पंजाब कांग्रेस संकट: चरणजीत चन्नी खेमे ने वारिंग को PPCC अध्यक्ष पद से हटाने की मांग तेज़ की। जानें पूरी कहानी, बागी नेताओं की लिस्ट और आगे क्या होगा — पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर छिड़ी जंग अब खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में पार्टी के एक बड़े धड़े ने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को पद से हटाने की मांग तेज़ कर दी है। 2027 के विधानसभा चुनाव से महज आठ महीने पहले उठा यह विवाद कांग्रेस के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गया है।
पंजाब कांग्रेस में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
करीब दो हफ्ते पहले कांग्रेस हाईकमान ने राजा वारिंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसी फेरबदल में चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह व्यवस्था जाट सिख, दलित सिख और हिंदू समुदायों को साधने और बड़े नेताओं में जिम्मेदारियां बांटने के मकसद से की गई थी।
लेकिन यह फॉर्मूला काम नहीं आया। पार्टी के एक बड़े हिस्से ने इसे चन्नी के कद के हिसाब से नाइंसाफी माना, क्योंकि चन्नी खुद प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार माने जा रहे थे।
दो बार हुआ शक्ति प्रदर्शन
4 जुलाई: चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर करीब 60 कांग्रेस नेता जुटे। फेरबदल के बाद यह पहला सार्वजनिक असंतोष था। नेताओं ने PPCC लिस्ट पर पुनर्विचार की मांग रखी। वारिंग खेमे ने इस बैठक को “फीका शो” करार दिया और हाईकमान को हाजिरी की पूरी लिस्ट भेज दी।
11 जुलाई: कपूरथला विधायक राणा गुरजीत सिंह के चंडीगढ़ स्थित घर पर इस बार करीब 92 नेता जुटे, जिनमें मौजूदा और पूर्व विधायक शामिल थे। यह बैठक कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ हुई, जिन्हें संकट सुलझाने भेजा गया था। वारिंग जानबूझकर इस बैठक से दूर रहे — उनका कहना था कि उनकी गैरमौजूदगी में नाराज़ नेता खुलकर अपनी बात रख सकेंगे। नेताओं ने बघेल से कहा कि उन्हें वारिंग से निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन “अगर किसी समझौतावादी नेता के हाथ में कमान रही तो पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी” — यह इशारा वारिंग पर आम आदमी पार्टी से कथित सांठगांठ के आरोपों की ओर था।
दिलचस्प बात यह रही कि चन्नी ने खुद सार्वजनिक तौर पर संयमित रुख अपनाया और कहा कि उनकी कोई निजी महत्वाकांक्षा नहीं है, वे सिर्फ पार्टी को सत्ता में वापस लाना चाहते हैं — हालांकि बैठक से पहले उनका एक रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट (“देखते हैं हवा किस तरफ बहती है”) कुछ और ही इशारा कर रहा था।
बघेल की सुलह बैठक हुई नाकाम
11 जुलाई की बैठक का मकसद शांति कायम करना था, लेकिन इसने गुटबाजी को और गहरा कर दिया:
- बघेल ने साफ कहा कि हाईकमान के फैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा, और यह भी दावा किया कि वारिंग को बदलने पर कोई चर्चा ही नहीं हुई।
- लेकिन कुछ ही मिनटों बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा और चन्नी ने अलग से मीडिया से बात करते हुए बघेल के बयान को सिरे से खारिज कर दिया। रंधावा ने कहा — “हम सबने माना कि पार्टी के कुछ फैसले कभी-कभी बदलने भी पड़ते हैं… हमें ऐसे नेता चाहिए जो बेबाकी से बोलें, समझौतावादी नेताओं की जरूरत नहीं है।”
- रंधावा, राणा गुरजीत और अन्य नेताओं ने बघेल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे पार्टी के बजाय वारिंग के हित में काम कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
बघेल के खाली हाथ रायपुर लौटने के बाद अब चन्नी खेमे के जल्द दिल्ली पहुंचकर हाईकमान — मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी — से सीधे मुलाकात करने की संभावना है। अब हाईकमान के सामने दो ही रास्ते हैं: वारिंग पर अड़े रहना और सार्वजनिक कलह को बर्दाश्त करना, या फैसला पलटकर चन्नी खेमे को प्रतीकात्मक जीत देना।
चन्नी खेमे ने हाल के स्थानीय निकाय चुनाव नतीजों का हवाला देकर भी अपनी दावेदारी मजबूत की है — दावा है कि कांग्रेस का प्रदर्शन चन्नी के प्रभाव वाले इलाकों में वारिंग के गढ़ों के मुकाबले बेहतर रहा।
बड़ी तस्वीर
यह गुटबाजी ऐसे वक्त सामने आई है जब पंजाब कांग्रेस 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के हाथों करारी हार के बाद खुद को फिर से खड़ा करने में जुटी है। 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के पास एकजुट होकर मैदान में उतरने के लिए एक साल से भी कम वक्त बचा है। लेकिन मौजूदा हालात बता रहे हैं कि कांग्रेस एक बार फिर उसी आपसी कलह में फंसती दिख रही है, जिसने राज्य में पार्टी को बार-बार नुकसान पहुंचाया है — वह भी तब जब पार्टी को सत्तारूढ़ AAP के खिलाफ रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. पंजाब कांग्रेस में विवाद किस बात को लेकर है?
कांग्रेस हाईकमान द्वारा अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को दोबारा PPCC (पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी) अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले को लेकर विवाद है। चरणजीत सिंह चन्नी खेमा इस फैसले से नाखुश है और वारिंग को हटाने की मांग कर रहा है।
2. चरणजीत सिंह चन्नी को क्या पद मिला है?
हाल के पार्टी फेरबदल में चन्नी को पंजाब कांग्रेस कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है, लेकिन उनके समर्थक इसे प्रदेश अध्यक्ष पद से कम आंकते हैं।
3. वारिंग विरोधी खेमे में कौन-कौन से नेता शामिल हैं?
इस खेमे में सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, संगत सिंह गिलजियां, अरुणा चौधरी, ओपी सोनी, परगट सिंह, त्रिप्त राजिंदर बाजवा और भारत भूषण आशु जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।
4. भूपेश बघेल की क्या भूमिका है?
भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस के AICC प्रभारी हैं और उन्हें हाईकमान ने इस अंदरूनी संकट को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन 11 जुलाई की बैठक के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका।
5. वारिंग पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
कुछ नेताओं ने वारिंग पर आम आदमी पार्टी (AAP) से कथित सांठगांठ रखने और उन्हें “समझौतावादी नेता” बताते हुए आरोप लगाए हैं, हालांकि किसी ने खुलकर नाम नहीं लिया।
6. क्या हाईकमान अपना फैसला बदल सकता है?
भूपेश बघेल ने साफ कहा है कि हाईकमान के फैसलों पर पुनर्विचार नहीं होता, लेकिन चन्नी खेमा जल्द दिल्ली जाकर सीधे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करने की तैयारी में है।
7. इस विवाद का पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह अंदरूनी कलह कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है, जिससे सत्तारूढ़ AAP के खिलाफ पार्टी की चुनावी रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
