मध्य प्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में अभ्यर्थियों का आंदोलन 36 दिन से जारी है। जानें मांग, टाइमलाइन और सरकार का रुख।
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती-2025 में पद बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब 36 दिन पूरे कर चुका है। वर्ग-2 और वर्ग-3 के हजारों चयनित उम्मीदवार 21 अगस्त से लगातार धरना, भूख हड़ताल और अनशन पर बैठे हैं। पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग की मांग पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग क्या है
आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाना है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, वर्ग-2 (माध्यमिक शिक्षक) में हर विषय में करीब 3 हजार पद और वर्ग-3 (प्राथमिक शिक्षक) में कुल 25 हजार पद बढ़ाए जाएं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पात्रता और चयन परीक्षा पास करने के बावजूद सीमित पदों की वजह से बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार नियुक्ति से बाहर हो रहे हैं। उनकी दूसरी बड़ी मांग बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की है। अभ्यर्थियों का हवाला है कि 2018 और 2022 की शिक्षक भर्ती में भी पद बढ़ाकर अतिरिक्त काउंसलिंग कराई गई थी, इसलिए इस बार भी वैसा ही किया जाए।
21 अगस्त से शुरू हुआ धरना, अब 36वें दिन पर पहुंचा आंदोलन
भोपाल के नीलम पार्क में यह आंदोलन 21 अगस्त को अनिश्चितकालीन धरने के तौर पर शुरू हुआ था। अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे नवंबर 2025 से अलग-अलग चरणों में अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
धरने के शुरुआती दिनों में ही कई अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर बैठ गए। 23 अगस्त को अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत ने अन्न-जल त्यागकर अनशन शुरू किया, जो बाद में आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा बन गए। आंदोलन को 15 दिन पूरे होने तक भोपाल के बाहर से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नीलम पार्क पहुंच चुके थे।
भूख हड़ताल से बिगड़ी तबीयत, कई बार अस्पताल पहुंचे अभ्यर्थी
आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ा, अभ्यर्थियों का प्रदर्शन भी तेज होता गया। 25 अगस्त को नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई। इसके कुछ दिन बाद ही तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठी एक महिला अभ्यर्थी भी बेहोश होकर गिर पड़ी थीं, जिन्हें भी अस्पताल पहुंचाया गया।
आंदोलन के 28वें दिन, यानी 17 सितंबर को नरेंद्र राजपूत का निर्जला अनशन सातवें दिन में पहुंच गया था। अभ्यर्थियों के मुताबिक, लगातार पानी न पीने से उनकी सेहत बिगड़ रही थी और वे कई बार बेहोश हो चुके थे। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर सरकार से जल्द हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। 20 सितंबर को आंदोलन के 31वें दिन नरेंद्र राजपूत का अनशन दसवें दिन में प्रवेश कर गया था।
सीएम का काफिला रुका, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी भी पहुंचे
आंदोलन के 15वें दिन अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी नीलम पार्क पहुंचे और सरकार को समयसीमा के साथ चेतावनी दी। कुछ घंटे बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी आंदोलनकारियों के मंच पर पहुंचे और सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की।
नीलम पार्क से डीपीआई कार्यालय तक पहुंचा आंदोलन
आंदोलन के 26वें दिन अभ्यर्थियों ने अपनी रणनीति बदली और नीलम पार्क से लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) कार्यालय तक रैली निकाली। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डीपीआई कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक पदों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार और शिक्षा विभाग का क्या कहना है
