ग्वालियर में नदी के ऊपर बन रही पहली एलिवेटेड रोड: अब तक क्या हुआ?

ग्वालियर में निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के पिलर और गर्डर

ग्वालियर की स्वर्णरेखा एलिवेटेड रोड का निर्माण कब शुरू हुआ, अब तक की प्रगति क्या है, लागत कितनी है और ट्रैफिक पर इसका असर कितना होगा, पूरी जानकारी।

प्रकाशन तिथि: 21 अक्टूबर 2026
अपडेट: निर्माण की नई प्रगति या आधिकारिक समय-सीमा बदलने पर इसी लेख में अपडेट जोड़ा जाएगा।

ग्वालियर में स्वर्णरेखा नदी के ऊपर एक एलिवेटेड रोड बन रही है। इसे मध्यप्रदेश की पहली ऐसी सड़क बताया जा रहा है जो किसी नदी के ऊपर से गुजरेगी। शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इस परियोजना को बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन इसकी समय-सीमा कई बार बदल चुकी है, इसलिए लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह सड़क आखिर कब बनकर तैयार होगी।

परियोजना क्या है?

यह एलिवेटेड रोड दो चरणों में बन रही है।

  • चरण 1: जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक, लगभग 6.5 किलोमीटर।
  • चरण 2: गिरवाई पुलिस चौकी (NH-46, AB Road) के पास से तारागंज, जीवाजीगंज और नदीगेट होते हुए लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक, लगभग 7.42 किलोमीटर।

तकनीकी ब्योरे के अनुसार इसमें 293 पिलर, 14 लूप और छह एंट्री-एग्ज़िट बिंदु होंगे। दोनों तरफ नौ-नौ मीटर की कैरिजवे और बीच में डिवाइडर प्रस्तावित है।

निर्माण कब शुरू हुआ?

रिपोर्ट्स के अनुसार निर्माण कार्य 26 जून 2024 को शुरू हुआ। परियोजना की नींव सितंबर 2022 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा शिलान्यास के समय की घोषणाओं से जुड़ी बताई जाती है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में इसकी DPR तैयार कराने की बात कही है।

लागत: स्रोतों में अंतर

इस परियोजना की लागत पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं:

  • सितंबर 2025 की सरकारी समीक्षा में चरण 1 की लागत ₹446.92 करोड़ और चरण 2 की ₹926.21 करोड़ बताई गई।
  • सितंबर 2026 के एक बयान में कुल लागत लगभग ₹800 करोड़ बताई गई।
  • एक अन्य रिपोर्ट में लगभग ₹1,000 करोड़ का उल्लेख है।

पाठकों के लिए नोट: आधिकारिक आंकड़ों पर अभी एकमत नहीं है। फंडिंग मॉडल को लेकर रिपोर्ट्स में समानता है: लगभग 90% केंद्र सरकार और 10% राज्य सरकार।

ठेकेदार कौन है?

चरण 2 के लिए PNC Infratech को सबसे कम बोली (L1) लगाने वाला बताया गया है। इसकी बोली लगभग ₹699 करोड़ थी। कुछ रिपोर्ट्स में निर्माण कंपनी के रूप में Shri Manglam Buildcon India का नाम भी आता है। दोनों नामों में अंतर है, इसलिए इसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करनी चाहिए।

समय-सीमा: बार-बार बदलती डेडलाइन

यह परियोजना लगातार देरी के कारण चर्चा में रही है:

  • अगस्त 2025: पहला 10 किलोमीटर का हिस्सा पूरा होना था।
  • सितंबर 2025 की समीक्षा: चरण 1 के लिए 1 अक्टूबर 2027 और चरण 2 के लिए 19 नवंबर 2027 तक की समय-सीमा तय हुई।
  • 2026: ठेकेदार कंपनी ने अतिरिक्त समय मांगा और जून 2026 तक का अनुरोध किया गया।
  • सितंबर 2026: केंद्रीय मंत्री सिंधिया के निरीक्षण के बाद सड़क का लक्ष्य नवंबर 2027 और पार्किंग का लक्ष्य जनवरी-फरवरी 2027 बताया गया।
  • अलग रिपोर्ट: एक स्रोत में पूरा होने का अनुमान नवंबर 2028 तक बताया गया है।

मौजूदा स्थिति में सबसे आधिकारिक लक्ष्य नवंबर 2027 है। इसके आगे की तारीख पर स्पष्टता नहीं है।

अब तक की प्रगति

सकारात्मक संकेत मिले हैं:

  • चरण 2 में बिजली के खंभे हटाने का काम शुरू हो चुका है। ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों की शिफ्टिंग अंतिम चरण में बताई गई है।
  • प्रशासन का दावा है कि भू-अर्जन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
  • 289 अतिक्रमण (मकान और दुकानें) हटाए जाने हैं और इसके लिए लगभग ₹63 करोड़ मुआवजा तय किया गया है।
  • सिंधिया ने निरीक्षण में गुणवत्ता से समझौता न करने पर जोर दिया।

लेकिन चिंता के बिंदु भी हैं:

  • अप्रैल 2026: PTI के अनुसार निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड खेड़ापति मंदिर के पास गिर गई। इस घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से मुझे नहीं मिली।
  • मानसून और जलभराव: कई रिपोर्ट्स में बारिश और जलभराव को निर्माण में बाधा बताया गया है।
  • ठेकेदार की धीमी गति: कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में देरी का एक कारण कंपनी की सुस्ती बताया गया है।

इससे ग्वालियर को क्या फायदा होगा?

