ग्वालियर वेस्टर्न बायपास की तर्ज पर अब शिवपुरी और गुना में भी बनेगा 34 किमी लंबा फोरलेन ग्रीनफील्ड बाईपास। जानें रूट, लागत, टेंडर स्टेटस और जाम से राहत की पूरी डिटेल।
शिवपुरी/गुना। ग्वालियर शहर में जिस तरह वेस्टर्न बायपास बनाकर बाहरी भारी वाहनों को शहर के अंदर आने से रोका जा रहा है, ठीक उसी मॉडल पर अब शिवपुरी और गुना को भी जाम से राहत देने की तैयारी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने मध्य प्रदेश में दो नए फोरलेन ग्रीनफील्ड ईस्टर्न बाईपास के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की कंसल्टेंसी सेवाओं का टेंडर जारी किया है — एक शिवपुरी में करीब 13 किमी और दूसरा गुना में करीब 21 किमी लंबा। दोनों को मिलाकर कुल लंबाई करीब 34 किलोमीटर होगी, जो शिवपुरी-गुना क्षेत्र को भारी वाहनों के दबाव और रोजाना के जाम से मुक्त करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
शिवपुरी और गुना में कितने किलोमीटर का बाईपास?
NHAI के सरकारी ई-टेंडर पोर्टल पर जारी जानकारी के अनुसार परियोजना में दो अलग-अलग बाईपास शामिल हैं।
| शहर | प्रस्तावित बाईपास | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| शिवपुरी | करीब 13 KM | DPR के लिए कंसल्टेंसी टेंडर |
| गुना | करीब 21 KM | DPR के लिए कंसल्टेंसी टेंडर |
| कुल | करीब 34 KM | DPR चरण |
टेंडर का नाम “Consultancy Services for Preparation of Detailed Project Report DPR for Construction of a New 4Lane Greenfield Eastern Bypass of Shivpuri Approx. 13km and a New 4Lane Greenfield Eastern Bypass of Guna Approx. 21km in the State of MP” है। इसे NHAI के RO-Bhopal ने जारी किया है।
इसका मतलब है कि फिलहाल यह प्रोजेक्ट DPR-तैयारी के चरण में है — यानी सर्वे, अलाइनमेंट, भूमि अधिग्रहण की जरूरत और तकनीकी डिजाइन को अंतिम रूप देने का काम शुरू होगा, उसके बाद निर्माण की मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस टेंडर की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तय की गई है।
“ग्रीनफील्ड” बाईपास का मतलब है कि यह सड़क पूरी तरह नए अलाइनमेंट पर, खाली जमीन से होकर गुजरेगी — मौजूदा शहर के अंदरूनी रास्तों को चौड़ा करने के बजाय शहर के बाहर से एक नया कॉरिडोर बनाया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे ग्वालियर के लिए किया जा रहा है।
ग्वालियर मॉडल से क्यों हो रही तुलना?
ग्वालियर उत्तर और मध्य भारत को जोड़ने वाला एक अहम शहर है, जहां आगरा, झांसी, शिवपुरी, मुरैना और दतिया से आने वाला भारी ट्रैफिक सीधे शहर के अंदर घुसने से दीनदयाल मार्ग, बामौर रोड और चंबल मार्ग जैसी सड़कों पर रोज जाम की स्थिति बनती है। इसी समस्या के समाधान के लिए NHAI करीब ₹1,347 करोड़ की लागत से ग्वालियर वेस्टर्न बायपास बना रहा है, जिसका लेवलिंग कार्य शुरू हो चुका है।
इसी तर्ज पर अब शिवपुरी और गुना के लिए भी अलग-अलग ईस्टर्न बाईपास प्लान किए गए हैं, ताकि दोनों शहरों में भारी ट्रकों और बाहरी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत न पड़े। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ 31 मार्च 2026 को हुई एक अहम बैठक में ग्वालियर, भिंड, अशोकनगर, शिवपुरी और गुना की सड़क परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की थी। इस बैठक में शिवपुरी शहर में यातायात सुधार के लिए फ्लाईओवर, अंडरपास और एलिवेटेड रोड बनाने के प्रस्तावों पर भी बात हुई थी।
शिवपुरी को पहले ही मिल चुकी है रिंग रोड की सौगात
34 किमी के इस ईस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट से अलग, शिवपुरी शहर के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही एक 14 किलोमीटर लंबी फोरलेन रिंग रोड को हरी झंडी दे चुके हैं, जिसकी लागत करीब ₹100 करोड़ है। यह रिंग रोड दो हिस्सों में बनेगी:
- गुना नाका से ग्वालियर नाका — सोनचरैया होटल होते हुए दुर्गादास राठौर चौराहे तक
- ग्वालियर चौराहा से झांसी रोड — सोनचरैया, भदैया कुंड और करवाल पुल होते हुए
इससे शहर के अंदर जो सफर अभी 20-25 मिनट में तय होता है, वह घटकर करीब 10 मिनट रह जाएगा। यह रिंग रोड और नया 34 किमी ईस्टर्न बाईपास दोनों मिलकर शिवपुरी-गुना क्षेत्र की समूची ट्रैफिक व्यवस्था को बदलने वाले हैं — रिंग रोड शहर के भीतरी हिस्से को जोड़ेगी, जबकि ईस्टर्न बाईपास भारी और लंबी दूरी के वाहनों को शहर से पूरी तरह बाहर निकालेगा।
जाम से मिलेगी कितनी राहत?
