TAJ MAHAL तेजो महालय मंदिर विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ASI-केंद्र को नोटिस भेजा। जानें पूरा केस, 2015 से 2026 तक की टाइमलाइन, आगे क्या होगा।
TAJ MAHAL— दुनिया के सात अजूबों में शामिल और शाहजहां-मुमताज़ की मोहब्बत की मिसाल — एक बार फिर कानूनी विवाद की वजह से चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को ताज महल तेजो महालय केस में केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया है। यह याचिका दावा करती है कि आगरा का यह विश्व-प्रसिद्ध स्मारक असल में एक प्राचीन हिंदू मंदिर ‘तेजो महालय’ है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि ताज महल हाईकोर्ट फैसला क्या है, तेजो महालय विवाद कहां से शुरू हुआ, और आगे इस केस में क्या होने वाला है — तो यह पूरी रिपोर्ट आपके लिए है।
संक्षेप में (Quick Summary)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कोर्ट | इलाहाबाद हाईकोर्ट |
| जज | जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल |
| आदेश की तारीख | 6 जुलाई 2026 |
| याचिकाकर्ता के वकील | हरि शंकर जैन |
| याचिका किसकी ओर से | भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान |
| मूल वाद दाखिल हुआ | 2015, सिविल कोर्ट आगरा |
| मौजूदा स्टेटस | केंद्र व ASI से जवाब तलब, अगली सुनवाई लंबित |
इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या हुआ?
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार और ASI को नोटिस जारी किया। यह याचिका आगरा की निचली अदालतों के उन आदेशों के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिनमें ताज महल परिसर के सर्वे, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग ठुकरा दी गई थी।
ज़रूरी बात: हाईकोर्ट ने अभी याचिका के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई राय नहीं दी है। कोर्ट ने सिर्फ प्रक्रियात्मक स्तर पर जवाब मांगा है — यानी यह अभी तय होना बाकी है कि ताज महल का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा या नहीं। मामले की अगली सुनवाई प्रतिवादियों के काउंटर-एफिडेविट दाखिल होने के बाद तय होगी।
याचिकाकर्ताओं का दावा क्या है?
याचिका भगवान ‘श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान’ की ओर से “नेक्स्ट फ्रेंड” अधिवक्ता हरि शंकर जैन और कई श्रद्धालुओं के माध्यम से दाखिल की गई है। मुख्य दावे इस प्रकार हैं:
- ताज महल की जगह पहले राजा मान सिंह, फिर जयपुर के राजा जय सिंह के स्वामित्व में एक भवन हुआ करता था। बाद में शाहजहां ने इसे अपने कब्जे में लेकर मुमताज़ महल की याद में मकबरे में बदल दिया, जिसमें इस्लामी स्थापत्य के तत्व जोड़े गए।
- स्मारक में 109 से ज़्यादा पुरातात्विक और स्थापत्य लक्षण मौजूद हैं जो इसे हिंदू मूल का साबित करते हैं — जैसे संगमरमर के गुंबद पर लगा कलश, गुंबद पर कमल की आकृतियां, और परिसर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में मौजूद एक ढांचा, जिसे ASI के रिकॉर्ड में ‘गौशाला’ दर्ज किया गया है।
- आरोप है कि ASI हर शुक्रवार नमाज़ की इजाज़त देता है, जबकि हिंदू पूजा पर रोक है और परिसर की कई मंज़िलें व कक्ष बंद रखे गए हैं।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत ताज महल परिसर में पूजा का अधिकार पाना है, जिसके लिए वे वैज्ञानिक व भौतिक सर्वे को ज़रूरी बताते हैं।
तेजो महालय विवाद कहां से शुरू हुआ? (पूरी टाइमलाइन)
ताज महल तेजो महालय विवाद कोई नई बात नहीं है — यह क़ानूनी लड़ाई एक दशक से भी पुरानी है।
2015 — आगरा की सिविल कोर्ट में एक डिक्लेरेटरी सूट (घोषणात्मक वाद) दाखिल किया गया, जिसमें ताज महल को ‘तेजो महालय मंदिर’ घोषित करने की मांग की गई।
वाद के दौरान — याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में परिसर के निरीक्षण, फोटोग्राफी और सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की अर्ज़ी दी।
