केंद्र सरकार ने संसद में साफ किया कि Old Pension Scheme (OPS) बहाल नहीं होगी। जानें मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स पर इसका क्या असर पड़ेगा।
पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) की बहाली की मांग कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों को एक बार फिर झटका लगा है। केंद्र सरकार ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में साफ कर दिया कि OPS को बहाल करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस जवाब का सीधा असर मध्य प्रदेश सहित देशभर के उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो लंबे समय से NPS छोड़कर पुरानी पेंशन व्यवस्था में लौटने की मांग कर रहे हैं।
संसद में सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने पर फिलहाल विचार नहीं कर रही है। सरकार का तर्क है कि OPS दोबारा लागू करने से आने वाले वर्षों में सरकारी खजाने पर लगातार बोझ बढ़ता जाएगा, जो वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है। यही वजह है कि इसे दोबारा शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यों में OPS लागू करने का फैसला संबंधित राज्य सरकार की अपनी नीति के तहत आता है — यानी केंद्र इसे रोक नहीं सकता, लेकिन प्रोत्साहित भी नहीं करेगा।
किन राज्यों ने पहले ही OPS लागू कर दी है?
संसदीय जवाब के अनुसार, देश के पांच राज्यों — राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश — ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) छोड़कर पुरानी पेंशन लागू करने की जानकारी पेंशन फंड नियामक PFRDA को दे दी है।
मध्य प्रदेश इस सूची में शामिल नहीं है। राज्य के सरकारी कर्मचारी अभी भी NPS के अंतर्गत ही आते हैं।
NPS से OPS में लौटना इतना आसान क्यों नहीं?
सिर्फ राजनीतिक फैसला ही काफी नहीं है। मौजूदा नियमों के तहत NPS में जमा कर्मचारी और सरकार के अंशदान के साथ उससे हुई कमाई को निकालकर राज्य सरकार को वापस जमा करने का कोई स्पष्ट वित्तीय-कानूनी प्रावधान नहीं है। यही वजह है कि जिन राज्यों ने OPS का ऐलान किया, वहां भी इसे लागू करने की प्रक्रिया धीमी और जटिल बनी हुई है।
मध्य प्रदेश में पेंशनर्स और कर्मचारियों की स्थिति
मध्य प्रदेश में भी पेंशनर्स संगठन लगातार OPS और अन्य मांगों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगते रहे हैं। जून 2026 में मध्य प्रदेश वित्त विभाग ने Pramukh Pensioners Association Indore द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अपनी नीतिगत स्थिति स्पष्ट की थी, जिसमें 7वें वेतनमान के एरियर और OPS जैसे विषय शामिल थे। विभाग ने कहा था कि कई मांगें वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और राज्य की प्राथमिकताओं पर निर्भर करती हैं — यानी राज्य स्तर पर भी OPS को लेकर अभी कोई ठोस प्रतिबद्धता सामने नहीं आई है।
इसके अलावा, 4 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश शासन के पेंशन निदेशालय ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया को डिजिटल और IFMIS आधारित बनाने का आदेश जारी किया, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को भटकना न पड़े। यह OPS से अलग मुद्दा है, लेकिन दिखाता है कि राज्य सरकार पेंशन व्यवस्था में सुधार पर काम कर रही है।
कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया
केंद्र के जवाब के बाद कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और OPS बहाली को 8वें वेतन आयोग से जुड़ी मांगों के साथ जोड़कर उठाने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश में भी कर्मचारी संगठन इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में दबाव बना सकते हैं।
OPS, NPS और UPS में क्या फर्क है?
केंद्र सरकार OPS की जगह अब यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को विकल्प के तौर पर पेश कर रही है, जिसमें अंतिम 12 महीने के औसत वेतन का 50% पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है, बशर्ते कर्मचारी ने कम से कम 25 साल की सेवा पूरी की हो।
| बिंदु | OPS (पुरानी पेंशन) | NPS (नई पेंशन) | UPS (यूनिफाइड पेंशन) |
|---|---|---|---|
| पेंशन राशि | अंतिम वेतन का 50% गारंटीड | बाजार आधारित, तय नहीं | अंतिम 12 माह औसत वेतन का 50% (25 साल सेवा पर) |
| कर्मचारी अंशदान | नहीं | वेतन का 10% | वेतन+DA का 10% |
| सरकार का अंशदान | पूरा खर्च सरकार वहन करती है | 14% | 18.5% |
| ग्रेच्युटी | मिलती है | नहीं मिलती | मिलती है |
| जोखिम | सरकार वहन करती है | कर्मचारी वहन करता है | आंशिक रूप से सरकार वहन करती है |
| न्यूनतम सेवा शर्त | नहीं | नहीं | 10 साल (पूर्ण लाभ के लिए 25 साल) |
उदाहरण से समझें: किसे कितनी पेंशन मिलेगी?
