भोपाल में मूंग की 100% MSP खरीदी की मांग को लेकर हजारों किसान सड़कों पर उतरे, CM हाउस घेराव की तैयारी। जानें किसानों की मांगें, सरकार की प्रतिक्रिया और पूरी टाइमलाइन।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार, 29 जुलाई 2026 को किसान आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। मूंग की फसल की 100% सरकारी खरीदी की मांग को लेकर हजारों किसान सड़कों पर डटे हैं और मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने पर अड़े हैं। मंगलवार शाम से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब तक बेनतीजा है, हालांकि राज्य सरकार ने बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित कर दी है।
किसान आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई
नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, रायसेन, सीहोर और रीवा सहित एक दर्जन से ज्यादा जिलों से किसान “किसान क्रांति पैदल यात्रा” के बैनर तले भोपाल पहुंचे। यात्रा सोमवार को नर्मदापुरम जिले से शुरू हुई थी, जो भोपाल से करीब 80 किलोमीटर दूर है। रातभर पैदल चलकर किसान मंगलवार को भोपाल के बाहरी इलाके पहुंचे और वीर सावरकर सेतु के पास, मुख्यमंत्री आवास से करीब 8 किलोमीटर दूर डेरा जमा लिया। किसानों ने पूरी रात होशंगाबाद रोड पर ही गुजारी और मांगें पूरी होने तक धरना खत्म करने से इनकार कर दिया।
बुधवार को किसानों ने बैरिकेड तोड़ते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की कोशिश की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा (Gen-Z) किसान भी शामिल हुए, जिन्होंने पोस्टर-बैनर के साथ सड़क पर उतरकर बुजुर्ग किसानों का साथ दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर विरोध जताया और सरकार से सही निर्णय की अपील करते हुए सद्बुद्धि यज्ञ भी आयोजित किया।
किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं
किसान संगठनों की मांगें मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर केंद्रित हैं:
- मूंग की 100% सरकारी खरीदी MSP दर ₹8,668 प्रति क्विंटल पर की जाए
- खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल खत्म या पूरी तरह सुधारा जाए
- MSP की कानूनी गारंटी दी जाए
- खरीदी प्रक्रिया में देरी और तकनीकी बाधाओं का समाधान हो
- किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए
किसानों का कहना है कि इस साल मूंग का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकारी खरीद सीमित होने से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। जहां MSP ₹8,668 प्रति क्विंटल तय है, वहीं किसान खुले बाजार में मजबूरन ₹4,000 से ₹5,000 प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचने को मजबूर हैं — यानी प्रति क्विंटल ₹3,000 से ₹4,000 तक का सीधा नुकसान। कांग्रेस नेताओं के अनुसार 16 जुलाई तक तय कोटे का महज 2% ही खरीदा जा सका था।
सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को बताया कि किसानों की मांगों पर बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित कर दी गई है। मंगलवार रात कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों से करीब एक घंटे बातचीत की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बुधवार शाम कंसाना के साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग और राकेश सिंह भी अधिकारियों सहित एक और दौर की बातचीत के लिए बैठे।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय किसान संगठन जैसे किसान संगठन बातचीत से ही रास्ता निकालेंगे।
इसी बीच, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग की स्वीकृत खरीद सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि मध्य प्रदेश के लिए पहले ही सबसे ज्यादा खरीद कोटा मंजूर किया जा चुका है और स्वीकृत सीमा से अधिक खरीदी के लिए राज्य सरकार को खुद फंड देना होगा।
भोपाल में क्या असर पड़ा
आंदोलन की वजह से नर्मदापुरम रोड सहित भोपाल के कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। प्रशासन ने कई जगह ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया और सुरक्षा के मद्देनजर कई स्कूलों में भी बदलाव किए गए। पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा कड़ी करते हुए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की, लेकिन किसान अलग-अलग रास्तों से CM हाउस तक पहुंचने की रणनीति बनाते रहे।
किसान नेता गजेंद्र सिंह जाट ने कहा कि प्रशासन उन्हें रोकने के लिए तरह-तरह के अवरोध पैदा कर रहा है, बावजूद इसके किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ते रहेंगे और हर हाल में CM हाउस तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।
आगे क्या हो सकता है
बुधवार शाम को सरकार और किसान संगठनों के बीच एक और दौर की बातचीत तय है। अगर इसमें कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो किसान नेताओं ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। इस बीच किसानों, छात्रों और युवाओं का साझा मंच बनाने को लेकर भी सक्रियता देखी जा रही है — कुछ संगठनों के नेताओं ने दिल्ली में भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या राज्य सरकार मूंग की पूरी फसल MSP पर खरीदने का भरोसा दिला पाती है, या आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. भोपाल में किसान आंदोलन क्यों हो रहा है?
मध्य प्रदेश के किसान मूंग की फसल की 100% सरकारी खरीदी MSP दर पर करने और खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं।
2. मूंग का MSP क्या है और किसानों को बाजार में कितना मिल रहा है?
मूंग का MSP ₹8,668 प्रति क्विंटल तय है, जबकि किसानों को खुले बाजार में सिर्फ ₹4,000 से ₹5,000 प्रति क्विंटल ही मिल रहा है, जिससे प्रति क्विंटल ₹3,000-4,000 का नुकसान हो रहा है।
3. आंदोलन में कौन-कौन से जिलों के किसान शामिल हैं?
नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, रायसेन, सीहोर और रीवा सहित एक दर्जन से अधिक जिलों के किसान इस आंदोलन में शामिल हैं।
4. सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों से बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित की है, जिसमें कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना सहित अन्य मंत्री शामिल हैं। कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार से खरीद सीमा बढ़ाने का भी अनुरोध किया है।
5. क्या किसान CM हाउस तक पहुंच पाए?
किसानों ने कई बार बैरिकेड तोड़कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस-प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के चलते वे पूरी तरह घेराव करने में अब तक सफल नहीं हो पाए हैं।
6. भोपाल में ट्रैफिक पर क्या असर पड़ा है?
नर्मदापुरम रोड सहित भोपाल के कई हिस्सों में भारी जाम की स्थिति बनी, जिसके चलते प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है।
