Mahatma Gandhi का परिवार, शिक्षा, आंदोलन, महात्मा और राष्ट्रपिता की उपाधि के साथ उनकी घड़ी, चश्मे, खान-पान और सफर की आदतों की पूरी जानकारी पढ़ें |
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता पोरबंदर रियासत के दीवान थे, जबकि खुद गांधी को वकालत में शुरुआत में खास सफलता नहीं मिली थी। आगे चलकर वे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने।
गांधी जयंती से पहले यहां उनके परिवार, शिक्षा, आंदोलनों और ‘महात्मा’ व ‘राष्ट्रपिता’ कहलाने की कहानी के साथ उनकी घड़ी, चश्मे, खान-पान और सफर की आदतों की जानकारी एक जगह दी जा रही है।
Mahatma Gandhi जन्म और परिवार
गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता करमचंद उत्तमचंद गांधी (1822-1885) कुटियाना गांव से आए थे। उन्होंने राज्य प्रशासन में क्लर्क के रूप में शुरुआत की और आगे चलकर पोरबंदर के दीवान (मुख्यमंत्री) बने।
करमचंद ने चार शादियां कीं। पहली दो पत्नियों का कम उम्र में निधन हो गया और तीसरी शादी से कोई संतान नहीं हुई। 1857 में उन्होंने पुतलीबाई से विवाह किया, जिनसे उनके चार बच्चे हुए।
गांधी इन चार बच्चों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई लक्ष्मीदास (लगभग 1860-1914) और करसनदास (लगभग 1866-1913) थे। बहन का नाम रालियातबेन था।
कस्तूरबा से विवाह और चार बेटे
गांधी का विवाह 1883 में कस्तूरबा से हुआ। कस्तूरबा का जन्म 11 अप्रैल 1869 को पोरबंदर में हुआ था। शादी के समय दोनों करीब 13 साल के थे। कस्तूरबा गांधी से लगभग छह महीने बड़ी थीं और देश में ‘बा’ के नाम से जानी गईं।
दोनों के चार बेटे थे: हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास। कस्तूरबा का निधन 22 फरवरी 1944 को हुआ। उस समय गांधी और कस्तूरबा भारत छोड़ो आंदोलन के बाद पुणे के आगा खां पैलेस में नजरबंद थे।
शिक्षा: पोरबंदर-राजकोट से लंदन तक
गांधी की शुरुआती पढ़ाई पोरबंदर और राजकोट में हुई। वे औसत छात्र थे। उन्होंने राजकोट के अल्फ्रेड हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की।
1888 में उन्होंने भावनगर के श्यामलदास कॉलेज (अब सामलदास आर्ट्स कॉलेज) में दाखिला लिया, लेकिन स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों से पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। उसी साल उन्होंने इंग्लैंड जाकर कानून पढ़ने का फैसला किया।
लंदन में उन्होंने इनर टेम्पल में दाखिला लिया और 1891 में बैरिस्टर बने। इंग्लैंड में रहते हुए उन्हें पश्चिमी जीवनशैली, भोजन और रहन-सहन के साथ तालमेल बैठाने में संघर्ष करना पड़ा।
1891 में भारत लौटकर उन्होंने वकालत शुरू की, पर शुरुआत में सफलता नहीं मिली। 1893 में वे एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। वहीं से नस्लीय भेदभाव और अन्याय के खिलाफ उनके संघर्ष की नींव पड़ी।
राजनीतिक गुरु: गोपाल कृष्ण गोखले
गांधी गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। गोखले उदारवादी नेता थे और साध्य के साथ साधन की पवित्रता में भी विश्वास करते थे। इसी विचार से प्रभावित होकर गांधी ने उन्हें गुरु बनाया।
भारत लौटने के बाद गोखले ने गांधी से वादा लिया था कि वे देश को समझने तक राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे। इसी दौर में गांधी ने तीसरे दर्जे की रेल यात्राएं शुरू कीं।
अंग्रेजों के खिलाफ प्रमुख आंदोलन
गांधी के नेतृत्व या भागीदारी वाले प्रमुख आंदोलनों में ये शामिल हैं:
- 1917: चंपारण आंदोलन
- 1918: खेड़ा आंदोलन
- 1919: खिलाफत आंदोलन
- 1920: असहयोग आंदोलन
- सविनय अवज्ञा आंदोलन, जिसमें 1930 की दांडी यात्रा भी शामिल है
- 1942: भारत छोड़ो आंदोलन
‘महात्मा’ और ‘राष्ट्रपिता’ कैसे कहलाए
‘महात्मा’ की उपाधि आमतौर पर रवींद्रनाथ टैगोर से जोड़ी जाती है। हालांकि कुछ इतिहासकारों के अनुसार 1915 में वैद्य जीवन राम कालिदास ने गांधी को सबसे पहले ‘महात्मा’ कहकर संबोधित किया था। इस पर इतिहासकारों में एकमत नहीं है।
‘राष्ट्रपिता’ कहने वाले पहले व्यक्ति सुभाष चंद्र बोस माने जाते हैं। उन्होंने 1944 में आजाद हिंद रेडियो के प्रसारण में गांधी को यह संबोधन दिया और आजादी की लड़ाई के लिए उनका आशीर्वाद मांगा। अधिकतर स्रोतों में यह तारीख 6 जुलाई 1944 बताई गई है, जबकि कुछ स्रोत 4 जून 1944 का जिक्र करते हैं।
30 जनवरी 1948 को गांधी के निधन के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो पर देश को संबोधित करते हुए उन्हें राष्ट्रपिता कहा।
Mahatma Gandhi : Zenith की अलार्म वाली जेब घड़ी
गांधी के पास स्विस कंपनी Zenith की चांदी की जेब घड़ी थी, जिसमें अलार्म भी था। नीलामी घर Antiquorum के कैटलॉग में इसे लगभग 1910 के दौर की बताया गया है। घड़ी बनाने वाली कंपनी के मुताबिक गांधी इसके अलार्म से प्रार्थना का समय याद रखते थे।
सफर के दौरान यह घड़ी चोरी हो गई थी। कंपनी के अनुसार यह घटना कानपुर जाते समय ट्रेन में हुई। 28 मई 1947 को लिखे एक नोट में गांधी ने घड़ी का ब्योरा दिया था। उन्होंने लिखा था कि उसमें रेडियम वाली डायल थी, अलार्म की व्यवस्था थी और वह उन्हें तोहफे में मिली थी।
करीब छह महीने बाद चोर को पछतावा हुआ। वह दिल्ली में गांधी से मिला, घड़ी लौटाई और माफी मांगी। निधन से पहले गांधी ने यह घड़ी अपनी सहयोगी आभा गांधी को दे दी थी।
घड़ी से जुड़े कुछ ब्योरों में स्रोतों के बीच फर्क है। Zenith की वेबसाइट के मुताबिक घड़ी जवाहरलाल नेहरू ने दी थी, जबकि एक अन्य घड़ी-पत्रिका में इंदिरा नेहरू का नाम आता है। घड़ी की कीमत भी अलग-अलग बताई गई है: एक जगह 40 रुपये और दूसरी जगह 80 रुपये।
चश्मा, चप्पल, कटोरी-थाली और बाकी सामान
गांधी की पहचान बन चुके गोल तार वाले चश्मे के अलावा उनकी चीजों में चमड़े की चप्पल, पीतल की कटोरी और थाली शामिल हैं। Antiquorum के कैटलॉग के अनुसार कटोरी और थाली गांधी ने 1940 के दशक में आभा गांधी को उपहार में दी थीं।
चप्पल को लेकर कैटलॉग में कहा गया है कि माना जाता है, 1931 में लंदन जाते समय गांधी ने अदन में एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी को अपनी चप्पल दे दी थी। अधिकारी ने वहां गांधी की तस्वीरें ली थीं।
एक अन्य स्रोत के अनुसार उनके निधन के बाद के सामान में दो जोड़ी चप्पल, प्रार्थना की किताब, डायरी, चश्मा, पीकदान, पत्र खोलने का चाकू, दो कप, चम्मच-कांटा और तीन बंदरों की एक चीनी मिट्टी की मूर्ति भी थी।
अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में गांधी का चरखा और लिखने की मेज रखी हुई है।
2009 की नीलामी में कितने में बिका सामान
न्यूयॉर्क में 5 मार्च 2009 को Antiquorum की नीलामी में गांधी की पांच चीजें बिकीं: जेब घड़ी, चश्मा, चप्पल, कटोरी और थाली। इन्हें भारतीय उद्योगपति विजय माल्या ने खरीदा और कहा कि वे इन्हें भारत लाएंगे।
कई रिपोर्टों में कुल कीमत 18 लाख डॉलर (1.8 मिलियन डॉलर) बताई गई है। वहीं नीलामी की एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 20,96,000 डॉलर लिखा है। दोनों आंकड़ों में फर्क क्यों है, यह स्रोतों में साफ नहीं है। तीन बंदरों की मूर्ति इस नीलामी का हिस्सा नहीं थी।
कार नहीं, ज्यादातर रेल और पैदल सफर