स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है और प्रदर्शनकारी जो मांग रहे हैं, वह उपलब्ध नहीं है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी कहा है कि सभी खाली पदों पर एक साथ भर्ती करना संभव नहीं है।
अभ्यर्थियों का जवाब है कि यदि पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है, तो पिछली भर्तियों में पद किस आधार पर बढ़ाए गए थे। दोनों पक्षों के बीच यही असहमति अब तक आंदोलन को खत्म नहीं होने दे रही है।
मध्य प्रदेश में कितने शिक्षक पद खाली हैं
मार्च 2026 में विधानसभा में सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पद 2 लाख 89 हजार 5 हैं, जिनमें से 1 लाख 74 हजार 419 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। यानी करीब 1 लाख 15 हजार 678 पद खाली हैं। इन्हीं आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 1,968 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि 46,417 स्कूलों में केवल दो शिक्षक ही तैनात हैं।
बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के बावजूद भर्ती में सीमित पद ही निकाले जाने को अभ्यर्थी अपनी मांग का सबसे बड़ा आधार बताते हैं। शिक्षक भर्ती वर्ग-1 के कुछ वेटिंग अभ्यर्थियों ने भी इसी दौरान प्रदर्शन में शामिल होकर पद बढ़ाने की मांग उठाई थी।
किस भर्ती में कितने पद निकले थे
वर्ग-1 (हाई स्कूल शिक्षक) भर्ती परीक्षा 2 अगस्त 2023 को हुई थी और इसके तहत कुल 8,720 पद अधिसूचित किए गए थे। इसी भर्ती के वेटिंग अभ्यर्थियों का दावा है कि जरूरत के मुकाबले सिर्फ 2,901 पदों पर ही भर्ती करके प्रक्रिया बंद कर दी गई, जिससे 1,000 से ज्यादा योग्य उम्मीदवार अब भी नियुक्ति से बाहर हैं।
वर्ग-3 (प्राथमिक शिक्षक) चयन परीक्षा 9 से 13 अक्टूबर 2025 तक आयोजित हुई थी, जिसमें कुल 13,089 पद अधिसूचित किए गए थे। इनमें स्कूल शिक्षा विभाग के 10,150 पद और जनजातीय कार्य विभाग के 2,939 पद शामिल हैं। अभ्यर्थी अब इसी संख्या में 25 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जो मौजूदा स्वीकृत पदों से करीब दोगुना है।
फिलहाल भोपाल में आंदोलन जारी है और अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है।
FAQ:
Q1. भोपाल में शिक्षक भर्ती आंदोलन कब शुरू हुआ था?
Answer: यह आंदोलन 21 अगस्त 2026 से भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरने के तौर पर शुरू हुआ था, जो अब 36 दिन पूरे कर चुका है।
Q2. अभ्यर्थियों की मुख्य मांग क्या है?
Answer: अभ्यर्थी वर्ग-2 में हर विषय में करीब 3 हजार पद और वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।
Q3. क्या सरकार ने पद बढ़ाने पर कोई फैसला लिया है?
Answer: अब तक शिक्षा विभाग ने कहा है कि पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है, और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि सभी खाली पदों पर एक साथ भर्ती संभव नहीं है।
Q4. आंदोलन अभी कहां चल रहा है?
Answer: शुरुआत में यह आंदोलन नीलम पार्क में था, लेकिन 26वें दिन से अभ्यर्थी लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) कार्यालय के बाहर भी धरने पर बैठे हैं।
Q5. क्या किसी राजनीतिक नेता ने आंदोलनकारियों से मुलाकात की?
Answer: कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी नीलम पार्क पहुंचकर आंदोलनकारियों से मिले थे, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला भी अभ्यर्थियों ने रोका था।
SOURCE/FACT-CHECK NOTE:
यह लेख निम्न रिपोर्टों में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है:
- ETV Bharat और Navbharat Live की रिपोर्ट्स (आंदोलन का 15वां दिन, सीएम का काफिला रोकना)
- Amar Ujala की रिपोर्ट्स (25वें, 26वें, 28वें दिन के अपडेट, नरेंद्र राजपूत का अनशन)
- India TV की रिपोर्ट (आंदोलन का चौथा दिन, वर्ग-1 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन)
- Dainik Jagran (MP-CG) की रिपोर्ट (26वें दिन डीपीआई कार्यालय के बाहर धरना)
- UNI Varta और People’s Update की रिपोर्ट्स (31वां दिन)