  1. ट्रैफिक का दबाव घटेगा: योजना के अनुसार लंबी दूरी और ट्रांजिट वाहन शहर के केंद्र से बचकर ऊपर से निकल सकेंगे।
  2. यात्रा समय में बचत: मुरैना और शिवपुरी की ओर जाने वाले वाहनों के लिए लगभग एक घंटे की बचत का अनुमान बताया गया है।
  3. शहर के केंद्र पर राहत: जीवाजीगंज, फूलबाग और लश्कर इलाकों में भीड़ कम होने की उम्मीद है।
  4. विकास और निवेश: प्रदेश की पहली नदी-उपरी एलिवेटेड रोड से शहर की पहचान और कनेक्टिविटी बढ़ने की बात कही जा रही है।

क्या सच में ट्रैफिक 50% कम होगा?

एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि गिर्वाई, लश्कर और फूलबाग क्षेत्रों में ट्रैफिक लगभग 50% तक कम हो सकता है। लेकिन यह परियोजना का अनुमान है, किसी स्वतंत्र ट्रैफिक सर्वे से पुष्ट आंकड़ा नहीं।

हकीकत यह है कि एलिवेटेड रोड मुख्य रूप से शहर से गुजरने वाले और लंबी दूरी के वाहनों को राहत देगी। शहर के भीतर बाज़ार, स्कूल और दफ्तर का स्थानीय ट्रैफिक पूरी तरह नहीं हटेगा। निर्माण के दौरान सड़कों के डायवर्शन से अस्थायी जाम भी बढ़ सकता है। सड़क का वास्तविक असर उसके डिज़ाइन, एंट्री-एग्ज़िट प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन पर भी निर्भर करेगा।

साथ में आ रही एक और बड़ी परियोजना

आगरा और ग्वालियर के बीच लगभग ₹4,613 करोड़ की 88 किलोमीटर लंबी छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना भी चल रही है। NHAI ने इसके लिए GR Infraprojects के साथ समझौता किया है। इसे BOT मॉडल पर बनाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में लगभग 50% कमी आने का अनुमान है।


Key Highlights

  • ग्वालियर की स्वर्णरेखा एलिवेटेड रोड निर्माणाधीन है। निर्माण 26 जून 2024 को शुरू हुआ।
  • लक्ष्य नवंबर 2027 है, लेकिन समय-सीमा कई बार बदल चुकी है।
  • लागत पर स्रोतों में अंतर है (₹800 करोड़ से लेकर लगभग ₹1,373 करोड़ तक के आंकड़े सामने आए हैं)।
  • 289 अतिक्रमण हटाए जाने हैं और ₹63 करोड़ मुआवजा तय हुआ है।
  • ट्रैफिक में 50% कमी का दावा अनुमान है, अभी पुष्ट नहीं।

Important Details

विषयविवरण
स्थानग्वालियर, स्वर्णरेखा नदी
कुल लंबाईलगभग 13–14 किमी (स्रोतों में अंतर)
चरण 1जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल, लगभग 6.5 किमी
चरण 2गिरवाई पुलिस चौकी से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल, लगभग 7.42 किमी
निर्माण शुरू26 जून 2024
लक्ष्यनवंबर 2027 (सड़क), जनवरी-फरवरी 2027 (पार्किंग)
फंडिंगलगभग 90% केंद्र, 10% राज्य
मुख्य ठेकेदार (चरण 2)PNC Infratech (L1 बोली)

ग्वालियर एलिवेटेड रोड: खर्च और रोचक तथ्य

कुल खर्च: स्रोतों के अनुसार अलग-अलग आंकड़े

स्रोतआंकड़ा
सितंबर 2025 की सरकारी समीक्षाचरण 1: ₹446.92 करोड़, चरण 2: ₹926.21 करोड़ (कुल लगभग ₹1,373 करोड़)
ANI (सितंबर 2026)लगभग ₹800 करोड़
Constructionworldलगभग ₹1,000 करोड़
चरण 2 का “sanctioned cost” (Indian Infrastructure)लगभग ₹778 करोड़

सबसे भरोसेमंद अनुमान: आधिकारिक समीक्षा में दिया गया ₹1,373 करोड़ का आंकड़ा सबसे अधिक बार दोहराया गया है। लेकिन चरण 2 के लिए अलग “sanctioned cost” भी मिलता है, इसलिए प्रकाशन से पहले PWD मध्यप्रदेश से पुष्टि ज़रूरी है।

