रिंटिंग सहायक कंपनी भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने तैयारी शुरू कर दी थी। 17 जुलाई 2026 को कंपनी ने वैश्विक स्तर पर पॉलिमर सब्सट्रेट सप्लाई के लिए 68,000 रीम की मांग करते हुए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया, जिसकी बोली 18 अगस्त 2026 तक स्वीकार की जाएगी। यह मात्रा दोनों मूल्यवर्ग में बराबर बांटी जाएगी। पॉलिमर नोट बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) नाम के टिकाऊ प्लास्टिक मटीरियल से बनाए जाते हैं, जो पानी, धूल, नमी और रोज़मर्रा की टूट-फूट के प्रति कागज़ की तुलना में कहीं ज्यादा प्रतिरोधी होता है।

क्या डिजिटल पेमेंट पर पड़ेगा असर

RBI ने सरकार को बताया है कि पॉलिमर नोटों का डिजिटल पेमेंट पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी — यह तभी संभव होगा जब नोट नियमित सर्कुलेशन में आ जाएंगे। केंद्रीय बैंक का कहना है कि नकद और डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं और आगे भी साथ-साथ चलते रहने की उम्मीद है।

क्या यह भारत की पहली कोशिश है

नहीं। भारत पहले भी पॉलिमर नोट का ट्रायल करने की कोशिश कर चुका है। 2013 में RBI ने जयपुर, भुवनेश्वर, कोच्चि, शिमला और मैसूर — इन पांच अलग-अलग जलवायु वाले शहरों में ₹10 के एक अरब पॉलिमर नोट जारी करने की योजना बनाई थी, ताकि विविध भौगोलिक परिस्थितियों में परफॉर्मेंस जांची जा सके। हालांकि उस समय यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी और सालों तक RBI की वार्षिक रिपोर्ट्स में भी पॉलिमर नोट का जिक्र नहीं मिला। अब 2026 में यह योजना दोबारा सक्रिय हुई है।

आगे क्या होगा

फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नियमित सर्कुलेशन को लेकर फैसला फील्ड ट्रायल पूरा होने और उसके नतीजे सामने आने के बाद ही लिया जाएगा। अगर ट्रायल सफल रहा, तो आने वाले समय में देशभर में पॉलिमर नोटों को व्यापक स्तर पर लॉन्च करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. RBI कौन-कौन से नोटों का पॉलिमर ट्रायल करेगा?

RBI ₹10 और ₹20 के मूल्यवर्ग में पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों का फील्ड ट्रायल करेगा, जिसमें हर मूल्यवर्ग के एक-एक अरब नोट जारी किए जाएंगे।

2. क्या मेरे पास मौजूद पुराने ₹10-₹20 के नोट अमान्य हो जाएंगे?

नहीं। सरकार ने साफ किया है कि पॉलिमर नोट मौजूदा पेपर नोटों की जगह नहीं लेंगे। आपके पुराने नोट पूरी तरह वैध बने रहेंगे और दोनों तरह की करेंसी साथ-साथ चलन में रहेगी।

3. पॉलिमर नोट पेपर नोट से कैसे अलग हैं?

पॉलिमर नोट बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) प्लास्टिक से बनते हैं, जो नमी, धूल और मुड़ने के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं, ज्यादा टिकाऊ होते हैं और इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो जैसे एडवांस सिक्योरिटी फीचर लगाए जा सकते हैं।

4. पॉलिमर नोट लाने का मकसद क्या है?

मकसद है नोटों की उम्र बढ़ाना, बार-बार छपाई-नष्टीकरण की लागत घटाना और नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए बेहतर सुरक्षा फीचर देना।

5. यह प्रस्ताव किस कानून के तहत मंजूर हुआ?

यह प्रस्ताव RBI एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत RBI के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर सरकार के पास भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है।

6. क्या दुनिया में पहले से पॉलिमर नोट चलन में हैं?

हां, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, न्यूजीलैंड और रोमानिया सहित दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलिमर करेंसी पहले से इस्तेमाल हो रही है।

7. पूरे देश में पॉलिमर नोट कब तक लॉन्च होंगे?

अभी कोई निश्चित तारीख तय नहीं है। यह पूरी तरह फील्ड ट्रायल के नतीजों पर निर्भर करेगा, जिसके बाद ही नियमित सर्कुलेशन पर फैसला लिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *