अमरावती जिला महिलाअस्पताल में आग: 3 नवजातों की मौत, 36 बच्चों को बचाया गया

अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में आग के बाद तीन नवजातों की मौत

अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में आग से 3 नवजातों की मौत हो गई। 39 बच्चों में 36 को बचाया गया। CM फडणवीस ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।

अमरावती, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल केंद्र (NICU/SNCU) में सोमवार तड़के लगी भीषण आग ने तीन परिवारों को कभी न भूलने वाला दर्द दे दिया। आग की इस घटना में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जबकि अस्पताल में भर्ती 39 अन्य नवजातों में से 36 को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। हादसे के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृत बच्चों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

सुबह करीब 3:15 से 3:30 बजे NICU में मची अफरा-तफरी

जानकारी के मुताबिक, यह हादसा सोमवार, 24 अगस्त 2026 की सुबह करीब 3:15 से 3:30 बजे के बीच हुआ। अमरावती जिला महिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित नवजात शिशु इकाई में अचानक आग लग गई। अमरावती के पुलिस आयुक्त राकेश ओला के अनुसार, आउटबॉर्न बच्चों वाले सेक्शन में एक वेंटिलेटर में आग लगी थी। शुरुआती रिपोर्टों में इसे वेंटिलेटर में हुए विस्फोट से भी जोड़ा गया है, हालांकि आग लगने का वास्तविक तकनीकी कारण अभी जांच के अधीन है।

आग लगने के समय NICU के तीन अलग-अलग सेक्शनों में कुल 39 नवजात भर्ती थे। इनमें समय से पहले जन्मे और गंभीर हालत वाले बच्चे भी शामिल थे। जिस सेक्शन में आग लगी, वहां नौ शिशु भर्ती थे। अस्पताल स्टाफ ने तत्काल बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की, लेकिन तीन नवजातों को नहीं बचाया जा सका। बाकी छह बच्चों को इलाज के लिए सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया।

तीन नवजातों की मौत, बाकी बच्चों को सुरक्षित निकाला गया

आग और धुएं की चपेट में आने के बाद तीन नवजातों की मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अन्य बच्चों को अस्पताल के कर्मचारियों ने तत्काल प्रभावित वार्ड से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

कुल 36 नवजातों को बचाकर दूसरे चिकित्सा केंद्रों में शिफ्ट किया गया। इनमें छह बच्चों को सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ बच्चों को डिविजनल रेफरल सर्विसेज अस्पताल भेजा गया। रिपोर्ट के अनुसार वहां चार बच्चों का इलाज चल रहा था और उनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई।

मृत नवजातों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। इससे मौत के कारणों और घटना से जुड़े अन्य चिकित्सकीय तथ्यों की पुष्टि जांच के दौरान की जाएगी।

वेंटिलेटर में आग लगी या कोई दूसरी तकनीकी खराबी थी?

हादसे की शुरुआती जानकारी में वेंटिलेटर में विस्फोट को आग की वजह बताया गया है। हालांकि अधिकारियों ने अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना है।

अमरावती पुलिस के अनुसार, आग लगने के कारण का पता लगाने के लिए फायर विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के इलेक्ट्रिकल विंग को जांच में लगाया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वेंटिलेटर का विस्फोट ही हादसे का निश्चित कारण था।

एक अन्य रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए जांच में मेडिकल उपकरण, विद्युत व्यवस्था और अस्पताल की अग्नि-सुरक्षा व्यवस्था सहित कई पहलुओं को देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।

अस्पताल की फायर सेफ्टी पर उठे सवाल

यह हादसा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि NICU में ऐसे बच्चे भर्ती होते हैं जो खुद आग या धुएं से बचने में सक्षम नहीं होते। नवजातों को अक्सर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट, मॉनिटर और अन्य जीवनरक्षक उपकरणों की आवश्यकता होती है।

ऐसी स्थिति में आग लगने के कुछ ही मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। स्टाफ को बच्चों को उपकरणों से अलग करना, ऑक्सीजन और अन्य मेडिकल सपोर्ट को सुरक्षित तरीके से संभालना और उन्हें दूसरे सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाना पड़ता है।

घटना के बाद अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, किसी लापरवाही या सुरक्षा मानक के उल्लंघन को अभी जांच पूरी होने से पहले तथ्य के रूप में नहीं बताया जा सकता। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

