Riju Dutta Extradited from TMC: रीजू दत्ता को तृणमूल कांग्रेस ने क्यों निकाला? जानिए असली वजह

Riju Dutta TMC

MC पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रीजू दत्ता 6 साल के लिए सस्पेंड। चुनाव के बाद शीर्ष नेतृत्व और I-PAC पर सवाल उठाने की मिली सजा। निष्कासन के बाद की BJP की तारीफ।

पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मुखर चेहरा और पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रीजू दत्ता (Riju Dutta) को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 6 साल के लिए निष्कासित (निलंबित) कर दिया गया है। चुनाव परिणामों के ठीक बाद आई इस खबर ने बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

लेकिन बात सिर्फ निलंबन तक सीमित नहीं है; निष्कासन के बाद रीजू दत्ता ने जो दावे किए हैं, उसने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी।

रीजू दत्ता के निष्कासन की मुख्य वजह क्या है?

चुनाव के नतीजों के बाद रीजू दत्ता ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे सवाल खड़े किए थे। उन पर अनुशासनहीनता और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (विशेष रूप से अभिषेक बनर्जी) पर निशाना साधने के गंभीर आरोप हैं।

रीजू दत्ता के निलंबन की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

  • शीर्ष नेतृत्व और I-PAC पर ठीकरा फोड़ना: रीजू दत्ता ने चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के लिए सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व और चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC को जिम्मेदार ठहराया।
  • ‘बाहरी संस्था’ का कब्जा: उन्होंने सनसनीखेज दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस पर एक बाहरी संस्था (I-PAC) ने पूरी तरह कब्जा कर लिया है, जिससे पार्टी के पुराने और जमीनी नेताओं की आवाज दबाई जा रही है।
  • आंतरिक लोकतंत्र का अभाव: दत्ता के अनुसार, वर्तमान में टीएमसी के भीतर अपनी बात रखने या असहमति जताने की कोई जगह नहीं बची है।

इन बयानों को अनुशासनहीनता का चरम मानते हुए टीएमसी की अनुशासनात्मक समिति ने त्वरित कार्रवाई की और उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

निष्कासन के बाद बदला सुर: BJP की तारीफ और सुवेंदु अधिकारी का कनेक्शन

टीएमसी से निकाले जाने के तुरंत बाद रीजू दत्ता के राजनीतिक सुर पूरी तरह बदले हुए नजर आए। उन्होंने चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जमकर तारीफ की।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा: रीजू दत्ता का यह बयान इस लिहाज से बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि अतीत में वे बीजेपी और विशेषकर पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के सबसे बड़े हमलावरों में से एक माने जाते थे। टीवी डिबेट्स में सुवेंदु अधिकारी और रीजू दत्ता के बीच का टकराव हमेशा सुर्खियों में रहता था। अब उनके इस हृदय परिवर्तन को भविष्य के नए राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या TMC में होने वाली है बड़ी बगावत? रीजू दत्ता का बड़ा दावा

पार्टी से निकाले जाने के बाद रीजू दत्ता ने एक ऐसा दावा किया है जो अगर सच साबित हुआ, तो पश्चिम बंगाल सरकार के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

दत्ता ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर इस समय भारी असंतोष है। उनके अनुसार:

  1. 50 विधायक नेतृत्व से नाराज: टीएमसी के लगभग 50 विधायक वर्तमान नेतृत्व (विशेषकर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली) से बेहद असंतुष्ट हैं।
  2. ‘असली TMC’ का दावा: यह नाराज गुट आने वाले दिनों में पार्टी से अलग होकर एक नया समूह बना सकता है या फिर खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ घोषित करने की लड़ाई लड़ सकता है।

निष्कर्ष: क्या बंगाल में पलटेगी बाजी?

रीजू दत्ता का निष्कासन और उनके द्वारा किया गया 50 विधायकों की टूट का दावा यह साफ करता है कि टीएमसी के अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। चुनावी रणनीतिकारों (I-PAC) के बढ़ते दखल से पार्टी के पुराने नेताओं में नाराजगी की खबरें पहले भी आती रही हैं, लेकिन रीजू दत्ता ने इसे खुलकर हवा दे दी है।

क्या रीजू दत्ता का अगला ठिकाना बीजेपी होगी? और क्या वाकई ममता बनर्जी की पार्टी में कोई बड़ी बगावत होने वाली है? इन सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएंगे, लेकिन फिलहाल बंगाल की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है।

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