भारत में गांधी ने लंबे समय तक जान-बूझकर तीसरे दर्जे में रेल यात्रा की। सितंबर 1917 में लिखे अपने लेख में उन्होंने बताया था कि भारत लौटने के बाद करीब ढाई साल में उन्होंने एक चौथाई से ज्यादा समय तीसरे दर्जे की ट्रेनों में बिताया। दक्षिण अफ्रीका में वे प्रथम श्रेणी में भी सफर कर चुके थे।
बाद के वर्षों में साथियों ने उनके लिए ऊंचे दर्जे की व्यवस्था करनी शुरू की। रेलवे पर लिखे एक लेख के मुताबिक गांधी इसके लिए मन से तैयार नहीं थे, पर तीसरे दर्जे में लिखने और पत्र-व्यवहार का काम मुश्किल होता था।
गांधी ने कभी हवाई यात्रा नहीं की। इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और म्यांमार वे समुद्री रास्ते से गए। भारत में वे रेल और कार का इस्तेमाल करते थे, लेकिन छोटी दूरी के लिए कार से बचते थे और खूब पैदल चलते थे। एक अध्ययन में प्रकाशित स्वास्थ्य रिकॉर्ड के हवाले से बताया गया है कि 1913 से 1948 के बीच उन्होंने अपने अभियानों में करीब 79,000 किलोमीटर पैदल यात्रा की। नवंबर 1946 से फरवरी 1947 तक नोआखाली और त्रिपुरा की उनकी पदयात्रा भी इसमें गिनी जाती है।
खाने में क्या पसंद था
गांधी ने जीवन भर खान-पान पर प्रयोग किए। किशोरावस्था में उन्होंने चोरी-छिपे मांस खाया था, लेकिन बाद में लंदन में शाकाहार से जुड़ने के बाद वे शाकाहारी बने।
फल और मेवे उनके पसंदीदा भोजन में गिने जाते हैं। वे मानते थे कि अंगूर और बादाम शरीर और नसों के पोषण के लिए काफी हैं। दक्षिण अफ्रीका के टॉल्स्टॉय फार्म में वे कुछ समय बिना नमक वाला, मुख्य रूप से फलों का आहार लेते थे। भारत लौटने के बाद कई मेजबान उनके लिए भारी-भरकम फलाहार का इंतजाम करने लगे थे।
आम दिनों के भोजन में उबली सब्जियां, हाथ का कुटा चावल, गेहूं की रोटी और सादी दाल का जिक्र मिलता है। एक दौर में उनका खाना मुख्य रूप से मूंगफली, मक्खन और नींबू पर टिका था।
दूध के मामले में उन्होंने लंबे समय तक गाय-भैंस का दूध छोड़े रखा। बाद में बीमारी के दौरान कस्तूरबा ने उन्हें बकरी का दूध लेने के लिए मनाया। यह सलाह मुंबई के सर्जन ए. के. दलाल की थी। गांधी ने खुद माना कि इससे उनका एक बड़ा प्रयोग रुक गया।
जिन चीजों से उन्होंने दूरी रखी
गांधी ने नमक और चीनी कम या बंद करने की कोशिश की, क्योंकि वे इन्हें संयम के लिए बाधा मानते थे। वनस्पति घी को भी उन्होंने खारिज किया था। वे स्थानीय और साधारण खाने पर जोर देते थे।
गांधी को खास सुविधा वाला सफर भी पसंद नहीं था। रेलवे यात्राओं पर उन्होंने स्टेशनों और डिब्बों की गंदगी की खुलकर आलोचना की थी और सफाई की कमी पर लिखा था।
FAQ
Q1. महात्मा गांधी का जन्म कब और कहां हुआ था?
Answer: गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे और माता का नाम पुतलीबाई था।
Q2. महात्मा गांधी की शादी कब हुई थी और उनके कितने बच्चे थे?
Answer: गांधी की शादी 1883 में कस्तूरबा से हुई थी। दोनों के चार बेटे थे: हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास।
Q3. महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु कौन थे?
Answer: गोपाल कृष्ण गोखले गांधी के राजनीतिक गुरु थे। गोखले साध्य और साधन दोनों की पवित्रता में विश्वास करते थे, जिससे गांधी प्रभावित थे।
Q4. गांधी जी को ‘राष्ट्रपिता’ सबसे पहले किसने कहा?
Answer: माना जाता है कि सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में आजाद हिंद रेडियो के प्रसारण में गांधी को यह संबोधन दिया था। अधिकतर स्रोतों में तारीख 6 जुलाई 1944 है।
Q5. गांधी जी के पास कौन-सी घड़ी थी?
Answer: गांधी के पास Zenith कंपनी की चांदी की जेब घड़ी थी, जिसमें अलार्म भी था। कंपनी के अनुसार वे इसके अलार्म से प्रार्थना का समय याद रखते थे। यह घड़ी 2009 में उनके चश्मे, चप्पल, कटोरी और थाली के साथ नीलाम हुई।
