Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ी के बाद एक्शन में योगी सरकार। जानें SIT की टाइमलाइन, गिरफ्तारियां और सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग का पूरा सच।
अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर सिर्फ एक धार्मिक ढांचा नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों के त्याग और समर्पण का प्रतीक है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर के दानपात्र (Donation Boxes) से चढ़ावे की राशि गायब होने के आरोपों ने देश की राजनीति को गरमा दिया है।
शुरुआत में सिर्फ एक आंतरिक गड़बड़ी के रूप में देखा जा रहा यह मामला अब उत्तर प्रदेश सरकार की SIT (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) की चौखट से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंच चुका है। आखिर क्या है यह पूरा विवाद? अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है? आइए एक एडिटर की नजर से इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हैं।
मामले की शुरुआत: ऑडिट और सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
इस विवाद की सुगबुगाहट जून 2026 की शुरुआत में तब हुई, जब ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों द्वारा नियमित वित्तीय ऑडिट (Internal Audit) किया जा रहा था।
- दानपात्र में विसंगति: ऑडिट के दौरान पाया गया कि मंदिर परिसर में रखे करीब 48 दानपात्रों (Donation Boxes) में जमा होने वाली नकदी के आंकड़ों में बड़ा अंतर है।
- CCTV ने खोली पोल: जब ट्रस्ट ने परिसर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो दान राशि की गिनती (Money Counting) करने वाले कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
- गोबर में छिपा कैश: जांच आगे बढ़ी तो पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपियों के पास से लाखों रुपयों की नकदी बरामद की गई, जिसे बेहद अजीबोगरीब जगहों पर (जैसे गोबर के ढेर आदि में) छिपाकर रखा गया था।
सियासी भूचाल: विपक्ष के तीखे सवाल
राम मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर वित्तीय हेराफेरी की खबर आते ही विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को आड़े हाथों लिया।
- अखिलेश यादव का हमला: 7 जून 2026 को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर और सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उछाल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब हैं। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, “अगर डबल इंजन सरकार के ड्रोन और दूरबीन सही काम कर रहे होते, तो यह चोरी न होती। यह वैश्विक हिंदू समुदाय की आस्था के साथ खिलवाड़ है।”
- कांग्रेस और सपा के अन्य नेताओं की मांग: सपा के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया कि यह गड़बड़ी करीब ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ के बीच की हो सकती है। वहीं यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के किसी सिटिंग जज से कराने की मांग की।
क्या है अब तक का एक्शन? (Timeline & Key Developments)
जैसे-जैसे दबाव बढ़ा, सरकार और ट्रस्ट दोनों को बैकफुट पर आना पड़ा। अब तक इस मामले में निम्नलिखित बड़े घटनाक्रम हो चुके हैं:
विवाद की शुरुआत (जून का पहला हफ्ता)
जून 2026
राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक ऑडिट और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में दानपात्रों से नकदी और मूल्यवान वस्तुओं के गायब होने की पुष्टि हुई। दो कर्मचारियों पर शक गहराया।
अखिलेश यादव का सीधा हमला
7 जून 2026
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कथित ‘चंदा चोरी’ को सार्वजनिक करते हुए अदालती हस्तक्षेप और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की।
बीजेपी ने माना – जांच जारी है
10 जून 2026
कानपुर दौरे पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेताओं ने माना कि गड़बड़ी की शिकायतें हैं और सरकार इसकी जांच करवा रही है।
योगी सरकार द्वारा SIT का गठन
13-14 जून 2026
ट्रस्ट की ही लिखित गुजारिश पर सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय SIT का गठन किया गया। इसमें लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। टीम को 7 दिन में शुरुआती और 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट देनी है।
सुप्रीम कोर्ट में अर्जी
15 जून 2026
एडवोकेट अनूप प्रकाश अवस्थी ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र याचिका भेजकर मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट की निगरानी में CBI जांच के आदेश दिए जाएं और FIR दर्ज हो।
अपनो के ही निशाने पर ट्रस्ट: विनय कटियार और बृजभूषण के बयान
इस विवाद की सबसे दिलचस्प कड़ी यह है कि बीजेपी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने फायरब्रांड नेता ही अब ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं।
बृजभूषण शरण सिंह का बयान: कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस मामले पर रहस्यमयी चुप्पी साधते हुए कहा, “अगर मैं इस मामले की पूरी सच्चाई सामने रख दूंगा तो विवादों में घिर जाऊंगा। इसमें बहुत ताकतवर लोग शामिल हैं, समय आने पर बोलूंगा।”
विनय कटियार का दर्द: बजरंग दल के संस्थापक और पूर्व सांसद विनय कटियार ने सीधे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “जब मैं मंदिर गया तो वहां के नए तैनात कर्मचारियों ने मुझसे ‘पास’ मांग लिया, जो लोग आंदोलन की नींव में थे उन्हें ही वहां कोई नहीं पहचानता। नए लोग जो वहां बैठे हैं, अगर वे गड़बड़ करेंगे तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। पीएम मोदी ने तत्काल SIT लगाकर अच्छा किया है।”
एडिटर का नजरिया: पारदर्शिता ही एकमात्र समाधान
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि स्टेट बैंक और ट्रस्ट के लोग नियमित ऑडिट करते हैं और कोई बड़ी विसंगति नहीं है। हालांकि, दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी और उनसे कैश की बरामदगी इस बात की गवाही देती है कि जमीनी स्तर पर लूपहोल्स (कमियां) मौजूद हैं।
चूंकि यह करोड़ों लोगों की गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा का विषय है, इसलिए इसे सिर्फ ‘प्रशासनिक विसंगति’ कहकर दबाया नहीं जा सकता। जब तक SIT की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और दान के पैसे की पाई-पाई का डिजिटल हिसाब (Digital Transparency) भक्तों के सामने नहीं रखा जाता, तब तक यह सियासी और कानूनी विवाद थमता नजर नहीं आता।