अमरावती हादसे से मिलती-जुलती घटनाएं

स्थानघटनानवजातों पर असर
अमरावती, महाराष्ट्र — 24 अगस्त 2026NICU में ventilator से जुड़ी आग3 मौतें, 36 बच्चों का रेस्क्यू
छिंदवाड़ा, MP — अगस्त 2026NICU में warmer machine में आग1 मौत, 2 घायल
झांसी, UP — नवंबर 2024Neonatal unit में भीषण आग10 नवजातों की मौत

CM देवेंद्र फडणवीस ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर दुख जताते हुए स्वास्थ्य प्रशासन को उच्चस्तरीय जांच करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने मृत बच्चों के परिवारों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को अमरावती जाकर स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि घायल और प्रभावित नवजातों का इलाज सरकारी खर्च पर सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासनिक लापरवाही की जांच भी महत्वपूर्ण

हादसे के बाद अभिभावकों और विपक्षी नेताओं की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ नेताओं ने पूरे महाराष्ट्र के अस्पतालों में फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है।

हालांकि, किसी विशेष अधिकारी, अस्पताल कर्मचारी या संस्था को इस समय सीधे तौर पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उच्चस्तरीय जांच का उद्देश्य यही पता लगाना है कि आग की शुरुआत कैसे हुई, मेडिकल उपकरण की स्थिति क्या थी, फायर सेफ्टी सिस्टम ने कैसे प्रतिक्रिया दी और आपात स्थिति में अस्पताल का रेस्क्यू प्रोटोकॉल कितना प्रभावी रहा।

NICU जैसे संवेदनशील वार्ड में सुरक्षा क्यों बेहद जरूरी है?

NICU में भर्ती बच्चे सामान्य मरीजों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील होते हैं। कई नवजात समय से पहले पैदा होते हैं और उन्हें लगातार मॉनिटरिंग तथा जीवनरक्षक उपकरणों की जरूरत होती है।

ऐसे वार्ड में किसी भी विद्युत या मेडिकल उपकरण की खराबी तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। आग लगने की स्थिति में सिर्फ आग बुझाना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि मरीजों को मेडिकल सपोर्ट से सुरक्षित तरीके से अलग कर दूसरे स्थान पर ले जाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

अमरावती की घटना इसलिए केवल तीन बच्चों की मौत तक सीमित सवाल नहीं है। यह अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों के रखरखाव, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन प्रशिक्षण और NICU evacuation protocol की समीक्षा की जरूरत को भी सामने लाती है।

जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

घटना की जांच में कई अहम सवालों पर ध्यान दिया जा सकता है:

  1. वेंटिलेटर या संबंधित मेडिकल उपकरण में तकनीकी खराबी कैसे आई?
  2. क्या उपकरण का नियमित maintenance और electrical inspection हुआ था?
  3. आग लगने के बाद fire alarm और fire suppression system ने कैसे काम किया?
  4. क्या NICU में emergency evacuation protocol लागू था?
  5. अस्पताल के कर्मचारियों को neonatal fire emergency की ट्रेनिंग मिली थी या नहीं?
  6. फायर विभाग को सूचना कितनी जल्दी मिली और response time कितना था?
  7. अस्पताल की विद्युत व्यवस्था और मेडिकल उपकरणों का हालिया safety audit हुआ था या नहीं?

इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

क्या सभी 39 नवजातों को बचा लिया गया?

नहीं। हादसे के समय NICU में कुल 39 नवजात भर्ती थे। इनमें से तीन की मौत हो गई और 36 अन्य नवजातों को बचाकर दूसरे चिकित्सा केंद्रों में शिफ्ट किया गया। छह बच्चों को सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अमरावती अस्पताल अग्निकांड: अभी तक क्या पता चला?