शिवपुरी-गुना फोरलेन हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही और कई बार छोटी-छोटी घटनाओं के चलते भी घंटों जाम लगने की खबरें आती रही हैं। जुलाई 2026 में ही कोलारस के पास इसी फोरलेन पर विवाद के चलते करीब एक घंटे तक जाम की स्थिति बनी थी। ऐसे में जब भारी ट्रक, ट्रेलर और लंबी दूरी के वाहन शहर से बाहर-बाहर ही निकल जाएंगे, तो:
- शहर के भीतर रोजाना लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी
- एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही आसान होगी
- सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है
- स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि शिवपुरी अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों के लिए जाना जाता है
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह प्रोजेक्ट DPR तैयार करने के चरण में है। DPR पूरी होने के बाद ही जमीन अधिग्रहण, अंतिम लागत का आकलन और निर्माण एजेंसी के चयन जैसी प्रक्रियाएं शुरू होंगी। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में हाल के महीनों में इसी तरह के कई बाईपास प्रोजेक्ट (डबरा वेस्टर्न बायपास, अशोकनगर बाईपास, गुना-उमरी-सिरसी बाईपास) पहले ही अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ चुके हैं, जिससे यह साफ है कि क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर तेजी से काम हो रहा है।
संपादकीय नोट: यह खबर सरकारी टेंडर दस्तावेज़ों और आधिकारिक बैठक विवरणों पर आधारित है। DPR चरण की परियोजना होने के कारण अंतिम रूट, लागत और निर्माण की समयसीमा में आगे बदलाव संभव है। अंतिम व आधिकारिक जानकारी के लिए NHAI/MoRTH की वेबसाइट देखें।
6. FAQ सेक्शन
Q1. शिवपुरी-गुना बाईपास कितने किलोमीटर लंबा होगा? शिवपुरी का ईस्टर्न बाईपास करीब 13 किमी और गुना का ईस्टर्न बाईपास करीब 21 किमी लंबा होगा। दोनों को मिलाकर कुल लंबाई लगभग 34 किलोमीटर है।
Q2. यह प्रोजेक्ट किस विभाग की देखरेख में बन रहा है? यह प्रोजेक्ट भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अंतर्गत आगे बढ़ रहा है।
Q3. क्या यह बाईपास ग्वालियर वेस्टर्न बायपास जैसा ही है? हां, यह करीब वैसा ही ग्रीनफील्ड फोरलेन मॉडल है, जैसा ग्वालियर में शहर के बाहर भारी वाहनों को डायवर्ट करने के लिए बनाया जा रहा है।
Q4. क्या यह प्रोजेक्ट अभी मंजूर हो चुका है? फिलहाल यह प्रोजेक्ट DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने के चरण में है। DPR पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्माण मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।
Q5. क्या शिवपुरी को इससे अलग कोई और सड़क परियोजना भी मिली है? हां, शिवपुरी को इससे अलग एक 14 किमी लंबी फोरलेन रिंग रोड (लागत करीब ₹100 करोड़) भी मंजूर हो चुकी है, जिसे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हरी झंडी दी है।