फंडिंग: लगभग 90% केंद्र सरकार और 10% राज्य सरकार। यदि कुल लागत ₹1,373 करोड़ मानें, तो केंद्र का हिस्सा लगभग ₹1,236 करोड़ और राज्य का लगभग ₹137 करोड़ होगा। (यह मेरी गणना है, आधिकारिक आंकड़ा नहीं।)


लागत के हिसाब से

1. प्रति किलोमीटर खर्च

  • चरण 1: लगभग ₹69 करोड़ प्रति किमी (₹446.92 करोड़ ÷ 6.5 किमी)
  • चरण 2: लगभग ₹125 करोड़ प्रति किमी (₹926.21 करोड़ ÷ 7.42 किमी)

चरण 2 की प्रति किमी लागत चरण 1 से लगभग दोगुनी है। इसकी वजह नदी के ऊपर का निर्माण और अधिक लूप व पिलर हो सकते हैं। (यह भी मेरी गणना है।)

2. आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे से तुलना

  • ग्वालियर एलिवेटेड रोड: लगभग ₹1,373 करोड़ में करीब 14 किमी
  • आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे: ₹4,613 करोड़ में 88 किमी (लगभग ₹52 करोड़ प्रति किमी)

यानी शहर के भीतर की एलिवेटेड सड़क प्रति किमी लगभग दोगुनी महंगी पड़ रही है। यह तुलना प्रोजेक्ट के प्रकार अलग होने के कारण पूरी तरह बराबरी की नहीं है।

3. विस्थापन का खर्च

  • 289 मकान और दुकानें हटेंगी
  • मुआवजा लगभग ₹63 करोड़ तय हुआ है
  • औसतन प्रति कब्ज़ा लगभग ₹22 लाख (मेरी गणना)

यह मुख्य परियोजना लागत से अलग खर्च है, जो अक्सर चर्चा में नहीं आता।

4. ठेके की राशि
PNC Infratech ने चरण 2 के लिए लगभग ₹699 करोड़ की सबसे कम बोली लगाई, जबकि Ranjit Buildcon ने लगभग ₹717 करोड़ की बोली लगाई थी। बोली और अंतिम लागत में अंतर होना सामान्य है।


निर्माण से जुड़े आंकड़े

  • 293 पिलर और 108 गर्डर
  • 14 लूप और छह एंट्री-एग्ज़िट बिंदु
  • स्वर्णरेखा नदी के ऊपर बनने वाली मध्यप्रदेश की पहली ऐसी एलिवेटेड सड़क
  • लगभग 60% काम पूरा होने का आंकड़ा एक पुरानी रिपोर्ट में आया था। ताज़ा प्रतिशत आधिकारिक रूप से नहीं मिला।

निष्कर्ष

ग्वालियर एलिवेटेड रोड पर अभी तक का सबसे भरोसेमंद अनुमान लगभग ₹1,373 करोड़ है। इस पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अलग-अलग स्रोतों के आंकड़े क्यों अलग हैं। यह जानकारी आपके ब्लॉग या रिपोर्ट के लिए बेहद उपयोगी होगी। प्रकाशन से पहले PWD मध्यप्रदेश या NHAI की ताज़ा प्रेस विज्ञप्ति से लागत की पुष्टि ज़रूर करें।

FAQ

1. ग्वालियर एलिवेटेड रोड कब तक बनकर तैयार होगी?
आधिकारिक लक्ष्य नवंबर 2027 बताया गया है। एक रिपोर्ट में नवंबर 2028 तक का अनुमान भी है।

2. इसकी लागत कितनी है?
स्रोतों में ₹800 करोड़ से लेकर लगभग ₹1,373 करोड़ तक के आंकड़े हैं। अंतिम आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि की जानी बाकी है।

3. इस सड़क से कितना ट्रैफिक कम होगा?
परियोजना के अनुमान में लगभग 50% तक कमी बताई गई है, लेकिन यह स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है।

4. निर्माण कहां तक पहुंचा है?
भू-अर्जन लगभग पूरा होने का दावा है। चरण 2 में बिजली खंभे हटाने और शिफ्टिंग का काम चल रहा है।

5. क्या निर्माण के दौरान सड़कें बंद होंगी?
इसके लिए आधिकारिक डायवर्शन योजना की जानकारी वाहन चालक स्थानीय ट्रैफिक पुलिस या PWD से लें।

6. आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे का इससे क्या संबंध है?
यह अलग परियोजना है, लेकिन दोनों मिलकर ग्वालियर के आसपास के ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद कर सकती हैं।

Sources

  • ANI: केंद्रीय मंत्री सिंधिया का निरीक्षण (21 सितंबर 2026)
  • Daily Excelsior और Projectstoday: सितंबर 2025 की समीक्षा बैठक
  • Constructionworld: Gwalior to get State’s first elevated road
  • Navabharat और Patrika: भू-अर्जन और 289 अतिक्रमण की रिपोर्ट
  • Tarun Mitra और MP Breaking News: सिंधिया का निरीक्षण (सितंबर 2026)
  • PTI (X): निर्माणाधीन सड़क गिरने की सूचना (16 अप्रैल 2026)

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