ट्रायल कोर्ट का फैसला — एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीज़न), आगरा ने यह अर्ज़ी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता विवादित संपत्ति का सही खसरा नंबर स्थापित करने के लिए ज़रूरी खसरा-खतौनी जैसे राजस्व रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाए, और पेश किए गए क्षेत्रफल व सीमाओं (77 बीघा) में विसंगतियां भी पाई गईं।
4 अप्रैल 2026 — याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश के खिलाफ एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज, आगरा के यहां रिवीज़न पिटीशन दाखिल की, जिसे “मेंटेनेबल नहीं” कहकर खारिज कर दिया गया।
6 जुलाई 2026 — दोनों निचली अदालतों के आदेशों से असंतुष्ट याचिकाकर्ता संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने केंद्र और ASI को 10 दिन के भीतर नोटिस तामील करने और काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया।
ताज महल सर्वे केस में आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल यह मामला शुरुआती चरण में है। आगे की प्रक्रिया कुछ इस तरह रहने की संभावना है:
- केंद्र सरकार और ASI को नोटिस का जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करना होगा।
- इसके बाद हाईकोर्ट तय करेगा कि आगरा की निचली अदालतों ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार करके सही किया या नहीं।
- अगर हाईकोर्ट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देता है, तो मामला वापस ट्रायल कोर्ट को भेजा जा सकता है, जहां सर्वे की अर्ज़ी पर नए सिरे से सुनवाई होगी।
- अगर हाईकोर्ट याचिका खारिज करता है, तो याचिकाकर्ताओं के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प रहेगा।
ग़ौरतलब है कि कोर्ट ने अभी तक याचिका के तथ्यों पर कोई राय ज़ाहिर नहीं की है — यह सिर्फ प्रक्रियात्मक सवाल पर है कि क्या निचली अदालतों ने सर्वे की मांग खारिज करने में सही रवैया अपनाया। असली विवाद — यानी ताज महल के ऐतिहासिक मूल की जांच — अभी बहुत दूर है और इसमें लंबा वक़्त लग सकता है।
निष्कर्ष
ताज महल को लेकर ‘तेजो महालय’ का दावा कोई नई बात नहीं, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट का ताज़ा नोटिस इस पुराने विवाद को फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है। फिलहाल फैसला सिर्फ प्रक्रियात्मक स्तर पर है — असली सवाल यानी सर्वे की इजाज़त मिलेगी या नहीं, यह अभी तय होना बाकी है। इस केस से जुड़े हर अपडेट के लिए यह पेज बुकमार्क कर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताज महल मामले में क्या आदेश दिया?
हाईकोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अभी याचिका के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।
2. ताज महल तेजो महालय विवाद क्या है?
यह दावा है कि ताज महल मूल रूप से भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन हिंदू मंदिर था, जिसे बाद में मुगल बादशाह शाहजहां ने मकबरे में तब्दील कर दिया।
3. यह मामला कब शुरू हुआ था?
यह क़ानूनी विवाद 2015 में आगरा की सिविल कोर्ट में दाखिल एक डिक्लेरेटरी सूट से शुरू हुआ था।
4. क्या ताज महल का सर्वे होगा?
अभी तय नहीं है। हाईकोर्ट ने केवल केंद्र और ASI से जवाब मांगा है; सर्वे की इजाज़त मिलेगी या नहीं, यह आगे की सुनवाई में तय होगा।
5. याचिका किसने दाखिल की?
याचिका भगवान ‘श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान’ की ओर से अधिवक्ता हरि शंकर जैन और कुछ श्रद्धालुओं ने दाखिल की है।
6. निचली अदालतों ने सर्वे की मांग क्यों खारिज की थी?
ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता विवादित संपत्ति की सही पहचान के लिए ज़रूरी खसरा-खतौनी जैसे राजस्व रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाए।
7. अगली सुनवाई कब होगी?
केंद्र और ASI के काउंटर-एफिडेविट दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई तय होगी।
8. क्या यह ज्ञानवापी या मथुरा शाही ईदगाह केस जैसा मामला है?
यह उसी तरह का विवाद है, जिसमें ऐतिहासिक स्मारकों के धार्मिक मूल की न्यायिक जांच की मांग की जाती है, लेकिन ताज महल का केस कानूनी और तथ्यात्मक रूप से अलग है क्योंकि यह वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और सीधे ASI के संरक्षण में है।
