MP में TET कराने से ESB ने किया इनकार: ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बाद निर्णय

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MP में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों की TET परीक्षा अटकी। कर्मचारी चयन मंडल ने ऑफलाइन परीक्षा कराने से इनकार किया, अब नई एजेंसी और तारीख पर फैसला बाकी।

मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर नया संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने परीक्षा को ऑफलाइन माध्यम से कराने में असमर्थता जता दी है। इससे डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के लिए प्रस्तावित इस परीक्षा का कार्यक्रम अब अधर में लटक गया है, और स्कूल शिक्षा विभाग को नई एजेंसी की तलाश करनी पड़ रही है।

क्या है पूरा मामला?

  • परीक्षा: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026
  • मोड: ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन कराने का फैसला
  • नई स्थिति: ESB ने ऑफलाइन परीक्षा कराने से इनकार किया
  • संभावित अभ्यर्थी: करीब डेढ़ लाख सेवारत शिक्षक
  • आवेदन की अंतिम तारीख: 18 सितंबर 2026
  • पहले प्रस्तावित परीक्षा तारीख: 12 अक्टूबर 2026
  • नई संभावना: नवंबर-दिसंबर 2026
  • नई एजेंसी: शासन स्तर पर फैसला होगा
  • आवेदन: पहले से आवेदन कर चुके शिक्षकों को दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

क्यों हुआ इनकार

मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री की घोषणा के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग ने टीईटी को ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम से भी कराने का प्रस्ताव कर्मचारी चयन मंडल को भेजा था। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मंडल ने साफ कर दिया कि वह पिछले छह वर्षों से केवल ऑनलाइन परीक्षाएं ही आयोजित कर रहा है और ऑफलाइन परीक्षा कराने का ढांचा पहले ही बंद कर चुका है, इसलिए वह ऑनलाइन के अलावा किसी और माध्यम से यह परीक्षा नहीं करा सकता।

अब नई एजेंसी की तलाश

कर्मचारी चयन मंडल के इनकार के बाद स्कूल शिक्षा विभाग अब दूसरी एजेंसियों के जरिए परीक्षा कराने की तैयारी में जुट गया है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के हवाले से बताया गया है कि मंडल की असमर्थता के बाद शासन अब अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। परीक्षा की जिम्मेदारी किस एजेंसी को सौंपी जाएगी, इसका अंतिम फैसला शासन स्तर पर लिया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार लोक सेवा आयोग को भी यह जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है, हालांकि आयोग ने इससे पहले कभी शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं की है।

PSC को मिल सकती है जिम्मेदारी?

नई परीक्षा एजेंसी के चयन को लेकर सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को TET कराने की जिम्मेदारी देने का विकल्प भी सामने आया है। हालांकि, MPPSC ने इससे पहले शिक्षक पात्रता या शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की है, इसलिए इस पर अंतिम फैसला शासन स्तर पर होगा।

परीक्षा केंद्रों को लेकर भी उठे सवाल

ऑफलाइन परीक्षा के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, उज्जैन और सीधी जैसे शहरों में केंद्र प्रस्तावित किए गए थे। वहीं ग्वालियर-चंबल सहित कुछ क्षेत्रों के शिक्षकों ने जिला और ब्लॉक स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग की है। नई एजेंसी तय होने के बाद परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था में भी बदलाव संभव है।

मुख्यमंत्री की वापसी के बाद होगा फैसला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फिलहाल विदेश दौरे पर हैं और 9 सितंबर को भोपाल लौटेंगे। उनके लौटने के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ चर्चा कर नई परीक्षा एजेंसी के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। तब तक परीक्षा को लेकर स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।

परीक्षा की तारीख और केंद्र भी बदल सकते हैं

कर्मचारी चयन मंडल ने पहले 12 अक्तूबर से परीक्षा कराने का कार्यक्रम तय किया था। एजेंसी बदलने की स्थिति में यह पूर्व-निर्धारित तारीख भी बदल सकती है, क्योंकि अब नई एजेंसी ही परीक्षा की नई तारीख तय करेगी।

परीक्षा केंद्रों को लेकर भी शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। फिलहाल भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, उज्जैन और सीधी को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र और सागर अंचल के कई जिलों को केंद्र न बनाए जाने पर शिक्षकों ने जिला और ब्लॉक स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाने की मांग उठाई है। नई एजेंसी के चयन के बाद परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

आवेदन की तारीख पहले ही बढ़ चुकी है

इससे पहले कर्मचारी चयन मंडल ने 21 अगस्त से 4 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। बाद में आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर कर दी गई थी, और फॉर्म में सुधार के लिए 20 सितंबर तक का समय दिया गया था। कंप्यूटर चलाने में सहज न रहने वाले वरिष्ठ शिक्षकों की सुविधा के लिए ही ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन (OMR शीट) परीक्षा का विकल्प देने की घोषणा की गई थी, जिस पर अब असमंजस बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शुरू हुई थी प्रक्रिया

यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी। वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में आदेश जारी कर इन शिक्षकों को वर्ष 2028 तक यह परीक्षा पास करने के निर्देश दिए थे। शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देने के लिए हर साल दो बार परीक्षा आयोजित की जा सकती है।

इस आदेश में यह प्रावधान भी रखा गया है कि छह प्रयासों के बाद भी परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा सकती है, जिसकी वजह से यह परीक्षा शिक्षकों के लिए काफी अहम बन गई है।