मान लीजिए मध्य प्रदेश के किसी सरकारी कर्मचारी का अंतिम वेतन (बेसिक + DA) ₹60,000 प्रति माह है और उसने 25 साल की सेवा पूरी की है। तीनों योजनाओं में अनुमानित फर्क कुछ इस तरह होगा:
- OPS के तहत: करीब ₹30,000 प्रति माह गारंटीड पेंशन (अंतिम वेतन का 50%), महंगाई भत्ते के साथ समय-समय पर बढ़ोतरी
- UPS के तहत: करीब ₹30,000 प्रति माह (25 साल की पूर्ण सेवा पर), लेकिन कर्मचारी को नौकरी के दौरान वेतन का 10% खुद जमा करना पड़ता है
- NPS के तहत: राशि तय नहीं है — यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि निवेश की गई रकम ने बाजार में कितना रिटर्न दिया
यह सिर्फ एक अनुमानित उदाहरण है, वास्तविक पेंशन राशि कर्मचारी की सेवा अवधि, वेतनमान और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
मध्य प्रदेश में OPS की मांग का इतिहास
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारी संगठन पिछले कई वर्षों से OPS बहाली की मांग उठाते रहे हैं। 2005 के बाद नियुक्त हुए ज्यादातर राज्य कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं, जबकि उससे पहले नियुक्त कर्मचारियों को अभी भी OPS का लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि राज्य में दो तरह के कर्मचारी वर्ग बन गए हैं — एक जिसे गारंटीड पेंशन मिलती है, और दूसरा जो बाजार आधारित NPS पर निर्भर है। यही असमानता कर्मचारी संगठनों की मुख्य शिकायत रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल केंद्र और मध्य प्रदेश दोनों स्तर पर OPS की बहाली को लेकर कोई ठोस समयसीमा या प्रतिबद्धता सामने नहीं आई है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ इस मुद्दे पर आगे चर्चा हो सकती है, लेकिन अभी अभ्यर्थियों और कर्मचारियों को आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या मध्य प्रदेश में OPS लागू हो गई है?
नहीं, मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल नहीं है जिन्होंने OPS लागू की है। अभी तक सिर्फ राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने OPS की तरफ लौटने की जानकारी दी है।
Q2. केंद्र सरकार OPS बहाल क्यों नहीं करना चाहती?
सरकार का कहना है कि OPS बहाल करने से आने वाले वर्षों में सरकारी खर्च लगातार बढ़ता जाएगा, जो वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है।
Q3. OPS और NPS में मुख्य अंतर क्या है?
OPS में रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का 50% गारंटीड पेंशन मिलता है, जबकि NPS बाजार आधारित है और इसमें कर्मचारी को खुद अंशदान करना पड़ता है।
Q4. मध्य प्रदेश के पेंशनर्स की मुख्य मांगें क्या हैं?
मध्य प्रदेश पेंशनर्स एसोसिएशन 7वें वेतनमान के एरियर, 65 वर्ष की आयु से अतिरिक्त पेंशन और OPS बहाली जैसी मांगें उठाते रहे हैं।
Q5. NPS से OPS में स्विच करना इतना मुश्किल क्यों है?
मौजूदा नियमों में NPS के तहत जमा राशि निकालकर राज्य सरकार को वापस देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसलिए यह प्रक्रिया कानूनी और वित्तीय रूप से जटिल है।
Q6. UPS और OPS में मुख्य फर्क क्या है?
OPS में पेंशन पूरी तरह सरकार वहन करती है और कर्मचारी को कोई अंशदान नहीं करना पड़ता, जबकि UPS में कर्मचारी को वेतन का 10% खुद जमा करना होता है और पूर्ण लाभ के लिए 25 साल की सेवा जरूरी है।
Q7. क्या मध्य प्रदेश में सभी कर्मचारी NPS के दायरे में हैं?
नहीं, 2005 से पहले नियुक्त हुए कर्मचारियों को अभी भी OPS का लाभ मिल रहा है, जबकि उसके बाद नियुक्त कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं।