जानकारीविवरण
घटनाNICU/SNCU में आग
स्थानजिला महिला अस्पताल, अमरावती, महाराष्ट्र
तारीख24 अगस्त 2026
समयकरीब 3:15–3:30 बजे सुबह
कुल नवजात भर्ती39
मौत3 नवजात
सुरक्षित निकाले गए36 नवजात
प्रभावित सेक्शनआउटबॉर्न बेबी सेक्शन
प्रारंभिक कारणवेंटिलेटर में आग/विस्फोट की रिपोर्ट
अंतिम कारणजांच जारी
6 बच्चों की स्थितिसुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती
जांचउच्चस्तरीय जांच के आदेश
परिवारों के लिए सहायताप्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को ₹5 लाख

उपरोक्त आंकड़े 24 अगस्त 2026 को उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और जांच आगे बढ़ने पर इनमें बदलाव संभव है।

यह खबर इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

अमरावती की यह घटना देश में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा सकती है। खासतौर पर NICU और SNCU जैसे वार्डों में मरीजों की उम्र और स्थिति ऐसी होती है कि छोटी-सी तकनीकी समस्या भी जानलेवा बन सकती है।

हालांकि अभी जांच पूरी नहीं हुई है, लेकिन इस घटना से यह सवाल जरूर सामने आता है कि क्या सभी अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की नियमित electrical safety testing, fire drills और emergency evacuation procedures पर्याप्त रूप से लागू हैं।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात प्रभावित बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और घटना के वास्तविक कारण का निष्पक्ष तरीके से पता लगाना है।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र के अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में सोमवार तड़के लगी आग में तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के समय 39 बच्चे भर्ती थे और 36 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में भेजा गया। शुरुआती रिपोर्टों में वेंटिलेटर में विस्फोट/आग को घटना की शुरुआत से जोड़ा गया है, लेकिन अधिकारियों ने वास्तविक तकनीकी कारण की जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृत बच्चों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि आग की वास्तविक वजह क्या थी और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई कमी थी या नहीं।

नोट: यह एक विकसित होती हुई खबर है। जैसे-जैसे पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

FAQ / F&Q

Q1. अमरावती अस्पताल में आग कब लगी?
अमरावती के जिला महिला अस्पताल के NICU में 24 अगस्त 2026 की सुबह करीब 3:15 से 3:30 बजे के बीच आग लगी।

Q2. अमरावती अस्पताल की आग में कितने नवजातों की मौत हुई?
इस हादसे में 3 नवजात शिशुओं की मौत हुई।

Q3. आग लगने के समय कितने बच्चे NICU में भर्ती थे?
घटना के समय NICU के अलग-अलग सेक्शनों में कुल 39 नवजात भर्ती थे।

Q4. कितने नवजातों को सुरक्षित बचाया गया?
हादसे के बाद 36 नवजातों को सुरक्षित निकालकर दूसरे चिकित्सा केंद्रों में शिफ्ट किया गया।

Q5. अमरावती अस्पताल में आग कैसे लगी?
प्रारंभिक रिपोर्टों में वेंटिलेटर में आग या विस्फोट की आशंका बताई गई है। हालांकि आग लगने का अंतिम कारण अभी जांच के अधीन है।

Q6. क्या वेंटिलेटर विस्फोट ही आग की वजह था?
अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फायर विभाग और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

Q7. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्या कार्रवाई की?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृत नवजातों के परिवारों को ₹5-₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

Q8. क्या इससे पहले भी NICU में आग की घटनाएं हुई हैं?
हां। नवंबर 2024 में झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की neonatal unit में आग लगने से 10 नवजातों की मौत हुई थी। इसके अलावा छिंदवाड़ा में NICU की warmer machine में आग लगने की घटना में भी एक नवजात की मौत हुई थी।

Q9. NICU में आग लगना इतना खतरनाक क्यों होता है?
NICU में भर्ती कई नवजात वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, warmer और monitoring equipment पर निर्भर होते हैं। आग या धुआं फैलने की स्थिति में उन्हें तुरंत और सुरक्षित तरीके से दूसरे स्थान पर ले जाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

Q10. क्या अमरावती अस्पताल की फायर सेफ्टी में लापरवाही सामने आई है?
अभी किसी लापरवाही को अंतिम रूप से साबित नहीं किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था और संभावित तकनीकी खामियों की जांच जारी है।

Q11. अमरावती अस्पताल हादसे की जांच कौन करेगा?
घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। फायर विभाग और PWD के इलेक्ट्रिकल विशेषज्ञ भी आग के कारणों की जांच कर रहे हैं।

Q12. क्या इस घटना के बाद महाराष्ट्र के अन्य अस्पतालों की जांच होगी?
ऐसी घटनाओं के बाद अस्पतालों की fire safety, electrical systems और medical equipment maintenance की समीक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है। आगे प्रशासन की ओर से राज्यव्यापी जांच या safety audit की घोषणा हो सकती है।

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