कितने शिक्षकों को देनी है परीक्षा, आंकड़ों में अंतर

इस परीक्षा से जुड़े शिक्षकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर देखने को मिला है। अमर उजाला और द सूत्र की रिपोर्ट में डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के इस परीक्षा में शामिल होने की बात कही गई है, जबकि एमपी समाचार और एमपी ब्रेकिंग न्यूज की एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा साढ़े तीन लाख से अधिक और एक अन्य रिपोर्ट में करीब ढाई लाख शिक्षकों का बताया गया है। तीनों आंकड़ों में अंतर की वजह अभी स्पष्ट नहीं है, इसलिए अंतिम और सटीक संख्या के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना बेहतर रहेगा।

दिलचस्प और कम चर्चित तथ्य

इस पूरे मामले से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य भी हैं, जिन पर आमतौर पर कम ध्यान जाता है:

  • शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य करने वाला नियम राष्ट्रीय स्तर पर एनसीटीई (NCTE) ने शिक्षा का अधिकार कानून के तहत वर्ष 2010 में लागू किया था। यानी 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों की भर्ती के समय यह नियम अस्तित्व में ही नहीं था, और अब करीब 15-16 साल बाद उन्हें यह परीक्षा देनी पड़ रही है, जो इस पूरे विवाद की मूल वजह है।
  • सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई नई नहीं है। कोर्ट ने सबसे पहले 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि मेरिट के आधार पर नियुक्त हुए इन शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और कई शिक्षक संगठनों ने अनुभव के आधार पर छूट मांगते हुए पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने मई 2026 में यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जो भी राहत दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है और अब कोई नई रियायत संभव नहीं है।
  • आवेदन प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया था। पहली अंतिम तारीख (4 सितंबर) नजदीक आने तक टीईटी के दायरे में आने वाले करीब ढाई लाख शिक्षकों में से मात्र 2,575 शिक्षकों ने ही आवेदन किया था। इसी वजह से बाद में आवेदन की तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर करनी पड़ी थी। यह आंकड़ा बताता है कि परीक्षा को लेकर शिक्षकों में शुरू से ही झिझक और नाराजगी रही है।
  • इस परीक्षा को पास करने वालों का प्रमाणपत्र सामान्य टीईटी उम्मीदवारों की तरह सीमित अवधि तक नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए वैध माना जाता रहा है, जो टीईटी परीक्षा की एक सामान्य विशेषता है।

FAQ:

Q1. कर्मचारी चयन मंडल ने MP TET ऑफलाइन कराने से इनकार क्यों किया?

Answer: मंडल के अनुसार वह पिछले छह वर्षों से केवल ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और ऑफलाइन परीक्षा कराने का ढांचा पहले ही बंद कर चुका है, इसलिए वह ऑनलाइन के अलावा किसी और माध्यम से परीक्षा नहीं करा सकता।

Q2. अब MP TET परीक्षा कौन कराएगा?

Answer: अभी इसका अंतिम फैसला नहीं हुआ है। स्कूल शिक्षा विभाग नई एजेंसी की तलाश कर रहा है और लोक सेवा आयोग को भी जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है, हालांकि आयोग ने पहले कभी यह परीक्षा आयोजित नहीं की है।

Q3. MP TET परीक्षा की नई तारीख कब आएगी?

Answer: कर्मचारी चयन मंडल ने पहले 12 अक्तूबर से परीक्षा का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन अब नई एजेंसी के चयन के बाद ही नई तारीख तय होगी।

Q4. यह परीक्षा किन शिक्षकों के लिए अनिवार्य है?

Answer: वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है, सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के आदेश के अनुसार उन्हें 2028 तक यह परीक्षा पास करनी होगी।

Q5. परीक्षा पास न करने पर क्या होगा?

Answer: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रावधान के अनुसार छह प्रयासों के बाद भी परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा सकती है।

Q6. आवेदन की पहली तारीख तक शिक्षकों का रिस्पॉन्स कैसा रहा था?

Answer: पहली अंतिम तारीख (4 सितंबर) नजदीक आने तक दायरे में आने वाले करीब ढाई लाख शिक्षकों में से मात्र 2,575 शिक्षकों ने ही आवेदन किया था, जिसके बाद आवेदन की तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर करनी पड़ी।

SOURCE/FACT CHECK NOTE:

यह लेख निम्न स्रोतों पर आधारित है: अमर उजाला (amarujala.com, 7 सितंबर 2026, लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के हवाले से), thesootr.com, mpsamachar.in, mpbreakingnews.in, etvbharat.com, patrika.com, bhopalsamachar.com और palpalindia.com। परीक्षा से प्रभावित शिक्षकों की संख्या को लेकर स्रोतों में अंतर पाया गया — कहीं “डेढ़ लाख से अधिक”, कहीं “करीब ढाई लाख” तो कहीं “साढ़े तीन लाख से अधिक” बताया गया है। यह अंतर लेख में पारदर्शिता के साथ दर्ज किया गया है, कोई एक आंकड़ा चुनकर दूसरे को हटाया नहीं गया है। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के मूल आदेश, मई 2026 की पुनर्विचार सुनवाई और 2,575 आवेदनों वाला आंकड़ा patrika.com, bhopalsamachar.com, palpalindia.com और mpbreakingnews.in की रिपोर्टों से लिया गया है। यह मामला अभी विकासशील स्थिति में है — मुख्यमंत्री के 9 सितंबर को लौटने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है, इसलिए प्रकाशन से पहले नवीनतम अपडेट जरूर जांच लें।

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